जैवनैतिकता
जैवनैतिकता जीवविज्ञान एवं दवाईयों में हुई प्रगति के कारण पैदा हुए नैतिक विवादों का दार्शनिक अध्ययन है. जैवनैतिकता उन नैतिक प्रश्नों से जुड़ा हुआ है जो जीव विज्ञान, जैवप्रोद्यौगिकी, औषधि, राजनीति, कानून तथा दर्शन के संबंधों के मध्य उठते हैं.
अनुक्रम |
[संपादित करें] इतिहास
[संपादित करें] शब्दावली
बायोथिक्स (जैवनैतिकता) शब्द (यूनानी बायोस , जीवन, इथोस , व्यवहार) 1927 में फ्रिट्ज जार के द्वारा बनाया गया था, जिन्होंने कई ऐसे तर्कों और बहसों को इजाद किया जिनमें से कई जानवरों को लेकर किए जा रहे आज के जैव वैज्ञानिक शोध प्रचलित हैं. यह सब उन्होंने एक आलेख में किया था, जैसा कि वे इसे, जानवरों एवं पौधों के वैज्ञानिक उपयोग के संबंध में "जैवनैतिक अनिवार्यता" कहते हैं.[1][2] 1970 में, अमेरिकी बायोकेमिस्ट वान रेंसेलायर पॉटर ने भी जीव मंण्डल की एकजुटता को शामिल करते हुए इस शब्द का उपयोग व्यापक अर्थ में किया, इस प्रकार उन्होंने एक "वैश्विक नैतिकता" को जन्म दिया, जो कि मानव और पशु प्रजाति दोनों के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए जैवविज्ञान, इकोलॉजी, औषधि और मानवीय मूल्यों के बीच में एक अनुशासन का प्रतिनिधित्व करती है.[3][4]
[संपादित करें] विषय का विकास
हालांकि जैवनैतिकता के मुद्दों पर प्राचीन काल से ही बहस होती आ रही है, और आम लोगों का ध्यान संक्षिप्त रूप में बायोमेडिकल प्रयोगों में मानवीय विषयों की भूमिका पर भी गया. इसके बाद द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाजी के द्वारा किए गए प्रयोग के रहस्योद्घाटन पर भी लोगों का ध्यान केन्द्रित रहा, लेकिन जैवनैतिकता का आधुनिक क्षेत्र पहली बार अकादमिक विषय के रूप में एंग्लोफोन सोसायटी में 1960 के दशक में प्रकट हुआ. इस तरह के विभिन्न क्षेत्रों जैसे अंग प्रत्यारोपण तथा एण्ड-ऑफ-लाईफ केयर के विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी प्रगतियों के साथ किडनी डायलिसिस एवं रेसपिरेटर्स के विकास ने इस संबंध में कुछ नए प्रश्न खड़े किये कि कब और कैसे देखभाल को वापस लिया जा सकता है. इसके अलावा, चूंकि ब्रिटेन और अन्य जगहों में दर्शन तार्किक वस्तुनिष्ठवाद और इनोटिविज्म के प्रभावों से दूर चला गया, नैतिकता के सिद्धान्तों के विकास तथा व्यवहारिक समस्याओं में इनकी उपयोगिता ने आंतरिक रूचि प्राप्त की. इन सवालों पर इंगलैण्ड के धार्मिक विद्वानों तथा दार्शनिकों द्वारा अक्सर चर्चा हुई, जिनमें जेम एंसकोंबे तथा आरएम हेयर का उल्लेखनीय योगदान रहा. 1970 के दशक तक, जैवनैतिक थिंक टैंक तथा शैक्षिक जैवनैतिक कार्यक्रमों का उभार हो चुका था. इस तरह के शुरूआती संस्थानों में 1969 में दार्शनिक डैनियल काल्लाहान तथा मनोवैज्ञानिक विलर्ड गेलिन के द्वारा स्थापित हेस्टिंग्स केन्द्र (मूलत: द इंस्टिट्युट ऑफ सोसायटी, इथिक्स एण्ड लाइफ सायंसेज) एवं 1971 में जॉर्जटाऊन विश्वविद्यालय में स्थापित कैनेडी इंस्टिट्युट ऑफ इथिक्स थे. जेम्स एफ. चाइल्ड्रेस एवं टॉम ब्युचैंप के द्वारा प्रकाशित नैतिकता की प्रथम पाठ्य पुस्तक - प्रिंसिपल ऑफ बायोकेमिकल इथिक्स - ने इस विषय में एक परिवर्तनकारी क्षण को चिह्नित किया.
