प्लास्टर

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पेरिस प्लास्टर का चूर्ण

प्लास्टर (फ्लस्तेर्) से तीन पदार्थों का बोध होता है-

१) जिप्सम प्लास्टर (या पेरिस प्लास्टर)

२) चूना प्लास्टर

३) सीमेंट प्लास्टर

पेरिस प्लास्टर[संपादित करें]

इसे 'प्लास्टर ऑफ पेरिस' भी कहा जाता है। यह निर्जलित जिप्सम है, जो प्राय: श्वेत चूर्ण के रूप में मिलता है। यदि विशुद्ध जिप्सम (CaSo4. 2H2O) को 1000 से 1900 सें॰ तक गरम किया जाय, तो जलांश का तीन चौथाई भाग निकल जाता है और परिणामी पदार्थ पेरिस प्लास्टर (CaSo4. ½H2O) कहलाता है।

पेरिस प्लास्टर पानी के संपर्क में आते ही शीघ्र ही उससे मिलकर जिप्सम बन जाता है। जमने या कठोर होने में बहुत कम समय लगता है। सामान्यतः इसके लिये 5 से 15 मिनट तक पर्याप्त होता है इसलिये जमने में विलंब कराने वाले कुछ पदार्थ मिलाना आवश्यक होता है। इनसे जमने का समय बढ़कर 20 से 40 मिनट तक हो जाता है। विलंबन के लिये प्रयुक्त होने वाले अनेक पदार्थ हैं, किंतु व्यापक प्रयोग में आने वाला विलंबक प्राय: पशुप्रांगण या संवेष्टनशालाओं के कूड़े कचरे से ही बनता है।

पानी मिलने पर जब यह जमता है, तब कुछ ऊष्मा उत्पन्न होती है और आयतन में वृद्धि के कारण ही यह रंगने या पॉलिश की जाने वाली लकड़ी या पलस्तर को दरारों ओर छेदी में भरने के लिये तथा साँचों में ढालकर विविध प्रकार की वस्तुएँ बनाने के लिये विशेष उपयुक्त होता है। पेरिस प्लास्टर का प्रयोग सजावटी पलस्तर में भी होता है। इस कार्य के लिये यह सवर्त्तोम है, क्योंकि इसके प्रयोग से कठोर तल, तीव्र रैखिक उभार और धारें सरलता से बनती हैं और सुदृढ़ होती हैं। इसकी शीघ्र जमने की प्रकृति ढलाई के लिये तो उपयोगी है, किंतु दीवार पर पलस्तर करने के लिये इसे अनुपयुक्त कर देती है। अपने स्थान पर ढाली गई और पूवनिर्मित, दोनों ही प्रकार की छतें बनाने के लिये इसका व्यापक प्रयोग होता है।