ब्‍लिंक (पुस्तक)

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Blink: The Power of Thinking Without Thinking  
The Blink: The Power of Thinking Without Thinking
लेखक Malcolm Gladwell
देश USA
भाषा English
प्रकार Psychology, Popular Psychology
प्रकाशक Back Bay Books, Little, Brown
प्रकाशन तिथि January 11, 2005
मीडिया प्रकार Print (Hardback & Paperback) & Audiobook
पृष्ठ 320 p. (paperback edition)
आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ ISBN 0-316-17232-4 & ISBN 0-316-01066-9 (paperback edition)
ओ॰सी॰एल॰सी॰ क्र॰ 55679231
पूर्ववर्ती The Tipping Point: How Little Things Make a Big Difference, 2000
उत्तरवर्ती Outliers: The Story of Success, 2008
लाइब्रेरी ऑफ़ कॉंग्रेस
वर्गीकरण
BF448 .G53 2005

ब्‍लिंक: द पावर ऑफ थिंकिंग विदाउट थिंकिंग 2005 में माल्कॉम ग्‍लैडवेल द्वारा लिखित किताब है. यह उस अनुकूलनीय अवचेतन पर; वह मानसिक प्रक्रियाएं जो सापेक्षिक रूप से अल्‍प जानकारी पर तीव्रता और स्‍वचालित रूप से कार्य करती हैं, मनोविज्ञान और व्‍यावहारिक अर्थशास्‍त्र से लोकप्रिय विज्ञान स्‍वरूप शोध को प्रस्‍तुत करती है. यह अनुकूलनीय अवचेतन, उदाहरणार्थ विशेषज्ञ निर्णय में, और इसकी कठिनाइयों जैसे रूढ़िवादिता, दोनों की शक्‍तियों पर विचार करता है.

सारांश[संपादित करें]

लेखक इस पुस्‍तक के मूल विषय को "पतला टुकड़ा करने की क्रिया": माप करने की हमारी योग्‍यता, जो वास्‍तव में अनुभव के बहुत नजदीक से हमारे लिए महत्‍वपूर्ण है, के रूप में वर्णन किया है. अन्‍य शब्‍दों में, यह एक कल्‍पना है कि स्‍वत:स्‍फुर्त निर्णय प्राय: - सावधानीपूर्वक योजना बनाए गए और विचार किए गए - से अच्‍छा या बेहतर होता है. ग्‍लैडवेल विज्ञान, विज्ञापन, विक्रय, चिकित्‍सा और लोकप्रिय संगीत से अपने विचारों को बल देने के लिए उदाहरणों को प्रस्‍तुत करते हैं. ग्‍लैडवेल पतला टुकड़ा करने की क्रिया के साथ लोगों के नियमित अनुभवों के कई उदाहरणों को प्रस्‍तुत करते हैं.

ग्‍लैडवेल बताते हैं कि किसी विशेषज्ञ की "पतले टुकड़े" की योग्‍यता उनके पसंद और नापसंद, पूर्वाग्रह और रूढ्रिवादिता (अवचेतना से भी) से कैसे भ्रष्‍ट हो सकती है और वे कैसे अधिक सूचना से अधिक भरी जा सकते हैं. अवचेतन पूर्वाग्रह के दो विशेष प्रारूप जिनकी चर्चा ग्‍लैडवेल करते हैं, वे हैं अंतर्निहित एसोसिएशन टेस्ट और मनोवैज्ञानिक स्‍वच्‍छता..ग्‍लैडवेल हमसे हमारे मनोभावों को पढ़ने की इंद्रियों की योग्‍यता को भी बताते हैं जो यह है कि अब हम केवल चेहरा देख कर यह जान सकते हैं कि एक आदमी किन भावनाओं का अनुभव कर रहा है

हम अपने निष्‍कर्ष पर आने के लिए सीमित जानकारी का उपयोग करते हुए इसे उस से करो "पतली टुकड़ा करना" का उपयोग करते हैं. ग्‍लैडवेल कहते हैं कि वह अतिभारित सूचना का युग है, वह पाते हैं कि विशेषज्ञ प्राय: कई विश्लेषणों को करने की तुलना में त्‍वरित निर्णयों के साथ बेहतर निर्णय लेते हैं.