पिछले तीन दशकों के दौरान जैवनैतिकता के मुद्दों ने कैरेन ऐन क्वीनलैन, नैन्सी कर्जन तथा तेरी शियावो की मौत से संबंधित आदालती मामलों के माध्यम से व्यापक स्तर पर ध्यान आकर्षित किया. इस क्षेत्र ने जाने-माने वकीलों के अपने कैडर का विकास किया, जैसे कि वाशिंगटन विश्वविद्यालय में अल जॉनसन, वरजिनिया विश्वविद्यालय में जॉन फ्लेचर, ब्राउन विश्वविद्यालय में जैकोब एम. अपेल, जॉन्स हॉपकिन्स में रूथ फैडेन तथा पेंसिलवेनिया विश्वविद्यालय में आर्थर कैपलन. 1995 में, राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने जैवनैतिकता पर राष्ट्रपति परिषद की स्थापना की, इससे यह संकेत गया कि यह क्षेत्र अतत: परिपक्वता के अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है और संयुक्त राज्य अमेरिका में इसे स्वीकृति मिली है. राष्ट्रपति जॉर्ज व. बुश ने भी इस क्षेत्र में निर्णय प्रतिपादन हेतु जैव नैतिकता परिषद का आश्रय लिया, जैसे कि एम्ब्रियोनिक स्टेम-सेल शोध को सार्वजनिक धन देना.
[संपादित करें] उद्देश्य और संभावनाएं
जैव नौतिकता का क्षेत्र मानवीय जांच के एक व्यापक पट्टी को संबोधित है, जीवन की सीमाओं पर बहस (अर्थात गर्भपात, इच्छामृत्यु) के विस्तार से लेकर दुर्लभ हेल्थ केयर संसाधनों के आवंटन (अर्थात् अंग दान, हेल्थ केयर रेशनिंग) तथा धार्मिक या सांस्कृतिक कारणों से हेल्थ केयर को धीमा करने के अधिकार तक इसका फैलाव है. जैव नैतिकतावादी अक्सर अपने विषय की सूक्ष्म सीमा पर आपस में असहमत होते हैं, इस बात पर बहस करते हुए कि जीवविज्ञान और औषधि को शामिल को करते हुए क्या इस क्षेत्र के सभी प्रश्नों के नैतिक मूल्यांकन से खुद को जोड़ना चाहिए या केवल इन सवालों के सबसेट से. कुछ जैव नैतिकतावादी केवल चिकित्सा उपचार या तकनीकीगत नवोत्पाद तथा इंसानों के तिकित्सा इलाज के समय का संकीर्ण मूल्यांकन करते हैं. दूसरों जैव नैतिकतावादियों ने सभी कार्यों की नैतिकता, जो भय और दर्द को महसूस करने वाले जीवों की मदद या नुकसान कर सकती थी, को शामिल कर नैतिक मूल्यांकन का दायरा बढ़ा दिया, तथा औषधि और जीवविज्ञान से संबंधित जीवों के ऐसे सभी कार्यों को जैवनैतिकता के अंतर्गत ला दिया. हालांकि, अधिकतर जैव नैतिकतावादी इस विषय के सार्थक फ्रेमवर्क के विश्लेषण के लिए खाद्य प्रदान करने वाले विभिन्न विषयों का उपयोग करते हुए इन जटिल विषयों के बहस में इमानदार, नम्र और वुद्धिमतापूर्ण रवैये के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाते हैं.
