कुछ जीवों, जैसे कि कीट-पतंगो तथा उभयचरों की विकास प्रक्रिया में इल्ली या डिंभक (लार्वा) एक अपरिपक्व अवस्था है। एक इल्ली का रूप रंग उसके व्यस्क रूप से एकदम भिन्न हो सकता है। जैसा कि तितली एंव उसकी इल्ली का होता है। प्रायः इल्ली में कुछ ऐसे अंग पाए जाते हैं जो उसके व्यस्क रूप में नहीं होते हैं।