ग्‍लैडवेल , पतला टुकड़ा करने के की व्‍यापक श्रृंखला का उदाहरण जुआ स्पीड डेटिंग टेनिस, सैनिक युद्धों के खेल, सिनेमा, गलत सूट्स, लोकप्रिय संगीत और भावी तलाक के संदर्भ में देते हैं.

ग्‍लैडवेल यह भी वर्णन करते हैं कि कभी कभी अधिक सूचना निर्णय की आवृति या डॉक्‍टर के निदान में भी हो सकती है. यह सामान्‍यत: "विश्लेषण पक्षाघात" कहा जाता है. चुनौती केवल निर्णय को लेने के लिए सर्वाधिक गंभीर जानकारी पर विस्‍थापन और फोकस करने की है. अन्य जानकारी निर्णय निर्माता के लिए अप्रासंगिक और भ्रमित हो सकता है. अधिकांश मामलों मं अधिक से अधिक जानकारी को संग्रहित करना केवल हमारे निर्णयों पर बल देता है लेकिन इसे अधिक परिशुद्ध बनाने में सहायता नहीं करता है. जानकारी का संग्रह सामान्‍य रूप से एक व्‍यक्ति के प्रारंभिक विश्‍वास या दुर्भावना की पुष्‍टि के रूप में व्‍याख्‍या किया जाता है. ग्‍लैडवेल स्‍पष्‍ट करते हैं कि बेहतर निर्णय अधिक सामान्‍य धारणा कि किसी रोगी के बारे में व्‍यापक जानकारी सुधारे गए निदान के अनुपातिक है के बजाय सरलता और जानकारी के के द्वारा ज्यादातर निष्‍पादित किया जा सकता है.यदि बड़ी तस्‍वीर निर्णय करने के लिए अधिक स्‍पष्‍ट है तो सूक्ष्‍मदर्शी यंत्र के उपयोग के बिना बड़ी तस्‍वीर से निर्णय करें.

पुस्तक में तर्क दिया गया है कि सहज निर्णय अनुभव, प्रशिक्षण और ज्ञान द्वारा विकसित होता है. उदाहरण के लिए, ग्‍लैडवेल दावा करते हैं कि उन व्‍यक्तियों में भी जिनकी चेतन प्रवृति पूर्वाग्रहित नहीं है, पूर्वाग्रह सहज अवचेतन स्‍तर पर संचालित हो सकता है. इसमें एक उदाहरण हालो प्रभाव है, जहां एक व्‍यक्ति जिसके पास मौन सकारात्‍कम गुण चिंतन अन्‍य में श्रेष्‍ठ है, असंबंधित आदर करता है. ग्‍लैडवेल 1999 के एमाडउ डियालो की हत्‍या का उपयोग एक त्‍वरित सहज निर्णय के रूप मे करता है जहां न्‍यूयार्क के चार पुलिस वाले एक एक निर्दोष आदमी को उसके घर के दरवाजे पर 41 गोलियां मारते हैं, इसका दारूण प्रभाव हो सकते हैं.[1]

अनुसंधान और उदाहरण[संपादित करें]

