आंत्र ज्वर
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| आंत्र ज्वर टाइफाएड वर्गीकरण एवं बाह्य साधन |
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| आंत्र ज्वर रोगी के सीने पर गुलाब जैसे चकत्ते। | |
| आईसीडी-१० | A01.0 |
| आईसीडी-९ | 002 |
| डिज़ीज़-डीबी | 27829 |
| ईमेडिसिन | oph/686 med/2331 |
| एम.ईएसएच | D014435 |
आंत्र ज्वर (अंग्रेज़ी:टाइफायड) जीवन के लिए एक खतरनाक रोग है जो कि सलमोनेल्ला टायफी जीवाणु से होता है। आंत्र ज्वर (टाइफायड) को सामान्यतः एंटीबायोटिक दवाइयों से रोका तथा इसका उपचार किया जा सकता है। इसे मियादी बुखार भी कहा जाता है। इसके प्रणेता जीवाणु का नाम साल्मोनेला टाइफी (Salmonella typhi) है। यह रोग विश्व के सभी भागों में होता है। यह किसी संक्रमित व्यक्ति के मल से मलिन हुए जल या खाद्य-पदार्थ के खाने/पीने से होता है।
सलमोनेल्ला टायफी केवल मानव मात्र में ही पाया जाता है। आंत्र ज्वर(टाइफायड) से पीड़ित व्यक्ति की रक्त धारा और धमनी मार्ग में जीवाणु प्रवाहित होती हैं। इसके साथ ही कुछेक संवाहक कहलाने वाले व्यक्ति आंत्र ज्वर(टाइफायड) से ठीक हो जाते हैं। किंतु फिर भी उनमें जीवाणु रहता है। इस प्रकार बीमार और संवाहक दोनों ही व्यक्तियों के मल से सलमोनेल्ला टायफी निसृत होती है। सलमोनेल्ला टायफी फैलाने वाले व्यक्तियों द्वारा प्रयोग किये अथवा पकड़े गये खाद्य अथवा पेय पदार्थ पीने या सलमोनेल्ला टायफी से संदूषित पानी से नहाने या पानी से खाद्य सामग्री धोकर खाने से आंत्र ज्वर(टाइफायड) हो सकता है। अतः आंत्र ज्वर (टाइफायड) संसार के ऐसे स्थानों में अधिक पाया जाता है जहां हाथ धोने की परंपरा कम पायी जाती है तथा जहां पानी, मलवाहक गंदगी से प्रदूषित होता है।जैसे ही सलमोनेल्ला टायफी जीवाणु खायी या पी जाती है वह रक्त धारा में जाकर कई गुणा बढ़ जाती है। शरीर में ज्वर होने तथा अन्य संकेत व लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
अनुक्रम |
[संपादित करें] लक्षण
सामान्यतः आंत्र ज्वर(टाइफायड) से पीड़ित व्यक्तियों को लगातार 103 से 104 डिग्री फैरेनहाइट का बुखार बना रहता है। उन्हें कमजोरी भी महसूस हो सकती है, पेट में दर्द, सिर दर्द अथवा भूख कम लग सकती है। कुछ मामलों में बीमार व्यक्ति को चपटे दोदरे, गुलाबी रंग के धब्बे पड़ सकते हैं। वास्तव में आंत्र ज्वर(टाइफायड) की बीमारी के संबंध में जानने के लिए केवल एक उपाय है कि मल का नमूना या खून के नमूने में सलमोनेल्ला टाइफी की जांच की जाए।
[संपादित करें] बचाव
आंत्र ज्वर(टाइफायड) से के दो मौलिक उपाय हैं-
- जोखिम भरे खाने और पीने की चीजों से बचें
- आंत्र ज्वर(टाइफायड) का टीका लगवाएं
पीने के पानी को पीने से पहले एक मिनट तक उबाल कर पीएं। यदि बर्फ, बोतल के पानी या उबले पानी से बनी हुई न हो तो पेय पदार्थ बिना बर्फ के ही पीएं। स्वादिष्ट बर्फीले पदार्थ न खाएं जो कि प्रदूषित पानी से बने हो सकते हैं। पूरी तरह पकाए और गर्म तथा वाष्प निकलने वाले खाद्य पदार्थ ही खाएं। कच्ची ऐसी साग सब्जियां और फल न खाएं जिन्हें छीलना संभव न हो। सलाद वाली सब्जियाँ आसानी से प्रदूषित हो जाती है। जब छीली जा सकने वाली कच्ची सब्जियां या फल खाएं तो स्वयं उन्हें छीलकर खाएं। (पहले हाथ साबुन से धो लें) छिलके न खाएं। जिन दुकानों/स्थानों में खाद्य पदार्थ/पेय पदार्थ साफ सुथरे न रखे जाते हों, वहां से लेकर न खाएं और न पीएं।
[संपादित करें] टीकाकरण
इसके रोकथाम के लिए एकमात्र उपचार टीकाकरण है। फिर भी कई सालो के बाद आंत्र ज्वर (टाइफायड) के टीकों का प्रभाव जाता रहता है। यदि पहले टीका लगवाया हो तो आपने डॉक्टर से जांच करवा लें कि क्या वर्धक टीका लगवाने की आवश्यकता तो नहीं है। रोग प्रतिरक्षी दवाइयां आंत्र ज्वर (टाइफायड) को रोक नहीं सकती है, वे केवल उपचार में सहायक सिद्ध हो सकती हैं।
| टीके का नाम | देने की विधि | आवश्यक खुराकों की संख्या | खुराकों के बीच समय की अंतराल | अलग से आवश्यक समयावधि | लिए न्यूनतम आयु | वर्धक टीके की आवश्यकता अवधि |
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| टी वाई 21 ए (विवोटिफ बर्ना स्विस
मेरम और वेक्सीन इंस्टीट्यूट) |
मुंह से 1 कैप्सूल | 4 | 2 दिन | 2 सप्ताह | 6 वर्ष | 5 वर्ष |
| वी आई सी पी एस (टायफिम वी आई, पास्ट्यूर मैरियोक्स) | इंजेक्शन | 1 | एन/ए | 2 सप्ताह | 2 वर्ष | 2 वर्ष |
[संपादित करें] इन्हें भी देखें
- [[मोत