प्रतीत्यसमुत्पाद

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प्रतीत्यसमुत्पाद का सिद्धांत कहता है कि कोई भी घटना केवल दूसरी घटनाओं के कारण ही एक जटिल कारण-परिणाम के जाल में विद्यमान होती है । प्राणियों के लिये इसका अर्थ है - कर्म और विपाक (कर्म के परिणाम) के अनुसार अनंत संसार का चक्र । क्योंकि सब कुछ अनित्य और अनात्म (बिना आत्मा के) होता है, कुछ भी सच में विद्यमान नहीं है । हर घटना मूलतः शून्य होती है । परंतु, मानव, जिनके पास ज्ञान की शक्ति है, तृष्णा को, जो दुःख का कारण है, त्यागकर, तृष्णा में नष्ट की हुई शक्ति को ज्ञान और ध्यान में बदलकर, निर्वाण पा सकते है


बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

PATICCA SAMUPPADA Part 1 - YouTube.flv 1st part is http://www.youtube.com/watch?v=htHOWPLXhQ0

PATICCA SAMUPPADA Parts 2 3 - YouTube.flv http://www.youtube.com/watch?v=hWNejKExQtE