प्रतीत्यसमुत्पाद
मुक्त ज्ञानकोष विकिपीडिया से
प्रतीत्यसमुत्पाद का सिद्धांत कहता है कि कोई भी घटना केवल दूसरी घटनाओं के कारण ही एक जटिल कारण-परिणाम के जाल में विद्यमान होती है । प्राणियों के लिये इसका अर्थ है - कर्म और विपाक (कर्म के परिणाम) के अनुसार अनंत संसार का चक्र । क्योंकि सब कुछ अनित्य और अनात्म (बिना आत्मा के) होता है, कुछ भी सच में विद्यमान नहीं है । हर घटना मूलतः शून्य होती है । परंतु, मानव, जिनके पास ज्ञान की शक्ति है, तृष्णा को, जो दुःख का कारण है, त्यागकर, तृष्णा में नष्ट की हुई शक्ति को ज्ञान और ध्यान में बदलकर, निर्वाण पा सकते है
[संपादित करें] बाहरी कड़ियाँ
- Digital Dictionary of Buddhism
- Kamma & the Ending of Kamma
- Maha-nidana Sutta
- Paticca-samuppada-vibhanga Sutta
- Upanisa Sutta translation by Bhikkhu Thanissaro
- A Translation and Exposition of the Upanisa Sutta by Bhikkhu Bodhi
- A Comprehensive Discourse on Paticcasamuppada by Mahasi Sayadaw
- Notes on Dhamma - A Note on Paticcasamuppāda by Nanavira Thera
- Bhikkhu Thanissaro: The Shape of Suffering: A Study of Dependent Co-arising (PDF-Dokument; 744 kb)