डोमिनिकन गणराज्य

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डोमिनिकन गणराज्य

डोमिनिकैन जनतंत्र (Dominican Republic) उत्तर अमेरिका महाद्वीप में केरिबियन क्षेत्र में एक देश है। राष्ट्रीय राजधानी सेंटो डोमिंगो नामक शहर है जो डिस्ट्रिटो नैशनल में स्थित है।

परिचय[संपादित करें]

यह जनतंत्र इंडीज के हिस्सपैनियाला (Hispaniola) द्वीप के दो तिहाई भाग में तथा बीऐटा (Beata), कैटालिना, सोने (Saona), ऑल्टो वीलो (Alto velo), कैटालिनिटा (Catalinita) तथा अन्य कई द्वीपिकाओं (Islets) पर फैला हुआ है। इस जनतंत्र की राजधानी सैंटो डोमिंगो (Santo Domingo) है। यह नगर डोमिनिकैन का सबसे बड़ा नगर है।

यह जनतंत्र पूर्व में माना पैसेज (Mona passage), पश्चिम में हैटी, उत्तर में ऐटलैंटिक महासागर तथा दक्षिण में कैरिबीऐन सागर से घिरा हुआ है। इसकी तटरेखा ८७० मील लंबी है। एंग्गान्यो (Engano) अंतरीप से लेकर हैटी की सीमा तक यह सर्वाधिक लंबा (२४० मील) है और बीऐटा अंतरीप से लेकर ईसावेला (Isabela) अंतरीप तक यह सर्वाधिक चौड़ा (१७०) है। इस जनतंत्र में सुदूर पश्चिम में बृहद् मरूभूमि है। साधारणतया यह जनतंत्र पहाड़ी है। यहाँ की मुख्य पर्वतमाला कॉरदियेरा (Cordillera) सेंट्रल है जो पूर्व से पश्चिम जाती हुई, जनतंत्र को दो भागों में विभक्त करती है। इस पर्वतमाला में चीड़ के जंगल हैं। ट्रहीयो (Trujillo) पर्वत वेस्ट इंडीज में देश की सर्वोच्च ऊँचाई (१०,३१९ फुट) तथा एंरिक्यूइलो (Enriquillo) झील जो कि समुद्रतल १४४ से फुट नीची है, न्यूनतम नीचाई है। याकी डेल नॉर्टे (Yaque del Norte), याकी डेल सर (Sur) और यूना (Yuna) देश की मुख्य नदियाँ हैं।


जाड़े में यहाँ का औसत ताप १८ डिग्री से लेकर २९ डिग्री सें० तक तथा गर्मी में २३ डिग्री से लेकर ३५ डिग्री सें० तक रहता है। तटीय मैदान में वार्षिक औसत ताप २५ डिग्री सें० रहता है। जबकि कॉरिदियेरा सेंट़ल में औसत ताप २० डिग्री सें० रहता है। वर्षा का वार्षिक औसत पूर्वी क्षेत्र में ५३ इंच, उत्तर-पूर्व में ८२ इंच में तथा पश्चिम १७.४ इंच है। वर्षा यहाँ मई से नवंबर तक हाती है।

महोगनी तथा अनन्नास डोमिनिकैन की विशेष वनस्पतियाँ हैं। यहाँ जंगली सुअर और जूटिया (कृंतक) पर्वतीय क्षेत्र में पाए जाते है। कई प्रकार के कबूतर, बतख तथा फाख्ता मौसमी पक्षी हैं। अमरीकन घड़ियाल तथा राजहंस एंरिक्यूइलो झील में पाए जाते हैं।

लगभग ९,९०० वर्ग मील भूमि खेती योग्य है। कृषि यहाँ की जनता का मुख्य उद्यम है। सीबाओ (Cibao) की घाटी यहाँ का प्रमुख कृषि केंद्र है। उत्तरी तथा दक्षिणी तटीय क्षेत्रों में गन्ना बड़े परिमाण में उगाया जाता है। गन्ने के अतिरिक्त कॉफी, कोको, तंबाकू और केला अन्य कृषि पदार्थ हैं, निका निर्यात होता है। धान, मटर, आलू, नारियल, सम, संतरा, अनन्नास, केला, मक्का और यूका की खेती होती है। पशुपालन बहुत सीमित है, परंतु सरकार इसकी वृद्धि के लिये प्रयत्नशील है। मत्स्य उद्योग अविकसित है, यद्यपि जनतंत्र को घेरे हुए जल में पर्याप्त मत्स्य हैं। लोहा, निकल, चाँदी, सोना, यूरेनियम, सीस, जस्ता और टीन यहँ के विशेष खनिज हैं। संगमरमर, जिप्सम, ताँबा तथा टैवरटाइन का भी लत्खनन हाता है। बाराओना (Barahona) के समीप दस मील लंबा ठोस नमक का साल्ट काउंटेन है और यह विश्व का सबसे बड़ा ज्ञात नमक निक्षेप है। शराब बनाना, चीनी बनाना, नमक का उत्खनन, समेंट, चाकलेट बनाना, सूती वस्त्र, आटा पीसना, ऐल्यूमिनियम के फर्नीचर बनाना यहाँ के मुख्य उद्योग हैं।

