सदस्य:गोविन्द सिहं लूलवा खास

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साँचा:== Govind Singh ==

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गोविन्द सिंह मेहरात
जन्म 1 जुलाई 1990 (1990-07-01) (आयु 24)
लूलवा खास, मसूदा, भारत
व्यवसाय मैंकेनिकल इँजीनियर
जीवनसंगी सबीना
संतान 2 अनुसिया, अनामिका

गोविन्द सिंह (अंग्रेज़ी: Govind Singh; जन्म गोविन्द सिंह 1 जुलाई 1990) एक मैंकेनिकल इँजीनियर है। लूलवा खास में जन्मे गोविन्द सिंह हमेशा से ही इँजीनियर बनना चाहते हें।

साँचा:कबीर के दोहे

माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर

रात गंवाई सोय के, दिवस गंवाया खाय हीरा जन्म अमोल था, कोड़ी बदले जाय

दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करै न कोय जो सुख में सुमिरन करे दुःख काहे को होय

सुख मे सुमिरन ना किया, दु:ख में किया याद कह कबीर ता दास की, कौन सुने फरियाद

लूट सके तो लूट ले, राम नाम की लूट पाछे फिरे पछताओगे, प्राण जाहिं जब छूट

जाति न पूछो साधु की, पूछि लीजिए ज्ञान मोल करो तलवार का, पड़ा रहन दो म्यान

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय

बडा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर पंथी को छाया नही फल लागे अति दूर साधु ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय सार-सार को गहि रहै थोथा देई उडाय

