पाप

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पाप मनुष्य जाति द्वारा विकसित की गयी एक धारणा है जो मनुष्यों को उन कार्यों को करने से हतोत्साहित करने के लिए बनाई गयी, जिसके तहत हर वो कार्य जो अध्यात्मिक एवं सामाजिक मूल्यों का हास करता हो अथवा आर्थिक एवं प्राकिर्तिक संसाधनों को नष्ट करता हो, पाप की श्रेणी में आते है।

उदाहरणार्थ :ईश निंदा, किसी को व्यर्थ आघात पहुँचाना, व्यर्थ जल बहाना, हरे पेड़ को काटना आदि पाप है।