क्यूबाई मिसाइल संकट
क्यूबाई मिसाइल संकट (क्यूबा में अक्टूबर संकट के रूप में जाना जाता है) शीत युद्ध के दौरान अक्टूबर 1962 में सोवियत संघ, क्यूबा और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच एक टकराव था. सितंबर 1962 में, क्यूबा और सोवियत सरकारों ने चोरी-छिपे क्यूबा में महाद्वीपीय संयुक्त राज्य अमेरिका के अधिकांश भागों पर मार कर सकने की क्षमता वाली अनेक मध्यम- और मध्यवर्ती-दूरी की प्राक्षेपिक मिसाइलें (MRBMs और IRBMs) लगानी शुरू की. 1958 में यूके (UK) में थोर आईआरबीएम (IRBM) और 1961 में इटली और तुर्की में जुपिटर आईआरबीएम (IRBM)- मॉस्को पर नाभिकीय हथियारों से हमला करने की क्षमता वाली इन 100 से अधिक यू.एस. (U.S.)-निर्मित मिसाइलों की तैनाती के प्रतिक्रियास्वरूप यह कारवाई की गयी. 14 अक्टूबर, 1962 को , एक संयुक्त राज्य अमेरिकी यू-2 (U-2) फोटोआविक्षण विमान ने क्यूबा में निर्माणाधीन सोवियत मिसाइल ठिकानों के फोटोग्राफिक सबूत जमा किये.
फलस्वरूप बर्लिन नाकाबंदी से पैदा हुआ संकट शीत युद्ध के एक बड़े टकराव का रूप ले लिया और आम तौर पर माना जाने लगा कि शीत युद्ध अब एक नाभिकीय संघर्ष के कगार पर आ पहुंचा है.[1] संयुक्त राज्य अमेरिका ने क्यूबा आकाश और समुद्र मार्ग से हमला करने पर विचार किया और क्यूबा का सैन्य संगरोधन करना तय किया. यू.एस. (U.S.) ने घोषणा की कि वह क्यूबा में आक्रामक हथियारों को ले जाने नहीं देगा और मांग की कि सोवियत संघ क्यूबा में निर्माणाधीन या बन चुके मिसाइल ठिकानों को नष्ट करे और वहां से सभी आक्रामक हथियारों को हटा ले. कैनेडी प्रशासन को बहुत ही कम उम्मीद थी कि क्रेमलिन उनकी मांगों को मान लेगा, और वह एक सैन्य टकराव की अपेक्षा कर रहा था. दूसरी ओर सोवियत संघ के निकिता ख्रुश्चेव ने केनेडी को एक पत्र में लिखा कि "अंतरराष्ट्रीय जल मार्ग और आकाश मार्ग के यातायात के" उनके संगरोधन की "कारवाई एक ऐसी आक्रामकता है जो मानव जाति को विश्व नाभिकीय-मिसाइल युद्ध के नरक कुंड में डाल देगी."
सोवियत संघ ने सार्वजनिक रूप से यू.एस. (U.S.) मांगों पर एतराज जताया, लेकिन संकट को हल करने के लिए गुप्त रूप से पिछले दरवाजे के संचार के जरिये एक प्रस्ताव की पहल की. 28 अक्टूबर 1962 को टकराव समाप्त हो गया, जब राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी और संयुक्त राष्ट्र महासचिव यू थांट ने सोवियत प्रमुख निकिता ख्रुश्चेव के साथ यह समझौता किया कि सोवियत संघ आक्रामक हथियारों को नष्ट कर देगा और उन्हें सोवियत संघ वापस ले जाएगा, इस प्रक्रिया की निगरानी संयुक्त राष्ट्र करेगा; बदले में हुए समझौते में संयुक्त राज्य अमेरिका ने क्यूबा पर कभी भी आक्रमण नहीं करने का वादा किया. सोवियत ने मिसाइल प्रणालियों और उनके सहायक उपकरणों को निकाल लिया, उन्हें 5-9 नवम्बर को आठ सोवियत जहाजों पर लाद दिया गया. एक महीने बाद, 5 और 6 दिसंबर को, और सोवियत Il-28 बमवर्षक विमानों को तीन सोवियत जहाज़ों पर लादकर रूस रवाना कर दिया गया. 20 नवंबर 1962 को शाम 6:45 ईडीटी (EDT) बजे औपचारिक रूप से संगरोध समाप्त कर दिया गया. एक गुप्त समझौते के भाग के रूप में, यूरोप में तैनात सभी अमेरिकी-निर्मित थोर और जुपिटर आईआरबीएम (IRBM) को सितंबर 1963 तक निष्क्रिय कर दिया गया.
क्यूबाई मिसाइल संकट ने हॉटलाइन एग्रीमेंट और मॉस्को तथा वाशिंगटन, डी.सी. के बीच सीधे संचार संपर्क के लिए मॉस्को-वाशिंगटन हॉटलाइन के निर्माण को प्रोत्साहन दिया.
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[संपादित करें] संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रारंभिक कार्रवाइयां
अमेरिकियों को स्टालिनवादी सोवियत विस्तारवाद की आशंका थी, लेकिन किसी लैटिन अमेरिकी देश का यूएसएसआर (USSR-सोवियत संघ) के साथ खुलेआम मित्रता अस्वीकार्य माना जाता था, इससे 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध के अंत के बाद से चल रही सोवियत-अमेरिकी शत्रुता में वृद्धि हुई. इस तरह का हस्तक्षेप मोनरो सिद्धांत का सीधा उल्लंघन था, यह संयुक्त राज्य अमेरिका की नीति है कि पश्चिमी गोलार्द्ध के देशों पर यूरोपीय शक्तियों को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए.
अप्रैल, 1961 में बे ऑफ़ पिग्स के विफल आक्रमण से संयुक्त राज्य अमेरिका को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा होना पड़ा था, जो राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के मातहत सीआईए (CIA) द्वारा प्रायोजित शक्तियों द्वारा किया गया था. उसके बाद पूर्व राष्ट्रपति आइजनहावर ने कैनेडी से कहा कि "बे ऑफ़ पिग्स की विफलता सोवियत संघ को ऐसा कुछ करने के लिए प्रोत्साहित करेगी जो वे अन्यथा नहीं करते."[2] अधूरे मन से किये आक्रमण से सोवियत प्रमुख निकिता ख्रुश्चेव और उनके सलाहकारों की धारणा बनी कि कैनेडी निर्णय लेने में ढुलमुल हैं, और एक सोवियत सलाहकार ने लिखा, "अल्पायु, बौद्धिक, संकट कालीन परिस्थितियों में निर्णय लेने में पूरी तरह सक्षम नहीं ... बहुत अधिक बौद्धिक और बहुत अधिक कमजोर."[2] विफल ऑपरेशन मोंगूज के साथ यू.एस. (U.S.) की गुप्त सामरिक गतिविधि 1961 में जारी रही.[3] सार्वजनिक रूप से, फरवरी 1962 को, संयुक्त राज्य अमेरिका ने क्यूबा के विरुद्ध आर्थिक नाकाबंदी की शुरुआत की.[4]
संयुक्त राज्य अमेरिका ने फिर से गुप्त कार्रवाई पर विचार किया और अपने विशेष गतिविधि डिवीजन के सीआईए (CIA) अर्द्धसैनिक अधिकारियों को क्यूबा में प्रवेश कराया.[5] वायुसेना जनरल कर्टिस लेमे ने सितंबर को आक्रमण-पूर्व बमबारी की एक योजना कैनेडी के समक्ष प्रस्तुत की, जबकि जासूसी उड़ानों और ग्वान्टोनामो नौसेना अड्डे पर अमेरिकी सेना द्वारा किये जा रहे छोटे-मोटे उत्पीड़न की क्यूबा की कूटनीतिक शिकायतें यू.एस. (U.S.) सरकार से निरंतर की जा रही थी.
अगस्त 1962 को, संयुक्त राज्य अमेरिका को संदेह हुआ कि सोवियत संघ क्यूबा में मिसाइल सुविधाओं के निर्माण में लगा हुआ है. उसी महीने, इसकी खुफिया सेवाओं ने अपने जमीनी पर्यवेक्षकों द्वारा रूस-निर्मित मिग-21 (नाटो का दिया नाम फिशबेड ) लड़ाकू विमानों और Il-28 हल्के बमवर्षक विमानों के अड्डों की सूचना प्राप्त की. U-2 जासूसी विमानों ने आठ अलग-अलग स्थानों में जमीन से आकाश में मार करने वाली S-75 ड्विना (नाटो (NATO) का दिया नाम एसए-2 ) (SA-2) मिसाइलों को पाया. 31 अगस्त को, सेनेटर केनेथ बी. कीटिंग ने सीनेट में कहा कि सोवियत संघ क्यूबा में संभवतः एक मिसाइल अड्डा बना रहा है; उन्हें शायद फ्लोरिडा[6] में रह रहे क्यूबा के निर्वासितों से यह सूचना मिली थी.[7] सीआईए (CIA) निदेशक जॉन ए मैककोन कई रिपोर्टों से संदिग्ध हुए. 10 अगस्त को उन्होंने राष्ट्रपति कैनेडी को एक ज्ञापन भेजा, जिसमें उन्होंने अनुमान लगाया गया कि सोवियत संघ क्यूबा में प्राक्षेपिक मिसाइल लगाने की तैयारी में है.[6]
[संपादित करें] शक्ति संतुलन