जो तोको काँटा बुवै ताहि बोव तू फूल तोहि फूल को फूल है वाको है तिरसुल

उठा बगुला प्रेम का तिनका चढ़ा अकास तिनका तिनके से मिला तिन का तिन के पास

सात समंदर की मसि करौं लेखनि सब बनराइ धरती सब कागद करौं हरि गुण लिखा न जाइ

साधू गाँठ न बाँधई उदर समाता लेय आगे पाछे हरी खड़े जब माँगे तब देय


[[करम गति टारै करम गति टारै नाहिं टरी .. टेक.. मुनि वसिष्ठ से पण्डित ज्ञानी, सिधि के लगन धरि . सीता हरन मरन दसरथ को, बनमें बिपति परी .. १.. कहॅं वह फन्द कहाॅं वह पारधि, कहॅं वह मिरग चरी . कोटि गाय नित पुन्य करत नृग, गिरगिट-जोन परि .. २.. पाण्डव जिनके आप सारथी, तिन पर बिपति परी . कहत कबीर सुनो भै साधो, होने होके रही .. ३.. रे दिल गाफिल रे दिल गाफिल गफलत मत कर, एक दिना जम आवेगा .. टेक.. सौदा करने या जग आया, पूॅंजी लाया, मूल गॅंवाया, प्रेमनगर का अन्त न पाया, ज्यों आया त्यों जावेगा .. १.. सुन मेरे साजन, सुन मेरे मीता, या जीवन में क्या क्या कीता, सिर पाहन का बोझा लीता, आगे कौन छुडावेगा .. २.. परलि पार तेरा मीता खडिया, उस मिलने का ध्यान न धरिया, टूटी नाव उपर जा बैठा, गाफिल गोता खावेगा .. ३.. दास कबीर कहै समुझाई, अन्त समय तेरा कौन सहाई, चला अकेला संग न कोई, कीया अपना पावेगा .. ४.. झीनी झीनी बीनी चदरिया झीनी झीनी बीनी चदरिया .. टेक.. काहे कै ताना काहे कै भरनी, कौन तार से बीनी चदरिया .. १.. इडा पिङ्गला ताना भरनी, सुखमन तार से बीनी चदरिया .. २.. आठ कँवल दल चरखा डोलै, पाँच तत्त्व गुन तीनी चदरिया .. ३.. साँ को सियत मास दस लागे, ठोंक ठोंक कै बीनी चदरिया .. ४.. सो चादर सुर नर मुनि ओढी, ओढि कै मैली कीनी चदरिया .. ५.. दास कबीर जतन करि ओढी, ज्यों कीं त्यों धर दीनी चदरिया .. ६.. दिवाने मन दिवाने मन, भजन बिना दुख पैहौ .. टेक.. पहिला जनम भूत का पै हौ, सात जनम पछिताहौउ . काॅंटा पर का पानी पैहौ, प्यासन ही मरि जैहौ .. १.. दूजा जनम सुवा का पैहौ, बाग बसेरा लैहौ . टूटे पंख मॅंडराने अधफड प्रान गॅंवैहौ .. २.. बाजीगर के बानर होइ हौ, लकडिन नाच नचैहौ . ऊॅंच नीच से हाय पसरि हौ, माॅंगे भीख न पैहौ .. ३.. तेली के घर बैला होइहौ, आॅंखिन ढाॅंपि ढॅंपैहौउ . कोस पचास घरै माॅं चलिहौ, बाहर होन न पैहौ .. ४.. पॅंचवा जनम ऊॅंट का पैहौ, बिन तोलन बोझ लदैहौ . बैठे से तो उठन न पैहौ, खुरच खुरच मरि जैहौ .. ५.. धोबी घर गदहा होइहौ, कटी घास नहिं पैंहौ . लदी लादि आपु चढि बैठे, लै घटे पहुॅंचैंहौ .. ६.. पंछिन माॅं तो कौवा होइहौ, करर करर गुहरैहौ . उडि के जय बैठि मैले थल, गहिरे चोंच लगैहौ .. ७.. सत्तनाम की हेर न करिहौ, मन ही मन पछितैहौउ . कहै कबीर सुनो भै साधो, नरक नसेनी पैहौ .. ८.. केहि समुझावौ केहि समुझावौ सब जग अन्धा .. टेक.. इक दुइ होयॅं उन्हैं समुझावौं, सबहि भुलाने पेटके धन्धा . पानी घोड पवन असवरवा, ढरकि परै जस ओसक बुन्दा .. १.. गहिरी नदी अगम बहै धरवा, खेवन- हार के पडिगा फन्दा . घर की वस्तु नजर नहि आवत, दियना बारिके ढूॅंढत अन्धा .. २.. लागी आगि सबै बन जरिगा, बिन गुरुज्ञान भटकिगा बन्दा . कहै कबीर सुनो भाई साधो, जाय लिङ्गोटी झारि के बन्दा .. ३.. बहुरि नहिं बहुरि नहिं आवना या देस .. टेक.. जो जो गए बहुरि नहि आए, पठवत नाहिं सॅंस .. १.. सुर नर मुनि अरु पीर औलिया, देवी देव गनेस .. २.. धरि धरि जनम सबै भरमे हैं ब्रह्मा विष्णु महेस .. ३.. जोगी जङ्गम औ संन्यासी, दीगंबर दरवेस .. ४.. चुंडित, मुंडित पंडित लोई, सरग रसातल सेस .. ५.. ज्ञानी, गुनी, चतुर अरु कविता, राजा रंक नरेस .. ६.. कोइ राम कोइ रहिम बखानै, कोइ कहै आदेस .. ७.. नाना भेष बनाय सबै मिलि ढूऊंढि फिरें चहुॅं देस .. ८.. कहै कबीर अंत ना पैहो, बिन सतगुरु उपदेश .. ९.. मन लाग्यो मेरो यार मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में .. जो सुख पाऊँ राम भजन में सो सुख नाहिं अमीरी में मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में .. भला बुरा सब का सुनलीजै कर गुजरान गरीबी में मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में .. आखिर यह तन छार मिलेगा कहाँ फिरत मग़रूरी में मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में .. प्रेम नगर में रहनी हमारी साहिब मिले सबूरी में मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में .. कहत कबीर सुनो भयी साधो साहिब मिले सबूरी में मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में .. भजो रे भैया भजो रे भैया राम गोविंद हरी . राम गोविंद हरी भजो रे भैया राम गोविंद हरी .. जप तप साधन नहिं कछु लागत, खरचत नहिं गठरी .. संतत संपत सुख के कारन, जासे भूल परी .. कहत कबीर राम नहीं जा मुख, ता मुख धूल भरी .. बीत गये दिन बीत गये दिन भजन बिना रे . भजन बिना रे, भजन बिना रे .. बाल अवस्था खेल गवांयो . जब यौवन तब मान घना रे .. लाहे कारण मूल गवाँयो . अजहुं न गयी मन की तृष्णा रे .. कहत कबीर सुनो भई साधो . पार उतर गये संत जना रे .. नैया पड़ी मंझधार नैया पड़ी मंझधार गुरु बिन कैसे लागे पार .. साहिब तुम मत भूलियो लाख लो भूलग जाये . हम से तुमरे और हैं तुम सा हमरा नाहिं . अंतरयामी एक तुम आतम के आधार . जो तुम छोड़ो हाथ प्रभुजी कौन उतारे पार .. गुरु बिन कैसे लागे पार .. मैं अपराधी जन्म को मन में भरा विकार . तुम दाता दुख भंजन मेरी करो सम्हार . अवगुन दास कबीर के बहुत गरीब निवाज़ . जो मैं पूत कपूत हूं कहौं पिता की लाज .. गुरु बिन कैसे लागे पार .. तूने रात गँवायी तूने रात गँवायी सोय के दिवस गँवाया खाय के . हीरा जनम अमोल था कौड़ी बदले जाय .. सुमिरन लगन लगाय के मुख से कछु ना बोल रे . बाहर का पट बंद कर ले अंतर का पट खोल रे . माला फेरत जुग हुआ गया ना मन का फेर रे . गया ना मन का फेर रे . हाथ का मनका छाँड़ि दे मन का मनका फेर .. दुख में सुमिरन सब करें सुख में करे न कोय रे . जो सुख में सुमिरन करे तो दुख काहे को होय रे . सुख में सुमिरन ना किया दुख में करता याद रे . दुख में करता याद रे . कहे कबीर उस दास की कौन सुने फ़रियाद .. राम बिनु राम बिनु तन को ताप न जाई . जल में अगन रही अधिकाई .. राम बिनु तन को ताप न जाई .. तुम जलनिधि मैं जलकर मीना . जल में रहहि जलहि बिनु जीना .. राम बिनु तन को ताप न जाई .. तुम पिंजरा मैं सुवना तोरा . दरसन देहु भाग बड़ मोरा .. राम बिनु तन को ताप न जाई .. तुम सद्गुरु मैं प्रीतम चेला . कहै कबीर राम रमूं अकेला .. राम बिनु तन को ताप न जाई .. ]]


साँचा:कबीर वाणी

माला फेरत जुग गया फिरा ना मन का फेर कर का मनका छोड़ दे मन का मन का फेर मन का मनका फेर ध्रुव ने फेरी माला धरे चतुरभुज रूप मिला हरि मुरली वाला कहते दास कबीर माला प्रलाद ने फेरी धर नरसिंह का रूप बचाया अपना चेरो

आया है किस काम को किया कौन सा काम भूल गए भगवान को कमा रहे धनधाम कमा रहे धनधाम रोज उठ करत लबारी झूठ कपट कर जोड़ बने तुम माया धारी कहते दास कबीर साहब की सुरत बिसारी मालिक के दरबार मिलै तुमको दुख भारी

चलती चाकी देखि के दिया कबीरा रोय दो पाटन के बीच में साबित बचा न कोय साबित बचा न कोय लंका को रावण पीसो जिसके थे दस शीश पीस डाले भुज बीसो कहिते दास कबीर बचो न कोई तपधारी जिन्दा बचे ना कोय पीस डाले संसारी

कबिरा खड़ा बाजार में सबकी मांगे खैर ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर ना काहू से बैर ज्ञान की अलख जगावे भूला भटका जो होय राह ताही बतलावे बीच सड़क के मांहि झूठ को फोड़े भंडा बिन पैसे बिन दाम ज्ञान का मारै डंडा



साँचा:रामचरितमानस:सुन्दरकाण्ड 1 From Wikisource Jump to: navigation, search सखा कही तुम्ह नीकि उपाई। करिअ दैव जौं होइ सहाई॥ मंत्र न यह लछिमन मन भावा। राम बचन सुनि अति दुख पावा॥ नाथ दैव कर कवन भरोसा। सोषिअ सिंधु करिअ मन रोसा॥ कादर मन कहुँ एक अधारा। दैव दैव आलसी पुकारा॥ सुनत बिहसि बोले रघुबीरा। ऐसेहिं करब धरहु मन धीरा॥ अस कहि प्रभु अनुजहि समुझाई। सिंधु समीप गए रघुराई॥ प्रथम प्रनाम कीन्ह सिरु नाई। बैठे पुनि तट दर्भ डसाई॥ जबहिं बिभीषन प्रभु पहिं आए। पाछें रावन दूत पठाए॥

