रॉबर्ट ओपेनहाइमर

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रॉबर्त ओपेनहाइमर

जूलियस रॉबर्ट ओपेनहाइमर (Julius Robert Oppenheimer) (२२ अप्रैल, १९०४ - १८ फरवरी, १९६७) एक सैद्धान्तिक भौतिकविद् एवं अमेरिका के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (बर्कली) में भौतिकी के प्राध्यापक थे। लेकिन वे परमाण बम के जनक के रूप में अधिक विख्यात हैं। वे द्वितीय विश्वयुद्ध के समय परमाणु बम के निर्माण के लिये आरम्भ की गयी मैनहट्टन परियोजना के वैज्ञानिक निदेशक थे। न्यू मैक्सिको में जब ट्रिनिटी टेस्ट हा और इनकी टीम ने पहला परमाणु परीक्षण किया तो उनके मुंह से भगवद गीता का एक श्लोक निकल पड़ा।

दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता।

यदि भाः सदृशी सा स्याद् भासस्तस्य महात्मनः॥१२॥

कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो

लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः।...॥३२॥

युद्ध की समाप्ति पर उन्हें युनाइटेड स्टेट्स एटॉमिक इनर्जी कमीशन का मुख्य सलाहकार बनाया गया।

प्रमुख कार्य[संपादित करें]

  • Science and the Common Understanding (New York: Simon and Schuster, 1954).
  • The Open Mind (New York: Simon and Schuster, 1955).
  • The flying trapeze: Three crises for physicists (London: Oxford University Press, 1964).
  • Uncommon sense (Cambridge, MA: Birkhäuser Boston, 1984). (posthumous)
  • Atom and void: Essays on science and community (Princeton, NJ: Princeton University Press, 1989). (posthumous)

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]