वृद्धावस्था

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Portrait of an Old Man Northern India

वृद्धावस्था या बुढापा जीवन की उस अवस्था को कहते हैं जिसमें उम्र मानव जीवन की औसत काल के समीप या उससे अधिक हो जाती है। वृद्ध लोगों को रोग लगने की अधिक सम्भावना होती है। उनकी समस्याएं भी अलग होती हैं। वृद्धावस्था एक धीरे-धीरे आने वाली अवस्था है जो कि स्वभाविक व प्राकृतिक घटना है। वृद्ध का शाब्दिक अर्थ है बढ़ा हुआ, पका हुआ, परिपक्व। वृद्धों के अनुभवों के आशीर्वाद स्वरूप प्रयोग कर आदमी कहां से कहां पहुंच सकता है।

वृद्धावस्था को सुखद बनाने के उपाय[संपादित करें]

आज समाज के बदलते हुए मापदंड़ों ने यह अवस्था शापित सी कर दी है, फिर भी हम अपनी समझ से इस अवस्था में होने वाले तनावों से छुटकारा पा सकते हैं व जीवन के अंतिम चरण को सुखपूर्वक व्यतीत कर सकते हैं।

वृद्धों को अपना-विहार ऋतु के अनुकूल एवं अपनी अवस्था के अनुसार रखना चाहिए। हो सके तो अंकुरित अनाज, दालों व उबली सब्जियों का अधिक सेवन करें।

घी-तेल का प्रयोग कम से कम करें।

धू्म्रपान, मदिरापान वृद्धावस्था में नहीं करना चाहिए।

मानसिक तनाव से बचना चाहिए।

इस अवस्था में मान-सम्मान को आकांक्षा बढ़ जाती है। अतः घरवालों को चाहिए कि वृद्धों को उचित सम्मान दें।

