देवदासी

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देवदासी हिन्दू धर्म में ऐसी स्त्रियों को कहते हैं जिनका "विवाह" मन्दिर या अन्य किसी धार्मिक प्रतिष्ठान से कर दिया जाता है । समाज में उन्हे उच्च स्थान प्राप्त होता है और उनका काम मंदिरों की देखभाल तथा नृत्य तथा संगीत सीखना होता है । परंपरागत रूप से वे ब्रह्मचारी होती हैं पर अब उन्हे पुरुषों से संभोग का अधिकार भी रहता है । यह एक अनुचित और गलत सामाजिक प्रथा है । इसका प्रचलन दक्षिण भारत में प्रधान रूप से था । बीसवीं सदी में इनकी स्थिति में कुछ परिवर्तन आया । पेरियार तथा अन्य नेताओं ने देवदासी प्रथा को समाप्त करने की कोशिश की । कुछ लोगों ने अंग्रेजों के इस विचार का विरोध किया कि देवदासियों की स्थिति वेश्याओं की तरह होती है ।