जनातंक (एगोराफोबिया)

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Agoraphobia
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वर्गीकरण एवं बाह्य साधन
आईसीडी-१० F40.
F40.00 Without panic disorder, F40.01 With panic disorder
आईसीडी- 300.22 Without panic disorder, 300.21 With panic disorder
एम.ईएसएच D000379

जनातंक (ग्रीक ἀγορά "बाज़ार स्थान" से; और φόβος/φοβία, -फोबिया (भय)) एक चिन्ता विकार है. जनातंक वहां उत्पन्न हो सकता है जहां एक भयाक्रांत हमला होने का ऐसा डर है जिससे किसी भी तरह से बचने की उम्मीद नहीं होती. वैकल्पिक रूप से, सामाजिक चिंता की समस्याएं भी एक आधारभूत कारण हो सकती हैं. जिसके परिणामस्वरूप, जनातंक से पीड़ित व्यक्ति, सार्वजनिक और/अपरिचित स्थानों से बचते हैं, विशेष कर विशाल, खुले, खाली स्थान से, जैसे शॉपिंग मॉल या हवाई अड्डे, जहां छुपने के लिए कुछ जगहें होती हैं. कई मामलों में, पीड़ित अपने या अपने घर तक ही सीमित हो सकता है, जहां उसे इस सुरक्षित जगह से कहीं और जाने में कठिनाई का अनुभव होता है. यद्यपि ज्यादातर मामलों में सार्वजनिक स्थानों का ही डर होता है, यह अब माना जाता है कि जनातंक का विकास भयाक्रांत हमले की जटिलताओं के रूप में होता है.[1] हालांकि, सबूत मौजूद हैं कि DSM-IV में सहज भयाक्रांत हमले और जनातंक के बीच जो एक एकतरफा कारणात्मक रिश्ता लक्षित होता है, वह गलत हो सकता है.[2] अमेरिका में 18 से लेकर 54 वर्ष के बीच के करीब 3.2 मिलियन वयस्क या 2.2% लोग जनातंक से ग्रसित हैं.[3]

परिभाषा[संपादित करें]

जनातंक (एगोराफोबिया), जिसे एग्राफोबिया नहीं समझा जाना चाहिए, एक ऐसी दशा है जहां पीड़ित वैसे परिवेश में व्याकुल हो जाता है जो कि उसके लिए अपरिचित होता है या जहां पीड़ित को ऐसा महसूस होता है कि उसके हाथों में नियंत्रण नहीं है. इस चिंता को सक्रिय करने में व्यापक खुले स्थान, भीड़ (सामाजिक चिंता), या यात्रा (यहां तक कम दूरी की भी) शामिल हो सकते हैं. जनातंक अक्सर एक सामाजिक परेशानियों के भय से संयोजित होता है लेकिन ऐसा हमेशा नहीं होता, क्योंकि एगोराफोबिक भय की शुरूआत जन साधारण में भयाक्रांत हमले और परेशानी से होती है. इसे कभी-कभी 'सामाजिक जनातंक' भी कहा जाता है जो सामाजिक चिंता विकार का एक प्रकार हो सकता है जिसे कभी-कभी 'सामाजिक भय' भी कहा जाता है.

हालांकि सभी जनातंक के लक्षण सामाजिक नहीं होते हैं. जनातंक से ग्रसित कुछ लोगों में खुली जगहों का भय होता है. जनातंक को "उन लोगों द्वारा एक भय, कभी-कभी भयानक भय के रूप में पारिभाषित किया जाता है जिन्होंने एक या एक से अधिक भयाक्रांत हमले का सामना किया है." ऐसे मामलों में, पीड़ित को एक विशेष स्थान का डर होता है, क्योंकि पिछली बार उसी स्थान पर उसने भयाक्रांत हमले का अनुभव किया था. एक और भयाक्रांत हमले को झेलने से बचने के लिए पीड़ित भयभीत हो जाता है या उस स्थान पर जाने से बचता है.