खाली बैठना अभिशाप है, अपनी रुचि के अनुसार अपना वक्त गुजारें।

खाली समय भगवान का नाम जपें या कोई धार्मिक ग्रंथ पढ़ें।

बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय व्यतीत करें।

सामथ्य के अनुसार ही कार्यों का प्रतिपादन करें।

अपने पुराने मित्रों से मिलें व पत्र व्यवहार करें।

ऐसे व्यक्तियों से मिलें जिनकी सोच ताजी हो।

निराशावादी दृष्टिकोण त्याग दें, आशावादी बनें।

ज्यादा से ज्यादा वक्त प्रकृति के साथ बिताएं।

गरम व तरल पदार्थ अधिक लें।

कैल्शियम की पूर्ति के लिए दूध का सेवन अधिक करें। कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो वृद्धावस्था को प्राप्त नहीं करता है। इस धरा पर प्रत्येक व्यक्ति अपरिहार्य रुप से प्रकृति द्वारा निर्धारित जीवन चक्र में से गुजरता जो उसे बचपन, किशोरावस्था, वयस्कता तथा प्रौढ़ावस्था के भिन्न भिन्न चरणों में ले जाता है। प्रत्येक चरण का एक विशिष्ट जोश या उत्साह होता है, उसके साथ उत्तरदायित्व जुड़े रहते हैं तथा उस चरण विशेष की विशिष्ट समस्याएं भी होती हैं। आमतौर पर, आयु के बढ़ने के साथ साथ, सम्पूर्ण परिदृश्य में आमूल चूल परिवर्तन होता है। उत्तरदायित्व अगली पीढ़ी को सौंप दिए जाते हैं तथा धीरे धीरे जोश कम होता जाता है और उसके स्थान पर निरसता और उकताहट का जन्म होता है जिसके परिणामस्वरुप अनेक जटिल समस्याओं का जन्म होता है जिनके कारण प्रभाविता में रुकावट पैदा हो जाती है! इन्ही समस्याओं के कारण किसी भी व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। आयु के बढ़ने के साथ आने वाली सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के साथ साथ यह सभी समस्याएं एक अपरिवर्तन शील स्पैम साबित होती हैं! इस समय आवश्यकता इस बात की होती है कि अपनी आशा को बनाए रखा जाए तथा अपनी जिंदगी को नए उत्साह तथा नवीन अनुभवों के साथ जागृत किया जाए। www.oldagesolutions.org पर हमारा प्रयास बिलकुल यही है कि नवीकरण, नए जोश और उमंग तथा पुनर्स्वास्थ्य लाभ को एक साथ संयोजित किया जाए। शारीरिक स्वास्थ्य स्वास्थ्य क्षेत्र के साथ जुड़ी दिक्कतों और दुखों को निम्नलिखित संकलनों के माध्यम से बेहतर समझा जा सकता है- नियमित रुप से ऐसी शारीरिक गतिविधि जो न केवल सुरक्षित है अपितु आनंददायक भी है, तो उससे दो उद्देश्य प्राप्त होंगे- इससे न केवल आपके वज़न पर नियंत्रण रखते हुए शरीर स्वस्थ रहेगा बल्कि एक ऐसी जीवनशैली भी आपको प्राप्त होगी जो खुशनुमा और आनंदप्रद होगी। शारीरिक स्वास्थ्य खान-पान की स्वस्थ आदतों के बिना प्राप्त नहीं किया जा सकता है। हमारे भली भांति अनुसंधान की गई आहार निर्देशिका के आधार पर आप बेहतर खान-पान ग्रहण कर सकते हैं तथा आपको अपने आहार में कोई अधिक कमी भी नहीं करनी होगा- आपको पौष्टिकता की अधिकतम मात्रा की प्राप्ति के साथ पूर्ण संतुष्टि भी प्राप्त होगी! एक अच्छी नींद आपके लिए वह सुखद परिणाम दे सकती है जो कि किसी दवा से प्राप्त नहीं होंगे। इस तथ्य के पीछे वैज्ञानिक आधार है कि जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती है हमारी नींद कम होती चली जाती है तथा हमारी नींद की गुणवत्ता में भी गिरावट आती है। केवल हमारी सरल चरणबद्ध निर्देशिका का पालन करें और अनिद्रा आपको कभी भी परेशानी नहीं करेगी। यदि आप अकेले रहते हैं, तो आपको अनेक शारीरिक समस्याओं से ग्रसित होने की संभावना होती है, जो कि परिवार के अन्य सदस्यों को नहीं होती हैं। अकेलापन और एकाकीपन इसका केवल एक हिस्सा ही है। अपने पड़ोसियों को जानने का प्रयास करें और हमेशा सुरक्षा प्रणाली को सक्रिय रखें। यदि आपात कालीन सम्पर्क नम्बरों को सुलभ रुप से रखा जाता है तो यह बहुत अधिक लाभप्रद हो सकते हैं। कमजोर हड्डियां, दांतों संबंधी रोग, नजर, श्रवण तथा पैरों के रोग, रक्त दाब तथा कब्ज उम्र के साथ होने वाली सामान्य समस्याएँ हैं तथा जिन्हें व्यायाम आदि करने से बचा जा सकता है। तथापि, इस अवस्था में मधुमेह, कैंसर, असंयत मूत्रण, ह्रदय वाहिका रोग, उन्माद तथा सन्घिशोथ जैसे खतरनाक रोग भी संभव हैं। इनका एक ही हल है कि आप नियमित स्वास्थ्य जांच तथा डाक्टर के साथ सलाह मशविरा करते हुए अपने आप को जागरूक बनाए रखें। मानसिक स्वास्थ्य स्वस्थ होने का अर्थ केवल शारीरिक रुप से स्वस्थ होने तक सीमित नहीं होता है। शारीरिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना की मानसिक स्वास्थ्य। इन दोनों में क्या अंतर है तथा उनके स्तर पर विचार करते समय किन किन पैरामीटरों पर ध्यान दिया जाता है। उम्र के बढ़ने के साथ अवसाद एक मुख्य स्थान ले लेता है। अनजाने में अधिकांश व्यक्ति इसकी खतरनाक पकड़ में फंस जाते हैं, और कभी कभी तो उन्हें इसके लक्षणों की भी जानकारी नहीं होती है। यदि आप भूख न लगने के साथ साथ बेचैनी, चिड़चिड़ापन तथा आप अधिक अपराध बोध तथा नगण्यता के विचारों का अनुभव करते हैं- तो निःसंदेह आप गम्भीर मानसिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। इसका एकमात्र हल यह है कि आप अपनी जिंदगी से उत्साह को दूर न होने दें तथा सजग और सक्रिय रहें। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ द्वारा प्रोत्साहन भी लाभदायक साबित हो सकता है। हमारी वेबसाइट पर आप उन सभी संगठनों की सम्पर्क संबंधी की जानकारी पा सकेगें जो आपको अपने आत्म विश्वास को पुन प्राप्त करने तथा अपनी कार्य कुशलता को धारण करने में सहायता प्रदान करते हैं।oldagesolutions.org

www.oldagesolutions.org पर हम यह जानते हैं कि आप कोई वस्तु या पदार्थ नहीं है अपितु आपका एक अलग व्यक्तित्व है तथा हम आपको सर्वोत्तम सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं ताकि आप अपने उद्देश्यों तथा लक्ष्यों को प्राप्त कर सकें, चाहे आप की आयु कुछ भी क्यों न हो। कुछ भी कहिए, जैसा कि सदियों से कहा जा रहा है कि वास्तव में स्वास्थ्य ही वास्तविक सम्पत्ति है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

==बाहरी कड़ियाँ==