जब कैनेडी 1960 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ रहे थे तब उनका मुख्य मुद्दा था कथित रूप से अग्रणी रूस से "मिसाइल का अंतर". जबकि दरअसल, संयुक्त राज्य अमेरिका सोवियत संघ से आगे था. 1961 में, सोवियत संघ के पास सिर्फ चार अंतरमहाद्वीपीय प्राक्षेपिक मिसाइलें (ICBMs) थीं. अक्टूबर 1962 तक, उनके पास कुछ दर्जन भर होंगी, हालांकि कुछ खुफिया के अनुमान के अनुसार अधिक से अधिक 75 होंगी.[6] जबकि दूसरी ओर संयुक्त राज्य अमेरिका के पास 170 ICBMs थीं तथा उसने जल्द ही और भी बना लिया था. उसके पास आठ जॉर्ज वॉशिंगटन और एथान अलेन श्रेणी की प्राक्षेपिक मिसाइल पनडुब्बियां भी थीं, उनकी क्षमता 2,200-किलोमीटर (1,400 मील) के रेंज के साथ प्रत्येक से 16 पोलारिस मिसाइलें छोड़ने की थी. ख्रुश्चेव ने मिसाइल अंतर की धारणा में वृद्धि की, जब उन्होंने जोर से दावा किया कि यूएसएसआर (USSR) "सौसेजेस जैसी" मिसाइलें बना रहा है, जिनकी संख्या और क्षमताएं वास्तविकता के करीब नहीं थीं. तथापि, सोवियत संघ के पास संख्या के हिसाब से मध्यम-दूरी की प्राक्षेपिक मिसाइलें जरुर थीं, लगभग 700.[6] 1970 में प्रकाशित अपने संस्मरण में ख्रुश्चेव ने लिखा था, "क्यूबा की रक्षा करने के अलावा, हमारी मिसाइलें बराबरी करने लगेंगी जिसे पश्चिम शक्ति संतुलन कहा करता है."[6][6]
[संपादित करें] पूर्वी गुट रणनीति
(translator needed) सोवियत प्रधानमंत्री निकिता ख्रुश्चेव के मन में मई 1962 में क्यूबा में अपनी मध्यवर्ती-दूरी की नाभिकीय मिसाइलों की तैनाती द्वारा संयुक्त राज्य अमेरिका के सामरिक मिसाइलों के विकास और तैनाती का प्रत्युत्तर देने का विचार आया. अप्रैल 1962 के दौरान तुर्की में संयुक्त राज्य अमेरिका की जुपिटर नामक मध्यवर्ती-दूरी की प्रक्षेपिक मिसाइलों की तैनाती के हिस्से के रूप में भी ख्रुश्चेव प्रतिक्रया कर रहे थे.[6]
एकदम शुरुआत से ही, सोवियत की गतिविधि का विस्तृत खंडन और छल आवश्यक बन गया था, जिसे रूस में मस्किरोव्का (Maskirovka) कहा जाता है.[8] सारी योजना और मिसाइलों का परिवहन और उनकी तैनाती अत्यंत गोपनीयता के साथ पूरी की गयी, सिर्फ कुछ लोगों को इस अभियान की वास्तविक प्रकृति के बारे में बताया गया. यहां तक कि इस अभियान पर जाने वाले सैनिकों को भी गुमराह किया गया था, उनसे कहा गया था कि वे ठंडे क्षेत्र को जा रहे हैं और स्की जूते, गर्म जैकेट और अन्य शीतकालीन उपकरणों से उन्हें सुसज्जित किया गया.[8] सोवियत कोड नाम रखा गया ऑपरेशन अनादीर (Operation Anadyr), जो बेरिंग सागर में समाने वाली एक नदी, चुकोत्स्की जिले की राजधानी और सुदूर पूर्वी क्षेत्र स्थित एक बमवर्षक अड्डे का भी नाम है. आंतरिक व बाहरी लोगों से इस कार्यक्रम को छुपाने के लिए यह सब किया गया.[8]
1962 के शुरू में, एक कृषि प्रतिनिधिमंडल के साथ सोवियत सैन्य और मिसाइल निर्माण विशेषज्ञों का एक दल हवाना पहुंचा. उन्होंने क्यूबा के नेता फिडेल कास्त्रो के साथ एक बैठक की. क्यूबा के नेतृत्व को पूरी आशंका थी कि यू.एस. (U.S.) फिर से क्यूबा पर करेगा और इसीलिए बड़े उत्साह के साथ उन्होंने क्यूबा में नाभिकीय मिसाइलें लगाने के विचार को मंजूरी दे दी. जुलाई में "मशीन ऑपरेटरों", "सिंचाई विशेषज्ञों", और "कृषि विशेषज्ञों" के वेश में मिसाइल निर्माण विशेषज्ञ वहां पहुंच गये.[8] सोवियत रॉकेट बलों के प्रमुख मार्शल सेर्गेई बिर्युज़ोव ने क्यूबा का दौरा करने वाले एक सर्वेक्षण दल का नेतृत्व किया. उन्होंने ख्रुश्चेव को बताया कि मिसाइलों को ताड़ के पेड़ों से छुपाया जाएगा और वैसा छद्मावरण बनाया जाएगा.[6]
क्यूबा का नेतृत्व तब और अधिक परेशान हुआ, जब सितंबर में कांग्रेस ने यू. एस. (U.S.) संयुक्त प्रस्ताव 230 को अनुमोदित कर दिया, जो अमेरिकी हितों पर खतरा होने पर क्यूबा के विरुद्ध सैन्य शक्ति के इस्तेमाल की इजाजत देता था.[9] उसी दिन, यू.एस. (U.S.) ने कैरिबियाई सागर में एक बड़े सैन्य अभ्यास, PHIBRIGLEX-62, की घोषणा कर दी, जिसे सुविचारित उकसावा बताकर क्यूबा ने उसकी निंदा की और इसे यू.एस. (U.S.) द्वारा क्यूबा पर हमला करने की योजना बनाने का सबूत बताया.[9][10]
ख्रुश्चेव और कास्त्रो गुप्त रूप से क्यूबा में सामरिक नाभिकीय मिसाइलें लगाने पर सहमत हो गये. कास्त्रो की तरह, ख्रुश्चेव ने भी महसूस किया कि क्यूबा पर एक यू.एस. (U.S.) आक्रमण आसन्न है, और क्यूबा को खोने से कम्युनिस्ट सिद्धांत को बड़ा नुक्सान उठाना पडेगा, खासकर लैटिन अमेरिका में. उन्होंने कहा कि वे अमेरिकियों से टकराव चाहते हैं "शब्दों के बजाय उससे कहीं ज्यादा...तार्किक उत्तर था मिसाइल."[11] सोवियत संघ ने अपनी सख्त गोपनीयता बनाए रखी, उन्होंने अपनी योजना को लौंगहैण्ड (हाथ से प्रवाही लेखन) से लिखा, जिसे रोडिओन मालिनोव्सकी ने 4 जुलाई को अनुमोदित किया और ख्रुश्चेव ने 7 जुलाई को.
सोवियत नेतृत्व का मानना था, जो बे ऑफ़ पिग्स आक्रमण के दौरान कैनेडी के आत्मविश्वास में कमी की उनकी अभिज्ञता पर आधारित थी, कि वे मिसाइलों को एक निर्विवादित तथ्य मानकर उसे स्वीकार कर लेंगे और टकराव से दूर रहेंगे.[2] 11 सितंबर को, सोवियत संघ ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी कि क्यूबा पर या द्वीप में आपूर्ति के लिए जा रहे सोवियत जहाज़ों पर यू.एस. (U.S.) हमले को युद्ध माना जायेगा.[7] सोवियत संघ ने क्यूबा में अपनी कार्रवाइयों को छुपाये रखने के लिए अपना मस्किरोव्का कार्यक्रम जारी रखा. वे बार-बार इससे इंकार करते रहे कि क्यूबा में लाये जा रहे हथियार आक्रामक प्रकृति के हैं. 7 सितंबर को, सोवियत राजदूत अनातोली दोब्रिनिन ने संयुक्त राष्ट्र में यू.एस. (U.S.) राजदूत अडलाई स्टीवेंसन को आश्वासन दिया कि यूएसएसआर (USSR) क्यूबा को केवल रक्षात्मक हथियारों की आपूर्ति कर रहा है. 11 सितंबर को, सोवियत समाचार एजेंसी तास (TASS) ने घोषणा की कि क्यूबा में आक्रामक परमाणु मिसाइलें लगाने की सोवियत संघ को कोई जरूरत नहीं या ऐसा कोई इरादा नहीं है. 13 अक्टूबर को, पूर्व विदेश उपमंत्री चेस्टर बाउल्स ने दोब्रिनिन से पूछा कि क्या क्यूबा में आक्रामक हथियार लगाने की सोवियत संघ की योजना है. उन्होंने ऐसी किसी योजना से इंकार किया.[9] और फिर 17 अक्टूबर को, सोवियत दूतावास अधिकारी ज्योर्जी बोल्शाकोव ने राष्ट्रपति कैनेडी को ख्रुश्चेव का एक "व्यक्तिगत संदेश" दिया, जिसमें उन्हें आश्वस्त किया गया था कि "किसी भी परिस्थिति में जमीन से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलें क्यूबा नहीं भेजी जाएंगी."[9]
आर-12 मिसाइलों की पहली खेप 8 सितंबर की रात को पहुंची और 16 सितंबर को दूसरी खेप. आर-12 पहली सामरिक मध्यम-दूरी की प्राक्षेपिक मिसाइल थी, यह सबसे पहली मिसाइल रही जिसका बड़े पैमाने पर उत्पादन किया गया, और यह पहली सोवियत मिसाइल थी जिसे थर्मोन्यूक्लियर स्फोटक शीर्ष के साथ तैनात किया गया. यह एक सिगल-स्टेज, सड़क से परिवहनयोग्य, जमीन से चलायी जाने वाली, भंडारयोग्य प्रणोदक ईंधन मिसाइल थी, जिससे एक मेगाटन-श्रेणी के नाभिकीय हथियार को छोड़ा जा सकता था.[12] सोवियत संघ ने नौ अड्डों का निर्माण किया था - छः 2,000-किलोमीटर (1,200 मील) की प्रभावकारी दूरी की आर-12 मध्यम-दूरी की मिसाइलों (नाटो का दिया नाम एस एस-4 संडल ) के लिए और तीन 4,500-किलोमीटर (2,800 मील) की अधिकतम दूरी की आर-14 मध्यवर्ती-दूरी की प्राक्षेपिक मिसाइलों (नाटो का दिया नाम एस एस-5 एस्कियन ) के लिए.[13]
[संपादित करें] क्यूबा का स्थिति निर्धारण
सोमवार 7 अक्टूबर को, क्यूबा के राष्ट्रपति ओसवाल्डो डोर्टिकोस (Osvaldo Dorticós) ने यू.एन. जनरल एसेंबली में कहा: अगर ... हम पर हमला हुआ, तो हमलोग अपनी रक्षा करेंगे. मैं फिर कहता हूं, हमारे पास पर्याप्त साधन हैं जिनसे हम अपनी रक्षा करेंगे; हमें हमारे पास निश्चित ही हमारे अपरिहार्य हथियार हैं, वो हथियार, जिन्हें प्राप्त करना नहीं चाहते हैं, और जिनका प्रयोग करने की हमारी इच्छा नहीं है."
