इन्द्रियबोध

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शार्क में विद्युत् क्षेत्र (ऍलॅक्ट्रिक फ़ील्ड) में परिवर्तन भांपने का इन्द्रियबोध होता है जिसका इस्तेमाल वह अपना ग्रास पकड़ने के लिए करती है

इन्द्रियबोध या शुबा उन शारीरिक क्षमताओं को कहते हैं जिनसे प्राप्त हुए ज्ञान से किसी जीव को अपने वातावरण का बोध होता है। आधुनिक विज्ञान में मनुष्यों में पाँच इन्द्रियबोध माने जाते हैं जिनके लिए भिन्न इन्द्रियाँ हैं - देखना (आँखों से), सुनना (कानों से), छूना (त्वचा से), सूंघना (नाक से) और स्वाद लेना (जीभ से)। अन्य जानवरों में अलग इन्द्रियबोध होते हैं, जिसे की कुछ मछलियों में पानी के दबाव के लिए इन्द्रियाँ होती है जिनसे वे आराम से बता पाती हैं के आसपास कोई अन्य मछली हिल रही है के नहीं। कुछ अन्य जानवर पानी में विद्युत् या चुम्बकीय क्षेत्रों में परिवर्तन को भांप लेते हैं - या शिकार करने के लिए बहुत फ़ाएदेमंद होती है क्योंकि हर अन्य जीव अपने इर्दगिर्द विद्युत् क्षेत्र पर प्रभाव डालता है।

अन्य शब्द[संपादित करें]

इन्द्रियबोध को अंग्रेज़ी में सॅन्स (sense) कहते हैं। आम हिन्दी में अंग्रेज़ी के "I sensed" जैसे वाक्य का अनुवाद "शुबा" शब्द से होता है ("मुझे शुबा हुआ")। "शुबे" को अरबी में "हासा" (حاسة) बोलते हैं जिस से "एहसास" शब्द उत्पन्न हुआ है। मराठी में इसे "जाणीव" बोलते हैं।

शुबा और बोध में अंतर[संपादित करें]

जैसे ही इन्द्रियाँ अपने वातावरण में किसी चीज़ के बारे में ज्ञान प्राप्त कर लेती हैं, उस वस्तु का शारीरिक रूप से "इन्द्रियबोध" या 'शुबा' हो जाता है। अभी मस्तिष्क ने इस शुबे का अर्थ नहीं निकाला होता। इसी कारणवश "मुझे शुबा हुआ" का अर्थ "मुझे खटका हुआ" या "मुझे शक हुआ" के अर्थ से लिया जाता है, यानि कोई जानकारी शारीरिक रूप से दर्ज तो हुई लेकिन उसका पूरा तात्पर्य नहीं निकाला गया। मस्तिष्क की कुछ ऐसी चोटे और रोग होतें हैं जिनमें किसी व्यक्ति को चीजें दिखती हैं लेकिन उनका बोध नहीं हो पाता। "विज़ुअल ऐग्नोज़िया" नाम के रोग में व्यक्ति चीज़ देखकर उसका विवरण दे सकता है लेकिन उसे पहचानता नहीं, जैसे एक घोड़ा देखकर उसकी सटीक तस्वीर हाथ से बनाने में सक्षम है लेकिन यह नहीं पहचान पता के यह एक घोड़ा है। इन व्यक्तियों में इन्द्रियबोध बिलकुल ठीक होता है लेकिन बोध की प्रक्रिया में कुछ हानि हुई होती है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]