इंटरनेट प्रोटोकॉल

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एक इंटरनेट प्रोटोकॉल (IP) ऐड्रेस एक संख्यात्मक लेबल है जो अपने नोड्स के बीच संचार के लिए इंटरनेट प्रोटोकॉल का प्रयोग करनेवाले कंप्यूटर नेटवर्क में भाग ले रहे डिवाइसेस को आबंटित किया जाता है।[1] एक IP ऐड्रेस दो प्रमुख कार्य करता है: मेजबान या नेटवर्क इंटरफ़ेस पहचान और स्थान परिचयन. इसकी भूमिका का चरित्रचित्रण इस प्रकार है: "एक नाम इंगित करता है कि हम क्या मांगते हैं। एक पता इंगित करता है कि वह कहाँ है। एक मार्ग इंगित करता है कि वहा तक कैसे पहुंचें."[2]

TCP/IP के डिजाइनर ने IP ऐड्रेस को एक 32-बिट नम्बर[1] के रूप में परिभाषित किया और इंटरनेट प्रोटोकल वर्ज़न 4 या IPv4 के नाम से जानी जानेवाली यह प्रणाली, आज भी उपयोग में है। बहरहाल, इंटरनेट के व्यापक विकास और इसके परिणामस्वरूप उपलब्ध पतों की कमी के कारण, 1995[3] में एड्रेस के लिए 128 बिट उपयोग कर के एक नया परिचयन सिस्टम (IPv6), विकसित किया गया और पिछली बार 1998[4] में RFC 2460 द्वारा मानकीकृत किया गया। हालांकि IP ऐड्रेस द्विआधारी संख्या के रूप में जमा किए जाते है, वह आमतौर पर मानवीय-पाठयोग्य चिह्नकारी जैसे 208.77.188.166 (IPv4 के लिए) और 2001:db8:0:1234:0:567:1:1 (IPv6 के लिए) में प्रदर्शित किए जाते हैं।

इंटरनेट प्रोटोकॉल नेटवर्क के बीच डाटा पैकेट भी भेजता है; IP ऐड्रेस, अनुमार्गण प्रणाली की टोपोलॉजी में स्रोत और गंतव्य नोड का स्थान उल्लिखित करता है। इस प्रयोजन के लिए, एक IP ऐड्रेस के कुछ बिट्स एक सब-नेटवर्क अभिनिहित करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इन बिट्स की संख्या IP ऐड्रेस से संलग्न, CIDR संकेतन में सांकेतिक की जाती है, जैसे 208.77.188.166/24 .

जैसे ही निजी नेटवर्क के विकास ने IPv4 एड्रेस के समापन के खतरे को उठाया, RFC 1918 ने निजी एड्रेस स्थान का एक समूह निर्धारित किया जो निजी नेटवर्क पर किसी के भी द्वारा इस्तेमाल किया जा सकता है। वह वैश्विक सार्वजनिक इंटरनेट से जुड़ने के लिए, अक्सर नेटवर्क एड्रेस अनुवादक के साथ उपयोग किए जाते हैं।

द इंटरनेट असाइंड नंबर अथौरिटी (IANA), जो सार्वभौमिक IP ऐड्रेस स्थान नियतन प्रबंध करता है, स्थानीय इंटरनेट रजिस्ट्री (इंटरनेट सेवा प्रदाता) और अन्य संस्थाओं को IP खंड आबंटन करने के लिए, पाँच क्षेत्रीय इंटरनेट रजिस्ट्री (RIRs) को सहयोग देता है।

आईपी संस्करण[संपादित करें]

इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) के दो संस्करण उपयोग में हैं: आई पी (IP) संस्करण 4 और आईपी (IP) संस्करण 6. (विवरण के लिए आई पी (IP) संस्करण इतिहास देखें.) प्रत्येक संस्करण एक आईपी (IP) एड्रेस को अलग ढंग से परिभाषित करता है। उसकी व्यापकता के कारण, सामान्य शब्द आईपी एड्रेस आम तौर पर अब भी IPv4 द्वारा परिभाषित एड्रेस को संदर्भित करता है।

दशमलव संकेतन और बाइनरी में एक IP ऐड्रेस (4 संस्करण) का एक उदाहरण.