[संपादित करें] मिसाइल प्रतिवेदित
इन मिसाइलों के जरिये सोवियत संघ ने वस्तुतः पूरे महाद्वीपीय संयुक्त राज्य अमेरिका को अपने प्रभावी निशाने पर ले लिया. चालीस लांचरों का आयोजित शस्त्रागार था. क्यूबा की आबादी ने तत्काल मिसाइलों के आगमन और तैनाती पर ध्यान दिया और सैकड़ों रिपोर्ट मियामी पहुंची. यू.एस. (U.S.) खुफिया विभाग को असंख्य रिपोर्ट मिली , उनमें से अनेक संदेहास्पद प्रकार की थीं या हास्यास्पद थीं, और उनमें से अधिकांश को रक्षात्मक मिसाइलें मानकर खारिज किया जा सकता था. केवल पांच रिपोर्टों ने विश्लेषकों को चिंतित किया. उन रिपोर्टों में रात के वक्त शहरों से बहुत लंबे कैनवास से ढंकी सिलिंडरनुमा वस्तुओं को बड़े ट्रकों के जरिये ले जाने के वर्णन थे, जिन्हें बिना मदद और युक्ति के शहरों में मोड़ा नहीं जा सकता था. रक्षात्मक मिसाइलें ऐसा कर सकती थीं. इन रिपोर्टों को संतोषजनक ढंग से खारिज नहीं किया जा सका.[14]
[संपादित करें] यू-2 विमानों ने मिसाइलों को खोज निकाला
क्यूबा में एक सैन्य निर्माण के सबूतों में वृद्धि के बावजूद, 5 सितंबर से 14 अक्टूबर तक क्यूबा के ऊपर यू-2 विमानों ने कोई उड़ान नहीं भरी. 30 अगस्त को टोही उड़ानों पर रोक लगाने की पहली वजह यह थी कि एक वायु सेना के स्ट्रेटेजिक एयर कमांड का यू-2 विमान गलती से सुदूर पूर्व सखालिन द्वीप के ऊपर जा पहुंचा था. सोवियत संघ ने विरोध दर्ज किया और यू.एस. (U.S.) को माफी मांगनी पड़ी. नौ दिन बाद, एक ताईवानी-स्वामित्व वाला यू-2 पश्चिमी चीन में खो गया, संभवतः सैम (SAM) की वजह से. यू.एस. (U.S.) अधिकारी चिंतित हुए कि एक क्यूबा में क्यूबा या सोवियत के सैम ने सीआईए के यू-2 को शायद मार गिराया, जिससे एक और अंतरराष्ट्रीय घटना की शुरुआत हुई. सितंबर के अंत में, नौसेना के टोही विमान ने सोवित जहाज कासिमोव के डेक पर बड़े-बड़े क्रेट की तस्वीरें लीं, जिनके आकार और बनावट Il-28 हल्के बमवर्षकों जैसी थी.[6]
12 अक्टूबर को, प्रशासन ने क्यूबा के यू-2 टोही अभियान का तबादला वायु सेना में करने का फैसला किया. इस बीच एक और यू-2 को मार गिराया गया, तब इसकी सफाई में वायु सेना की उड़ानों को बहाना के रूप में पेश करने के बारे में सोचा गया, जिसे सीआईए की उड़ानों से आसान समझा गया. इस बात के भी सबूत हैं कि रक्षा विभाग और वायु सेना ने क्यूबाई उड़ानों की जिम्मेवारी लेने के लिए लॉबी की.[6] 8 अक्तूबर को जब टोही अभियानों को पुन:-अधिकृत किया गया तब मौसम ने विमानों की उड़ान में बाधा डाली. 14 अक्टूबर को यू.एस. (U.S.) ने पहली बार मिसाइलों की तस्वीर खींचकर प्रमाण प्रमाण प्राप्त किया, जब मेजर रिचर्ड हेसर द्वारा उडाये जा रहे यू-2 से 928 तस्वीरें ली गयीं, उनसे पश्चिमी क्यूबा के पिनार डेल रियो प्रांत के सान क्रिस्टोबल अड्डे में एस एस-4 (SS-4)निर्माण का पता चला.[15]
[संपादित करें] राष्ट्रपति को सूचना
बुधवार, 17 अक्टूबर को, सीआईए के राष्ट्रीय फोटोग्राफिक खुफिया केंद्र ने यू-2 तस्वीरों की समीक्षा की और वस्तुओं की पहचान करके उनकी व्याख्या मध्यम दूरी की प्राक्षेपिक मिसाइलों के रूप में की. उस शाम, सीआईए ने विदेश विभाग को सूचित किया और रात 8.30 EST राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मैकजॉर्ज बंडी ने राष्ट्रपति को बताने के लिए सुबह तक इंतजार करना तय किया. रक्षा सचिव रॉबर्ट एस. मैकन्मारा को आधी रात में जानकारी दी गयी. गुरुवार की सुबह 8:30 ईएसटी (EST) बजे बंडी ने कैनेडी के साथ मुलाकात की और उन्हें यू-2 से ली गयी तस्वीरें दिखाया और उन तस्वीरों के बारे में सीआईए के विश्लेषण से अवगत कराया.[16][not in citation given] शाम 6:30 EST कैनेडी ने राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के नौ सदस्यों और पांच अन्य प्रमुख सलाहकारों[17] की एक बैठक बुलायी, राष्ट्रीय सुरक्षा कार्रवाई ज्ञापन 196 के 22 अक्टूबर के तथ्य के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से एक समूह में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की कार्यकारी समिति के नाम घोषित किये.[18]
[संपादित करें] प्रतिकिया पर विचार
अमेरिका के पास दरअसल कोई योजना नहीं थी, क्योंकि अमेरिकी खुफिया विभाग आश्वस्त था कि सोवियत संघ कभी भी क्यूबा में परमाणु प्रक्षेपास्त्र नहीं लगाएगा. एक्सॉम (EXCOMM) ने शीघ्रता से पांच संभावित कार्रवाई के क्रमों पर चर्चा की:[19]
- कुछ नहीं करना है.
- मिसाइलों को हटाने के लिए सोवियत संघ पर कूटनीतिक दबाव का इस्तेमाल किया जाय.
- मिसाइलों पर एक हवाई हमला.
- एक पूर्ण सैन्य आक्रमण.
- क्यूबा की समुद्री नाकाबंदी, जिसे कहीं ज्यादा एक चयनात्मक संगरोध के रूप में नए सिरे से परिभाषित किया गया.
संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ ने सर्वसम्मति से सहमति व्यक्त की कि एक पूर्ण-पैमाने पर हमला और हस्तक्षेप ही एकमात्र समाधान है. उनका मानना था कि क्यूबा पर विजय प्राप्त करने से यू.एस. (U.S.) को रोकने का प्रयास सोवियत संघ नहीं करेगा. कैनेडी उलझन में थे.
कैनेडी ने सोचा कि क्यूबा पर हवाई हमला करने से सोवियत यह मान लेंगे कि बर्लिन को अधीन करने के लिए "एक हरी झंडी" का सिग्नल मिल गया है. कैनेडी का यह भी मानना था कि अमेरिका के सहयोगी यह सोचेंगे कि क्यूबा स्थिति का शांतिपूर्ण समाधान नहीं निकाल पाने के कारण "युद्ध-प्रेमी काउब्वॉय" ("trigger-happy cowboys") के रूप में बर्लिन ने यू.एस. (U.S.) को गंवा दिया.[20]
तब एक्सॉम (EXCOMM) ने शक्ति के सामरिक संतुलन, राजनीतिक और सैनिक दोनों पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा की. संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ का मानना था कि मिसाइलों से सैन्य संतुलन गंभीर रूप से बदल जाएगा, लेकिन रक्षा सचिव रॉबर्ट मैकन्मारा ने इससे असहमति जतायी. उन्हें यकीन था कि मिसाइलों से सामरिक संतुलन पर बिल्कुल कोई असर नहीं पड़नेवाला. उनका कहना था कि अतिरिक्त चालीस से समग्र सामरिक संतुलन पर कोई ख़ास फर्क नहीं पडेगा. यू.एस. (U.S.) के पास पहले से ही लगभग 5,000 सामरिक स्फोटक शीर्ष (वारहेड्स) थे, जबकि सोवियत संघ के पास सिर्फ 300.[21] उन्होंने कहा कि इसलिए सोवियत संघ के पास 340 होने में सामरिक संतुलन मूलतः नहीं बदलने वाला. 1990 में उन्होंने दोहराया कि "इससे कोई अंतर नहीं आया...सैन्य संतुलन नहीं बदला था. मैं तब भी नहीं मानना था, और मैं अब भी नहीं मानता हूं."[22]
एक्सॉम (EXCOMM) सहमत था, हालांकि, मिसाइलों से राजनीतिक संतुलन प्रभावित हो रहा था. सबसे पहले, कैनेडी ने संकट से एक माह पहले अमेरिकी जनता से स्पष्ट वादा किया था कि "अगर अमेरिका के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई करने लायक क्षमता से संपन्न होता है...तो अमेरिका कार्रवाई करेगा,"[23] दूसरे, उसके सहयोगियों और अमेरिकी जनता के बीच यू.एस. (U.S.) की विश्वसनीयता को क्षति पहुंचेगी, अगर वे क्यूबा में मिसाइल लगाने के जरिये सामरिक संतुलन को बदलता दिखाने की सोवियत संघ को इजाजत देते हैं. संकट के बाद कैनेडी ने कहा कि "इससे राजनीतिक रूप से शक्ति संतुलन बदल जाता. ऐसा आभास हो रहा था, और आभास का वास्तविकता में योगदान होता है."[24]
गुरुवार, 18 अक्टूबर को, राष्ट्रपति कैनेडी ने सोवियत विदेश मंत्री अंद्रेई ग्रोमिको से मुलाक़ात की, जिन्होंने दावा किया कि हथियार केवल रक्षात्मक प्रयोजनों के लिए हैं. उन्हें जिस बात की पहले से जानकारी थी वे उसे प्रकट करना नहीं चाहते थे, और वे अमेरिकी जनता में घबराहट फैलाना नहीं चाहते थे,[25] सो राष्ट्रपति ने मिसाइल तैयारी की अपनी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया.[26]
शुक्रवार, 19 अक्तूबर तक, बारंबार उड़ान भर रहे यू -2 जासूसी विमानों ने चार सामरिक अड्डों को दिखाया. नाकाबंदी के हिस्से के रूप में, यू.एस. (U.S.) सेना को नाकाबंदी लागू करने के लिए हाई अलर्ट पर रखा गया था और एक पल की चेतावनी पर क्यूबा पर आक्रमण करने के लिए तैयार रखा गया था. पहला बख़्तरबंद प्रभाग जॉर्जिया के लिए भेजा जा चुका था, और सेना के पांच प्रभागों को अधिकतम कार्रवाई के लिए सतर्क कर दिया गया था. सामरिक वायु कमान (SAC) ने अपने छोटी दूरी के बी-47 स्ट्राटोजेट मध्यम बमवर्षकों का नागरिक हवाई अड्डों में वितरण कर दिया और अपने बी-52 स्ट्राटोफोर्ट्रेस भारी बमवर्षकों को हवा में ऊपर भेज दिया.[27]
[संपादित करें] सामरिक योजनाएं
दो सामरिक योजनाओं (OPLAN) पर विचार किया गया. OPLAN 316 के तहत वायु सेना और नौसेना के हवाई हमलों के बाद सेना और नौसेना इकाइयों द्वारा क्यूबा पर पूर्ण आक्रमण करने के बारे में सोचा गया था. हालांकि, संयुक्त राज्य अमेरिका की आर्मी इकाइयों को यंत्रचालित और सहाय-सहकार संबंधी सामग्री को संगठित करने में परेशानी आ रही थी, जबकि अमेरिकी नौसेना आर्मी के एक साधारण बख्तरबंद सैन्य दल को भेजने के लिए उभयचर नौपरिवहन की पर्याप्त आपूर्ति तक नहीं कर सकी. OPLAN 312, जो मुख्यतः एक वायु सेना और नौसेना संवाहक आपरेशन था, जिसे किसी ख़ास मिसाइल अड्डे से किसी भी भड़काऊ गतिविधि से निपटने के लिए काफी लचीला बनाया गया था, ताकि OPLAN 316 की जमीनी सेना को हवाई मदद दी जा सके.[28]
[संपादित करें] संगरोध
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रविवार, 21 अक्टूबर को दिन भर कैनेडी ने एक्सॉम (EXCOMM) सदस्यों और अन्य शीर्ष सलाहकारों से मुलाक़ात की, और बाक़ी दो विकल्पों पर विचार किया: मुख्य रूप से क्यूबा के मिसाइल अड्डों पर हवाई हमले, या क्यूबा की समुद्री नाकेबंदी.[26] एक पूर्ण पैमाने पर आक्रमण प्रशासन का पहला विकल्प नहीं था, लेकिन कुछ तो किया जाना जरुरी था. रॉबर्ट मैकनैमारा ने समुद्री नाकेबंदी को एक मजबूत मगर सीमित सैन्य कार्रवाई के रूप में समर्थन किया ताकि USSR का नियंत्रण बना रहे. अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार नाकाबंदी करना एक युद्ध की कार्रवाई है, लेकिन कैनेडी प्रशासन ने नहीं सोचा था कि मात्र नाकाबंदी से यूएसएसआर (USSR) हमला करने के लिए उत्तेजित हो जाएगा.[कृपया उद्धरण जोड़ें]
नौसेना परिचालन प्रमुख एडमिरल एंडरसन ने एक स्थिति दस्तावेज लिखा, जिससे कैनेडी को आक्रामक हथियारों के संगरोध और सभी सामग्री की नाकेबंदी के बीच फर्क करने में मदद मिली, संकेत दिया कि एक पारंपरिक नाकेबंदी का मौलिक इरादा नहीं है. चूंकि यह अंतरराष्ट्रीय जल में होने वाला था, इसलिए राष्ट्रपति कैनेडी रियो संधि के गोलार्द्ध रक्षा प्रावधानों के तहत सैन्य कार्रवाई करने के लिए ओएएस (OAS) (Organization of American States) से अनुमोदन प्राप्त किया.