इस प्रकार के पीड़ित को अब जनातंक से ग्रसित माना जाता है. कभी-कभी पीड़ित उस स्थान से बचने के लिए हर प्रकार से कोशिश कर सकते हैं जहां पर पहले भयाक्रांत हमले का सामना किया गया था. इस ढंग से वर्णित जनातंक, वास्तव में भयाक्रांत विकार के निदान निर्माण के समय पेशेवर लक्षण जांच हैं. अत्यंत ग्रसित बाध्यकारी विकार या उत्तर अभिघातजन्य तनाव विकार जैसे संलक्षण भी जनातंक के कारण हो सकते हैं, मूलरूप से कोई भी निराधार भय जो एक व्यक्ति को बाहर जाने से रोकता है, इसके लक्षणों को उत्पन्न कर सकता है.[4]

यात्रा दूरी से संबंधित जनातंक में मूलतः सख्ती के तीन स्तर होते हैं जो कि वर्तमान में मानसिक विकारों के नैदानिक सांख्यिकीय मैनुअल में अन्तर्निहित नहीं हैं.

पहले स्तर के जनातंक में एक क्षेत्र की सामान्य परिधि जहां वह रहता है उसके परे यात्रा के परिणाम के रूप में एक कल्पनात्मक भय या वास्तविक भयाक्रांत हमला शामिल है, जैसे एक बड़ा शहर या देश.

द्वितीय स्तर की जनातंक में एक पड़ोस या आवासीय जिले की सामान्य परिधि जहां वह रहता है, उसके परे यात्रा के परिणाम के रूप में एक कल्पनात्मक भय या वास्तविक भयाक्रांत हमला शामिल होता है.

तीसरे स्तर के जनातंक में किसी के आवास की सीमाओं या परिसरों के बाहर जाने के परिणाम के रूप में एक कल्पनात्मक भय या वास्तविक भयाक्रांत हमला शामिल होता है. इस श्रेणी के अधिकांश पीड़ित बरामदे, बालकनी, छत, प्रांगण या आंगन के बाहर चलने में सक्षम होते हैं, लेकिन तीसरे स्तर के अल्पसंख्यक पीड़ित इससे बाहर जाने से डरते हैं.

दूसरे स्तर और तीसरे स्तर के जनातंक से पीड़ित व्यक्ति के लिए भी विशेष तौर पर अस्थायी पृथक्करण चिंता विकार से उस वक्त पीड़ित होना असामान्य नहीं होता जब उस घर के अन्य सदस्य अस्थाई रूप से कहीं चले जाते हैं, जैसे माता-पिता या पति-पत्नी या जनातंक से पीड़ित व्यक्ति घर में अकेला होता है.. इस तरह की अस्थायी परिस्थितियों के परिणामस्वरूप चिंता या भयाक्रांत हमले में वृद्धि हो सकती है.

जनातंक का एक और सार्वजनिक साहचर्य विकार मृत्यु भय रोग है - मृत्यु का भय. अततः मर जाने के विचार से जनातंक से पीड़ित व्यक्ति के चिंता स्तर में अक्सर वृद्धि हो जाती है, जिसे वे जानबूझकर या अनजाने में अंततः नश्वर भावनात्मक आश्वासन और सुरक्षा क्षेत्रों और प्रियजनों से अंतिम जुदाई के विचारों से जोड़ते हैं, यहां तक कि उनके लिए भी जो अन्यथा आध्यात्मिक रूप से जीवन पश्चात अस्तित्व के कुछ रूपों पर विश्वास करते हैं.

लिंग भेद[संपादित करें]

जिस प्रकार जनातंक पुरूषों में आम रूप से होता है उससे लगभग दुगने स्तर पर महिलाओं में होता है .[5] लैंगिक अंतर को उन सामाजिक-सांस्कृतिक कारकों के फलस्वरूप माना जा सकता है जो महिलाओं को अलगाव नियंत्रण रणनीतियों की अधिक अभिव्यक्ति करने के लिए प्रोत्साहित या अनुमति देता है. अन्य सिद्धांतों में यह विचार शामिल है कि महिलाएं मदद की अधिक तलाश करती हैं और इसलिए इनका निदान हो सकता है, और पुरुषों में अत्यधिक चिंता की प्रतिक्रिया स्वरूप शराब की लत की संभावना होती है और उनका निदान एक शराबी के रूप में किया जाता है, और पारंपरिक महिला यौन भूमिका, महिलाओं को घबराहट की प्रतिक्रिया स्वरूप आश्रित और असहाय व्यवहार में उलझने को प्रोत्साहित करती है.[6] अनुसंधानों के परिणामों में अभी तक एगोराफ़ोबिया में लिंग भेद[कृपया उद्धरण जोड़ें] के लिए कोई भी स्पष्ट व्याख्या नहीं मिलती.