IP संस्करण 4 पते[संपादित करें]

IPv4, 32-बिट (4 बाइट) एड्रेस का उपयोग करता है, जो एड्रेस स्थान को 4,294,967,296 (2(32)) संभव अद्वितीय एड्रेस पर सीमित करता हैं। IPv4 कुछ एड्रेस, विशेष प्रयोजनों जैसे निजी नेटवर्क (~ 18 मिलियन पते) या बहुस्त्र्पीय एड्रेस (~ 270 मिलियन पते) के लिए आरक्षित करता है। इससे अंत उपयोगकर्ताओं को नियत किए जाने वाले पतों की संख्या कम हो जाती है और जैसे ही उपलब्ध पतों की संख्या क्षय हो जाती है, IPv4 पता समापन निश्चित हो जाता है। यह पूर्वाभासी कमी IPv6 विकसित करने के लिए प्राथमिक प्रेरणा थी, जो दुनिया भर में विभिन्न तैनाती चरणों में है और IPv4 प्रतिस्थापन और इंटरनेट के लगातार विस्तार के लिए अकेली रणनीति है।

IPv4 एड्रेस आमतौर पर डॉट-दशमलव संकेतन में दर्शाए जाते हैं (चार नंबर, प्रत्येक 0 से 255 की श्रेणी में, बिंदु के द्वारा अलग किए गए, उदाहरण के तौर पर 208.77.188.166). प्रत्येक भाग एड्रेस के 8 बिट का प्रतिनिधित्व करता है और इसलिए ओकटेट कहलाया जाता है। तकनीकी लेखन के कम आम मामलों में, IPv4 एड्रेस, षोडश आधारी, अष्टाधारी, या बाइनरी अभिवेदन में प्रस्तुत किया जा सकता है। सर्वाधिक प्रतिनिधित्व में प्रत्येक ओकटेट व्यक्तिगत रूप से बदला जाता है।

IPv4 सब-नेटिंग[संपादित करें]

इंटरनेट प्रोटोकॉल के विकास के प्रारंभिक चरण में,[1] नेटवर्क के प्रशासकों ने IP ऐड्रेस का दो भागों में वर्णन किया, नेटवर्क संख्या भाग और मेजबान संख्या में भाग. एक एड्रेस में सर्वोच्च क्रम ओकटेट (सबसे महत्वपूर्ण आठ बिट्स) को नेटवर्क नंबर अभिनिहित किया जाता था और बाकी के बिट्स रेस्ट फील्ड या होस्ट आईडेनटिफायर कहलाए जाते थे और नेटवर्क के अभ्यंतर मेज़बान संख्यांकन के लिए इस्तेमाल किए जाते थे। यह पद्धति जल्द ही अननुरूप साबित हुई जैसे ही अतिरिक्त नेटवर्क विकसित हुए जो मौजूदा नेटवर्क से स्वच्छंद थे, जिन्हें पहले से ही एक नेटवर्क संख्या द्वारा अभिनिहित किया होता था। 1981 में, क्लासफुल नेटवर्क संरचना के समावेशन के साथ इंटरनेट परिचयन विनिर्देश में संशोधन किया गया।[2]

क्लासफुल नेटवर्क डिज़ाइन एक बड़ी संख्या के लिए व्यक्तिगत नेटवर्क कार्य की अनुमति देता था। एक IP ऐड्रेस के सबसे महत्वपूर्ण ओकटेट के पहले तीन बिट, एड्रेस की श्रेणी के रूप में परिभाषित किए गए। सार्वभौमिक युनिकास्ट परिचयन के लिए तीन श्रेणीयां (, और ) परिभाषित की गई। व्युत्पन्न वर्ग के आधार पर नेटवर्क पहचान पूरे पते के ऑक्टेट सीमा क्षेत्रों पर आधारित था। प्रत्येक श्रेणी नेटवर्क पहचानकर्ता में क्रमशः अतिरिक्त ओक्टेट का उपयोग करती थी, इस प्रकार से उच्च वर्ग श्रेणी ( और ) में संभव मेजबानों की संख्या कम हो जाती है। निम्न तालिका इस फलतः अप्रचलित प्रणाली का एक सिंहावलोकन देता है।