19 अक्तूबर को, एक्सॉम (EXCOMM) ने हवाई हमले और नाकाबंदी विकल्पों को जांचने के लिए अलग-अलग कार्य समूह का गठन किया, और दोपहर तक एक्सॉम (EXCOMM) का अधिकांश नाकाबंदी का पक्षधर हो गया.
सोमवार, 22 अक्टूबर दोपहर 3:00 बजे ईएसटी (EST) बजे राष्ट्रपति कैनेडी ने औपचारिक रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा कार्रवाई ज्ञापन (एनएसएएम(NSAM)) 196 के साथ कार्यकारिणी समिति एक्सॉम (EXCOMM) की स्थापना की. शाम 5:00 बजे, वे कांग्रेस के नेताओं से मिले, जो कलहपूर्वक नाकाबंदी का विरोध कर रहे थे और एक तगड़ी प्रतिक्रया की मांग कर रहे थे. मास्को में, राजदूत कोहलर ने अध्यक्ष ख्रुश्चेव को आसन्न नाकाबंदी और राष्ट्र के नाम कैनेडी के भाषण के बारे में बताया. दुनिया भर के राजदूतों ने गैर-पूर्वी खेमे के नेताओं को अग्रिम सूचना दे दी. भाषण से पहले, यू.एस. (U.S.) के प्रतिनिधिमंडल ने कनाडा के प्रधानमंत्री जॉन डिफेनबेकर , ब्रिटिश प्रधानमंत्री हेरोल्ड मैकमिलन, पश्चिम जर्मन चांसलर कोनराड अड़ेनौअर और फ्रांस के राष्ट्रपति चार्ल्स डी गाल के साथ मुलाकात की और उन्हें यू.एस. (U.S.) ख़ुफ़िया विभाग तथा अपनी प्रस्तावित प्रतिक्रिया के बारे में बताया. सभी ने यू.एस. (U.S.) की स्थिति का समर्थन किया.[29]
22 अक्टूबर, सोमवार शाम को 7:00 बजे EST, राष्ट्रपति कैनेडी ने सभी प्रमुख नेटवर्क द्वारा प्रसारित एक देशव्यापी टेलीविजन भाषण दिया, जिसमें मिसाइलों की खोज की घोषणा की.
कैनेडी ने प्रशासन की योजना को वर्णित किया:
भाषण के दौरान विश्व भर में यूएस (US) सेनाओं को DEFCON 3 (defense readiness condition) में रखे जाने का निर्देश जारी हुआ.
[संपादित करें] गहराता संकट
23 अक्टूबर, मंगलवार सुबह 11:24 बजे EST को, जॉर्ज बॉल का तैयार किया गया मसौदा केबिल से तुर्की में यू.एस. (U.S.) राजदूत और नाटो के यू.एस. (U.S.) राजदूत के पास पहुंचा, जिसमें उन्हें सूचित किया गया था कि वे क्यूबा से सोवियत की वापसी के एवज में इटली और तुर्की से मिसाइलों को हटा लेने पर विचार कर रहे हैं, जैसा कि यू.एस. (U.S.) को पता था कि वो मिसाइलें लगभग बेकार किस्म की थीं. तुर्की के अधिकारियों ने कहा कि उनके देश में यू.एस. (U.S.) मिसाइलों की उपस्थिति को लेकर अगर उन्होंने कोई सौदा किया तो वे "अत्यंत नाराज" होंगे.[30] दो दिन बाद, गुरुवार 25 अक्टूबर की सुबह, पत्रकार वाल्टर लिपमैन ने सिंडिकेटेड स्तम्भ में ठीक वही बात प्रस्तावित किया. कास्त्रो ने क्यूबा की आत्मरक्षा के अधिकार के बारे में फिर से अपना दावा दुहराया और कहा कि उसके सारे हथियार रक्षात्मक हैं और क्यूबा किसी जांच की अनुमति नहीं देगा.[7]
[संपादित करें] अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
कैनेडी के भाषण को ब्रिटेन में कोई ख़ास पसंद नहीं किया गया था. भाषण के अगले दिन, सीआईए की पिछली भूलों को याद करते हुए ब्रिटिश प्रेस ने क्यूबा में सोवियत अड्डे के अस्तित्व को नहीं माना, और उसका अनुमान था कि कैनेडी की यह कार्रवाई उनके पुनर्निर्वाचन से संबंधित हो सकती है.[31]
कैनेडी के भाषण के दो दिन बाद, चीनी पीपुल्स डेली ने घोषणा की कि "650,000,000 चीनी पुरुष और महिलाएं क्यूबा की जनता के साथ खड़े हैं."[32]
जर्मनी में, समाचार पत्रों ने संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रतिक्रिया का समर्थन किया, लगे हाथ पिछले महीनों के दौरान इस क्षेत्र में ढुलमुल अमेरिकी कार्रवाईयों के साथ इसकी तुलना भी कर डाली. उन्होंने अपने कुछ भय भी व्यक्त किये कि सोवियत संघ बर्लिन में बदला ले सकता है.[31] 23 अक्तूबर को फ्रांस में,यह संकट सभी दैनिक समाचार पत्रों की सुर्खियां बना हुआ था. अगले दिन, ले मोंडे के एक संपादकीय में सीआईए के फोटोग्राफिक सबूत की प्रामाणिकता के बारे में संदेह व्यक्त किया गया. दो दिन बाद, एक उच्चस्तरीय सीआईए (CIA) एजेंट के आने के बाद, उन्होंने तस्वीरों की वैधता को स्वीकार किया. फ्रांस में ही, ले फिगारो के 29 अक्टूबर के अंक में रेमंड एरोन ने अमेरिकी प्रतिक्रिया के समर्थन में लिखा.[31]
[संपादित करें] सोवियत प्रसारण
जब संकट निरंतर प्रचंड रूप से जारी था, तब बुधवार 24 अक्टूबर की शाम को, सोवियत समाचार एजेंसी टेलिग्राफ्नो एजेंटसत्वो सोवेत्सकोगो सोयुज़ा (तास (TASS)) ने कैनेडी के नाम ख्रुश्चेव के एक टेलीग्राम का प्रसारण किया, जिसमें ख्रुश्चेव चेतावनी दी थी कि अमेरिका की "समुद्री डाकू जैसी कार्रवाई" से युद्ध होगा. बहरहाल, इसके बाद रात 9:24 बजे ख्रुश्चेव का भेजा एक तार कैनेडी को रात 10:52 ईएसटी (EST) बजे मिला, जिसमें ख्रुश्चेव ने कहा था, "आवेग को छोड़कर अगर आप विकसित हो रही स्थिति को ठंडे दिमाग से देखेंगे, तो आप समझ जायेंगे कि सोवियत संघ अमेरिका की मनमानी मांगों को खारिज करने से नहीं चूकेगा," और सोवियत संघ नाकाबंदी को "एक हमले की कार्रवाई" के रूप में देखता है और उसके जहाज़ों को इसकी उपेक्षा करने के निर्देश दिए जायेंगे.
[संपादित करें] अमेरिकी सतर्कता स्तर में बढ़ोतरी
गुरुवार, 25 अक्टूबर को संयुक्त राज्य अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने का अनुरोध किया. सुरक्षा परिषद् की आपात बैठक में यू.एन. (U.N.) में यू.एस. (U.S.) राजदूत अडलाई स्टीवेंसन ने सोवियत राजदूत वैलेरियन ज़ोरीन का सामना करते हुए ऊंची आवाज में रोब जमाने के स्वर में उनसे मिसाइलों के अस्तित्व को स्वीकार करने की मांग की. राजदूत जोरीन ने जवाब देने इंकार कर दिया. अगले दिन रात 10:00 ईएसटी (EST) बजे यू.एस. (U.S.) अमेरिका ने डेफकॉन (DEFCON) 2 बलों के बराबर एसएसी (SAC) बलों के तत्परता स्तर को बढ़ा दिया. अमेरिकी इतिहास में एकमात्र पक्के समय के लिए बी-52 बमवर्षकों को 15 मिनट की नोटिस पर विभिन्न स्थानों के लिए रवाना किया गया और उन्हें पूरी साज-सज्जा के साथ उड़ान भरने को तैयार रहने के लिए कहा गया.[33] एसएसी (SAC) के 1,436 बमवर्षकों में से आठवें हिस्से को विमानस्थ रहने के लिए सावधान कर दिया गया था, जबकि एयर डिफेन्स कमांड (एसीडी (ADC)) ने 161 परमाणु-हथियार से लैस अवरोधक विमानों को 16 वितरण क्षेत्रों में नौ घंटे के अंदर पुनः वितरित किया, जिनमे से एक-तिहाई को 15-मिनट की सावधान अवस्था में रखा गया.[28]
"२२ अक्टूबर तक, सामरिक वायु कमान (टीएसी (TAC)) ने एक घंटे की सतर्क अवस्था में क्यूबा का सामना करने के लिए 511 लड़ाकू विमानों सहित मददगार टैंकरों और टोही विमानों को तैनात कर दिया था. हालांकि, टीएसी और सैन्य एयर ट्रांसपोर्ट सेवा की समस्याएं थीं. फ्लोरिडा में विमानों के जमाव से कमान और सहायक पंक्तियों में तनाव पैदा हुआ; हमें सुरक्षा, हथियारों और संचार में कर्मियों की कमी के संकट का सामना करना पडा; पारंपरिक युद्ध सामग्री के युद्ध-आरक्षित भंडार के लिए आरंभिक अनुमति के अभाव में TAC को मजबूरन उधार लेना पडा; और किसी बड़े हवाई ड्रॉप में सहायता के लिए हवाई परिवहन सामग्री की कमी के कारण 24 रिजर्व स्क्वाड्रनों के लिए भर्ती का आदेश देना जरुरी हो गया.[28]
25 अक्टूबर, गुरुवार की सुबह 1:45 ईएसटी (EST) बजे कैनेडी ने ख्रुश्चेव के तार का जवाब देते हुए कहा कि यू.एस. (U.S.) को कार्रवाई के लिए मजबूर किया गया है, हमें लगातार यह आश्वासन मिलता रहा कि क्यूबा में कोई आक्रामक हथियार नहीं लगाए गये हैं, और जब ये आश्वासन गलत साबित हुए तब तैनाती "के खिलाफ वो प्रतिक्रियाएं जरुरी हो गयीं जिनकी मैंने घोषणा की है... मुझे आशा है कि आपकी सरकार पहले की स्थिति की बहाली के लिए आवश्यक कार्रवाई करेगी."