इतिहास[संपादित करें]

समुद्रयात्री क्रिस्टॉफर कोलंबस ने १८९२ में हिस्पानिओला द्वीप की खोज की। इस प्रकार इस पर स्पेन का अधिकार हुआ। २४ वर्षो के अंतर्गत कोलंबस की नई दुनिया में यूरोपीय लोग अधिक संख्या में बस गए। स्पेनियों ने लगभग सारे कैरियवियन क्षेत्र को जीत लिया। १९१७ तक उन लोगों ने पशुपालन और कृषि उद्योग - मुख्यत: गन्ने का -आरंभ कर दिया। जनसंख्या भी ६० हजार के लगभग पहुँच गई जिसमें अधिकांश नीग्रो (दास) थे। १५६४ तक अनेक बीमारियों एवं अन्य कारणों से जनसंख्या लगभग आधी रह गई और स्पािनिओला का स्पेनी शक्तिकेंद्र के रूप में अमरीका पर प्रभाव क्षीण हो गया। १६९७ में रिज़विक की संधि हुई जिसके अनुसार द्वीप हाइती का पश्चिमी एक तिहाई क्षेत्र फ्रांस के अधिकर में मान्य हुआ। १९९१ में गुलाम नीग्रो लोगों ने विद्राह कर दिया। १९९५ में बेसिल की संधि (Treaty of Basle) के परिणामस्वरूप स्पेन को हिस्पैनिओला का शेष भाग (सांतो दामिंगो) भी फ्रांस के हाथ में देना पड़ा। हाइती १८०४ में स्वतंत्र हो गया। पेरिस की संधि (१८१४) के अनुसार स्पेन ने पुन: द्वीप के पूर्वी भाग पर अपना अधिकार जमा लिया, किंतु १८२१ में में डामिनकनों ने अपने को स्वतंत्र घोषित कर दिया। एक वर्ष तक यह राज्य ग्रान कोलंबिया (Gran Columbia) गणराज्य का अंग बना रहा।

१९२२ में हाइतीवासियों ने सांतो दामिन्गो पर आक्रमण किया और २२ वर्ष तक उसके अधिकारी रहे। ला त्रिनितारिया (La Trinitaria) नामक एक गुप्त संगठन से विद्रोह द्वारा १८४४ में हाइतियों को पुन: स्वतंत्रता मिली। १८६१ से १८६५ तक यह प्रदेश पुन: चार वर्ष तक स्पेन का उपनिवेश रहा। आंतरिक विद्रोहों के फलस्वरूप १८६५ में स्पेनी सेनाएँ वहाँ से हट गईं।

१९वीं शताब्दी के अंत तक गृहस्थिति अत्यंत संकटपूर्ण रही। विदेशी ऋणों के भारी बोझ से भी देश दब गया। १९१६ में यहाँ अमरीकी सैनिक शासन स्थापित हुआ जिसका अंत १२ जुलाई १९२४ को हुआ। केवल व्यापार पर अमरीका का नियंत्रण १९४१ तक चला।

१९६० में जोक्विन वालागुएर (Joaquin Balaguer) राष्ट्रपति निर्वाचित हुए। इनके नेतृत्व में डामिननिकन गणराज्य ने आर्थिक उन्नति, प्रशासनिक स्थिरता, वित्तीय आत्मनिर्भरता के साथ विदेशी ऋणों से मुक्ति प्राप्त की। उसने जनता के प्रजातांत्रिक अधिकारों का हनन किया और पुन: डामिनिकन रिपब्लिकन में उपद्रव हुए। जुलाई, १९६१ में वालागुएर के मंत्रिमंडल ने पदत्याग किया किंतु सितंबर में विरोधियों ने बालागुएर के ही नेतृत्व में मिली जुली सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा।

१ जनवरी १९६१ को सात सदस्यीय अंतरिम परिषद् की स्थापना हुई। जनवारी के मध्य में क्रांति का सूत्रपात हुआ किंतु क्रांति असफल हुई। राफेल बोनली (Rafael Bounelly) के राष्ट्रपति में पुन: परिषद् गठित हुई। दिसंबर १९६२ के निर्वाचन में जुआन बोश (Juan Bosch) राष्ट्रपति निर्वाचित हुए।

सन्दर्भ[संपादित करें]