[संपादित करें] सिद्धांत
इन क्षेत्रों में आधुनिक जैव नैतिकतावादियों का ध्यान मानव प्रयोगों पर सबसे पहली बार गया. जैवचिकित्सा तथा स्वभावजन्य शोध के विषय पर राष्ट्रीय मानव रक्षा आयोग की स्थापना प्रारंभ में मानव विषयों को लेकर होने वाले जैवचिकित्सा तथा स्वभावजन्य शोध के आधारभूत सिद्धान्तों की पहचान करने के लिए की गई थी. हालांकि, स्वायत्तता, उपकारिता और न्याय नामक मौलिक अधिकारों की घोषणा बैलमौंट रिपोर्ट (1979) में हुई - जिसने इन मुद्दों के विस्तृत क्षेत्र पर जैव नैतिकतावादियों की सोच को प्रभावित किया. दूसरों ने प्रमुख मूल्यों की इस सूची में नॉन-मालइफिशेंस, मानव गरिमा तथा जीवन की शुद्धता को जोड़ा है.
[संपादित करें] चिकित्सा नैतिकता
चिकित्सा नैतिकता दवा के लिए लागू नैतिक मूल्य और निर्णयों का अध्ययन है. एक अध्ययनशील विषय के रूप में, चिकित्सा नैतिकता में नैदानिक समायोजन के व्यावहारिक अनुप्रयोग के साथ ही साथ इतिहास, दर्शन, धर्मशास्त्र पर इसके काम भी शामिल हैं.
चिकित्सा नैतिकता को सामान्यत: एक व्यवहारिक पेशेवर नैतिकता के रूप में समझा जाता है जबकि जैवनैतिकता विज्ञान के दर्शन और जैवप्रद्यौगिकी के मामलों को स्पर्श करते हुए अधिक व्यापक विषयों पर कार्य करती दिखती है. फिर भी, दोनों क्षेत्र अक्सर परस्पर व्याप्त हैं और शैली का मामला गौरव और अधिक पेशेवर मतैक्य से अधिक महत्वपूर्ण है. चिकित्सा नैतिकता के कई सिद्धान्त स्वास्थ्य सेवा नैतिकता की कई शाखाओं जैसे कि नर्सिंग नैतिकता के भाग हैं.
[संपादित करें] परिप्रेक्ष्य और कार्य-पद्धति
जैवनैतिकतावादी पृष्ठभूमि की एक विस्तृत विविधता से आए हैं और इनके पास विषयों की विविध कार्य पद्धति का प्रशिक्षण है. इस क्षेत्र में, प्रिंसटन विश्वविद्यालय के पीटर सिंगर, हेस्टिंग्स केंद्र के डैनियल कैलहान, तथा हार्वर्ड विश्वविद्यालय के डैनियल व्रॉक जैसे दर्शन में प्रशिक्षित व्यक्ति, शिकागो विश्वविद्यालय के मार्क सेगलर, कॉमेल विश्वविद्यालय के जोसेफ फिन्स जैसे चिकित्सा-प्रशिक्षित क्लिनिशियन जैव नैतिकतावादी, जैकोब अपेल एवं वेजली जे, स्मिथ जैसे कानूनविद, फ्रोसिस फुकुयामा जैसे राजनैतिक अर्थशास्त्री तथा जेम्स चाइल्ड्रेस के साथ ही कई धर्मशास्त्री शामिल हैं. एक बार औपचारिक रूप से प्रशिक्षित दार्शनिकों के प्रभुत्व में आ जाने के बाद यह क्षेत्र आगे बढ़कर बहुविषयक हो गया है, साथ ही कुछ आलोचकों का दावा है कि इस क्षेत्र के विकास पर विश्लेषणात्मक दर्शन का नकारात्मक प्रभाव पड़ता रहा है. इस क्षेत्र की अग्रणी पत्रिकाओं में हेस्टिंग्स सेंटर रिपोर्ट , जर्नल ऑफ मेडिकल इथिक्स तथा कैंब्रीज क्वारटर्ली ऑफ हेल्थकेयर इथिक्स शामिल हैं.