ऐतिहासिक क्लासफुल नेटवर्क संरचना
वर्ग पहले ओक्टेट में बाइनरी पहले ओक्टेट की रेंज नेटवर्क आईडी (ID) मेजबान आईडी (ID) नेटवर्क की संख्या एड्रेस की संख्या
0XXXXXXX 0-127 बी.सी.डी 27-2 = 126 224-2 = 16, 777,214
10XXXXXX 128-191 अ.ब सी.डी 214 = 16,384 2 16-2 = 65,534
110XXXXX 192-223 ए.बी.सी. डी 2 21 -1 = 2,097,151 2 8 -2 = 254

'सबनेटवर्क' और 'क्लासफुल नेटवर्क' लेख में इस अभिकल्प का विवरण समझाया गया है।

हालांकि क्लासफुल नेटवर्क अभिकल्प एक सफल विकासात्मक अवस्था थी लेकिन इंटरनेट के बेतहाशा विस्तार के कारण इसे आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया और जब नए आईपी ऐड्रेस खंड देने के लिए क्लासलेस इंटर-डोमेन रूटिंग (CIDR) का सृजन किया गया और रूटिंग प्रोटोकॉल के लिए आईपीवी4 (IPv4) ऐड्रेस का प्रयोग करने के लिए नए नियम तैयार किए गए तो इसे छोड़ दिया गया। स्वेच्छित-लंबाई उपसर्गों का आबंटन एवं अनुमार्गण करवाने के लिए सीआईडीआर (CIDR) वेरियेबल-लेन्थ सबनेट मास्किंग (VLSM) पर आधारित है।

आज, क्लासफुल नेटवर्क संकल्पना के अवशिष्ट केवल एक सीमित क्षेत्र में काम करते हैं जो कि कुछ नेटवर्क सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर घटकों (अर्थात् नेटमास्क) के डिफाल्ट कन्फीग्रेशन मापदण्ड हैं और नेटवर्क प्रशासकों की चर्चा के तकनीकी जार्गनों में प्रयुक्त होते हैं।

आईपीवी4 (IPv4) निजी पते[संपादित करें]

आरंभिक नेटवर्क अभिकल्प में जब संचार के लिए सभी इंटरनेट प्रयोगकर्ताओं के बीच वैश्विक स्तर पर एक छौर से दूसरे छौर तक जोड़ने की बात सोची गई तो यह लक्ष्य था कि प्रत्येक कंप्यूटर या उपकरण का एक विशिष्ट आईपी (IP) पता हो. लेकिन यह पाया गया कि हमेशा ऐसा कर पाना संभव नहीं है क्योंकि निजी नेटवर्क विकसित हो गए और सार्वजनिक पतों का स्थान संरक्षित करने की जरूरत पड़ी (आईपीवी4 पते समापन).

जो कंप्यूटर इंटरनेट से नहीं जुड़े हैं, जैसे कि कारखाने की मशीनें जो टीसीपी/आईपी (TCP/IP) के माध्यम से केवल आपस में संचार करती हैं, उनके लिए वैश्विक तौर पर विशिष्ट आईपी (IP) पता होना जरूरी नहीं है। निजी नेटवर्क के लिए IPv4 पतों में से तीन सीमाएं, हर वर्ग के लिए एक सीमा (, , ), 1918 RFC में आरक्षित थी। इन पतों का मार्गन इंटरनेट पर नहीं किया जाता और इसलिए इनका प्रयोग आईपी पतों की पंजी के साथ समन्वित करने की आवश्यकता नहीं है।

आज, जब जरूरत पड़ती है, ऐसे निजी नेटवर्क आमतौर पर नेटवर्क पता अनुवाद (NAT) के माध्यम से इंटरनेट से कनेक्ट हो जाते हैं।

IANA-आरक्षित निजी IPv4 नेटवर्क श्रेणी
प्रारंभ अंत पते की संख्या
24 बिट ब्लॉक (/8 उपसर्ग, 1 x क) 10.0.0.0 10.255.255.255 16.777.216
20 बिट ब्लॉक (/12 उपसर्ग, 16 x बी) 172.16.0.0 172.31.255.255 1.048.576
16 बिट ब्लॉक (/16 उपसर्ग, 256 x ग) 192.168.0.0 192.168.255.255 65.536

