दिगंश

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किसी वस्तु का दिगंश (ऐज़िमुथ) दर्शक से मानक दिशा और दर्शक से उस वस्तु की दो लकीरों के बीच का कोण (ऐंगल) होता है - इस चित्र में मानक दिशा उत्तर (N) है और जिस वस्तु का दिगंश बताया जा रहा है वह एक तारा है

दिगंश या ऐज़िमुथ (azimuth) किसी गोलीय निर्देशांक प्रणाली (spherical coordinate system) में एक विशेष कोण (ऐंगल) के माप का नाम है।

उदाहरण के लिए अगर किसी धरती पर खड़े दर्शक के लिए किसी तारे का दिगंश मापना हो तो खगोलीय निर्देशांक पद्धति के अनुसार यह किया जा सकता है। इसमें दर्शक को खगोलीय गोले के उत्तरी ध्रुव से जोड़ने वाली काल्पनिक रेखा मानक दिशा होती है। दर्शक का चारों ओर का क्षितिज एक समतल होता है, जिसमें यह मानक दिशा की रेखा भी विद्यमान होती है। दर्शक को तारे से जोड़ने वाली एक अन्य रेखा को लम्ब (परपेंडिक्युलर) के प्रयोग से इस समतल पर उतारा जाने से दर्शक और समतल पर उस तारे के नीचे वाले बिंदु के बीच एक दूसरी रेखा बनती है। इस रेखा और मानक दिशा की रखा के बीच का कोण ही दिगंश कहलाता है।[1]

दिगंश का प्रयोग नौकावहन, खगोलशास्त्र, अभियांत्रिकी और सैन्य क्षेत्र में मिसाइल इत्यादि की उड़ान निर्धारित करने के लिए बहुत होता है। दिगंश एक कोण है इसलिए इसका माप आमतौर पर डिग्री (°) में किया जाता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Satellite Communications Network Design and Analysis, Kenneth Y. Jo, pp. 477, Artech House, 2011, ISBN 978-1-60807-195-1, ... The new Cartesian coordinate system may then be converted to a spherical coordinate system. The resulting angles correspond to the azimuth and elevation angles to each terminal as viewed from the satellite ...