दोहा- सकल चरित तिन्ह देखे धरें कपट कपि देह। प्रभु गुन हृदयँ सराहहिं सरनागत पर नेह॥५१॥

प्रगट बखानहिं राम सुभाऊ। अति सप्रेम गा बिसरि दुराऊ॥ रिपु के दूत कपिन्ह तब जाने। सकल बाँधि कपीस पहिं आने॥ कह सुग्रीव सुनहु सब बानर। अंग भंग करि पठवहु निसिचर॥ सुनि सुग्रीव बचन कपि धाए। बाँधि कटक चहु पास फिराए॥ बहु प्रकार मारन कपि लागे। दीन पुकारत तदपि न त्यागे॥ जो हमार हर नासा काना। तेहि कोसलाधीस कै आना॥ सुनि लछिमन सब निकट बोलाए। दया लागि हँसि तुरत छोडाए॥ रावन कर दीजहु यह पाती। लछिमन बचन बाचु कुलघाती॥

दोहा- कहेहु मुखागर मूढ़ सन मम संदेसु उदार। सीता देइ मिलेहु न त आवा काल तुम्हार॥५२॥

तुरत नाइ लछिमन पद माथा। चले दूत बरनत गुन गाथा॥ कहत राम जसु लंकाँ आए। रावन चरन सीस तिन्ह नाए॥ बिहसि दसानन पूँछी बाता। कहसि न सुक आपनि कुसलाता॥ पुनि कहु खबरि बिभीषन केरी। जाहि मृत्यु आई अति नेरी॥ करत राज लंका सठ त्यागी। होइहि जब कर कीट अभागी॥ पुनि कहु भालु कीस कटकाई। कठिन काल प्रेरित चलि आई॥ जिन्ह के जीवन कर रखवारा। भयउ मृदुल चित सिंधु बिचारा॥ कहु तपसिन्ह कै बात बहोरी। जिन्ह के हृदयँ त्रास अति मोरी॥ दो०–की भइ भेंट कि फिरि गए श्रवन सुजसु सुनि मोर। कहसि न रिपु दल तेज बल बहुत चकित चित तोर॥५३॥

नाथ कृपा करि पूँछेहु जैसें। मानहु कहा क्रोध तजि तैसें॥ मिला जाइ जब अनुज तुम्हारा। जातहिं राम तिलक तेहि सारा॥ रावन दूत हमहि सुनि काना। कपिन्ह बाँधि दीन्हे दुख नाना॥ श्रवन नासिका काटै लागे। राम सपथ दीन्हे हम त्यागे॥ पूँछिहु नाथ राम कटकाई। बदन कोटि सत बरनि न जाई॥ नाना बरन भालु कपि धारी। बिकटानन बिसाल भयकारी॥ जेहिं पुर दहेउ हतेउ सुत तोरा। सकल कपिन्ह महँ तेहि बलु थोरा॥ अमित नाम भट कठिन कराला। अमित नाग बल बिपुल बिसाला॥

दोहा- द्विबिद मयंद नील नल अंगद गद बिकटासि। दधिमुख केहरि निसठ सठ जामवंत बलरासि॥५४॥

ए कपि सब सुग्रीव समाना। इन्ह सम कोटिन्ह गनइ को नाना॥ राम कृपाँ अतुलित बल तिन्हहीं। तृन समान त्रेलोकहि गनहीं॥ अस मैं सुना श्रवन दसकंधर। पदुम अठारह जूथप बंदर॥ नाथ कटक महँ सो कपि नाहीं। जो न तुम्हहि जीतै रन माहीं॥ परम क्रोध मीजहिं सब हाथा। आयसु पै न देहिं रघुनाथा॥ सोषहिं सिंधु सहित झष ब्याला। पूरहीं न त भरि कुधर बिसाला॥ मर्दि गर्द मिलवहिं दससीसा। ऐसेइ बचन कहहिं सब कीसा॥ गर्जहिं तर्जहिं सहज असंका। मानहु ग्रसन चहत हहिं लंका॥ दो०–सहज सूर कपि भालु सब पुनि सिर पर प्रभु राम। रावन काल कोटि कहु जीति सकहिं संग्राम॥५५॥

राम तेज बल बुधि बिपुलाई। तब भ्रातहि पूँछेउ नय नागर॥ तासु बचन सुनि सागर पाहीं। मागत पंथ कृपा मन माहीं॥ सुनत बचन बिहसा दससीसा। जौं असि मति सहाय कृत कीसा॥ सहज भीरु कर बचन दृढ़ाई। सागर सन ठानी मचलाई॥ मूढ़ मृषा का करसि बड़ाई। रिपु बल बुद्धि थाह मैं पाई॥ सचिव सभीत बिभीषन जाकें। बिजय बिभूति कहाँ जग ताकें॥ सुनि खल बचन दूत रिस बाढ़ी। समय बिचारि पत्रिका काढ़ी॥ रामानुज दीन्ही यह पाती। नाथ बचाइ जुड़ावहु छाती॥ बिहसि बाम कर लीन्ही रावन। सचिव बोलि सठ लाग बचावन॥ दो०–बातन्ह मनहि रिझाइ सठ जनि घालसि कुल खीस। राम बिरोध न उबरसि सरन बिष्नु अज ईस॥५६(क)॥ की तजि मान अनुज इव प्रभु पद पंकज भृंग। होहि कि राम सरानल खल कुल सहित पतंग॥५६(ख)॥

