वनस्पति विज्ञान
जीव जंतुओं या किसी भी जीवित वस्तु के अध्ययन को जीवविज्ञान या बायोलोजी (Biology) कहते हैं। इस विज्ञान की दो मुख्य शाखाएँ हैं :
(1) प्राणिविज्ञान (Zoology), जिसमें जंतुओं का अध्ययन होता है और
(2) वनस्पतिविज्ञान (Botany) या पादपविज्ञान (Plant Science), जिसमें पादपों का अध्ययन होता है।
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पादप एवं प्राणी [संपादित करें]
सामान्य अर्थ में जीवधारियों को दो प्रमुख वर्गों - प्राणियों और पादपों - में विभक्त किया गया है। दोनों में अनेक समानताएँ हैं। दोनों की शरीररचनाएँ कोशिकाओं और ऊतकों से बनी हैं। दोनों के जीवनकार्य में बड़ी समानता है। उनके जनन में भी सादृश्य है। उनकी श्वसनक्रिया भी प्राय: एक सी है। पादप में जीवन के अन्य लक्षण, जैसे नए जीवद्रव के बनाने, नई कोशिकाओं को निरंतर बनाने और पुरानी को नष्ट होने देने की क्षमता, होते हैं। पादपों में अन्य जीवलक्षण, जैसे वर्धन, जनन इत्यादि की क्षमता, भी पाए जाते हैं।
पादप प्राणी जीवधारियों से कई तरह से भिन्न होते हैं। जैसे पादपों में पर्णहरित (chlorophyll) नामक हरा पदार्थ रहता है, जो प्राणी जीवधारियों में नहीं होता। पादपों की कोशिकाओं की दीवारें सेलुलोज (cellulose) की बनी होती हैं, जैसा प्राणी जीवधारियों में नहीं होता। अधिकांश पादपों में गमनशीलता नहीं होती, जो प्राणी जीवधारियों का एक विशिष्ट लक्षण है।
पादप विज्ञान की शाखाएँ [संपादित करें]
(विस्तृत जानकारी के लिये पादप विज्ञान की शाखाएँ देखें। )
पादपविज्ञान के समुचित अध्ययन के लिये इसे अनेक शाखाओं में विभक्त किया गया है, जिनमें निम्नलिखित प्रमुख हैं :
1. पादप आकारिकी (Plant Morphology) - इसके अंतर्गत पादप में आकार, बनावट इत्यादि का अध्ययन होता है। आकारिकी आंतर हो सकती है या बाह्य।
2. कोशिकानुवंशिकी (Cytogenetics) - इसके अंतर्गत कोशिका के अंदर की सभी चीजों का, कोशिका तथा केंद्रक (nucleus) के विभाजन की विधियों का तथा पौधे किस प्रकार अपने जैसे गुणोंवाली नई पीढ़ियों को जन्म देते हैं इत्यादि का, अध्ययन होता है।
3. पादप परिस्थितिकी (Plant Ecology) - इसके अंतर्गत पादपों और उनके वातावरण के आपसी संबंध का अध्ययन होता है। इसमें पौधों के सामाजिक जीवन, भौगोलिक विस्तार तथा अन्य मिलती जुलती चीजों का भी अध्ययन किया जाता है।
4. पादप शरीर-क्रिया-विज्ञान (Plant Physiology) - इसके अंतर्गत जीवनक्रियाओं (life processes) का बृहत् रूप से अध्ययन होता है।
5. भ्रूणविज्ञान (Embryology) - इसके अंतर्गत लैंगिक जनन की विधि में जब से युग्मक बनते हैं और गर्भाधान के पश्चात् भ्रूण का पूरा विस्तार होता है तब तक की दशाओं का अध्ययन किया जाता है।
6. विकास (Evolution) - इसके अंतर्गत पृथ्वी पर नाना प्रकार के प्राणी या पादप किस तरह और कब पहले पहल पैदा हुए होंगे और किन अन्य जीवों से उनकी उत्पत्ति का संबंध है, इसका अध्ययन होता है।
7. आर्थिक पादपविज्ञान - इसके अंतर्गत पौधों की उपयोगिता के संबंध में अध्ययन होता है।
8. पादपाश्मविज्ञान (Palaeobotany) - इसके अंतर्गत हम उन पौधों का अध्ययन करते हैं जो इस पृथ्वी पर हजारों, लाखों या करोड़ों वर्ष पूर्व उगते थे पर अब नहीं उगते। उनके अवशेष ही अब चट्टानों या पृथ्वी स्तरों में दबे यत्र तत्र पाए जाते हैं।
9. वर्गीकरण या क्रमबद्ध पादपविज्ञान (Taxonomy or Systematic botany) - इसके अंतर्गत पौधों के वर्गीकरण का अध्ययन करते हैं। पादप संघ, वर्ग, गण, कुल इत्यादि में विभाजित किए जाते हैं।
18वीं या 19वीं शताब्दी से ही अंग्रेज या अन्य यूरोपियन वनस्पतिज्ञ भारत में आने लगे और यहाँ के पौधों का वर्णन किया और उनके नमूने अपने देश ले गए। डाक्टर जे. डी. हूकर ने लगभग 1860 ई. में भारत के बहुत से पौधों का वर्णन अपने आठ भागों में लिखी "फ्लोरा ऑव ब्रिटिश इंडिया" नामक पुस्तक में किया है।
पादप वर्गीकरण [संपादित करें]
(विस्तृत विवरण के लिये पादप वर्गीकरण देखें। )
डार्विन (Darwin) के विचारों के प्रकाश में आने के पश्चात् यह वर्गीकरण पौधों की उत्पत्ति तथा आपसी संबंधों पर आधारित होने लगा। ऐसे वर्गीकरण को 'प्राकृतिक पद्धति' (Natural System) कहते हैं और जो वर्गीकरण इस दृष्टिकोण को नहीं ध्यान में रखते उसे 'कृत्रिम पद्धति' (Artificial System) कहते हैं।
- अपुष्पी या क्रिप्टोगैम (Cryptogam)
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- थैलोफाइटा, (Thallophyta),
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- शैवाल या ऐलजी (Algae),
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- कवक या फंजाइ (Fungi) और
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- लाइकेन (Lichen)
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- ब्रायोफाइटा (Bryophyta) और
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- हिपैटिसी (Hepaticae),
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- ऐंथोसिरोटी (Anthocerotae) और
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- मससाइ (Musci)
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- टेरिडोफाइटा (Pteridophyta)
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- लाइकोपोडिएलीज़ (Lycopodiales),
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- इक्विसिटेलीज़ (Equisetales) और
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- फिलिकेलीज़ (Filicales)
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- पुष्पोद्भिद या फेनेरोगैम (Phanerogam) में दो बड़े वर्ग हैं :*
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- अनावृतबीजी या जिम्नोस्पर्म (Gymnosperm) और
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- आवृतबीजी या ऐंजियोस्पर्म (Angiosperm)
संदर्भ [संपादित करें]
बाहरी कड़ियाँ [संपादित करें]
- बेदी वनस्पति कोश ; भाग - १ (गूगल पुस्तक ; लेखक - रामेश बेदी)
- वनस्पति जगत की आश्चर्यजनक बातें (गूगल पुस्तक; लेखक - ललित नारायन उपाध्याय)
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