कारण और सहायक तत्व[संपादित करें]

जनातंक का सटीक कारण अभी तक अज्ञात है, हालांकि कुछ चिकित्सक मान्य सिद्धांतों की पेशकश करते हैं, जिन्होंने जनातंक का इलाज किया है या करने का प्रयास किया. इस हालत में अन्य दुष्चिन्ता विकार, एक तनावपूर्ण वातावरण या नशे की उपस्थिति को जोड़ा गया है. बेंज़ोडियाज़ेपाइन्स जैसे प्रशांतक और नींद की गोलियों के दीर्धकालीन उपयोग को जनातंक के कारणों के साथ जोड़ा गया है.[7] जब बेंज़ोडियाज़ेपाइन्स निर्भरता का इलाज किया जाता है और परहेज़ की एक अवधि के बाद, जनातंक के लक्षण धीरे-धीरे कम हो जाते हैं.[8]

अनुसंधान ने स्थानिक उन्मुखीकरण में कठिनाइयों और जनातंक के बीच एक सम्बन्ध का खुलासा किया है.[9][10] जनातंक से मुक्त व्यक्ति अपने कर्ण कोटर प्रणाली, दृश्य प्रणाली और अपनी प्रग्राही बोध के संयोजन द्वारा संतुलन बनाने में सक्षम होते हैं. एक अनुपातहीन संख्या में जनातंक से ग्रसितों में कमजोर कर्ण कोटर प्रकार्य होते हैं और वे दृश्य या स्पर्श संकेतों पर अधिक भरोसा करते हैं. विस्तृत खुले स्थान या भारी भीड़ के रूप में जब दृश्य संकेत कम हो जाते हैं, वे असंतुलित हो सकते हैं. इसी तरह, वे तिरछी या अनियमित सतहों द्वारा भी भ्रमित हो सकते हैं.[11] नियंत्रण की तुलना में, आभासी वास्तविकता अध्ययन में जनातंक से ग्रसितों ने औसत रूप से बदलते श्रव्य-दृश्य आंकड़ों के न्यूनीकृत संसाधन को दर्शाया.[12]

वैकल्पिक सिद्धांत[संपादित करें]

अनुलग्नक सिद्धांत[संपादित करें]

कुछ विद्वानों[13][14] ने जनातंक को एक अनुलग्नक कमी के रूप में बताया है, यानी, एक सुरक्षित स्थान से स्थानिक अलगाव को सहन करने की क्षमता अस्थायी रूप से कम हो जाती है.[15] हाल के अनुभवजन्य अनुसंधान ने भी जनातंक के अनुलग्नक और स्थानिक सिद्धांतों को जोड़ा है.[16]

स्थानिक सिद्धांत[संपादित करें]

सामाजिक विज्ञान में जनातंक अनुसंधान में एक कथित रूप से नैदानिक पूर्वाग्रह है.[17] सामाजिक विज्ञान की शाखाएं, खासकर भूगोल की जिस पहलू की तरफ रूची बढ़ी है उसे स्थानिक घटना के रूप में माना जा सकता है. इसी तरह का एक दृष्टिकोण, जनातंक के विकास को आधुनिकता से जोड़ता है.[18]

रोग निदान[संपादित करें]

ज्यादातर लोग जो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के पास जाते हैं उनमें भयाक्रांत विकार के शुरू होने के बाद जनातंक विकसित होता है (अमेरिकी मनोचिकित्सा संगठन, 1998). जनातंक को बारम्बार भयाक्रांत हमले के प्रतिकूल व्यवहारिक परिणाम के रूप में बेहतर समझा जा सकता है और इन हमलों के साथ बाद की चिंता और पूर्वव्यस्तता के कारण ग्रसित व्यक्ति वैसी परिस्थितियों से बचने की कोशिश करता हैं जहां भयाक्रांत हमला होने की संभावना हो सकती है.[19] कुछ दुर्लभ मामलों में जहां जनातंक से ग्रसित व्यक्ति के भयाक्रांत विकार का निदान मापदंड से मेल नहीं खाता, तब भयाक्रांत विकार के इतिहास के बिना जनातंक का औपचारिक निदान किया जाता है (प्राथमिक जनातंक).

