मिज़ो समझौता

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मिज़ो समझौता (Mizo Accord) भारत सरकार और मिज़ो नैश्नल फ़्रन्ट (ऍम॰ऍन॰ऍफ़॰) के बीच ३० जून १९८६ को हुआ एक समझौता था। ऍम॰ऍन॰ऍफ़॰ ने १९५० के दशक में भारत-सरकार के मिज़ोरम के प्रति ग़ैर-संवेदनशील प्रशासन से उत्तेजित होकर एक अलगाववादी अभियान आरम्भ किया था। हालांकि यह अभियान असफल था लेकिन इसके कारण मिज़ो समाज विस्तृत हिन्सा से पीड़ित था। इस समझौते के अंतरगत ऍम॰ऍन॰ऍफ़॰ ने भारतीय संविधान के तहत कार्य करने की घोषणा करी और हिन्सा त्याग दी। भारत सरकार ने बदले में ऍम॰ऍन॰ऍफ़॰ से सम्बन्धित उग्रवादियों को मुख्यधारा में प्रवेश करवाने की सहायता की घोषणा करी। मिज़ोरम को संघक्षेत्र से बढ़ाकर पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया गया।[1]

समझौता मिज़ोरम में शान्ति लाने में सफल रहा और वहाँ उग्रवाद लगभग ख़त्म हो गया। ऍम॰ऍन॰ऍफ़॰ एक राजनैतिक दल के रूप में जारी रही और उसके नेता, पू लालडेन्गा, मिज़ोरम के मुख्यमंत्री रहे। मिज़ोरम में तेज़ी से विकास हुआ है और अब उसका साक्षरता दर लगभग केरल के बराबर और सभी अन्य भारतीय राज्यों से ऊँचा है।[2][3]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Chatterjee S (1994). Making Of Mizoram. Md Publications Pvt Ltd, India, pp.320-324. ISBN 978-81-85880-38-9
  2. Nunthara C (2002). Mizoram: Society And Polity. Indus Publishing Company, India, pp. 290-293. ISBN 978-81-7387-059-0
  3. Banner of Revolt: Angami Zapu Phizo & Laldenga, Sanjoy Hazarika, India Today, ... 1986 when Rajiv Gandhi hammered out a deal that ended the fighting. Mizoram became a full Indian state and Laldenga its interim chief minister before his MNF won the first elections to the state legislature ...