कई धार्मिक समुदायों के पास जैवनैतिक मामलों की जांच के अपने इतिहास हैं तथा उन्होंने इस पर नियम और दिशा निर्देश का विकास भी किया है कि उनकी अपनी विशिष्ट आस्था के दृष्टिकोण से इन मुद्दों को कैसे निपटाया जाय. यहूदी, ईसाई और मुस्लिम, सभी ने इन मुद्दों पर एक महत्वपूर्ण शास्त्र मंडल का विकास कर लिया है. कई गैर पश्चिमी संस्कृतियों में, धर्म और दर्शन सख्त रूप से अलग नहीं हैं. उदाहरण के लिए, कई एशियाई संस्कृतियों में जैवनैतिक मुद्दों पर एक जीवंत बहस होती है. सामान्यत: बौद्ध जैव नैतिकता को, एक यथार्थवादी दृष्टि, जो एक तर्कबुद्धिपरक, व्यवहारिक दृष्टिकोण की ओर ले जाती है, द्वारा चिन्हित किया जाता है. बौध जैवनैतिकतावादियों में डैमिअन केवों शामिल हैं. भारत में वंदना शिवा हिन्दू परम्पराओं की हिमायत करने वाले जैवनैतिकतावादियों में अग्रणी हैं. अफ्रिका और आंशिक रूप से लैटिन अमेरिका में जैवनैतिकता पर बहस, विकासशील परिप्रेक्ष्य तथा जैव राजनैतिक शक्ति संबंधों में इसकी व्यवहारिक प्रासंगिकता पर केन्द्रित है.
[संपादित करें] इन्हें भी देखें
- जैवनैतिकता (पत्रिका)
- जॉन्स हॉपकिन्स बर्मन जैवनैतिकता के संस्थान
- लिनाक्रे तिमाही
- चिकित्सा कानून
- नैदानिक नैतिकता के लिए संसाधन परामर्श
[संपादित करें] समस्या
प्रकाशित और सहकर्मी की समीक्षा वाली जैवनीतिपरक विश्लेषण के विषय वाले स्वास्थ्य विज्ञान के क्षेत्रों में शामिल है:
[संपादित करें] सन्दर्भ
- ↑ लोलस, एफ. (2008). जैवनैतिकता और पशु अनुसंधान: एक व्यक्तिगत परिप्रेक्ष्य और फ्रिट्ज जह्र के योगदान पर एक नोट. जीव विज्ञान रेस. , सैंटियागो, 41 (1), 119-123. <http://www.scielo.cl/scielo.php?script=sci_arttext&pid=S0716-97602008000100013&lng=es&nrm=iso>, 15 जनवरी 2010 को पुनःप्राप्त. doi: 10.4067/S0716-97602008000100013 पर प्राप्त.
- ↑ सैस, एच. एम. (2007). फ्रिट्ज जह्र की 1927 जैवनैतिकता के अवधारणा. कैनेडी इनस्ट एथिक्स जे , 17 (4), दिसंबर, 279-295.
- ↑ गोल्डिम, जे. आर. (2009). जैवनैतिकता की शुरुआत की दुबारा चर्चा: फ्रिट्ज जह्र का योगदान (1927). पर्सपेक्ट बीयोल मेड , सम, 377-380.
- ↑ लोल्स, एफ., ओपी. सीआईटी.
[संपादित करें] आगे पढ़ें
[संपादित करें] सामान्य जैवनैतिकता
- Andre, Judith (2002), Bioethics as Practice, Chapel Hill and London: University of North Carolina Press, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-8078-2733-9
- Appel, Jacob (2009), A Supreme Court for Bioethics
- Aulisio, Mark; Arnold, Robert; Younger, Stuart (2003), Ethics Consultation; from theory to practice, Baltimore, London: Johns Hopkins University Press, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-8018-7165-4
- Faden, Ruth (2004), Bioethics: A field in transition, Journal of Law, Medicine & Ethics
- आर्थर कैपलन, स्मार्ट माइस नॉट सो स्मार्ट पीपल रॉमन लिटलफील्ड 2006
- Glad, John (2008). Future Human Evolution: Eugenics in the Twenty-First Century. Hermitage Press. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 1-55779-154-6.