  • ग्‍लैडवेल क्‍लीवलैड में एक अग्‍निकर्मी की कहानी बताते है जो अपने सहयोगियों के साथ दैनिक कॉल पर गया. आग एक आवासीय परिसर में एक मंजिले घर के पीछे किचेत में लगी थी. अग्‍निकर्मी ने रसोई का दरवाजा तोड़ डाला, अपनी पाइप को बिछाया और पानी से आग बुझाने का प्रयास करने लगे. यह कम हो गया होता लेकिन यह कम नहीं हुआ. जैसा कि अग्‍निकर्मी याद करते हैं कि वह अचानक स्‍वयं के बारे में सोंचता है, "कुछ यहां गलत है" और वह तुरंत अपने सहयोगियों को बाहर आने का आदेश देता है. उनके जाने के कुछ ही पलों बाद जिस सतह पर वह खड़े थे गिर जाती है. आग बेसमेंट में लगी थी, किचेन में नहीं जैसा कि दिखाई दे रही थी. यह पूछे जाने पर कि वह वह बाहर जाने के बारे में कैसे जाना, अग्‍निकर्मी ने सोचा कि यह इएसपी था. ग्‍लैडवेल के लिए सबसे मजेदार यह था कि अग्‍निकर्मी तुरंत यह स्‍पष्‍ट नहीं कर सका कि वह वह बाहर निकलने के बारे में कैसे सोंचा. ग्‍लैडवेल इसे हमारे दिमाग का "बंद दरवाजा" कहते हैं जिसे हमारे अग्‍निकर्मी ने तुरंत जला दिया और सही फैसला किया. वास्तव में, यदि अग्‍निकर्मी ने जानबूझकर उन तथ्यों पर होता जो वह देख रहा था तो संभवत: अपने जीवन को और सहयोगियों को खो दिया होता.
  • कहानी गेटी कुरोस की कहानी से प्रारंभ होती है, जो एक प्रतिमा थी जो कैलिफोर्निया के जे पॉल गेटी संग्रहालय में लाई गई थी. यह औचित्‍यपूर्ण होने के लिए कई विशेषज्ञों द्वारा साबित हो चुका था लेकिन जब लोगों ने पहली बार इसे देखा तो उनकी प्रारंभिक प्रतिक्रिया थी कि कुछ सही नहीं है. उदाहरण के लिए, जॉर्ज डेसपिंस, एथेंस में एक्रोपोलिस संग्रहायल के विभागाध्‍यक्ष, ने कहा कि "सतह पर आते हुए किसी भी वास्‍तुकला को किसी ने कभी देखी हो तो वह कह सकता है कि चह चीज कभी भी सतह पर नहीं रही है". हालांकि, कुरोस के आसापास घूमता रहता है क्‍योंकि इस पर सहमति नहीं थी कि यह वास्‍तविक है या नकली.[2]
  • जॉन गॉटमैन एक शोधार्थी हैं जो वैवाहिक संबंधों पर अपने शोध के लिए जाने जाते हैं. उनका कार्य ब्‍लिंक में देखा गया है. पति और पत्‍नी के बीच एक घंटे की बातचीत का विश्‍लेषण करने के बाद, गॉटमैन यह 95 प्रतिशत शुद्ध अनुमान लगा सकते हैं कि यह जोड़ा 15 सालों में शादी करेगा या नहीं. यदि वह 15 मिनटों तक उनका विश्‍लेषण करता है तो उसकी परिशुद्धता 90 प्रतिशत तक हो जाती है. यह "पतला टुकड़ा करने" की क्रिया का एक उदाहरण है.[3]

आलोचना और स्वागत[संपादित करें]

रिचर्ड पोस्‍नर शिकागो विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और यूनाइटेड स्‍टेट्स कोर्ट ऑफ अपील्‍स फॉर द सेवेंथ कोर्ट के एक न्यायाधीश तर्क देते हैं कि ग्‍लैडवेल का ब्‍लिंक पतला टकड़ा करने के संबंध में अपने स्‍वयं की अनुशंसाओं का पालन करने में असमर्थ है और इस सिद्धांत[4] के तथ्‍यों के चित्रण में कई असमर्थित अनुमानों और गलतियों को करते हैं. डेली टेलिग्राफ की समीक्षा में कहा गया कि "शायद ही ऐसे मजबूत दावे इस प्रकार के सबेत पर उन्‍नत हुए हैं".[5]

फिल्म[संपादित करें]

लेखक और निर्देशक स्टीफन गेगहैन ने लियनार्डो डिकैप्रियो की भूमिका वाली फिल्‍म में पुस्‍तक को ग्रहण किया है, जो 2011 में आ रही है. मुख्‍य भूमिका (डिकैप्रियो) के पास लोगों के चेहरे और शरीर की भाषा को पढ़ने की विशेष योग्‍यता है. वह इस योग्‍यता का उपयोग कॉरपोरेट जगत में बाहर करने के लिए करता है लेकिन अपने धनी पिता की मदद एक मुकदमें को जीतने के लिए मामले में संभावित जजों की क्षमता को देख कर करता है.[6]

वर्णित विषय[संपादित करें]

  • मिलेनियम चैलेंज 2002 और पॉल वैन के.एच. रिपर
  • केन्‍ना
  • पेप्सी चैलेंज और नई कोक
  • द मैरी टायलर मूर शो
  • गेट्टी कौरोस
  • कुक काउंटी अस्पताल
  • अमदोऊ दिएलो
  • हरमन मिलर एरोन कुर्सी

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • गेविन डे बेकर
  • पॉल एकमैन
  • जॉन गौटमैन
  • पारस्परिक धारणा

संदर्भ[संपादित करें]

बाहरी लिंक्स[संपादित करें]

साँचा:Malcolm Gladwell