सन्यास

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हिन्दू धर्म में जीवन के ४ भाग (आश्रम) किए गए हैं- ब्रम्ह्चर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और सन्यास। चौथा भाग सन्यास का अर्थ एक न्यासी या ट्रस्टी की तरह जीवन व्यतीत करना होता है। इस आश्रम का उद्देश्य मोक्ष की प्राप्ति है। मनुष्य जीवन को १०० वर्षों का मानकर ७५ वर्ष के उपरांत व्यक्ति को इस तरह से जीवन यापन करना चाहिए।