योशिरो नाकामत्सु

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डा योशिरो नाकामत्सु (जन्म: 26 जून 1928) को मानव-इतिहास में जन्मे महान मस्तिष्कसमृद्ध लोगों में शुमार किया जाता है। 3000 से अधिक पेटेंट हासिल करने वाले योशिरो को 36 वर्षों तक निरंतर, किये गये हर भोजन की बाकायदा फोटोग्राफी के साथ हर तथ्य का रिकार्ड रखने के लिए पोषण श्रेणी का इग्नोबल पुरस्कार (Ig Nobel Prize) भी दिया गया। उन्हें अमेरिका की यूएस साइंस एकेडेमिक सोसायटी ने आर्कीमिडीज, माइकल फैराडे, मेरी क्यूरी, निकोल टेसला के बाद विश्व का पांचवा महान वैज्ञानिक घोषित भी किया।

जीवनी[संपादित करें]

एक स्कूलशिक्षक माता के गर्भ से, 26 जून 1928 को जापान में जन्में इस वैज्ञानिक ने 23 वर्ष की उम्र में कालेज लाइफ के दौरान फ्लॉपी की खोज की थी। उसके बाद सीडी, डीवीडी, डिजीटल घड़ियाँ, कसरत और जागिंग के लिए आम आदमी से 3 गुना तेजी से दौड़ने में सहायक विशेष जूते, मानसिक क्षमता बढ़ाने वाली सेरेबेरेक्स चेयर, टैक्सीकेब मीटर, सिनेमास्कोप, कराओके मशीन, यौनशक्तिवर्धक स्पे्र लवजेड 200 इत्यादि उनके मुख्य आविष्कार रहे हैं। पानी से चलने वाले इंजन की यथार्थपरक परिकल्पना भी उनकी देन है। इन आविष्कारों की बदौलत उन्हें जापान का एडिसन कहा जाने लगा।

उनका आविष्कार सेरेबेरेक्स चेयर एक ऐसी कुर्सी है जिस पर आराम कर व्यक्ति की समरणशक्ति, गणित कौशल और दृष्टि क्षमता में सुधार होता है। इसके अलावा निम्न रक्तचाप, धमनियों में रक्त संचरण संबंधी रोगों में भी यह कुसी लाभदायक है। इस कुर्सी में विशेष ध्वनि तरंगे के कंपन पैरों से शुरू होकर मस्तिक तक प्रवाहित होते हैं। डा नाकामत्सु के अनुसार इस पर किया गया 20-30 मिनिट का विश्राम मस्तिष्क को 8 घंटे की आम नींद की ताजगी देता है।

अपने भोजन में वो रोज सूखे झींगे विशेष मिश्रण, समुद्री शैवाल, चीज, योगर्ट, ईल, अंडों, गोमांस और मुर्गे की कलेजी आदि लेते हैं। पौष्टिक भोजन, सुबह की सैर, व्यायाम के समर्थक डाॅ नाकामत्सु के अनुसार हमें अपने उन विचारों पर अधिक ध्यान देना चाहिए जो अचानक, एक फ्लैश लाइट्स की चमक की तरह आते और खो जाते हैं। क्योंकि इन्हें नोट कर इन पर अमल करना किसी भी व्यक्ति की जिंदगी बदलता या बदल सकता है।

उनकी खोजों का मुख्य समय रात्रि के 12 से सुबह के 4 बजे तक का है। वो दिन में 4 घंटे से ज्यादा नहीं सोते और मानते हैं कि किसी भी व्यक्ति के लिए 6 घंटे से ज्यादा सोना हानिकारक होता है। विशेष साधनों के साथ पानी के भीतर रहकर खोजें करने में आनंद मनाने वाले नाकामत्सु कहते हैं कि ‘‘आक्सीजन’’ मानव मस्तिष्क के लिए दुश्मन है।

जापान में डा नाकामत्सु के नाम से प्रसिद्ध इस वैज्ञानिक ने जीवन जीने यानि अपनी आयु का लक्ष्य 144 वर्ष रखा है। उनका ये भी कहना है कि वे अपने आयु लक्ष्य के दौरान संभवतः 6000 खोजें कर लेने का रिकार्ड बना डालेंगे।

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