बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र

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पहली बैलिस्टिक मिसाइल V-2 का रेखाचित्र

तकनीकी दृष्टि से बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र या बैलिस्टिक मिसाइल (ballistic missile) उस प्रक्षेपास्त्र को कहते हैं जिसका प्रक्षेपण पथ सब-आर्बिटल बैलिस्टिक पथ होता है। इसका उपयोग किसी हथियार (प्राय: नाभिकीय अस्त्र) को किसी पूर्वनिर्धारित लक्ष्य पर दागने के लिये किया जाता है। यह मिसाइल अपने प्रक्षेपण के प्रारम्भिक चरण में ही केवल गाइड की जाती है; उसके बाद का पथ कक्षीय यांत्रिकी (या आर्बिटल मेकैनिक्स) के सिद्धान्तों एवं बैलिस्टिक्स के सिद्धान्तों से निर्धारित होता है। अभी तक इन्हें रासायनिक रॉकेट इंजनों के द्वारा प्रणोदित (प्रोपेल) किया जाता है।

इतिहास[संपादित करें]

सबसे पहला बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र (मिसाइल) A-4 था जिसे सामान्यत V-2 रोकेट के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रक्षेपास्त्र को नाज़ी जर्मनी ने 1930 से 1940 के मध्य में रोकेट साइंटिस्ट (वैज्ञानिक) वेर्न्हेर वॉन ब्राउन की देखरेख में विकसित किया था। V-2 रोकेट का पहला सफल परिक्षण 3 अक्टूबर 1942 को हुआ, इसका 6 सितम्बर 1944 को फ़्रांस के विरुद्ध और उसके दो दिन बाद लन्दन पर इसका प्रयोग किया गया। द्वितीय विश्व युद्ध के अंत तक (मई 1945), इस V-2 रोकेट प्रक्षेपास्त्र को 3,000 से भी ज्यादा बार प्रयोग में लाया गया था।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]