कोई भी उपयोगकर्ता किसी भी आरक्षित ब्लाक का उपयोग कर सकते हैं। आमतौर पर, एक नेटवर्क व्यवस्थापक एक खंड का सब्नेट्स में विभाजन कर देता है, उदाहरण के लिए, कई घरेलू अनुर्मागक स्वतः 192.168.0.0 - 192.168.0.255 (192.168.0.0/24) के एक वितथ ऐड्रेस श्रेणी का उपयोग करते हैं।

IPv4 पते की कमी[संपादित करें]

आईपी (IP) संस्करण 4 पते का स्थान तेजी से अपने आधिकारिक तौर पर उपलब्ध आबंटित पते के खंडों के समापन पर पहुँच रहा है।

आईपी (IP) संस्करण 6 एड्रेस[संपादित करें]

षोडश आधारी और बाइनरी में एक IP ऐड्रेस (6 संस्करण) का एक उदाहरण.

संरक्षण तकनीकों के बावजूद, IPv4 एड्रेस स्थान के तेजी से समापन ने इंटरनेट इंजीनियरिंग टास्क फोर्स (IETF) को इंटरनेट की परिचयन क्षमता का विस्तार करने के लिए नई प्रौद्योगिकियों का पता लगाने के लिए प्रेरित किया। इसका स्थायी समाधान, इंटरनेट प्रोटोकॉल का ही एक नया स्वरूप, समझा था। इंटरनेट प्रोटोकॉल की यह अगली पीढ़ी, जिसका उद्देश्य इंटरनेट पर IPv4 की जगह लेना था, अंततः 1995[3][4] में इसे इंटरनेट प्रोटोकॉल संस्करण 6 (IPv6) का नाम दिया गया। पता आकार 32 से बढ़ा कर 128 बिट या 16 ओकटेट कर दिया गया, जो, नेटवर्क ब्लॉक के एक उदार काम के साथ भी, निकट भविष्य के लिए पर्याप्त माना जाता है। गणितीय, नया एड्रेस स्थान, अधिकतम 2(128), या लगभग 3.403×10(38) अद्वितीय पते की क्षमता प्रदान करता है।

नया डिजाइन केवल एड्रेस की पर्याप्त मात्रा प्रदान करने के लक्ष्य पर आधार नहीं है, बल्कि सबनेट अनुमार्गण उपसर्गों के कुशल एकत्रिकरण को अनुमार्गण नोड्स पर होने की अनुमति देने के लिए. परिणामस्वरूप, अनुमार्गण तालिका आकार छोटा होता हैं और सबसे छोटा संभव व्यक्तिगत आवंटन 264 होस्ट के लिए एक सबनेट है, जो पूरे IPv4 इंटरनेट के आकार का वर्गाकार है। इन स्तरों पर, वास्तविक एड्रेस उपयोग दर किसी भी IPv6 नेटवर्क खंड पर छोटा होगा. नया डिजाइन एक नेटवर्क खंड के परिचयन बुनियादी ढांचे को अलग करने का मौका भी प्रदान करता है-जो खंड के उपलब्ध स्थान का स्थानीय प्रशासन है-एक परिचयन उपसर्ग से जो एक नेटवर्क के लिए बाहरी यातायात को मार्ग देने के लिए उपयोग किया जाता है। IPv6 में ऐसी सुविधाएं है जो, यदि वैश्विक संपर्क या अनुमार्गण नीति में परिवर्तन हो, तो बिना आंतरिक नए स्वरूप या नए संख्यांकन के स्वतः ही पूरे नेटवर्क का अनुमार्गण उपसर्ग बदल देती हैं।

IPv6 पतों की बड़ी संख्या विशिष्ट प्रयोजनों के लिए बड़े ब्लॉक निर्दिष्ट करने की अनुमति देते है और जहां उचित है, कुशल मार्ग के लिए एकत्रित होने की. एक बड़े एड्रेस स्थान के साथ एक जटिल पता संरक्षण तकनीक की जरूरत नहीं होती, जैसे क्लास्लेस इंटर-डोमेन रूटिंग (CIDR) में उपयोग की जाती है।

सबmodern के अनुसार  डेस्कटॉप और उद्यम सर्वर ऑपरेटिंग सिस्टम IPv6 प्रोटोकॉल के लिए निष्कपट समर्थन शामिल करते हैं, लेकिन यह अभी तक अन्य उपकरणों जैसे होम नेटवर्किंग राऊटरज़, वोईस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (VoIP) और मल्टींमीडिया उपकरण और नेटवर्क परिधीय में व्यापक रूप से तैनात नहीं हैं।

