विक्टोरिया जलप्रपात

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
विक्टोरिया जलप्रपात

विक्टोरिया जलप्रपात जिसे स्थानिय भाषा मे मोसी-ओआ-तुन्या (Mosi-oa-Tunya) कहॉ जाता है अफ़्रीका की जेम्बेजी नदी पर स्थित एक जल प्रपात है। इस जलप्रपात को विश्व के सात प्राकृतिक आश्चर्यो मे से एक माना जाता है।

शानदार जलप्रपातों में से यह प्रपात दूसरे नम्बर पर रखा जाता है। इस जलप्रपात का अफ़्रीकी नाम 'मोसी- ओआ-तुन्या' है, अर्थात 'धुआँ जो गरजे'।विक्टोरिया फॉल्स को इस धरती पर गिरते पानी का सबसे चौड़ा प्रपात (सबसे चौड़ा पानी का परदा) कहा जाता है। इसकी चौड़ाई सत्रह सौ मीटर है। दुनियाभर से लोगों के यहां सालभर आने के बाद भी इस जगह के जादू में कोई कमी नहीं आई है। वाटरफॉल्स से बनने वाला कुहासा बीस किलोमीटर दूर से भी देखा जा सकता है। इसी तरह उसकी गर्जना भी बहुत दूर से सुनी जा सकती है। सौ मीटर नीचे पानी के गिरने से बाद उठने वाली बौछारें काफी हद तक उस इलाके में मौजूद रेनफॉरेस्ट को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार हैं। नजारा तब और खूबसूरत हो उठता है जब अलग- अलग कोण से इंद्रधनुष पानी के ऊपर देखने को मिलते हैं। यह दक्षिणी अफ्रीका के सबसे पसंदीदा पर्यटक स्थलों में से एक है। नवंबर 1855 में यहां पहुंचने वाले पहले विदेशी डेविड लिंगस्टोन थे। उन्होंने ब्रिटेन की महारानी के नाम पर इस फॉल्स का नाम रखा। चार साल पहले गरजने वाले धुंए के बारे में सुनकर उन्होंने इसकी खोज शुरू की थी।

हनीमून के लिए लोकप्रिय[संपादित करें]

दुनियाभर में हनीमून के लिए भी यह सबसे लोकप्रिय जगहों में से है। जाम्बेजी नदी में क्रूज, गेम रिजर्व व सफारी यहां के अन्य आकर्षण हैं। नवंबर से अप्रैल का समय यहां काफी गरम, उमस भरा व भीगा होता है। मार्च व अप्रैल की बाढ़ में यह अपने पूरे प्रवाह पर होता है लेकिन इसकी बौछारें इतनी तेज होती हैं कि आपको दूर- दूर तक गीला कर देती हैं और उसे देख पाना तक मुश्किल हो जाता है।

कब व कैसे[संपादित करें]

विक्टोरिया फॉल्स के लिए अफ्रीका में सभी प्रमुख स्थानों से आसानी से पहुंचा जा सकता है। विक्टोरिया फॉल्स के ही नाम से शहर इस प्रपात से थोड़ा ही दूर है, जहां रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा, दोनों हैं। दक्षिण अफ्रीका, जिंबाब्वे, जांबिया, बोत्सवाना आदि जगहों से सीधे संपर्क में है। वैसे तो यहां पूरे सालभर जाया जा सकता है लेकिन जून से मध्य अगस्त तक यहां हल्का ठंडा मौसम होता है जो भारत में गरमियों से सुकून देने वाला हो सकता है। यह समय न केवल फॉल्स का बेहतर आनंद देता है बल्कि इन दिनों राफ्टिंग, बंजी जंपिंग, तार से बंधकर प्रपात के ऊपर उड़ने और अन्य कई हवाई करतबों जैसी बाकी रोमांचक गतिविधियां भी हो सकती हैं। दिसंबर से जनवरी में फॉल्स अपने सबसे निचले और अप्रैल में अपने सबसे उफानी स्तर पर होता है। दक्षिण अफ्रीका में प्रीटोरिया से एक विशेष लक्जरी ट्रेन भी चलती है जो तीन दिन में पीटर्सबर्ग पहुंचाती हैं जहां से विक्टोरिया फॉल्स के नजारे को देखने के लिए दो घंटे की विशेष उड़ान होती है। इसके अलावा भी कई टूर पैकेज हैं जिनमें विक्टोरिया फॉल्स के अलावा आस-पास के गेम रिजर्व व सफारी भी शामिल है। प्रपात से पहले जेम्बेजी नदी में 'लुआम्पा' और 'कुआन्डो' नाम की दो बड़ी नदियां भी आकर मिलती हैं। विक्टोरिया जलप्रपात विश्व का सबसे बड़ा एकल प्रपात है, जो बेसाल्ट घाटियों में मीलो तक शोर करता है। इस जलप्रपात में जल के गिरने की आवाज़ किसी के भी रौंगटे खड़े कर सकती है। ऐसा लगता है कि मानो पूरी जेम्बेजी नदी ही यहाँ से कूद पड़ी हो। मुख्य जलप्रपात सबसे लंबा है, इसे 'मेन फ़ाल्स' कहते हैं। विक्टोरिया जलप्रपात में जल इतने जोरों से गहराई में गिरता है कि आस-पास 20 किलोमीटर तक धुंध दिखाई देती है। उससे होने वाली बौछार उँचे जाकर वर्षा की तरह गिरती है। इसी की वजह से यहां रेन फॉरेस्ट बना हुआ है।

==सन्दर्भ==          

1.दैनिक जागरण हिंदी अख़बार 2.bharatdiscovery. org वेबसाइट