सम और विषम अंक

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विश्व के कुछ शहरों में घरों को संख्यांक देने की यह परंपरा है कि सड़क की एक तरफ़ सम अंक होते हैं और सड़क की दूसरी तरफ़ विषम अंक - अगर किसी घर-ढूंढते हुए वाहनचालक को घर-संख्यांक मालूम हो तो उसे सड़क के सिर्फ़ एक ही ओर देखने की आवश्यकता है

गणित में सम (even) ऐसे अंकों को कहा जाता है जो २ द्वारा पूर्णतः विभाज्य (डिविज़िबल​) हों, जैसे कि ०, २, ४, ६, ८, इत्यादि। यही कहने का एक और तरीका है कि सभी सम अंक २ के गुणज (मल्टिपल) होते हैं। इस से विपरीत विषम (odd) अंक ऐसे अंकों को कहा जाता है जो २ द्वारा विभाज्य नहीं होते, मसलन १, ३, ५, ७, ९, ११, वग़ैराह। हालांकि मूल रूप से सम-विषम की अवधारणा अंको पर लगाई जाती थी आधुनिक गणित में इसे अन्य चीज़ों पर भी लागू किया जाता है। किसी चीज़ की गणितीय समता (parity) उसका वह लक्षण होती है जो यह बतलाए कि वह सम है या विषम।

अंतिम अंक द्वारा समता-विषमता बताना[संपादित करें]

कृपया ध्यान दें कि यदि कोई संख्या सम है तो उसका अंतिम अंक भी सम ही होता है और इसी तरह विषम संख्या का अंतिम अंक भी केवल विषम ही हो सकता है। मसलन १२,३४,३४७ को अगर २ से विभाजित किया जाए तो यह विषम पाया जाएगा, और यह इसके अंतिम अंक (७) को देखकर बिना कोई विभाजन करे फ़ौरन ही बताया जा सकता है क्योंकि ७ स्वयं एक विषम अंक है।[1]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Learning Mathematics Standard Six, M.Raphael, Jeevandeep Prakashan Pvt Ltd, ... Even numbers are numbers whose digit in the units place is either 0, 2, 4, 6 or 8. Odd numbers are numbers whose digit in the units place is either 1, 3, 5, 7 or 9 ...