[संपादित करें] संगरोध को चुनौती
गुरुवार की सुबह 7:15 ईएसटी (EST) बजे यूएसएस एसेक्स (USS Essex) और यूएसएस गेयरिंग (USS Gearing) ने बुखारेस्ट को बीच में रोकने का प्रयास किया मगर ऐसा करने में विफल रहे. काफी हद तक निश्चित था कि उस टैंकर में कोई सैन्य सामग्री नहीं थी, इसे नाकाबंदी से जाने की अनुमति दे दी गयी थी. बाद में उस दिन, शाम 5:43 पर, नाकाबंदी प्रयास के कमांडर ने यूएसएस कैनेडी को लेबनानी मालवाहक जहाज मरुक्ला (Marucla) को रोकने और उस पर चढ़ने का आदेश दिया. यह काम अगले दिन हुआ, और उसके कार्गो की जांच के बाद मरुक्ला को नाकाबंदी से बहार जाने की अनुमति दे दी गयी.[34]
25 अक्तूबर, गुरुवार की शाम 5:00 ईएसटी (EST) बजे विलियम क्लीमेंट्स ने घोषणा की कि क्यूबा में मिसाइलों पर अभी भी सक्रिय रूप से काम किया जा रहा है. बाद में सीआईए (CIA) की एक रिपोर्ट द्वारा इस रिपोर्ट को सत्यापित किया गया, जिसके अनुसार काम ज़रा भी धीमा नहीं हुआ था. जवाब में, कैनेडी ने सुरक्षा कार्रवाई ज्ञापन 199 जारी किया, इसके द्वारा SACEUR (सोवियत संघ पर पहला हवाई हमला करने का जिसका जिम्मा था) के कमांड के तहत विमानों पर परमाणु हथियार लादने के काम के लिए अधिकृत किया गया. दिन के दौरान, सोवियतों ने १४ जहाजों को वापस करके अपनी संगरोध पर प्रतिक्रिया दिखाई, उन जहाजों में संभवतः आक्रामक हथियार लदे थे.[33]
[संपादित करें] संकट गतिरोध
अगली सुबह, शुक्रवार, 26 अक्टूबर, कैनेडी ने एक्सॉम (EXCOMM) को सूचित किया कि उनका मानना है कि सिर्फ आक्रमण से ही क्यूबा से मिसाइलों को हटाया जा सकेगा. हालांकि, इस मामले को समय देने तथा सैन्य व कूटनीतिक दबाव जारी रखने के लिए उन्हें राजी किया गया. वे सहमत हुए और उन्होंने द्वीप पर कम ऊंचाई की उड़ानों में वृद्धि करने के आदेश दिए, प्रतिदिन दो बार की जगह दो घंटे में एक बार उड़ान भरने का आदेश दिया गया. क्यूबा पर अगर हमला हुआ तो वहां एक नयी नागरिक सरकार की स्थापना के लिए उन्होंने एक अकस्मात कार्यक्रम का भी आदेश दिया.
इस बिंदु पर, संकट जाहिरा तौर पर एक गतिरोध में फंस गया था. यूएसएसआर (USSR) ने कोई संकेत नहीं दिया था कि वे पीछे हटने वाले हैं और उन्होंने इसके विपरीत कई टिप्पणियां कीं. यू.एस (U.S.) के पास कुछ और विश्वास करने का कोईकार्न नहीं था और वह आक्रमण की तैयारी के शुरुआती दौर में था, साथ ही सोवियत संघ पर नाभिकीय हमला करने की भी योजना थी अगर उसने सैन्य प्रतिक्रिया की, जो मान लिया गया था.[35]
[संपादित करें] गुप्त वार्ता
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26 अक्टूबर शुक्रवार दोपहर 01:00 ईएसटी (EST) बजे एलेक्जेंदर फोमिन के अनुरोध पर एबीसी न्यूज (ABC News) के जॉन ए. स्कैली ने दोपहर का खाना साथ खाया. फोमिन ने कहा, "लगता है युद्ध छिड़ने वाला है," और उन्होंने स्कैली से अपने संपर्कों का इस्तेमाल करके विदेश विभाग में अपने "उच्च स्तर के मित्रों" से बात करके यह टटोलने को कहा यू.एस. (U.S.) कूटनीतिक समाधान में रूचि रखेगा या नहीं. उन्होंने सुझाव दिया कि समझौते की भाषा में सोवियत यूनियन यूएन (UN) की निगरानी में हथियार हटा लेने का आश्वासन दें और कास्त्रो सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करें कि भविष्य में वे इस तरह के हथियार को स्वीकार नहीं करेंगे, बदले में यू.एस. (U.S.) सार्वजनिक बयान जारी करेगा कि वह क्यूबा पर कभी हमला नहीं करेगा. यू.ए. (U.S.) ने ब्राजील सरकार से कास्त्रो तक यह संदेश पहुंचाने के लिए कहते हुए अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की कि अगर हथियार हटा लिये गए तो यू.एस. (U.S.) की ओर "हमला करने की संभावना नहीं" होगी.
26 अक्टूबर शुक्रवार की शाम 6:00 ईएसटी (EST) बजे, विदेश विभाग को एक संदेश मिलना शुरू हुआ जो ख्रुश्चेव द्वारा व्यक्तिगत रूप से लिखा गया लगता था. मॉस्कों में तब शनिवार रात 2:00 बजे का वक्त था. लंबे पत्र को पहुंचने में कई मिनट लग गए, और लंबे पत्र का अनुवाद होने और इसके अनुलेखन में और भी अतिरिक्त समय लग गया.
रॉबर्ट कैनेडी ने इसे "बहुत लंबा और भावुक पत्र" कहा. ख्रुश्चेव ने बुनियादी रूपरेखा को दोहराया, जिसके बारे में जॉन स्कैली को एक दिन पहले ही कहा गया था, "मेरा प्रस्ताव है: अपनी ओर से हम यह घोषणा करेंगे कि क्यूबा के लिए हमारे पोतों में कोई भी हथियारों नहीं होंगे. आप घोषणा करेंगे कि संयुक्त राज्य अमेरिका क्यूबा पर हमला नहीं करेगा और किसी अन्य बलों का, जो क्यूबा पर हमला करने की मंशा रखता हो, का समर्थन नहीं करेगा. तब क्यूबा में हमारे सैन्य विशेषज्ञों की उपस्थिति की आवश्यकता नहीं रह जाती है." शाम 6:45 ईएसटी (EST) बजे स्कैली को दिया गया फोमिन का प्रस्ताव अंतत: सुना गया और ख्रुश्चेव के पत्र के आगमन के सिलसिले में एक "तैयारी" के रूप में इसकी व्याख्या की गयी. पत्र को तब आधिकारिक और यर्थाथ माना गया, हालांकि बाद में यह पता चला कि फोमिन कुछ हद तक निश्चित रूप में बैगर किसी आधिकारिक समर्थन के स्वयं अपने तई यह कर रहे थे. पत्र के अतिरिक्त अध्ययन का आदेश दिया गया और यह काम रात भर चलता रहा.
[संपादित करें] संकट जारी रहा
दूसरी ओर कास्त्रो को यकीन दिलाया गया कि आक्रमण जल्द ही होनेवाला है, और उन्होंने एक पत्र ख्रुश्चेव को लिखवाया, जिसे यू.एस. (U.S.) पर पूर्वक्रियक हमले की मांग के रूप में देखा गया. उन्होंने क्यूबा में सभी विमान भेदी हथियारों का बौछार यू.एस. (U.S.) विमानों पर करने का भी आदेश दिया,[36] जबकि इससे पहले केवल दो या दो से अधिक को छोड़ने का आदेश था. 27 अक्टूबर शनिवार, सुबह 6:00 ईएसटी (EST) बजे सीआईए (CIA) ने यह बताते हुए एक ज्ञापन दिया कि सैन क्रिस्टोबॉल के चार में से तीन मिसाइल स्थलों और सागुआ ला ग्रैंडे के दो स्थलों पर पूरी कार्रवाई हुई नजर आती है. उसने यह भी कहा कि क्यूबा की सेना का कार्रवाई के लिए व्यवस्थित होना जारी है, हालांकि उन्हें यह आदेश दिया गया है कि जब तक हमला न हो कोई कार्रवाई न की जाए.[कृपया उद्धरण जोड़ें]
27 अक्टूबर की शनिवार सुबह 9:00 ईएसटी (EST) बजे रेडियो मास्को ने ख्रुश्चेव के एक संदेश का प्रसारण शुरू किया. पिछली रात के पत्र के विपरीत इस संदेश में एक नया प्रस्ताव दिया गया, कि इटली और तुर्की से जूपिटर मिसाइलें हटा ली गयीं तो बदले में क्यूबा से मिसाइलें हटा ली जाएंगी. सुबह 10:00 ईएसटी (EST) बजे स्थिति पर चर्चा के लिए कार्यकारी समिति की फिर से बैठक हुई और यह निष्कर्ष निकला कि क्रेमलिन में ख्रुश्चेव और पार्टी के अन्य अधिकारियों के बीच आंतरिक तर्क-वितर्क के बाद संदेश में परिवर्तन हुआ.[37] मैकनैमारा ने पाया कि ग्रोज्नी नाम का एक और टैंकर रवाना होने600-मील (970 कि.मी.) को है, उसे रोक दिया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी पाया कि उनलोगों ने यूएसएसआर (USSR) को संगरोधी रेखा के बारे में जागरूक नहीं किया गया है, इसीलिए संयुक्त राष्ट्र में यू थांट के जरिए उन्हें यह सूचना पहुंचा देने का उन्होंने सुझाव दिया.
जबकि बैठक जारी रहने के दौरान सुबह 11:03 ईएसटी (EST) बजे ख्रुश्चेव की ओर से एक नया संदेश आना शुरू हुआ, संदेश के एक भाग में कहा गया,
कार्यकारी समिति की बैठक पूरे दिन भर जारी रही.
संकट के पूरे समय, तुर्की बार-बार कहता रहा कि अगर जूपिटर मिसाईल को हटा लिया गया तो इससे उसे परेशानी होगी. इटली के प्रधानमंत्री फंफानी, जो अस्थायी विदेश मंत्री भी थे, ने समझौते के लिए मोलभाव के तौर पर आपुलिया में तैनात मिसाइलों को हटा लेने की अनुमति दिए जाने की पेशकश की. उन्होंने यह संदेश अपने एक बहुत ही विश्वास्त मित्र और आरएआई-टीवी (RAI-TV) के महाप्रबंधक एत्तोरे बेर्नाबी को आर्थर एम. स्च्लेसिंगेर, जूनियरको संप्रेषित करने के लिए दिया.. बेर्नाबी उपग्रह टीवी प्रसारण पर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए न्यूयॉर्क में थे. सोवियत संघ इससे अनजान था कि अमेरिका के लिए जूपिटर मिसाइलें बेकार थीं और उनकी जगह पोलरिस परमाणु बैलिस्टिक पनडुब्बी मिसाइल द्वारा ली जा चुकी हैं.[6]
27 अक्टूबर की सुबह, यूएसएएफ (USAF) मेजर रुडोल्फ एंडरसन द्वारा चलाया जानेवाला एक यू-2एफ (U-2F) (हवा में ईंधन भरनेवाले के लिए सीआईए यू-2ए (CIA U-2A) को तीसरी बार रूपांतरित किया गया)[38] विमान आगे की कार्रवाई स्थल फ्लोरिडा के मैककॉय एएफबी के लिए रवाना कर दिया गया, और लगभग दोपहर 12:00 ईएसटी (EST) को क्यूबा से चले एस-75 (S-75) डिविना (नाटो द्वारा नियुक्त SA-2 दिशानिर्देश ) एसएएम (SAM) मिसाइल द्वारा विमान पर हमला हुआ. विमान नीचे मार गिराया गया और मेजर एंडरसन मारे गए. यूएसएसआर (USSR) और यू.एस. (U.S.) के बीच वार्ता में तनाव गहरा गया, और कुछ समय बाद पता चला कि मिसाइल को छोड़ने का निर्णय एक स्थानीय तौर पर एक अनिश्चित सोवियत कमांडर द्वारा उसके अपने अधिकार के तहत लिया गया था. अगले दिन दोपहर 3:41 (EST) बजे कई यू.एस. (U.S.) नौसेना आरएफ-8ए क्रुसेडर (RF-8A Crusader) विमान निचले स्तर के तस्वीर टोही मिशन पर रवाना हुआ और उनमें से एक पर 37 मिमी गोले द्वारा मार किया गया, लेकिन किसी तरह बेस पर लौटने आया.
