धूमावती

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धूमावती पार्वती का एक रूप हैं। इस रूप में उन्हें बहुत भूख लगी और उन्होंने महादेव से कुछ खाने को माँगा। महादेव ने थोड़ा ठहरने के लिये कहा। पर पार्वती क्षुधा से अत्यंत आतुर होकर महादेव को निगल गई। महादेव को निगलने पर पार्वती को बहुत कष्ट हुआ।[1]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. N. राज गोपाल, सुमन सचर (2000) (English में). Indian English poetry and fiction: a critical evaluation. नई दिल्ली: Atlantic Publishers & Distributors. प॰ 164. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-7156-905-2. http://books.google.co.in/books?id=-tu6CYOLR0cC&pg=PA164.