भयाक्रांत हमलों के साथ सम्बन्ध[संपादित करें]

जनातंक के रोगियों को अचानक भयाक्रांत हमले का सामना करना पड़ सकता है, जब वे ऐसे स्थानों की यात्रा करते हैं जहां उन्हें यह भय होता है कि वे नियंत्रण से बाहर हैं, या उन्हें मदद नहीं मिल सकती, या वे शर्मिन्दा हो सकते हैं. एक हमले के दौरान, एपिनेफ्रीन बड़ी मात्रा में स्रावित होता है, और शरीर की लड़ने या भागने की प्राकृतिक प्रतिक्रिया को सक्रिय कर देता है. एक भयाक्रांत हमला, आम तौर पर अचानक शुरू होता है और 10 से 15 मिनट के भीतर अधिक से अधिक तीव्र हो जाता है, और शायद ही कभी 30 मिनट से अधिक तक चलता है.[20] एक भयाक्रांत हमले के लक्षणों में अतिस्पंदन, तीव्र हृदय-गति, पसीने आना, कांपना, उल्टी करना, चक्कर आना, गले में जकड़न और सांस की कमी होना शामिल है. कई रोगियों ने मृत्यु के भय या भावनाओं और/या व्यवहार पर नियंत्रण खोने की बात कही है.[20]

उपचार[संपादित करें]

संज्ञानात्मक व्यवहार उपचार[संपादित करें]

जनातंक और भयाक्रांत हमले के अधिकांश रोगियों को एक्स्पोज़र उपचार द्वारा स्थायी राहत प्रदान की जा सकती है. सिर्फ भयाक्रांत हमलों की बजाय, अवशिष्ट और उपनैदानिक जनातंक अलगाव की विलुप्ति, एक्सपोज़र चिकित्सा का लक्ष्य होना चाहिए.[21] इसी प्रकार, व्यवस्थित विसुग्राहीकरण का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

जनातंक के इलाज के लिए संज्ञानात्मक पुनर्गठन भी उपयोगी साबित हुआ है. इस उपचार में प्रतिभागी को डायनोटिक चर्चा के माध्यम से कोचिंग देना शामिल है, जिसके तहत अधिक तथ्यात्मक और लाभकारी विश्वासों द्वारा निराधार और बाधक विश्वासों को प्रतिस्थापित करना लक्ष्य होता है.[कृपया उद्धरण जोड़ें]

जनातंक से ग्रसितों में शिथिलीकरण तकनीक अक्सर उपयोगी होते हैं, क्योंकि इनका इस्तेमाल चिंता और हमले के लक्षणों को रोकने या समाप्त करने में किया जा सकता है.[कृपया उद्धरण जोड़ें]

मनोरोग औषधी उपचार[संपादित करें]

चिंता विकारों के इलाज के लिए सबसे आम रूप से इस्तेमाल अवसाद-विरोधी दवाएं मुख्य रूप से SSRI (सेलेक्टीव सेरोटेनिन रीअपटेक इनहिबिटर) वर्ग में हैं और जिसमें सेर्टालाइन, पेरोक्सीटाइन और फ्लुक्सोटाइन शामिल है. बेंजोडाइजेपाइन प्रशांतक, MAO इनहिबिटर्स और ट्राइसाइक्लिक एंटीडिप्रेसेन्ट्स को भी सामान्यतः जनातंक के इलाज के लिए निर्धारित किया जाता है.[कृपया उद्धरण जोड़ें]

वैकल्पिक उपचार[संपादित करें]