शाम 4:00 ईएसटी (EST) बजे, कैनेडी ने व्हाइट हाउस में एक्सॉम (EXCOMM) के सदस्यों की फिर से बुलाया और आदेश दिया कि एक संदेश तुरंत यू थांट को भेजा जाए कि वह सोवियत को कहे कि वार्ता चलने के दौरान वह मिसाइल कार्रवाई को "निलंबित" रखे. इस बैठक के दौरान, मैक्सवेल टेलर ने समाचार दिया कि यू-2 (U-2) को मार गिराया गया है. कैनेडी ने पहले ही कह दिया था कि अगर हमला हुआ तो वे उन स्थलों पर हमले का आदेश देंगे, लेकिन उन्होंने तय किया कि वे ऐसा तब तक नहीं करेंगे जब तक कि दूसरी बार हमला नहीं होता. 40 सालों के बाद मैकनैमारा ने एक साक्षात्कार में कहा:
[संपादित करें] प्रतिक्रिया मसौदा
कैनेडी द्वारा दूत भेजे गए और निकिता ख्रुश्चेव 27 अक्टूबर शनिवार की शाम को वाशिंगटन डी.सी. के करीब क्लीवलैंड पार्क में स्थित येनचिंग पैलेस चीयनीज रेस्टुरेंट (जो 2009 को बंद हो गया) में उनसे मिलने को राजी हो गयीं.[39] कैनेडी ने सुझाव दिया कि मिसाइलों को हटा लेने के ख्रुश्चेव के प्रस्ताव को वे मान लेते है. एक्सॉम (EXCOMM) के अधिकांश सदस्यों की गैर जानकारी में, रॉबर्ट कैनेडी ने इरादों की वास्तविकता को भांपने के लिए वॉशिंगटन में यूएसएसआर (USSR) के राजदूत के साथ बैठक की. आमतौर पर एक्सॉम (EXCOMM) इस प्रस्ताव के खिलाफ था, क्योंकि इससे नाटो का प्रभुत्व कमजोर होता, और तुर्की सरकार ने बार-बार कहा था कि यह ऐसे किसी भी कार्य-व्यापार के खिलाफ था.
बैठक में प्रगति के साथ एक नई योजना उभर कर आयी और कैनेडी को धीरे-धीरे उस पर राजी किया गया. नई योजना ने राष्ट्रपति से नवीनतम संदेश की अनदेखी करने और बदले में ख्रुश्चेव के पुराने को मान लेने की मांग की. शुरू में कैनेडी यह सोच कर अनिश्चित थे कि ख्रुश्चेव उस समझौते को अब स्वीकार नहीं करेंगे, क्योंकि वैसे भी नए की पेशकश की जा चुकी थी, लेकिन लेवेलियन थॉम्पसन ने दलील पेश की कि वे इसे स्वीकार कर ही सकते हैं. व्हाइट हाउस के विशेष परामर्शदाता और सलाहकार टेड सोरेंसेन और रॉबर्ट कैनेडी बैठक करके चले गए और 45 मिनट बाद एक मसौदा पत्र के प्रभाव के साथ वापस लौटे. राष्ट्रपति ने इसमें कई परिवर्तन किए थे, टाइप किया गया और इसे भेजा गया.
एक्सॉम (EXCOMM) की बैठक के बाद, ओवल कार्यालय में एक और छोटी बैठक जारी रही. दल ने दलील दी कि राजदूत डोब्रेनिन को दिया गया पत्र एक मौखिक संदेश के साथ यह कहते हुए रेखांकित होना चाहिए कि अगर मिसाइलें हटा नहीं ली गईं तो उन्हें हटाने के लिए सैन्य कार्रवाई की जाएंगी. डीन रस्क ने एक प्रावधान जोड़ा कि समझौते की भाषा में कहीं भी तुर्की का जिक्र नहीं होगा, लेकिन एक सहमति होगी कि इसके बाद "स्वेच्छा से" मिसाइलें तुरंत हटा ली जाएंगी. राष्ट्रपति इस पर सहमत हो गए और संदेश भेजा दिया गया.
जुऑन ब्रिटो की गुजारिश पर फोमिन और स्कैली फिर से मिले. स्कैली ने पूछा कि ख्रुश्चेव के दो पत्र इतने अलग क्यों हैं, तो फोमिन ने दावा दिया कि "खराब संप्रेषण" के कारण ऐसा हुआ होगा. स्कैली ने जवाब दिया कि यह दावा विश्वसनीय नहीं और वे चिल्लाए कि उन्हें सोचा कि यह "एक बेकार धोखा था". वे यह कह कर चले गए कि आक्रमण अब केवल कुछ ही घंटे का मामला है, इस बिंदु पर फोमिन ने कहा कि ख्रुश्चेव से यू.एस. (U.S.) के संदेश की प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही है, और उन्होंने स्कैली से विदेश विभाग को यह कहने का आग्रह किया कि छल करने का ऊनका कोई इरादा नहीं था. स्कैली ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि कोई इस पर विश्वास करेगा, लेकिन वे संदेश दे देने के लिए सहमत हो गए. दोनों अपने-अपने अलग रास्तों पर चले गए, और स्कैली ने एक्सॉम (EXCOMM) के लिए तुरंत एक ज्ञापन टाइप किया.[कृपया उद्धरण जोड़ें]
यू.एस. (U.S.) प्रतिष्ठान के भीतर इसे अच्छी तरह समझ लिया गया कि दूसरे प्रस्ताव की अनदेखी करने और पहले को मान लेने से ख्रुश्चेव एक भयानक स्थिति पड़ गए हैं. सैन्य तैयारियां जारी रही, और संभावित कार्रवाई के लिए एअर फोर्स के सभी अधिकारियों को सक्रिय ड्यूटी के लिए उनके अड्डों पर वापस बुला लिया गया. बाद में रॉबर्ट कैनेडी ने उस मनोदशा को याद करते हुए कहा, "हमलोगों ने उम्मीद एकदम से नहीं छोड़ दी थी, लेकिन अगले कुछ घंटों में अपनी स्थिति का जब ख्रुश्चेव पुनरावलोकन करने लगे हों तो अब और क्या उम्मीद की जा सकती थी. यह एक उम्मीद थी, न कि अपेक्षा. मंगलवार या संभवत: कल तक सैन्य संघर्ष की अपेक्षा थी ..."[कृपया उद्धरण जोड़ें]
रात 8:05 ईएसटी (EST) एक पत्र अगले दिन दिए जाने के लिए तैयार किया गया. संदेश इस तरह था, "जैसा कि मैंने आपका पत्र पढ़ा, आपके प्रस्ताव की मुख्य बातें - जितना भी मैं उन्हें समझ सका, लगता है वे स्वीकारयोग्य हैं - जो निम्नलिखित हैं: 1) आप क्यूबा से इन हथियार प्रणालियों को राष्ट्र संघ के उपयुक्त पर्यवेक्षण और निगरानी में यथोचित सुरक्षा के साथ हटा लेने और आइंदा इस तरह के अस्त्र प्रणालियों को क्यूबा में नहीं रखने के लिए सहमत हो गए हैं. 2) हमारी ओर से हम संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से पर्याप्त व्यवस्था की स्थापना करेंगे, इन प्रतिबद्धताओं (क) तुरंत हटाने के संगरोधी उपायों अभी प्रभावी करने (ख) क्यूबा पर हमला न करने का आश्वासन देने, को पूरा करने और उन्हें जारी रखने पर सहमत हैं." कहीं "देर" न हो जाए, इसे सुनिश्चित करने के लिए इस पत्र को सीधे प्रेस के लिए भी रिलीज कर दिया गया.[कृपया उद्धरण जोड़ें]
पत्र मिलने के साथ ही एक समझौता तैयार हुआ. हालांकि जैसे कि रॉबर्ट कैनेडी ने जिक्र किया, एक छोटी-सी अपेक्षा थी कि इसे स्वीकार कर लिया जाएगा. रात 9:00 ईएसटी (EST) बजे अगले दिन की कार्रवाई पर विचार करने के लिए एक्सॉम(EXCOMM) की फिर से बैठक हुई. मिसाइल स्थलों के साथ ही साथ अन्य आर्थिक लक्ष्यों, विशेष रूप से पोट्रोलियम भंडारण पर हवाई हमलों की योजनाओं को रोक दिया गया. मैकनैमारा ने कहा कि उन्हें "दो चीजें तैयार रखनी" ही पड़ेंगी: क्यूबा के लिए एक सरकार, क्योंकि हमें इसकी जरूरत पड़ने वाली है; और दूसरा, यूरोप में सोवियत संघ से कैसे निपटा जाय इसकी योजनाएं, क्योंकि निश्चित तौर पर वे लोग वहां कुछ न कुछ गड़बड़ करने वाले हैं.[कृपया उद्धरण जोड़ें]
27 अक्टूबर, शनिवार की मध्य रात्रि 12:12 ईएसटी (EST) को यू.एस. (U.S. ) ने अपने नाटो (NATO) सहयोगियों को सूचित किया कि "स्थिति कमजोर होने जा रही है ... संयुक्त राज्य अमेरिका को जरूरी लगता है बहुत ही कम समय के भीतर अपने हितों के लिए उसे और पश्चिमी गोलार्द्ध में उसके सहयोगी देशों को कोई भी सैन्य कार्रवाई करना जरूरी हो सकता है." सुबह 6 बजे सीआईए (CIA) ने चिंता में और इजाफा करने के लिए रिपोर्ट किया कि क्यूबा में सभी मिसाइलें कार्रवाई के लिए तैयार थीं.
बाद में उसी दिन, इस जानकारी के बगैर ही कि पनडुब्बी परमाणु-सिरे वाला टारपिटो के ऐसे क्रम में लैस था ताकि अगर पनडुब्बी के ढांचे में "छेद हो जाए" (गहराई पर मार करनेवाले हथगोले से सतह पर आग लगने पर छेद हो जाना) तो इसके प्रयोग किया जा सके, यूएस (US) नौसेना ने बहुत सारा "सिग्नलिंग डीप चार्जेज" (बहुत गहराई में छोड़े जानेवाले हैंड ग्रैनेड का आकार[40]) संगरोधी रेखा में सोवियत पनडुब्बी (बी-59) पर गिराया, व्हाइट हाउस ने बाद में उसे "काला शनिवार" कहा.[41] उसी दिन, यू.एस. (U.S.) के एक जासूसी विमान U-2 ने गलती से, अनाधिकृत रूप से सोवियत संघ के सुदूर पूर्वी तट के ऊपर से उड़ान भरी.[42] व्रेंगल द्वीप से सोवियत का मिग लड़ाकू विमान तेजी से उड़ा और इसके प्रतिक्रियास्वरूप अमेरिका ने हवा से हवा में मार करनेवाले परमाणु मिसाइलों के साथ F-102 को बेरिंग सागर के ऊपर भेजा.[43]
[संपादित करें] संकट का अंत
सोवियत संघ और कैनेडी की कैबिनेट के बीच काफी विचार-विमर्श के बाद, कैनेडी गुप्त रूप से दक्षिणी इटली और तुर्की में सभी मिसाइलों को हटा लेने पर सहमत हुए, बाद में सोवियत संघ की सीमा पर से भी, बदले में ख्रुश्चेव ने क्यूबा से सभी मिसाइलें हटा लीं.