- Emanuel, Ezekiel; Crouch, Robert; Arras, John; Moreno, Jonathan; Grady, Christine (2003), Ethical and Regulatory Aspects of Clinical Research, Baltimore, London: Johns Hopkins University Press, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-8018-7813-6
- Crowley, Mary (ed) (2008), From Birth to Death and Bench to Clinic: The Hastings Center Bioethics Briefing Book, Garrison, New York: The Hastings Center
- Beauchamp, Tom; Childress, James (2001), Principles of Biomedical Ethics, Oxford, New York: Oxford University Press, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-19-514332-9
- Jonsen, Albert; Veatch, Robert; Walters, leRoy (1998), SourceBook in Bioethics, Washington: Georgetown University Press, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-87840-685-9
- Jonathan, Baron (2006). Against Bioethics. The MIT Press. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-262-02596-6.
- McGee, Glenn (2003), Pragmatic Bioethics, Cambridge: Massachusetts Institute of Technology Press, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-2626-3272-1
- Khushf, Tom (ed) (2004), Handbook of Bioethics: taking stock of the field from a philosophical perspective, Dordrecht, Boston, London: Kluwer Academic Publishers, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 1-4020-1893-2
- Korthals, Michiel; Robert J. Bogers (eds.) (2004). Ethics for Life Scientists. Springer. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-1-4020-3178-6.
- Kuczewski, Mark G.; Ronald Polansky (eds.) (2002). Bioethics: Ancient Themes in Contemporary Issues. The MIT Press. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-262-61177-0.
- Murphy, Timothy (2004). Case Studies in Biomedical Research Ethics. The MIT Press. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-262-13437-8.
- Singer, Peter A.; Viens, A.M. (2008), Cambridge Textbook of Bioethics, Cambridge: Cambridge University Press, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0-521-69443-8
- Sugarman, Jeremy; Sulmasy, Daniel (1999), Confessions of a Medicine Man, Cambridge: MIT Press, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-262-70072-7
- Tauber, Alfred I (2005), Patient Autonomy and the Ethics of Responsibility, Cambridge: MIT Press, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 0-262-70112-x
[संपादित करें] ईसाई जैवनैतिकता
- कोलसन, चार्ल्स डब्ल्यू.(एड.) (2004). ह्युमन डिग्निटी इन द बायोटेक सेंचुरी: ए क्रिस्चन विज़न फॉर पब्लिक पॉलिसी . डोव्नर्स ग्रोव, इलिनोइस: इंटरवर्सिटी प्रेस. ISBN 0830827838
- डेमी, टिमोथी जे. और ग्रे पी. स्टेवर्ट. (1998). सुसाइड: अ क्रिस्चन रेस्पोंस: क्रूशियल कंसीडरेशंस फॉर चूसिंग लाइफ . ग्रांड रैपिड्स: क्रेगेल. ISBN 0825423554
- पोप जॉन पॉल II. (1995). एवनगेलियम वाइटे: द गॉस्पेल ऑफ़ लाइफ . न्यूयॉर्क: रेंडम हाउस ISBN 0812926714
- किल्नर, जॉन एट अल. (1995). बायोथिक्स एण्ड द फ्यूचर ऑफ़ मेडिसिन: ए क्रिस्चन अप्रेसल . ग्रांड रैपिड्स, मिशिगन: वम. बी. एर्डमैन्स प्रकाशन कंपनी. ISBN 0802840817
- किल्नर जॉन एफ., अर्लेने बी. मिलर और एडमंड डी. पल्लेग्रिनो (एड्स.). (1996). डिग्निटी एण्ड डायिंग: ए क्रिस्चन अप्रेसल . ग्रांड रैपिड्स, एमआई: एर्डमैन्स प्रकाशन कं और कार्लिस्ले: यूनाइटेड किंगडम: पीटरनॉस्टर प्रेस. ISBN 0802842321
- मिलेंडर, गिल्बर्ट (2004). बायोथिक्स: ए प्राइमर फॉर क्रिस्चंस . ग्रांड रैपिड्स, मिशिगन: वम. बी. एर्डमैन्स प्रकाशन कंपनी. ISBN 0802842348
- लाउडोविकोस, निकोलोस, प्रोटोप्रेसबाइटर (2002). द इंडीविज़्वालाइज़ेशन ऑफ़ डेथ एण्ड युथानासिया , ग्रीस के चर्च का पवित्रा धर्मसभा, जैवनैतिकता की समिति, इच्छामृत्यु पर वैज्ञानिक सम्मेलन (एथेंस, 17-18 मई 2002), 27 फरवरी 2009 को पुनः प्राप्त. (ग्रीक में अनुच्छेद).