सुनत सभय मन मुख मुसुकाई। कहत दसानन सबहि सुनाई॥ भूमि परा कर गहत अकासा। लघु तापस कर बाग बिलासा॥ कह सुक नाथ सत्य सब बानी। समुझहु छाड़ि प्रकृति अभिमानी॥ सुनहु बचन मम परिहरि क्रोधा। नाथ राम सन तजहु बिरोधा॥ अति कोमल रघुबीर सुभाऊ। जद्यपि अखिल लोक कर राऊ॥ मिलत कृपा तुम्ह पर प्रभु करिही। उर अपराध न एकउ धरिही॥ जनकसुता रघुनाथहि दीजे। एतना कहा मोर प्रभु कीजे। जब तेहिं कहा देन बैदेही। चरन प्रहार कीन्ह सठ तेही॥ नाइ चरन सिरु चला सो तहाँ। कृपासिंधु रघुनायक जहाँ॥ करि प्रनामु निज कथा सुनाई। राम कृपाँ आपनि गति पाई॥ रिषि अगस्ति कीं साप भवानी। राछस भयउ रहा मुनि ग्यानी॥ बंदि राम पद बारहिं बारा। मुनि निज आश्रम कहुँ पगु धारा॥

दोहा- बिनय न मानत जलधि जड़ गए तीन दिन बीति। बोले राम सकोप तब भय बिनु होइ न प्रीति॥५७॥

लछिमन बान सरासन आनू। सोषौं बारिधि बिसिख कृसानू॥ सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीती। सहज कृपन सन सुंदर नीती॥ ममता रत सन ग्यान कहानी। अति लोभी सन बिरति बखानी॥ क्रोधिहि सम कामिहि हरि कथा। ऊसर बीज बएँ फल जथा॥ अस कहि रघुपति चाप चढ़ावा। यह मत लछिमन के मन भावा॥ संघानेउ प्रभु बिसिख कराला। उठी उदधि उर अंतर ज्वाला॥ मकर उरग झष गन अकुलाने। जरत जंतु जलनिधि जब जाने॥ कनक थार भरि मनि गन नाना। बिप्र रूप आयउ तजि माना॥

दोहा- काटेहिं पइ कदरी फरइ कोटि जतन कोउ सींच। बिनय न मान खगेस सुनु डाटेहिं पइ नव नीच॥५८॥

सभय सिंधु गहि पद प्रभु केरे। छमहु नाथ सब अवगुन मेरे॥ गगन समीर अनल जल धरनी। इन्ह कइ नाथ सहज जड़ करनी॥ तव प्रेरित मायाँ उपजाए। सृष्टि हेतु सब ग्रंथनि गाए॥ प्रभु आयसु जेहि कहँ जस अहई। सो तेहि भाँति रहे सुख लहई॥ प्रभु भल कीन्ही मोहि सिख दीन्ही। मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्ही॥ ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी॥ प्रभु प्रताप मैं जाब सुखाई। उतरिहि कटकु न मोरि बड़ाई॥ प्रभु अग्या अपेल श्रुति गाई। करौं सो बेगि जौ तुम्हहि सोहाई॥

दोहा- सुनत बिनीत बचन अति कह कृपाल मुसुकाइ। जेहि बिधि उतरै कपि कटकु तात सो कहहु उपाइ॥५९॥

नाथ नील नल कपि द्वौ भाई। लरिकाई रिषि आसिष पाई॥ तिन्ह के परस किएँ गिरि भारे। तरिहहिं जलधि प्रताप तुम्हारे॥ मैं पुनि उर धरि प्रभुताई। करिहउँ बल अनुमान सहाई॥ एहि बिधि नाथ पयोधि बँधाइअ। जेहिं यह सुजसु लोक तिहुँ गाइअ॥ एहि सर मम उत्तर तट बासी। हतहु नाथ खल नर अघ रासी॥ सुनि कृपाल सागर मन पीरा। तुरतहिं हरी राम रनधीरा॥ देखि राम बल पौरुष भारी। हरषि पयोनिधि भयउ सुखारी॥ सकल चरित कहि प्रभुहि सुनावा। चरन बंदि पाथोधि सिधावा॥

छंद- निज भवन गवनेउ सिंधु श्रीरघुपतिहि यह मत भायऊ। यह चरित कलि मलहर जथामति दास तुलसी गायऊ॥ सुख भवन संसय समन दवन बिषाद रघुपति गुन गना॥ तजि सकल आस भरोस गावहि सुनहि संतत सठ मना॥

दोहा- सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुन गान। सादर सुनहिं ते तरहिं भव सिंधु बिना जलजान॥६०॥

मासपारायण, चौबीसवाँ विश्राम

इति श्रीमद्रामचरितमानसे सकलकलिकलुषविध्वंसने पञ्चमः सोपानः समाप्तः। (सुन्दरकाण्ड समाप्त)