20 अक्टूबर, सोमवार के दिन सुबह 9:00 ईडीटी (EDT) बजे मॉस्को रेडियो पर ख्रुश्चेव का नया संदेश प्रसारित किया गया. ख्रुश्चेव ने कहा कि, "सोवियत सरकार ने, हर्थियारों निर्माण स्थलों पर काम बंद करने के पहले के जारी निर्देश के अलावा, जिसे आप 'आक्रामक' बताते हैं, उन हथियारों को नष्ट करने और उन्हें पेटीबंद करके सोवियत संघ वापस लाने का एक नया आदेश भी जारी किया है.
कैनेडी ने तुरंत बयान जारी करते हुए इसे "शांति के लिए एक महत्वपूर्ण और रचनात्मक कदम" बताया. एक औपचारिक पत्र में उन्होंने आगे कहा: "सत्ताइस अक्टूबर को आपको लिखे गए मेरे पत्र और आज आपके जवाब को मैं हमारी दोनों सरकारों का दृढ़ उपक्रम मानता हूं, जिसे मुस्तैदी के साथ जारी रखा जाना चाहिए... क्यूबा के संदर्भ में सुरक्षा परिषद के ढांचे के तहत यू.एस. (U.S.) एक बयान देगा, जो इस तरह है: यह घोषणा की जाएगी कि संयुक्त राज्य अमेरिका क्यूबा की सीमाओं की अनुल्लंघनीयता, इसकी संप्रभुता का सम्मान करेगा, आंतरिक मामले में दखल नहीं देगा, अतिक्रमण नहीं करने और क्यूबा पर हमला करने के लिए एक मोर्चे के रूप में अपनी भूमि के इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देने की शपथ लेगा, और यू.एस (U.S.) की जमीन पर से या क्यूबा के पड़ोसी देश की जमीन से क्यूबा पर आक्रमण करने की योजना बनाने वालों को रोकेगा."[44]
यू.एस. (U.S) ने संगरोध जारी रखा, और अगले दिनों में, हवाई जांच ने साबित कर दिया कि सोवियत का मिसाइल प्रणालियों को दूर हटाने का काम प्रगति पर था. 42 मिसाइलों और उनके सहयोगी उपकरणों को आठ सोवियत जहाज पर लाद दिया गया था. 5-9 नवंबर तक जहाजों ने क्यूबा छोड़ दिया. यू.एस. (U.S.) ने अंतिम दृश्य जांच किया कि हरेक जहाज संगरोधी लाइन को पार चुका हैं या नहीं. सोवियत आईएल-28 बमवर्षकों को हटाने के लिए आगे और भी राजनयिक प्रयासों की जरूरत थी, और 5 तथा 6 दिसंबर को वे तीन सोवियत जहाजों में लाद दिए गए. संगरोध औपचारिक रूप से 20 नवंबर 1962 को शाम 6:45 ईडीटी (EDT) बजे समाप्त हो गया.[27]
यू.एस. (U.S.) एटॉर्नी जनरल रॉबर्ट कैनेडी ने सोवियत राजदूत एंटोनी डोब्रेनिन से अपने समझौते में अनौपचारिक रूप से प्रस्ताव दिया कि तुर्की में जूपिटर मिसाइलों को "संकट खत्म होने के कुछ ही दिनों के भीरत" हटा लिया जाएगा.[45] आखिरी यू.एस. (U.S.) मिसाइलों को 24 अप्रैल 1963, तक खोलकर अलग-अलग कर दिया गया और इसके तुरंत बाद उन्हें तुर्की से बाहर भेज दिया गया.[46]
कैनेडी-ख्रुश्चेव की इस संधि का व्यावहारिक प्रभाव यह हुआ कि इसने प्रभावी ढंग से क्यूबा में कास्त्रो की स्थिति को मजबूत किया, साथ में निश्चित किया कि यू.एस. (U.S.) क्यूबा पर आक्रमण नहीं करेगा. यह संभव है कि ख्रुश्चेव ने क्यूबा में मिसाइलों को केवल इसलिए रखा था ताकि कैनेडी इटली और तुर्की से मिसाइले हटा ले, जबकि सोवियत का परमाणु युद्ध की शरण में जाने का कोई इरादा नहीं था; बशर्ते अमेरिकियों द्वारा गोली मार कर उनकी हत्या कर दी जाए.[कृपया उद्धरण जोड़ें] बहरहाल, चूंकि दक्षिणी इटली और तुर्की में नाटो (NATO) बेस से जूपिटर मिसाइलों का हटा लिया जाना उस समय सार्वजनिक नहीं किया गया था, इसीलिए ख्रुश्चेव संघर्ष को हारते हुए नजर आते हैं और कमजोर हो जाते है. धारणा यह बनी कि महाशक्तियों के बीच की लड़ाई में कैनेडी जीत गए और ख्रुश्चेव अपमानित हो गए. हालांकि, यह मामला पूरी तरह से ठीक ऐसा नहीं है क्योंकि कैनेडी और ख्रुश्चेव दोनों ने ही उनकी अपनी सरकारों के दबाव के बावजूद पूर्ण संघर्ष को टाल देने के लिए ही हर कदम उठाया. ख्रुश्चेव अगले दो साल तक सत्ता में बने रहे.[44]
[संपादित करें] परिणाम
ख्रुश्चेव और सोवियत संघ के लिए यह समझौता विशेष रूप से बड़ा ही शर्मनाक था, क्योंकि अमेरिकी मिसाइलों को इटली और तुर्की से हटा लेने को सार्वजनिक नहीं किया गया था - यह कैनेडी और ख्रुश्चेव के बीच एक गुप्त समझौता था. सोवियत संघ उन परिस्थितियों से पीछे हटता हुआ नजर आ रहा था जिसकी शुरूआत उनलोगों ने की थी - हालांकि इसे अगर ठीक ढंग से निभाया गया होता तो इसे विपरीत रूप में देखा जा सकता था. ख्रुश्चेव के सत्ता से हट जाने के दो साल बाद भी उनकी यू.एस. (U.S.) को संभावित रूप से रियायत देने और उचित समय पर संकट से बेखबर होने की अयोग्यता दोनों ही पोलिटब्यूरो की शर्मिंदगी में उनकी आंशिक हिस्सेदारी हो सकती है. हालांकि, क्यूबा मिसाइल संकट ख्रुश्चेव के पतन के लिए अकेले जिम्मेदार नहीं था.[कृपया उद्धरण जोड़ें]
इस संकट का हल किस तरह किया जाए इसका निर्णय कैनेडी और ख्रुश्चेव द्वारा लिये जाने को क्यूबा ने इसे सोवियत संघ द्वारा आंशिक रूप से किए विश्वासघात के रूप में लिया. क्यूबा के हित के लिए ग्वांटानामो की स्थिति जैसे कुछ मुद्दे को इसमें शामिल नहीं किए जाने से कास्त्रो विशेष रूप से परेशान थे. इस कारण क्यूबा-सोवियत के संबंध कुछ सालों के लिए खराब हो गए.[47] दूसरी ओर, आक्रमण से क्यूबा की रक्षा भी जारी रही.
इस नतीजे से यू.एस. (U.S.) के एक सैन्य कमांडर बहुत खुश नहीं थे. जनरल लेमे ने राष्ट्रपति से कहा कि "हमारे इतिहास में यह सबसे बड़ी हार है" और यू.एस. (U.S.) को तुरंत क्यूबा पर आक्रमण करना चाहिए.
क्यूबा मिसाइल संकट ने हॉटलाइन एग्रीमेंट के लिए प्रेरित किया, जिससे मॉस्को-वाशिंगटन हॉट लाइन का निर्माण मॉस्को और वाशिंगटन डी.सी. के बीच सीधे संपर्क के लिए हुआ. इसका उद्देश्य ऐसा रास्ता निकालना था, जिससे शीत युद्ध के दोनों देशों के नेता ऐसे संकट को सुलझाने के लिए सीधे संवाद स्थापित कर सके. विश्व व्यापी यूएस (US) सैन्य बल डेफोकन 3 (DEFCON 3) की स्थिति 20 नवंबर 1962 को डेफकोन 4 (DEFCON 4) में बदल गया. यू-2 (U-2) पायलट मेजर एंडरसन की लाश संयुक्त राज्य अमेरिका लौटी और उसे पूरे सैनिक सम्मान के साथ दक्षिण कैरोलिना में दफनाया गया था. नव निर्मित एअर फोर्स क्रॉस पानेवाले वे पहले थे, जिन्हें मरणोपरांत सम्मानित किया गया.