- पोप पॉल VI. (1968). ह्युमने वाइटे: ह्युमन लाइफ . वैटिकन सिटी.
- स्मिथ, वेस्ले जे. (2004). कंस्यूमरम'र्स गाइड टू ए ब्रेव न्यू वर्ल्ड . सैन फ्रांसिस्को: एंकाउन्टर बुक्स. ISBN 1893554996
- स्मिथ, वेस्ली जे. (2000). कल्चर ऑफ़ डेथ: द एसौल्ट ऑन मेडिकल एथिक्स इन अमेरिका . सैन फ्रांसिस्को: एंकाउन्टर बुक्स. ISBN 1893554066
- स्मिथ, वेस्ली जे. (1997). फोर्स्ड एक्ज़िट: द स्लिपरी स्लोप फ्रॉम एसिस्टेड स्युसाइड टू मर्डर . न्यूयॉर्क: टाइम्स बुक्स. ISBN 0812927907
- स्टीवर्ट, गैरी पी. एट अल. (1998). बेसिक क्वेस्चंस ऑन स्युसाइड एण्ड यूथनेसिया: आर दे एवर राईट? बायोबेसिक्स श्रृंखला. ग्रांड रैपिड्स: क्रेगेल. ISBN 0825430720
- स्टीवर्ट, गैरी पी. एट अल. (1998). बेसिक क्वेस्चंस ऑन एण्ड ऑफ़ लाइफ डिसीजन्स: हाउ डू वी नॉ व्हाट'स राईट? ग्रैंड रैपिड्स: क्रेगेल. ISBN 0825430704
- वेस्टफल, युलर रेनाटो. ओ ओइटावो डिया - na era da seleção आर्टिफिशियल (द एटथ डे (किताब) की समीक्षा देखें). 1. एड. São Bento do Sul: União Cristã, 2004. वी. 01. पृष्ठ 125. ISBN 85-87485-18-0
[संपादित करें] यहूदी जैवनैतिकता
- ब्लीच, जे. डेविड. (1981). ज्युडाज़िम एण्ड हीलिंग . न्यूयॉर्क: कटव. ISBN 087068891X
- डोर्फ़, इलियट एन. (1998). मैटर्स ऑफ़ लाइफ एण्ड डेथ: ए जेविश अप्रोच टू मोडर्न मेडिकल एथिक्स . फिलाडेल्फिया: यहूदी प्रकाशन सोसायटी. ISBN 0827606478
- फेल्डमैन डीएम. (1974). मैरिटल रिलेशन, बर्थ कंट्रोल एण्ड अबोर्शन इन जेविश लॉ . न्यूयॉर्क: स्चोस्कें पुस्तकें.
- फ्रीडमैन बी. (1999). ड्यूटी एण्ड हीलिंग्स: फ़ाउंडेशन ऑफ़ ए जेविश बायोथिक . न्यूयॉर्क: रूटलेज. ISBN 0415921791
- जैकोबोविट्स आइ. (1959). जेविश मेडिकल एथिक्स . न्यूयॉर्क: ब्लोच प्रकाशन.
- मैक्लर, हारून एल. (एड.) (2000). लाइफ एण्ड डेथ रेसपॉज़िबिलिटी इन जेविश बायोमेडिकल एथिक्स . न्यूयॉर्क: जेटीएस. ISBN 0873340817.