साँचा:इस्लाम का इतिहास

आमतौर पर यह समझा जाता है कि इस्लाम 1400 वर्ष पुराना धर्म है, और इसके ‘प्रवर्तक’ पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल॰) हैं। लेकिन वास्तव में इस्लाम 1400 वर्षों से काफ़ी पुराना धर्म है; उतना ही पुराना जितना धर्ती पर स्वयं मानवजाति का इतिहास और हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) इसके प्रवर्तक (Founder) नहीं, बल्कि इसके आह्वाहक हैं। आपका काम उसी चिरकालीन (सनातन) धर्म की ओर, जो सत्यधर्म के रूप में आदिकाल से ‘एक’ ही रहा है, लोगों को बुलाने, आमंत्रित करने और स्वीकार करने के आह्वान का था। आपका मिशन, इसी मौलिक मानव धर्म को इसकी पूर्णता के साथ स्थापित कर देना था ताकि मानवता के समक्ष इसका व्यावहारिक रूप साक्षात् रूप में आ जाए। इस्लाम का इतिहास जानने का अस्ल माध्यम स्वयं इस्लाम का मूल ग्रंथ ‘क़ुरआन’ है। और क़ुरआन, इस्लाम का आरंभ प्रथम मनुष्य ‘आदम’ से होने का ज़िक्र करता है। इस्लाम धर्म के अनुयायियों के लिए क़ुरआन ने ‘मुस्लिम’ शब्द का प्रयोग हज़रत इबराहीम (अलैहि॰) के लिए किया है जो लगभग 4000 वर्ष पूर्व एक महान पैग़म्बर (सन्देष्टा) हुए थे। हज़रत आदम (अलैहि॰) से शुरू होकर हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) तक हज़ारों वर्षों पर फैले हुए इस्लामी इतिहास में असंख्य ईशसंदेष्टा ईश्वर के संदेश के साथ, ईश्वर द्वारा विभिन्न युगों और विभिन्न क़ौमों में नियुक्त किए जाते रहे। उनमें से 26 के नाम कु़रआन में आए हैं और बाक़ी के नामों का वर्णन नहीं किया गया है। इस अतिदीर्घ श्रृंखला में हर ईशसंदेष्टा ने जिस सत्यधर्म का आह्वान दिया वह ‘इस्लाम’ ही था; भले ही उसके नाम विभिन्न भाषाओं में विभिन्न रहे हों। बोलियों और भाषाओं के विकास का इतिहास चूंकि क़ुरआन ने बयान नहीं किया है इसलिए ‘इस्लाम’ के नाम विभिन्न युगों में क्या-क्या थे, यह ज्ञात नहीं है। इस्लामी इतिहास के आदिकालीन होने की वास्तविकता समझने के लिए स्वयं ‘इस्लाम’ को समझ लेना आवश्यक है। इस्लाम क्या है, यह कुछ शैलियों में क़ुरआन के माध्यम से हमारे सामने आता है, जैसे: 1. इस्लाम, अवधारणा के स्तर पर ‘विशुद्ध एकेश्वरवाद’ का नाम है। यहां ‘विशुद्ध’ से अभिप्राय है: ईश्वर के व्यक्तित्व, उसकी सत्ता व प्रभुत्व, उसके अधिकारों (जैसे उपास्य व पूज्य होने के अधिकार आदि) में किसी अन्य का साझी न होना। विश्व का...बल्कि पूरे ब्रह्माण्ड और अपार सृष्टि का यह महत्वपूर्ण व महानतम सत्य मानवजाति की उत्पत्ति से लेकर उसके हज़ारों वर्षों के इतिहास के दौरान अपरिवर्तनीय, स्थायी और शाश्वत रहा है। 2. इस्लाम शब्द का अर्थ ‘शान्ति व सुरक्षा’ और ‘समर्पण’ है। इस प्रकार इस्लामी परिभाषा में इस्लाम नाम है, ईश्वर के समक्ष, मनुष्यों का पूर्ण आत्मसमर्पण; और इस आत्मसमर्पण के द्वारा व्यक्ति, समाज तथा मानवजाति के द्वारा ‘शान्ति व सुरक्षा’ की उपलब्धि का। यह अवस्था आरंभ काल से तथा मानवता के इतिहास हज़ारों वर्ष लंबे सफ़र तक, हमेशा मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता रही है। इस्लाम की वास्तविकता, एकेश्वरवाद की हक़ीक़त, इन्सानों से एकेश्वरवाद के तक़ाज़े, मनुष्य और ईश्वर के बीच अपेक्षित संबंध, इस जीवन के पश्चात (मरणोपरांत) जीवन की वास्तविकता आदि जानना एक शान्तिमय, सफल तथा समस्याओं, विडम्बनाओं व त्रासदियों से रहित जीवन बिताने के लिए हर युग में अनिवार्य रहा है; अतः ईश्वर ने हर युग में अपने सन्देष्टा (ईशदूत, नबी, रसूल, पैग़म्बर) नियुक्त करने (और उनमें से कुछ पर अपना ‘ईशग्रंथ’ अवतरित करने) का प्रावधान किया है। इस प्रक्रम का इतिहास, मानवजाति के पूरे इतिहास पर फैला हुआ है। 