दौलताबाद

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दौलताबाद महाराष्ट्र का एक शहर है । देवगिरि नाम से भी प्रसिद्ध । मुहम्म्द बिन तुगलक़ की राजधानी । यह अहमदनगर जिले में स्थित है ।

यह शहर हमेशा शक्‍तिशाली बादशाहों के लिए आकर्षण का केंद्र साबित हुआ है। दौलताबाद की सामरिक स्थिति बहुत ही महत्‍वपूर्ण थी। यह उत्तर और दक्षिण भारत के मध्‍य में पड़ता था। यहां से पूरे भारत पर शासन किया जा सकता था। इसी कारणवश बादशाह मुहम्‍मद बिन तुगलक ने इसे अपनी राजधानी बनाया था। उसने दिल्‍ली की समस्‍त जनता को दौलताबाद चलने का आदेश दिया था। लेकिन वहां की खराब स्थिति तथा आम लोगों की तकलीफों के कारण उसे कुछ वर्षों बाद राजधानी पुन: दिल्‍ली लानी पड़ी।

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अनुक्रम

किला [संपादित करें]

दौलताबाद किला'-एक उपेक्षित किला ! न शोधकर्ताओं की नज़र पड़ती है न ही इसे संरक्षित रखने के प्रयाप्त उपाय किए जा रहे हैं.कमजोर दीवारें गिर रही हैं..एक प्राचीन धरोहर भारत खोता जा रहा है.इतिहास गवाह है -यही एक मात्र एक ऐसा किला है जिसे कभी कोई जीत नहीं सका.

कई राजाओं की तरह अकबर महान ने भी इस पर चार बार चढाई की थी मगर सफल नहीं हुआ.इस के अविजित होने में इस की सरंचना को श्रेय जाता है. यह किला महाराष्ट्र राज्य में औरंगाबाद से १३ किलोमीटर पर पहाडी की चोटी पर स्थित है.

निर्माण [संपादित करें]

इस में कई मत हैं-

  • -स्टुअर्ट piggat के अनुसार यह शाहजहाँ के लिए १६३६ में बनवाया गया था.Maharashtra राज्य के गजेट के अनुसार शाहजहाँ और उस का बेटा औरंगजेब गर्मियों में यहाँ घूमने आते रहते थे.
  • -M. S. मेट के अनुसार यह किला १७वि शताब्दी में बनवाया गया था.
  • -अधिकतर यही मानते हैं की औरंगजेब ने यह किला १६४४ में बनवाया होगा क्योंकि उसी ने दो बार डेक्कन पर जीत हासिल की थी-[१६३६-१६४४ और १६५२-१६५७].

दौलताबाद को देवगिरि के नाम से भी जाना जाता है। This fort is built by the king 'Bhillam' in the 11 century.

बनावट [संपादित करें]

-यह भारत के सबसे मजबूत किलों में एक मजबूत किला है.यह तीन मजिला है.

  • - hill-top महल के भीतर पहुँचने के लिए एक खाई और एक पुल को पार करते हुए एक संकरी सुरंग में दाखिल होना पड़ेगा,कई सौ फीट चलने के बाद सपाट सीधी सीढियां इस रास्ते को जटिल बनाती हैं.इस की बनावट पर मुग़ल शैली का प्रभाव है.
  • -hill-top महल की बनावट में इस्तमाल खांचे और ग्रिड प्लान का हुबहू प्रयोग शाहजहाँ के बनवाए 'दौलत खाना 'में भी मिलता है. - इस में कुछ कमरे सोने के लिए , कुछ मनोरंजन के लिए और कुछ दर्शक हॉल के रूप में. इस्तमाल होते थे.

यह शाही निवास जैसा ही था. हालांकि, यहाँ मस्जिद और स्नान जैसी सुविधाओं तक पहुँचने में कठिनाई है,

-यह प्राथमिक मुगल निवास नहीं था ,न ही यह एक स्थायी आधार पर एक घर था बल्कि अपने दूरस्थ और दर्शनीय स्थान को सुझाता यह स्थान /किला शाही परिवार और दरबारी सदस्यों द्वारा कभी-कभी उपयोग के लिए था.

दौलताबाद में बहुत सी ऐतिहासिक इमारतें हैं जिन्‍हें जरुर देखना चाहिए। इन इमारतों में जामा मस्जिद, चांद मीनार तथा चीनी महल शामिल है। औरंगाबाद से दौलताबाद जाने के लिए प्राइवेट तथा सरकारी बसें मिल जाती हैं।

प्रवेश [संपादित करें]

प्रवेश शुल्‍क: भारतीयों के लिए 5 रु. [?]तथा विदेशियों के लिए 5 डालर। समय: सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक।'डेक्कन ऑडिसी ट्रेन' ले सकते हैं जो प्रत्येक बुधवार 16.40 बजे मुंबई के छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से चलती है.[confirm it] पर्यटकों के लिए ख़ास हिदायत है की इस किले में जा रहे हैं तो पानी की बोतल जरुर साथ रखें क्योंकि वहां ऊपर कहीं भी पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है.

छायाचित्र [संपादित करें]

यहाँ भी देखें :-http://rampuriapc.blogspot.com/search/label/दोलताबाद