हालांकि इस संकट के दौरान केवल मेजर रुडोल्फ एंडरसन की लड़ाई में मृत्यु हुई; साथ ही 27 सितंबर और 11 नवबंर 1962 के बीच की अवधि के दौरान 55वें स्ट्रैटिजिक रीकॉनसैंस विंग (Strategic Reconnaissance Wing) के तीन रीकॉनसैंस (प्राथमिक आक्रमण) बोइंग आरबी-47 स्ट्रैटोजेट्स (Boeing RB-47 Stratojets) की दुर्घटना में चालक दल के ग्यारह सदस्य भी मारे गए थे.[48]
सेमुर मेलमैन[49] और सेमुर हेर्श[50] सहित अन्य आलोचकों का कहना है कि क्यूबा मिसाइल संकट ने यू.एस. (U.S.) को वियतनाम युद्ध की ही तरह सैन्य साधन का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया. इस रूसी-अमेरिकी टकराव ने भारत-चीन युद्ध को इसके समकक्ष लाकर खड़ा कर दिया, क्यूबा में यू.एस. (U.S.) के सैन्य संगरोध के काल के निर्धारण से इतिहासकारों[कौन?] ने अटकल लगाया कि भूमि विवाद को लेकर भारत के खिलाफ चीनी हमले का मतलब क्यूबा मिसाइल संकट से उसका एकमत होना है.[51][मृत कड़ियाँ]
[संपादित करें] संकट के बाद का इतिहास
इतिहासकार और जॉन एफ. केनेडी के सलाहाकार आर्थर स्च्लेसिंगर (Arthur Schlesinger) ने 16 अक्टूबर 2002 को नेशनल पब्लिक रेडियो पर दिए गए एक साक्षात्कार में कहा कि कास्त्रो मिसाइलें नहीं चाहते थे, लेकिन वे ख्रुश्चेव थे जिन्होंने इसके लिए कास्त्रो पर दबाव डाला था. कास्त्रो इस विचार से पूरी तरह से खुश नहीं थे, लेकिन क्यूबा को यू.एस. (U.S.) के हमले से बचाने के लिए और अपने सहयोगी सोवियत यूनियन की मदद करने के लिए क्यूबन नेशनल डाइरेक्टरेट ऑफ द रेवलूशन को उन्होंने स्वीकार किया.[47] स्च्लेसिंगर का मानना था कि मिसाइलें हटा लिये जाते तो कास्त्रो ख्रुश्चेव से और भी नाराज होते और तब वे कैनेडी के साथ होते, क्योंकि ख्रुश्चेव ने उन्हें हटाने का निर्णय लेने से पहले कास्त्रो से मश्विरा नहीं किया था.[notes 1]
1992 के शुरू में, इसकी पुष्टि हो गयी थी कि संकट टलने तक क्यूबा में सोवियत सेना ने अपने तोपों के रॉकेट और Il-28 बमवर्षक विमानों के लिए सामरिक परमाणु स्फोटक शीर्ष प्राप्त कर लिया था.[52] कास्त्रो ने कहा है कि अगर यू.एस. (U.S.) यह जानते हुए भी कि क्यूबा तबाह हो जाएगा, आक्रमण करता है तो वे इनके उपयोग की सिफारिश करेंगे.[52]
विवादास्पद रूप से इस संकट में सबसे खतरनाक क्षण की पहचान अक्टूबर 2002 को क्यूबन मिसाइल क्राइसेस हवाना सम्मेलन के दौरान ही की गयी थी. संकट के कई दिग्गजों ने इसमें भाग लिया, उन सब को पता चला कि 26 अक्टूबर 1962 को यूएसएस बाले (USS Beale) ने पीछे किया और सोवियत प्रोजेक्ट 641 (नाटो (NATO) द्वारा दिया गया नाम फॉक्सट्रोट (Foxtrot)) बी-59 नाम की पनडुब्बी पर गहराई तक संकेत देनेवाले चार्जर (हथगोले का आकार) गिरा दिया, यू.एस. (U.S.) इस बात से अनजान था कि पनडुब्बी 15 किलोटन परमाणु टारपिडो से लैस था. हवा में उड़ते हुए अमेरिकी युद्धपोत से सोवियत पनडुब्बी घिर गयी थी और उसे सतह पर आने की बहुत जरूरत थी. बी-59 के तीन अधिकारियों, जिसमें पनडुब्बी के कैप्टन वैलेंटिन सैवितस्की, राजनीतिक अधिकारी इवान सेमोनोविच मास्लेनिकोव और उप ब्रिगेड कमांडर सेकेंड कैप्टन वैसिली अर्खिपोव शामिल थे, के बीच बड़ा तर्क-वितर्क हुआ. हताश सैवितस्की आपे से बाहर हो गए और उन्होंने सामना करने लिए पनडुब्बी के बोर्ड पर परमाणु टारपिडो तैयार करने का आदेश दिया. उनमें इस बात को लेकर मतभेद था कि कमांडर अर्खिपोव सैवित्सकी हमला करने की बात पर सहमत है या सैवित्सकी ने अंतत: यह निष्कर्ष निकाला है कि सतह पर आने का केवल यही मुनासिब विकल्प खुला रह गया है.[53] सम्मेलन के दौरान रॉबर्ट मैकनैमारा ने कहा कि लोगों ने जितना सोचा था परमाणु युद्ध उससे बहुत करीब आ पहुंचा है. नेशनल सिक्योरिटी आर्काइव के निदेशक थॉमस ब्लैंटन ने कहा, "वैसिली आर्खिपोव नाम के शख्स ने दुनिया को बचा लिया."
2003 के वृत्तचित्र द फॉग ऑफ वार (The Fog of War) में यह संकट अच्छी तरह केंद्रित था, जिसने ऑस्कर जीता.
[संपादित करें] इन्हें भी देखें
- केन्द्रीय खुफिया एजेंसी
- अंतरराष्ट्रीय संकट
- कोल्ड वार
- ब्रिंकमैन्शिप (कोल्ड वार)
- बौम्बर गैप
- मिसाइल गैप
- डिनो ब्रुगियोनी
- क्यूबा-संयुक्त राज्य अमेरिका के संबंध
- क्यूबा - सोवियेट संघ के संबंध
- स्टैनिस्लव पेट्रोव
- सिनु-इन्डियन वार
- एबल आर्कर 83
- नार्वे रॉकेट घटना
[संपादित करें] मीडिया
- द मिज़ाइल ऑफ़ अक्टूबर , एक नाटकीय
- थर्टीन डेज़ (पुस्तक)
- थर्टीन डेज़ (फिल्म)
- द फौग ऑफ़ वॉर , रॉबर्ट एस. मैकनमारा अमेरिकी रक्षा के अध्यक्ष की एक फिल्म जीवनी.
- Cuban Missile Crisis: The Aftermath , इस अवधि में एक वीडियो स्थापित
- इस अवधि में द वर्ल्ड नेक्स्ट डोर नामक एक उपन्यास स्थापित
- "अनआर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट", बरट्रांड रसेल, रस्किन हॉउस- जॉर्ज एलेन एंड अन्विन लिमिटेड, लंडन, 1963
[संपादित करें] नोट्स
- ↑ अपनी जीवनी में, कास्त्रो ने अपनी भावनाओं की तुलना उस समय के किसी भी नेता से नहीं की है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि उनके साथ मश्विरा करने में असफल ख्रुश्चेव से वे नाराज थे.1978 रामोनेट)
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[संपादित करें] अतिरिक्त पढ़ें
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[संपादित करें] हिस्टोरियोग्राफ़ी
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[संपादित करें] प्राथमिक स्रोत
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- चैंग, लॉरेंस एंड पिटर कॉर्नब्लुह, एड्स. क्यूबन मिसाइल क्राइसिस, 1962: अ नेशनल सिक्योरिटी आर्चिव डोक्युमेन्ट्स रीडर (1998) एक्सेप्ट एंड टेक्स्ट सर्च; ऑल्सो इंट्रोडक्शन ऑनलाइन
- केनेडी, रॉबर्ट एफ. थर्टीन डेज़: अ मेमोएर द क्यूबन मिसाइल क्राइसिस (2001) एक्सेप्ट एंड टेक्स्ट सर्च
- मेय, अर्नेस्ट आर. एंड फिलिप डी. ज़ेलिको, एड्स. द केनेडी टेप्स:इनसाइड द व्हाइट हॉउस ड्यूरिंग द क्यूबन मिसाइल क्राइसिस . (दूसरा संस्करण 2002). 514 पीपी.
- "द क्यूबन मिसाइल क्राइसिस: 1962" नेशनल सिक्योरिटी आर्चिव से प्राथमिक दस्तावेज और फोटो (एक विश्वविद्यालय केन्द्र ना की सरकारी केन्द्र)
[संपादित करें] प्रशिक्षण योजनाएं
- एनइएच एडसाईटमेंट (NEH EdSitement) से जॉन मोसर और लोरी हैन द्वारा "द मिसाइल ऑफ़ अक्युबर: द क्यूबन मिसाइल क्राइसिस, 1962" जो 9 से 12 ग्रेड्स के लिए प्राथमिक दस्तावेज़ों के साथ एक बहुत विस्तृत प्रशिक्षण है
- क्यूबन मिसाइल क्राइसिस, अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से मध्य विद्यालय प्रशिक्षण योजनाएं
[संपादित करें] बाहरी लिंक्स
- क्यूबन मिसाइल क्राइसिस में इंटरनेशनल स्खोलर्स डॉक्युमेंट कलेक्शन के लिए विल्सन सेंटर मे सीडब्ल्यूआईएचपी (CWIHP)
- क्यूबाई मिसाइल संकट के मिसाइल साइटों की नई तस्वीरें (2009)
- IV. पनडुब्बी के कालक्रम. क्यूबा मिसाइल संकट के दौरान संपर्क करें. 1 अक्टूबर 1962 - 14 नवम्बर 1962. जेरेमी रॉबिन्सन-लियोन और विलियम बर द्वारा तैयार.
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- डिक्लासिफाइड डॉक्युमेंट्स, एक्सट्रा - जॉर्ज वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में नेशनल सिक्योरिटी आर्चिव द्वारा उपलब्ध.
- जोइंट शेफ ऑफ़ स्टाफ द्वारा "जस्टिफिकेशन फॉर अमेरिकन मिलिट्री इंटर वेंशन इन क्यूबा," में "मेमोरैंडम फॉर द सेक्रेटरी ऑफ़ डिफेन्स" पर विवर्गीकरण, वॉशिंगटन, डी.सी., 13 मार्च 1962, क्रीपटॉम द्वारा एचटीएमएल (html) टेक्स्ट, जॉर्ज वॉशिंगटन विश्वविद्यालय में नेशनल सिक्योरिटी आर्चिव द्वारा पीडीऍफ़ (pdf).
- ट्रानस्क्रिप्ट्स एंड ऑडियो ऑफ़ एक्सकॉम (EXCOMM) मीटिंग्स - फ्रॉम द मिलर सेंटर प्रेसी डेंशियल रिकॉर्डिंग्स प्रोगरैम, यूनिवर्सिटी ऑफ़ वर्जिनिया.
- द क्यूबन मिसाइल क्राइसिस, अक्टूबर 18-29. 1962 इन्क्लुड्स रियलप्लेयर (RealPlayer) स्ट्रीमिंग ऑडियो ऑफ़ डिबेट्स बिटवीन जेऍफ़के (JFK) एंड हिस एडवाइसर ड्यूरिंग द क्राइसिस
- प्रेसिडेंट केनेडी एड्रेस टू द नेशन ऑन द सोवियेट आर्म्स बिल्ड अप इन क्यूबा
- द वर्ल्ड ऑन द ब्रिंक: जॉन एफ. केनेडी एंड द क्यूबन मिसाइल क्राइसिस
- 14 डेज़ इन अक्टूबर: द क्यूबन मिसाइल क्राइसिस हाई-स्कूल स्तर के पाठ्यक्रम
- Nuclear Files.org क्यूबाई मिसाइल संकट के बारे में परिचय, समयरेखा और लेख
- क्यूबा हवाना वृत्तचित्र क्यूबाई आज क्या सोंच रहे हैं उसके ऊपर एक वृत्तचित्र
- एल्सोस डिजिटल लाइब्रेरी द्वारा क्यूबाई मिसाइल संकट पर व्याख्या ग्रंथ सूची.
- अक्टूबर, 1962: डेफकौन (DEFKON), डेफकौन (DEFKON) 3
- स्पार्टा कास एडूकेशनल(यूके): क्यूबन मिसाइल क्राइसिस
- लैटिन अमेरिकी टास्क फोर्स
- राष्ट्रपति को क्या नहीं पता है
- दस्तावेज़-ब्रिटेन क्यूबाई
- क्यूबा मिसाइल युद्ध: एक वैकल्पिक इतिहास समयरेखा
- नो टाइम टू टॉक: क्यूबाई मिसाइल संकट
- क्यूबा में 32 गार्ड्स एयर फाइटर रेजिमेंट (1962-1963) एस. आइसेव.
साँचा:Cuba-United States relations
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- Articles with unsourced statements July 2010
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- लेख जिनमें May 2010 से मृत कड़ियाँ हैं
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- क्यूबा - संयुक्त राज्य अमेरिका के संबंध
- क्यूबाई क्रांति
- फिडेल कास्ट्रो
- क्यूबा में 1962
- की वेस्ट, फ्लोरिडा का इतिहास
- जॉन एफ. केनेडी के प्रेसीडेंसी
- निकिता ख्रुश्चेव
- संयुक्त राज्य अमेरिका के परमाणु इतिहास
- क्यूबा - सोवियेट संघ के संबंध
- सोवियेट संघ - अमेरिका के संबंध
- अंतरराष्ट्रीय संबंधों में 1962
- 1991 में संघर्ष
- संयुक्त राज्य अमेरिका में 1962
- सोवियेट संघ में 1962
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