4. शब्द ‘धर्म’ (Religion) को, इस्लाम के लिए क़ुरआन ने शब्द ‘दीन’ से अभिव्यक्त किया है। क़ुरआन में कुछ ईशसन्देष्टाओं के हवाले से कहा गया है (42:13) कि ईश्वर ने उन्हें आदेश दिया कि वे ‘दीन’ को स्थापित (क़ायम) करें और इसमें भेद पैदा न करें, इसे (अनेकानेक धर्मों के रूप में) टुकड़े-टुकड़े न करें। इससे सिद्ध हुआ कि इस्लाम ‘दीन’ हमेशा से ही रहा है। उपरोक्त संदेष्टाओं में हज़रत नूह (Noah) का उल्लेख भी हुआ है और हज़रत नूह (अलैहि॰) मानवजाति के इतिहास के आरंभिक काल के ईशसन्देष्टा हैं। क़ुरआन की उपरोक्त आयत (42:13) से यह तथ्य सामने आता है कि अस्ल ‘दीन’ (इस्लाम) में भेद, अन्तर, विभाजन, फ़र्क़ आदि करना सत्य-विरोधी है-जैसा कि बाद के ज़मानों में ईशसन्देष्टाओं का आह्वान व शिक्षाएं भुलाकर, या उनमें फेरबदल, कमी-बेशी, परिवर्तन-संशोधन करके इन्सानों ने अनेक विचारधाराओं व मान्यताओं के अन्तर्गत ‘बहुत से धर्म’ बना लिए। मानव प्रकृति प्रथम दिवस से आज तक एक ही रही है। उसकी मूल प्रवृत्तियों में तथा उसकी मौलिक आध्यात्मिक, नैतिक, भौतिक आवश्यकताओं में कोई भी परिवर्तन नहीं आया है। अतः मानव का मूल धर्म भी मानवजाति के पूरे इतिहास में उसकी प्रकृति व प्रवृत्ति के ठीक अनुकूल ही होना चाहिए। इस्लाम इस कसौटी पर पूरा और खरा उतरता है। इसकी मूल धारणाएं, शिक्षाएं, आदेश, नियम...सबके सब मनुष्य की प्रवृत्ति व प्रकृति के अनुकूल हैं। अतः यही मानवजाति का आदिकालीन तथा शाश्वत धर्म है। क़ुरआन ने कहीं भी हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) को ‘इस्लाम धर्म का प्रवर्तक’ नहीं कहा है। क़ुरआन में हज़रत मुहम्मद (सल्ल॰) का परिचय नबी (ईश्वरीय ज्ञान की ख़बर देने वाला), रसूल (मानवजाति की ओर भेजा गया), रहमतुल्-लिल-आलमीन (सारे संसारों के लिए रहमत व साक्षात् अनुकंपा, दया), हादी (सत्यपथ-प्रदर्शक) आदि शब्दों से कराया है। स्वयं पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल॰) ने इस्लाम धर्म के ‘प्रवर्तक’ होने का न दावा किया, न इस रूप में अपना परिचय कराया। आप (सल्ल॰) के एक कथन के अनुसार ‘इस्लाम के भव्य भवन में एक ईंट की कमी रह गई थी, मेरे (ईशदूतत्व) द्वारा वह कमी पूरी हो गई और इस्लाम अपने अन्तिम रूप में सम्पूर्ण हो गया’ (आपके कथन का भावार्थ।) इससे सिद्ध हुआ कि आप (सल्ल॰) इस्लाम धर्म के प्रवर्तक नहीं हैं। (इसका प्रवर्तक स्वयं अल्लाह है, न कि कोई भी पैग़म्बर, रसूल, नबी आदि)। और आप (सल्ल॰) ने उसी इस्लाम का आह्वान किया जिसका, इतिहास के हर चरण में दूसरे रसूलों ने किया था। इस प्रकार इस्लाम का इतिहास उतना ही प्राचीन है जितना मानवजाति और उसके बीच नियुक्त होने वाले असंख्य रसूलों के सिलसिले (श्रृंखला) का इतिहास। यह ग़लतफ़हमी फैलने और फैलाने में, कि इस्लाम धर्म की उम्र कुल 1400 वर्ष है दो-ढाई सौ वर्ष पहले लगभग पूरी दुनिया पर छा जाने वाले यूरोपीय (विशेषतः ब्रिटिश) साम्राज्य की बड़ी भूमिका है। ये साम्राज्यी, जिस ईश-सन्देष्टा (पैग़म्बर) को मानते थे ख़ुद उसे ही अपने धर्म का प्रवर्तक बना दिया और उस पैग़म्बर के अस्ल ईश्वरीय धर्म को बिगाड़ कर, एक नया धर्म उसी पैग़म्बर के नाम पर बना दिया। (ऐसा इसलिए किया कि पैग़म्बर के आह्वाहित अस्ल ईश्वरीय धर्म के नियमों, आदेशों, नैतिक शिक्षाओं और हलाल-हराम के क़ानूनों की पकड़ (Grip) से स्वतंत्र हो जाना चाहते थे, अतः वे ऐसे ही हो भी गए।) यही दशा इस्लाम की भी हो जाए, इसके लिए उन्होंने इस्लाम को ‘मुहम्मडन-इज़्म (Muhammadanism)’ का और मुस्लिमों को ‘मुहम्मडन्स (Muhammadans)’ का नाम दिया जिससे यह मान्यता बन जाए कि मुहम्मद ‘इस्लाम के प्रवर्तक (Founder)’ थे और इस प्रकार इस्लाम का इतिहास केवल 1400 वर्ष पुराना है। न क़ुरआन में, न हदीसों (पैग़म्बर मुहम्मद सल्ल॰ के कथनों) में, न इस्लामी इतिहास-साहित्य में, न अन्य इस्लामी साहित्य में...कहीं भी इस्लाम के लिए ‘मुहम्मडन-इज़्म’ शब्द और इस्लाम के अनुयायियों के लिए ‘मुहम्मडन’ शब्द प्रयुक्त हुआ है, लेकिन साम्राज्यिों की सत्ता-शक्ति, शैक्षणिक तंत्र और मिशनरी-तंत्र के विशाल व व्यापक उपकरण द्वारा, उपरोक्त मिथ्या धारणा प्रचलित कर दी गई। भारत के बाशिन्दों में इस दुष्प्रचार का कुछ प्रभाव भी पड़ा, और वे भी इस्लाम को ‘मुहम्मडन-इज़्म’ मान बैठे। ऐसा मानने में इस तथ्य का भी अपना योगदान रहा है कि यहां पहले से ही सिद्धार्थ गौतम बुद्ध जी, ‘‘बौद्ध धर्म’’ के; और महावीर जैन जी ‘‘जैन धर्म’’ के ‘प्रवर्तक’ के रूप में सर्वपरिचित थे। इन ‘धर्मों’ (वास्तव में ‘मतों’) का इतिहास लगभग पौने तीन हज़ार वर्ष पुराना है। इसी परिदृश्य में भारतवासियों में से कुछ ने पाश्चात्य साम्राज्यिों की बातों (मुहम्मडन-इज़्म, और इस्लाम का इतिहास मात्र 1400 वर्ष की ग़लत अवधारणा) पर विश्वास कर लिया।