एक IPv6 पते का उदाहरण:

2001:0db8:85a3:08d3:1319:8a2e:0370:7334

IPv6 निजी एड्रेस[संपादित करें]

जैसे IPv4 निजी या आंतरिक नेटवर्क के लिए एड्रेस आरक्षित करता है, IPv6 में निजी एड्रेस के लिए एड्रेस के विभाग अलग से समुच्चय किए होते हैं। IPv6 में, इन को यूनीक लोकल एड्रेस (ULA) के नाम से संबोधित किया जाता है। RFC 4,193 इस विभाग के लिए अनुमार्गण उपसर्ग fc00::/7 अलग से समुच्चय करता है, जो कि विभिन्न उपलक्षित नीतियों के साथ दो/ 8 विभागों में विभाजित है (cf. IPv6) एड्रेस में एक 40 बिट छद्म यादृच्छिक संख्या शामिल होती है जो साईट विलय या पैकेट के गलत मार्ग पर चल जाने से होने वाले एड्रेस मुठभेड़ के जोखिम को कम करती है।

आरंभिक डिजाइन (RFC 3,513) इस प्रयोजन के लिए एक अलग खंड का प्रयोग करते थे (fec0::), डबड साइट-स्थानीय एड्रेस. हालांकि, साइट का गठन किस से होता है, इसकी परिभाषा अस्पष्ट रही और खराब परिभाषित परिचयन नीति ने अनुमार्गण में संदिग्धता बना दी. एड्रेस रेंज विनिर्देश छोड़ दिया गया और अब नई व्यवस्था में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

fe80 से शुरू होते पते: - लिंक-लोकल एड्रेस कहलाये जाने वाले - केवल स्थानीय लिंक क्षेत्र में नियत किए जाते हैं। प्रत्येक नेटवर्क इंटरफ़ेस के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम के IP परत द्वारा आमतौर पर स्वचालित रूप से एड्रेस उत्पन्न किए जाते हैं। यह किसी भी IPv6 मेजबान के लिए तत्काल स्वत: नेटवर्क संयोजकता प्रदान करता है और इसका मतलब है कि यदि कई मेजबान एक आम हब या स्विच से जुड़ते हैं तो उनके लिंक स्थानीय IPv6 एड्रेस द्वारा उन्हें एक शीघ्र संचार मार्ग मिलता है। IPv6 नेटवर्क प्रशासन की निचली परतों में इस सुविधा का बड़े पैमाने पर और अधिकांश उपयोगकर्ताओं के लिए अप्रत्यक्ष रूप से, इस्तेमाल किया जाता है (cf. नेबर डिस्कवरी प्रोटोकॉल).

सार्वजनिक इंटरनेट में कोई भी निजी एड्रेस उपसर्ग नहीं भेजा जा सकता.

आईपी सब नेटवर्क[संपादित करें]

सब्नेटिंग की तकनीक दोनों IPv4 और IPv6 नेटवर्क में काम कर सकती हैं। आईपी एड्रेस दो भागों में विभाजित है: नेटवर्क एड्रेस और होस्ट आईडेनटीफायर . सबनेट मास्क (केवल IPv4 में) या CIDR उपसर्ग निर्धारित करता है कि कैसे IP ऐड्रेस नेटवर्क और होस्ट भागों में विभाजित है।

शब्द सबनेट मास्क केवल IPv4 में प्रयोग किया जाता है। हालंकि दोनों आईपी संस्करण, क्लासलेस इंटर-डोमेन रूटिंग (CIDR) की अवधारणा और संकेतन का उपयोग करते हैं। इस में, IP ऐड्रेस के पीछे एक स्लेश और नेटवर्क भाग के लिए इस्तेमाल की गई बिट्स की संख्या (दशमलव में), जिसे मार्ग उपसर्ग भी कहा जाता है, होते है। उदाहरण के लिए, एक IPv4 एड्रेस और उसका सबनेट मास्क क्रमशः 192.0.2.1 और 255.255.255.0 हो सकता है। एक ही आईपी एड्रेस और सबनेट मास्क के लिए CIDR संकेतन 192.0.2.1/24 है, क्योंकि आईपी पते के पहले 24 बिट नेटवर्क और सबनेट सांकेतिक करते है।