- मैबॉम एम्. "जर्नल ऑफ़ रिफ़ॉर्म ज्युडीसम 1986 पर एक 'प्रगतिशील' यहूदी चिकित्सा नैतिकता: एजेंडा के लिए एक नोट"; 33(3):27-33.
- रोस्नर, फ्रेड. (1986). मॉर्डन मेडिसिन एण्ड जेविश एथिक्स . न्यूयॉर्क: येशिवा विश्वविद्यालय प्रेस. ISBN 0881250910
- कंज़र्वेटिव ज्युडीसम खंड 54(3), स्प्रिंग 2002 (जैवनैतिकता पर छह लेख की एक सेट होता है)
- ज़ोहर, नोम जे. (1997). अल्टरनेटिव्ज इन जेविश बायोथिक्स . अल्बानी: न्यूयॉर्क राज्य विश्वविद्यालय के प्रेस. ISBN 0791432734
[संपादित करें] मुस्लिम जैवनैतिकता
- अल ख्यात एम्एच. "हेल्थ एण्ड इस्लामिक बिहेवियर" इन: इआइ गिंडी एआर, एडिटर,
हेल्थ पॉलिसी, एथिक्स एण्ड ह्युमन वैल्यूज़: इस्लामिक पर्सपेक्टिव . कुवैट: चिकित्सा विज्ञान के इस्लामी संगठन, 1995. पृष्ठ 447-50.
- इब्राहीम, अबुल फडल मोहसिन. (1989). अबौर्शन, बर्थ कंट्रोल एण्ड सुरोगेट पेरेंटिंग. ऐन इस्लामिक पर्सपेक्टिव . इंडियानापोलिस. ISBN 0892590815
- एस्पोसिटो, जॉन. (एड.) (1995). द ऑक्सफोर्ड इन साइक्लोपीडिया ऑफ़ द मोडर्न इस्लामिक वर्ल्ड पर "सुरोगेट मदरहुड" (खंड 4). न्यूयॉर्क : ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस. ISBN 0195096150
- केरिक, एनेस. इस्लामिक मैगज़ीन फॉल/विंटर पर "द एथिक्स ऑफ़ क्लोनिंग" 2004. अंक #11
[संपादित करें] बौद्ध जैवनैतिकता
- फ्लोरिडा, आर. इ. (1994) प्रिंसिपल्स ऑफ़ हेल्थ केयर एथिक्स पर बुद्धिज़्म एण्ड द फोर प्रिंसिपल्स , एड. आर. गीलॉन और ए लॉयड, चिचेस्टर: जॉन विले & संस, 105-16.
- कोवन, डेमियन. (1995) बौद्धधर्म और जैवनैतिकता . लंदन और न्यूयॉर्क: मैकमिलन/सेंट. मार्टिंस प्रेस.
[संपादित करें] हिंदू जैवनैतिकता
- कोवॉर्ड, एच. जी., जे. जे. लिप्नर और के. के. यंग. (1989) हिंदू एथिक्स: पवित्रता गर्भपात और इच्छामृत्यु . अल्बने: न्यूयॉर्क राज्य विश्वविद्यालय के प्रेस.
- क्रॉफोर्ड, एस. सी. (2003) हिन्दू बायोथिक्स फॉर द ट्वेंटी-फर्स्ट सेंचुरी . अल्बने, एनवाई: न्यूयॉर्क राज्य विश्वविद्यालय के प्रेस.
- क्रॉफोर्ड, एस. सी. (1995) डेलिमानस ऑफ़ लाइफ एण्ड डेथ, हिन्दू एथिक्स इन ए नॉर्थ अमेरिकन कांटेक्स्ट 1995 . अल्बने, एनवाई: न्यूयॉर्क राज्य विश्वविद्यालय के प्रेस.
- फर्थ, एस. (2005) जीवन का अंत: एक हिंदू नजरिया. द लैनसेट . 366(9486): 682-686.
- लखन, शाहीन. (2008) हिंदूधर्म: जीवन और मृत्यु. स्टुडेंट बीएमजे . 16(18):310-311.
|
|||||||||||||||||