तृत्सु लोग

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तृत्सु बृहत भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर भाग में बसने वाले आर्य समुदाय के भारत लोगों की एक उपशाखा थी। इनका उल्लेख ऋग्वेद के सातवें मंडल में ७:१८, ७:३३ और ७:८३ में मिलता है। १७०० से १००० ईसापूर्व काल में राजा सुदास और महऋषि वशिष्ठ के नेतृत्व में लड़े गये दस राजाओं के युद्ध (दशराज्ञ युद्ध) में उन्होने पुरु परिसंघ को हराकर सम्स्त हिन्द-आर्य क़बीलों पर अपनी धाक जमा ली।[1][2] उस काल में राजनैतिक व्यवस्था गणतांत्रिक क़बीलों से परिवर्तित होकर राजाओं पर केन्द्रित भी हो रही थी। तृत्सु-समेत दशराज्ञ युद्ध में विजयी भारत क़बीला राजा-प्रथा पर आधारित था जबकि उनके विरोध में खड़े १० क़बीले लगभग सभी लोकतांत्रिक थे।[3]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Indian History, Krishna Reddy, pp. 1-103, Tata McGraw-Hill Education, 2006, ISBN 9780070635777, ... Sudas was a Bharata king of Tritsu family. At first, Visvamitra was the priest of Sudas, but Visvamitra was dismissed by Sudas who appointed Vasishtha as his priest ...
  2. A History of Ancient and Early Medieval India: From the Stone Age to the 12th Century, pp. 187, Pearson Education India, 2008, ISBN 9788131716779, ... In this battle, the Bharata chief Sudas, grandson of Divodasa, fought against a confederacy of 10 tribes. The mention of the Purus, their former allies, as a part of this confederacy indicates that political alliances were fluid and shifting ...
  3. Tribal Fusion and Social Evolution, Sushant Kumar, pp. 21, Strategic Book Publishing, 2000, ISBN 9781606930359, ... The Bharats invaded them under the leadership of king Sudas and thus the ten- kings' war started. One more fact should be considered. The Bharat tribe followed the system of kingship while almost all the opposing tribes were republicans ...