स्थिर और गतिशील आईपी एड्रेस[संपादित करें]

जब एक कंप्यूटर हर बार एक ही आई पी एड्रेस का प्रयोग करने के लिए समनुरूप किया जाता है तो वह तेज़ हो जाता है, इसे स्टेटिक IP ऐड्रेस कहते हैं। इसके विपरीत, उन स्थितियों में जब कंप्यूटर के आईपी पते स्वतः ही नियुक्त किए जाते हैं, उसे डाइनेमिक आईपी एड्रेस के रूप में जाना जाता है।

निर्धारण का तरीका[संपादित करें]

स्टेटिक IP ऐड्रेस एक व्यवस्थापक द्वारा हाथ से कंप्यूटर को सौंपा है। इसकी सटीक प्रक्रिया प्लेटफार्म के अनुसार पृथक होती है। यह डाइनेमिक आई पी एड्रेस से असादृश्य हैं, जो या तो कंप्यूटर इंटरफेस या स्वयम होस्ट सॉफ्टवेयर, जैसे ज़ेरोंकोंफ़ में, द्वारा निर्दिष्ट होते है या डाइनेमिक होस्ट कान्फिग्रेष्ण प्रोटोकॉल (DHCP) के इस्तेमाल से एक सर्वर द्वारा निर्दिष्ट किए होते है। हालांकि DHCP के उपयोग से निर्दिष्ट आईपी एड्रेस लंबे समय के लिए एक जैसे रहते हैं, वह आम तौर पर बदल सकते हैं। कुछ मामलों में, एक नेटवर्क व्यवस्थापक सक्रिय रूप से निर्दिष्ट स्टेटिक IP ऐड्रेस लागू कर सकता हैं। इस मामले में, एक DHCP सर्वर का उपयोग होता है, लेकिन एक विशिष्ट कंप्यूटर को हमेशा एक ही आईपी एड्रेस निर्दिष्ट करने के लिए, इसका समनुरूप विशेष रूप से किया जाता है। यह स्टेटिक IP ऐड्रेस को मुख्य रूप से समनुरूप होने की अनुमति देता है, जिसमें नेटवर्क पर प्रत्येक कंप्यूटर को हस्तचालित प्रणाली द्वारा विशेष रूप से समनुरूप करने की आवश्यकता नहीं पड़ती.

स्टेटिक या स्टेटफुल (DHCP) एड्रेस विन्यास के अभाव या विफलता में, एक परिचालन प्रणाली एक नेटवर्क इंटरफेस को स्टेट-लेस स्वचालित-समाकृति तकनीक, जैसे ज़ेरोकोंफ़, के उपयोग से आईपी एड्रेस निर्दिष्ट कर सकती है।

गतिशील परिचयन के उपयोग[संपादित करें]

गतिशील आईपी पते डाइनेमिक होस्ट कंफिगरेशन प्रोटोकॉल (DHCP) सर्वरों द्वारा अत्यधिक प्रायः LANs और ब्रॉडबैंड नेटवर्क पर नियुक्त होते हैं। इन्हें इसलिए इस्तेमाल किया जाता है क्यूंकि यह एक नेटवर्क पर प्रत्येक उपकरण के लिए विशिष्ट स्टेटिक एड्रेस निर्दिष्ट करने के प्रशासनिक बोझ से बचा सकते है। यह कई उपकरणों को एक नेटवर्क पर सीमित एड्रेस स्थान में सहभागी बनाने की अनुमति भी देता है, पर केवल यदि उन में से कुछ किसी विशेष समय पर ऑनलाइन हों. कई वर्तमान डेस्कटॉप ऑपरेटिंग सिस्टम में, गतिशील आईपी विन्यास डिफ़ॉल्ट रूप से सक्षम किया होता है ताकि एक उपयोगकर्ता को DHCP सर्वर के साथ एक नेटवर्क से जुड़ने के लिए अपने हाथ से कोई सेटिंग्स दर्ज करने की आवश्यकता ना पड़े. गतिशील IP ऐड्रेस निर्दिष्ट करने के लिए DHCP ही अकेली तकनीक नहीं है। डायलअप और कुछ ब्रॉडबैंड नेटवर्क बिंदु से बिंदु प्रोटोकॉल की गतिशील एड्रेस विशेषताएँ उपयोग करते हैं।