आई मुवमेंट डिसेन्सीटाइजेशन एंड प्रोग्रामिंग (EMDR) का अध्ययन एक जनातंक के संभावित इलाज के लिए किया गया है, लेकिन परिणाम संतोषजनक नहीं थे.[22] वैसे, EMDR की सलाह ऐसे मामलो में दी जाती है जहां संज्ञानात्मक व्यवहार दृष्टिकोण अप्रभावी साबित होते हैं या वैसे मामले जहां जनातंक में बाद के आघात का विकास होता है.[23]

चिंता विकार से ग्रसित कई लोग स्वयं सहायता या सहायता समूह में शामिल होकर लाभावन्वित होते हैं (टेलीफोन कंफ्रेस कॉल ग्रुप या ऑनलाइन सहायता समूह जो विशेष कर उन रोगियों के लिए मदद करते हैं जो घर तक अपने को सीमित कर देते हैं). समस्याओं और उपलब्धियों को एक-दूसरों के साथ आदान-प्रदान करने के साथ-साथ स्वयं-सहायता उपकरणों को साझा करना इन समूहों की सामान्य गतिविधियां हैं. विशेष रूप से तनाव प्रबंधन तकनीक और विभिन्न प्रकार के ध्यान अभ्यास के आलावा मानसिक- दर्शन तकनीक, चिंता विकारों से ग्रसित रोगियों को शांत करने में मदद कर सकती है और चिकित्सा के प्रभाव को बढ़ा सकती है. इसी प्रकार परोपकार के कार्यों द्वारा आत्म-लीनता से विमुख हुआ जा सकता है जो चिंता समस्याओं के साथ देखी जाती है. साथ ही ऐसे प्राथमिक प्रमाण भी मिले हैं कि एरोबिक व्यायाम का भी शांतिदायक प्रभाव हो सकता है. चूंकी कैफीन, कुछ अवैध औषधियां, और कुछ बिना नुस्खे वाली दवाइयां चिंता विकार के लक्षणों को बढ़ा सकती हैं, उनका परहेज किया जाना चाहिए.[24]

जनातंक से पीड़ित उल्लेखनीय व्यक्ति[संपादित करें]

  • बोलेसलव प्रस (1847-1912), पोलिश पत्रकार और उपन्यासकार [25]
  • हावर्ड ह्यूस (1905-1976), अमेरिकी पायलट, उद्योगपति, फिल्म निर्माता और जनहितैषी.[26]
  • एच. एल. गोल्ड (1914-1996), विज्ञान कथा सम्पादक; युद्ध काल के अपने अनुभवों के परिणाम स्वरूप, उनका जनातंक इतना गंभीर हो गया कि दो दशक से ज्यादा वे अपने आवास से बाहर निकलने में अक्षम थे. उनके जीवन के अंतिम दिनों उन्होंने अपनी स्थिति पर कुछ नियंत्रण हासिल किया था.[27]
  • वुडी एलेन (1935-), अमेरिकी अभिनेता, निर्देशक, संगीतकार.[28]
  • ब्रायन विल्सन (1942-), अमेरिकी गायक और गीतकार, बीच बॉयज़ के प्राथमिक गीतकार. एक पूर्व संयासी और एगारोफोबिक पीड़ित जो पागलपन के दौरे से गुज़रा.[29]
  • पाउला डीन (1947 -), अमेरिकी बावर्ची.[30]
  • ओलिविया हसी (1951-) एंग्लो अर्जेण्टीनी अभिनेत्री.[31][32]
  • किम बेसिंजर (1953-), अमेरिकी अभिनेत्री.[33]
  • डेरिल हन्ना (1960-), अमेरिकी अभिनेत्री.[34]
  • पीटर रॉबिन्सन (1962-), ब्रिटिश संगीतकार जिन्हें मर्लिन के रूप में जाना जाता है.[35]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