इन्हें भी देखें: आवर्त सारणी

नीचे परमाणु क्रमांक के बढते हुए क्रम में रासायनिक तत्वों की सूची दी गयी है। अलग-अलग प्रकार के तत्वों को अलग-अलग रंगों से चिन्हित किया गया है। इस सूची में प्रत्येक तत्व का नाम , उसका रासायनिक प्रतीक, आवर्त सारणी में उसका समूह एवं पिरियड , रासायनिक श्रेणी, तथा परमाणु द्रब्यमान (सबसे स्थायी समस्थानिक का)दिये गये हैं।

परमाणु
क्रमांक
(Z)

तत्व का नाम
प्रतीक
आवर्त
समूह
रासायनिक श्रेणी
द्रव्यमान
(g/mol)
1 हाइड्रोजन H 1 1 अधातु 00,00,001 1.00794(7)[1][2][3]
2 हीलियम He 1 18 अक्रिय गैस 00,00,004 4.002602(2)[1][3]
3 लिथियम Li 2 1 क्षार धातु 00,00,006 6.941(2)[1][2][3][4]
4 बेरेलियम Be 2 2 क्षारीय पार्थिव धातु 00,00,009 9.012182(3)
5 बोरान B 2 13 उपधातु 00,00,010 10.811(7)[1][2][3]
6 कार्बन C 2 14 अधातु 00,00,012 12.0107(8)[1][3]
7 नाइट्रोजन N 2 15 अधातु 00,00,014 14.0067(2)[1][3]
8 ऑक्सीजन O 2 16 अधातु 00,00,015 15.9994(3)[1][3]
9 फ्लोरीन F 2 17 हैलोजन्स 00,00,018 18.9984032(5)
10 नियोन Ne 2 18 अक्रिय गैस 00,00,020 20.1797(6)[1][2]
11 सोडियम Na 3 1 क्षार धातु 00,00,022 22.98976928(2)
12 मैग्नीशियम Mg 3 2 क्षारीय पार्थिव धातु 00,00,024 24.3050(6)
13 एल्युमिनियम Al 3 13 संक्रमण धातु 00,00,026 26.9815386(8)
14 सिलिकॉन Si 3 14 उपधातु 00,00,028 28.0855(3)[3]
15 फास्फोरस P 3 15 अधातु 00,00,030 30.973762(2)
16 गंधक S 3 16 अधातु 00,00,032 32.065(5)[1][3]
17 क्लोरीन Cl 3 17 हैलोजन्स 00,00,035 35.453(2)[1][2][3]
18 आर्गन Ar 3 18 अक्रिय गैस 00,00,039 39.948(1)[1][3]
19 पोटैशियम K 4 1 क्षार धातु 00,00,039 39.0983(1)
20 कैल्सियम Ca 4 2 क्षारीय पार्थिव धातु 00,00,040 40.078(4)[1]
21 स्कैंडियम Sc 4 3 संक्रमण धातु 00,00,044 44.955912(6)
22 टाइटैनियम Ti 4 4 संक्रमण धातु 00,00,047 47.867(1)
23 वैनेडियम V 4 5 संक्रमण धातु 00,00,050 50.9415(1)
24 क्रोमियम Cr 4 6 संक्रमण धातु 00,00,051 51.9961(6)
25 मैंगनीज Mn 4 7 संक्रमण धातु 00,00,054 54.938045(5)
26 लोहा Fe 4 8 संक्रमण धातु 00,00,055 55.845(2)
27 कोबाल्ट Co 4 9 संक्रमण धातु 00,00,058 58.933195(5)
28 निकिल Ni 4 10 संक्रमण धातु 00,00,058 58.6934(2)
29 ताम्र (कॉपर) Cu 4 11 संक्रमण धातु 00,00,063 63.546(3)[3]
30 जस्ता (जिंक) Zn 4 12 संक्रमण धातु 00,00,065 65.409(4)
31 गैलियम Ga 4 13 संक्रमण धातु 00,00,069 69.723(1)
32 जरमैनियम Ge 4 14 उपधातु 00,00,072 72.64(1)
33 आर्सेनिक As 4 15 उपधातु 00,00,074 74.92160(2)
34 सेलेनियम Se 4 16 अधातु 00,00,078 78.96(3)[3]
35 ब्रोमिन Br 4 17 हैलोजन्स 00,00,079 79.904(1)
36 क्रिप्टन Kr 4 18 अक्रिय गैस 00,00,083 83.798(2)[1][2]
37 रुबिडियम Rb 5 1 क्षार धातु 00,00,085 85.4678(3)[1]
38 स्ट्रोन्सियम Sr 5 2 क्षारीय पार्थिव धातु 00,00,087 87.62(1)[1][3]
39 इत्रियम Y 5 3 संक्रमण धातु 00,00,088 88.90585(2)
40 जर्कोनियम Zr 5 4 संक्रमण धातु 00,00,091 91.224(2)[1]
41 नियोबियम Nb 5 5 संक्रमण धातु 00,00,092 92.906 38(2)
42 मोलिब्डेनम Mo 5 6 संक्रमण धातु 00,00,095 95.94(2)[1]
43 टेक्निशियम Tc 5 7 संक्रमण धातु 00,00,098 [98.9063][5]
44 रूथेनियम Ru 5 8 संक्रमण धातु 00,00,101 101.07(2)[1]
45 रोडियम Rh 5 9 संक्रमण धातु 00,00,102 102.90550(2)
46 पलाडियम Pd 5 10 संक्रमण धातु 00,00,106 106.42(1)[1]
47 चाँदी Ag 5 11 संक्रमण धातु 00,00,107 107.8682(2)[1]
48 कैडमियम Cd 5 12 संक्रमण धातु 00,00,112 112.411(8)[1]
49 इण्डियम In 5 13 संक्रमण धातु 00,00,114 114.818(3)
50 त्रपु Sn 5 14 संक्रमण धातु 00,00,118 118.710(7)[1]
51 एन्टिमोनी Sb 5 15 उपधातु 00,00,121 121.760(1)[1]
52 टेलुरियम Te 5 16 उपधातु 00,00,127 127.60(3)[1]
53 आयोडिन I 5 17 हैलोजन्स 00,00,126 126.90447(3)
54 ज़ेनान Xe 5 18 अक्रिय गैस 00,00,131 131.293(6)[1][2]
55 सीज़ियम Cs 6 1 क्षार धातु 00,00,132 132.9054519(2)
56 बेरियम Ba 6 2 क्षारीय पार्थिव धातु 00,00,137 137.327(7)
57 लाञ्थनम La 6 लेन्थेनाइड 00,00,138 138.90547(7)[1]
58 सेरियम Ce 6 लेन्थेनाइड 00,00,140 140.116(1)[1]
59 प्रासियोडाइमियम Pr 6 लेन्थेनाइड 00,00,140 140.90765(2)
60 नियोडाइमियम Nd 6 लेन्थेनाइड 00,00,144 144.242(3)[1]
61 प्रोमेथियम Pm 6 लेन्थेनाइड 00,00,146 [146.9151][5]
62 सैमरियम Sm 6 लेन्थेनाइड 00,00,150 150.36(2)[1]
63 युरोपियम Eu 6 लेन्थेनाइड 00,00,151 151.964(1)[1]