स्टिकी गतिशील IP ऐड्रेस[संपादित करें]

एक स्टिकी डाईनेमिक IP ऐड्रेस या स्टिकी आईपी केबल और DSL इंटरनेट अधिगम भुगतानकर्ता द्वारा एक गत्यात्मकता से नियुक्त आईपी एड्रेस जिसमें अक्सर बदलाव नहीं आता, उसका वर्णन करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। पते आमतौर पर DHCP प्रोटोकॉल के साथ नियुक्त किए जाते है। चूँकि मोडेम आमतौर पर विस्तारित अवधि के समय के लिए यंत्रचालित होते हैं, इसलिए एड्रेस पट्टे अक्सर लंबे समय के लिए नियमित किए जाते हैं और समाप्ति होने पर नवीकृत कर दिए जाते हैं। यदि एक मॉडेम बंद कर दिया जाए और एड्रेस पट्टे के अगले समापन से पहले फिर से संचालित किया जाए, तो इस बात की सर्वाधिक संभावना है कि उसे वही IP ऐड्रेस प्राप्त होगा.

ऐड्रेस ऑटोकॉन्फिगरेशन[संपादित करें]

RFC 3330 IPv4 नेटवर्कों के लिए स्थानीय-लिंक एड्रेसिंग में विशेष उपयोग करने के लिए एड्रेस ब्लॉक, 169.254.0.0/16, परिभाषित करता है। IPv6 में, स्थैतिक या गतिक एड्रेस कार्यों का उपयोग करने वाला, प्रत्येक इंटरफेस fe80::/10 सबनेट में स्वतः एक स्थानीय-लिंक एड्रेस प्राप्त करता है।

ये एड्रेस केवल लिंक पर वैध होते हैं, जैसे एक स्थानीय नेटवर्क खंड या बिंदुवार कनेक्शन जिससे कोई होस्ट जुड़ा हुआ हो. ये एड्रेस मार्गसक्षमीय नहीं होते और निजी एड्रेसों की तरह इंटरनेट पैकेट प्रतिबंधन के स्रोत या गंतव्य नहीं हो सकते हैं।

जब स्थानीय-लिंक IPv4 एड्रेस ब्लॉक आरक्षित हुआ था, एड्रेस स्वचालित-समाकृति के तंत्र के लिए कोई भी मानक अस्तित्व में नहीं था। शून्यता भरना, माइक्रोसॉफ्ट ने एक कार्यांवयन बनाया जिसे स्वतः निजी IP ऐड्रेसिंग (APIPA) कहा गया। माइक्रोसॉफ्ट की विपणन क्षमता के कारण APIPA को लाखों मशीनों पर तैनात किया गया है और, इस प्रकार यह उद्योग में एक वास्तविक मानक बन गया है। कई वर्षों बाद, IETF ने इस कार्यशीलता के लिए एक औपचारिक मानक, RFC 3927, स्थानीय-लिंक एड्रेस IPv4 के सक्रिय विन्यास का अधिकारी परिभाषित किया।

स्थैतिक एड्रेस के उपयोग[संपादित करें]

कुछ बुनियादी ढाँचों को स्थैतिक एड्रेस उपयोग करना आवश्यक है, जैसे कि डोमेन नाम प्रणाली का होस्ट प्राप्त करने पर जो डोमेन नाम को IP ऐड्रेस में बदल देता है। किसी इंटरप्राइज़ में सर्वर स्थापित करने के लिए स्थैतिक एड्रेस सुविधाजनक भी है, परंतु बिलकुल आवश्यक नहीं. DNS सर्वर से प्राप्त किया गया एक एड्रेस अपने जीवनकाल, या कैशिंग समय के साथ आता है, जिसके बाद इसमें बदलाव नहीं आया, इसकी पुष्टि करने के लिए यह देखा जाना चाहिए. यहाँ तक कि स्थैतिक IP ऐड्रेस भी नेटवर्क प्रबंधन (RFC 2072) के परिणामस्वरूप बदल जाता है।

आशोधन से आई पी परिचयन[संपादित करें]