  • मानसिक बीमारी # जनातंक वाली फिल्मों की सूची
  • एगीरोफोबिया सड़क पार करने का भय
  • एनोकलोफोबिया भीड़ का डर
  • सामान्यीकृत दुष्चिन्ता विकार
  • हिकिकमोरी
  • सनकी बाध्यकारी विकार में विशिष्ट प्रकार के भय हो सकते हैं जिसके कारण एक व्यक्ति घर में ही सीमित रहता है
  • ज़ख्म-संबंधी तनाव के बाद का विकार
  • सामाजिक चिंता
  • सामाजिक भय
  • सिनोफोबिया अजनबियों का डर

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. http://helpguide.org/mental/panic_disorder_anxiety_attack_symptom_treatment.htm
  2. Br जे साइकेटरी. मई 2006; 188:432-8.
  3. Phobia Fear Release. "Percentage Of Americans With Phobias". http://www.phobia-fear-release.com/percentage-of-americans-with-phobias.html. अभिगमन तिथि: 2010-4-7. 
  4. साइक सेन्ट्रल: अगोराफोबिया सिम्पटम
  5. मागी, डब्ल्यू. जे., इटोन, डब्ल्यू., विचेन, एच. यू. मैकगोनेगल, के. ए., एंड केसलर, आर. सी. (1996). एगोराफोबिया, सिम्पल फोबिया, एंड सोशिएल फोबिया इन द नेशनल कोमोरबिडिटी सर्वे , जेनरल साइकेटरी का अभिलेखागार, 53, 159–168.
  6. Agoraphobia Research Center. "Is agoraphobia more common in men or women?". http://www.agoraphobia.ws/whogets.htm. अभिगमन तिथि: 2007-11-15. 
  7. Hammersley D, Beeley L (1996). "The effects of medication on counselling". In Palmer S, Dainow S, Milner P (eds.). Counselling: The BACP Counselling Reader. 1. Sage. pp. 211–4. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-0803974777. http://books.google.com/?id=wnIBEQKQi7IC. 
  8. Professor C Heather Ashton (1987). "Benzodiazepine Withdrawal: Outcome in 50 Patients". British Journal of Addiction 82: 655–671. http://www.benzo.org.uk/ashbzoc.htm. 
  9. Yardley, L; Britton, J; Lear, S; Bird, J; Luxon, LM (1995 May). "Relationship between balance system function and agoraphobic avoidance.". Behav Res Ther. 33 (4): 435–9. doi:10.1016/0005-7967(94)00060-W. PMID 7755529 : 7755529. 
  10. Jacob, RG; Furman, JM; Durrant, JD; Turner, SM (1996). "Panic, agoraphobia, and vestibular dysfunction". Am J Psychiatry 153 (4): 503–512. PMID 8599398. 
  11. Jacob, RG; Furman, JM; Durrant, JD; Turner, SM (1997 May-June). "Surface dependence: a balance control strategy in panic disorder with agoraphobia". Psychosom Med. 59 (3): 323–30. PMID 9178344 : 9178344. 
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  18. जे. होम्स, (2006). "बिल्डिंग ब्रिजेस एंड ब्रेकिंग बाउंड्रिज: मोडर्निटी एंड एगोराफोबिया", Opticon1826, 1, 1, http://www.ucl.ac.uk/opticon1826/archive/issue1
  19. Barlow, D. H. (1988). Anxiety and its disorders: The nature and treatment of anxiety and panic. Guilford Press. 
  20. David Satcher etal. (1999). "Chapter 4.2". Mental Health: A Report of the Surgeon General. http://www.surgeongeneral.gov/library/mentalhealth/chapter4/sec2.html. 
  21. Fava, G.A.; Rafanelli, C.; Grandi, S.; Cinto, S.; Ruini, C.; Mangelli, L; Belluardo, P (2001). "Long-term outcome of panic disorder with agoraphobia treated by exposure". Psychological Medicine (Cambridge University Press) 31 (5): 891–898. doi:10.1017/S0033291701003592. PMID 11459386. 
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  34. बायोग्राफी फॉर डेरील हन्ना . इंटरनेट मूवी डेटाबेस. 28 नवम्बर 2007 को पुनःप्राप्त.
  35. व्हाटएवर हेपेन्ड टू द जेंडर बेनडर्स? चैनल 4 डोक्यूमेंटरी, यूनाइटेड किंगडम

साँचा:NIMH

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