64 ग्याडोलिनियम Gd 6 लेन्थेनाइड 00,00,157 157.25(3)[1]
65 टर्बियम Tb 6 लेन्थेनाइड 00,00,158 158.92535(2)
66 डिस्प्रोसियम Dy 6 लेन्थेनाइड 00,00,162 162.500(1)[1]
67 होल्मियम Ho 6 लेन्थेनाइड 00,00,164 164.93032(2)
68 अर्बियम Er 6 लेन्थेनाइड 00,00,167 167.259(3)[1]
69 थुलियम Tm 6 लेन्थेनाइड 00,00,168 168.93421(2)
70 यिट्टरबियम Yb 6 लेन्थेनाइड 00,00,173 173.04(3)[1]
71 लुटेटियम Lu 6 3 लेन्थेनाइड 00,00,174 174.967(1)[1]
72 हाफ्नियम Hf 6 4 संक्रमण धातु 00,00,178 178.49(2)
73 टैंटेलम Ta 6 5 संक्रमण धातु 00,00,180 180.9479(1)
74 टंग्स्टन W 6 6 संक्रमण धातु 00,00,183 183.84(1)
75 रेनियम Re 6 7 संक्रमण धातु 00,00,186 186.207(1)
76 अस्मियम Os 6 8 संक्रमण धातु 00,00,190 190.23(3)[1]
77 इरिडियम Ir 6 9 संक्रमण धातु 00,00,192 192.217(3)
78 प्लाटिनम Pt 6 10 संक्रमण धातु 00,00,195 195.084(9)
79 सोना Au 6 11 संक्रमण धातु 00,00,196 196.966569(4)
80 पारा Hg 6 12 संक्रमण धातु 00,00,200 200.59(2)
81 थैलियम Tl 6 13 संक्रमण धातु 00,00,204 204.3833(2)
82 सीसा Pb 6 14 संक्रमण धातु 00,00,207 207.2(1)[1][3]
83 बिस्मथ Bi 6 15 संक्रमण धातु 00,00,208 208.98040(1)
84 पोलोनियम Po 6 16 उपधातु 00,00,208 [208.9824][5]
85 एस्टाटिन At 6 17 हैलोजन्स 00,00,209 [209.9871][5]
86 रेडन Rn 6 18 अक्रिय गैस 00,00,222 [222.0176][5]
87 फ्रान्सियम Fr 7 1 क्षार धातु 00,00,223 [223.0197][5]
88 रेडियम Ra 7 2 क्षारीय पार्थिव धातु 00,00,226 [226.0254][5]
89 एक्टिनियम Ac 7 ऐक्टिनाइड 00,00,227 [227.0278][5]
90 थोरियम Th 7 ऐक्टिनाइड 00,00,232 232.03806(2)[1][5]
91 प्रोटैक्टीनियम Pa 7 ऐक्टिनाइड 00,00,231 231.03588(2)[5]
92 युरेनियम U 7 ऐक्टिनाइड 00,00,238 238.02891(3)[1][2][5]
93 नेप्ट्यूनियम Np 7 ऐक्टिनाइड 00,00,237 [237.0482][5]
94 प्लूटोनियम Pu 7 ऐक्टिनाइड 00,00,244 [244.0642][5]
95 अमेरिशियम Am 7 ऐक्टिनाइड 00,00,243 [243.0614][5]
96 क्यूरियम Cm 7 ऐक्टिनाइड 00,00,247 [247.0703][5]
97 बर्केलियम Bk 7 ऐक्टिनाइड 00,00,247 [247.0703][5]
98 कैलीफोर्नियम Cf 7 ऐक्टिनाइड 00,00,251 [251.0796][5]
99 कैलीफोर्नियम Es 7 ऐक्टिनाइड 00,00,252 [252.0829][5]
100 फर्मियम Fm 7 ऐक्टिनाइड 00,00,257 [257.0951][5]
101 मेण्डेलीवियम Md 7 ऐक्टिनाइड 00,00,258 [258.0986][5]
102 नोबेलियम No 7 ऐक्टिनाइड 00,00,259 [259.1009][5]
103 लॉरेंशियम Lr 7 3 ऐक्टिनाइड 00,00,260 [260.1053][5]
104 रुथरफोर्डियम Rf 7 4 संक्रमण धातु 00,00,261 [261.1087][5]
105 डब्नियम Db 7 5 संक्रमण धातु 00,00,262 [262.1138][5]
106 सीबोर्गियम Sg 7 6 संक्रमण धातु 00,00,263 [263.1182][5]
107 बोरियम Bh 7 7 संक्रमण धातु 00,00,262 [262.1229][5]
108 हसियम Hs 7 8 संक्रमण धातु 00,00,265 [265][5]
109 मेइट्नेरियम Mt 7 9 संक्रमण धातु 00,00,266 [266][5]
110 डार्म्स्टेडशियम Ds 7 10 संक्रमण धातु 00,00,269 [269][5]
111 रॉन्टजैनियम Rg 7 11 संक्रमण धातु 00,00,272 [272][5]
112 उनउनबियम Uub 7 12 संक्रमण धातु 00,00,285 [285][5]
113 उनउनट्रियम Uut 7 13 संक्रमण धातु 00,00,284 [284][5]
114 उनउनक्वाडियम Uuq 7 14 संक्रमण धातु 00,00,289 [289][5]
115 उनउनपैन्शियम Uup 7 15 संक्रमण धातु 00,00,288 [288][5]
116 उनउनहैक्षियम Uuh 7 16 संक्रमण धातु 00,00,292 [292][5]
117 उनउनसैप्क्षियम Uus 7 17 हैलोजन्स 00,00,293 [295] [6]
118 उनउनऑक्षियम Uuo 7 18 अक्रिय गैस 00,00,294 [294][5]
  1. कुछ भूवैज्ञानिक नमूनों में इस तत्व की समस्थानिक रचना भिन्न होती है और यह परिवर्तन सूची में दर्शाई गयी अनिश्चिता की सीमा से अधिक हो सकता है।
  2. इस तत्व की समस्थानिक संरचना वाणिज्यिक पदार्थ के संबंध में बदल सकती है, जिसके कारण परमाणु भार संख्या उल्लिखित संख्या से भिन्न हो जाती है।
  3. इस तत्व की समस्थानिक संरचना स्थलीय पदार्थ के संबंध में बदलती रहती है, इसलिए निश्चित परमाणु भार नहीं दिया गया है।
  4. वाणिज्यिक लीथियम का परमाणु भार 6.939 से 6.996 तक रहता है (विशिष्ट पदार्थ का विश्लेषण करने से अधिक निकटतम संख्या प्राप्त की जा सकती है।)
  5. स्थिर न्यूक्लाइड्स रहित तत्व और कोष्ठक की संख्या तत्व के अधिकतम आयु युक्त समस्थानिक की द्रव्यमान संख्या को इंगित करता है जैसे [209]। किन्तु थोरियम, प्रोटॅक्टिनियम और यूरेनियम के विशेष गुण धर्म, स्थलीय समस्थानिक रचना के होते है। इसलिए परमाणविक द्रव्यमान उल्लखित है।
  6. यह तत्व अभी तक खोजा या विश्लेषित नहीं किया गया है।