आईपी अवरोध और फायरवालज[संपादित करें]

today के अनुसार  इंटरनेट पर फ़ायरवॉल आम हैं। बड़ी हुई नेटवर्क सुरक्षा के लिए, वह ग्राहक के सार्वजनिक आईपी पर आधारित निजी नेटवर्क को अभिगम नियंत्रण करते हैं। काली सूची प्रयोग कर रहे हो या सफ़ेद सूची, जो IP ऐड्रेस अवरुद्ध होता है, वह ग्राहक का कथित सार्वजनिक आईपी एड्रेस होता है, मतलब यदि ग्राहक प्रोक्सी सर्वर या NAT इस्तेमाल कर रहा हो तो एक IP ऐड्रेस का अवरोध करने से कई अलग अलग लोग अवरुद्ध हो सकते हैं।

आई पी (IP) एड्रेस अनुवाद[संपादित करें]

IP ऐड्रेस प्रयोग करने के लिए एकाधिक ग्राहक उपकरण प्रदर्शित हो सकते हैं: या तो इसलिए क्योंकि वह एक साझे होस्टिंग वेब सर्वर वातावरण का हिस्सा हैं या क्योंकि एक IPv4 नेटवर्क ऐड्रेस अनुवादक (NAT) या प्रॉक्सी सर्वर अपने ग्राहकों की ओर से एक मध्यस्थ के रूप में काम करता है, इस अवस्था में, असली उत्पन्न IP ऐड्रेस एक अनुरोध प्राप्त कर रहे सर्वर से छिपे हो सकते है। एक निजी नेटवर्क में NAT का एक बड़ी संख्या में IP ऐड्रेस को छिपाना एक आम कार्य प्रणाली है। NAT के केवल "बाहरी" इंटरफेस (s) को इंटरनेट रुटेबल एड्रेस की आवशकता है।[5]

सबसे सामान्य नेट उपकरण बाहरी ओर TCP या UDP पोर्ट संख्या मानचित्र करते हैं और भीतरी भाग में व्यक्तिगत निजी एड्रेस को. जैसे एक टेलीफोन नंबर का साइट-विशेष विस्तारण हो सकता हैं, पोर्ट संख्या IP ऐड्रेस के लिए एक साइट-विशेष विस्तारण हैं।

छोटे घरेलु नेटवर्क में, NAT कार्य आम तौर पर एक आवासीय प्रवेश-द्वार डिवाइस में होते हैं, विशिष्ट रूप से एक "रूटर" के रूप में बेचा जाता है। इस परिदृश्य में, रूटर से जुड़े कंप्यूटर के पास 'निजी' IP ऐड्रेस होगा और रूटर के पास इंटरनेट के साथ संवाद करने के लिए एक शासकीय एड्रेस होगा. इस प्रकार का रूटर, कई कंप्यूटर को एक सार्वजनिक आई पी पता बांटने की अनुमति देता है।

साधन[संपादित करें]

विण्डोज़ में कमांड लाइन साधन ipconfig का उपयोग कर के आई पी पता निर्धारित किया जा सकता है। यूनिक्स में कमांड लाइन ifconfig इस प्रकार्य का प्रदर्शन करता है।

एक डोमेन नाम के अनुकूल आईपी (IP) ऐड्रेस nslookup example.net or dig example.net. के इस्तेमाल से निर्धारित किए जा सकते हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]

  1. RFC 760,"DOD Standard Internet Protocol". DARPA Request For Comments. Internet Engineering Task Force. जनवरी 1980. http://www.ietf.org/rfc/rfc0760.txt. अभिगमन तिथि: 2008-07-08. 
  2. RFC 791,"Internet Protocol". DARPA Request For Comments. Internet Engineering Task Force. September 1981. pp. 6. http://www.ietf.org/rfc/rfc791.txt. अभिगमन तिथि: 2008-07-08. 
  3. RFC 1883,"Internet Protocol, Version 6 (IPv6) Specification". Request For Comments. The Internet Society. December 1995. http://www.ietf.org/rfc/rfc1883.txt. अभिगमन तिथि: 2008-07-08. 
  4. RFC 2460, इंटरनेट प्रोटोकॉल, संस्करण 6 (IPv6) विशिष्टता, एस. डीरिंग, आर. हिंडन, द इंटरनेट सोसाइटी (दिसंबर 1998)
  5. कोमर pg.394


बाहरी लिंक[संपादित करें]