अलजाइमर रोग

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
अलजाइमर रोग
Alzheimer
वर्गीकरण एवं बाह्य साधन
Alzheimer's disease brain comparison.jpg
सामान्य वय मस्तिष्क (बायें) और एक अल्ज़ाइमर रोगी के मस्तिष्क की तुलना। अंतर चिह्नित हैं।
आईसीडी-१० G30., F00.
आईसीडी- 331.0, 290.1
ओएमआईएम 104300
डिज़ीज़-डीबी 490
मेडलाइन प्लस 000760
ईमेडिसिन neuro/13 
एम.ईएसएच D000544

अल्जाइमर रोग(अंग्रेज़ी:Alzheimer's Disease) रोग 'भूलने का रोग' है। इसका नाम अलोइस अल्जाइमर पर रखा गया है, जिन्होंने सबसे पहले इसका विवरण दिया। इस बीमारी के लक्षणों में याददाश्त की कमी होना, निर्णय न ले पाना, बोलने में दिक्कत आना तथा फिर इसकी वजह से सामाजिक और पारिवारिक समस्याओं की गंभीर स्थिति आदि शामिल हैं। रक्तचाप, मधुमेह, आधुनिक जीवनशैली और सर में कई बार चोट लग जाने से इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है। अमूमन 60 वर्ष की उम्र के आसपास होने वाली इस बीमारी का फिलहाल कोई स्थायी इलाज नहीं है।[1]
हालांकि बीमारी के शुरूआती दौर में नियमित जांच और इलाज से इस पर काबू पाया जा सकता है। मस्तिष्क के स्त्रायुओं के क्षरण से रोगियों की बौद्धिक क्षमता और व्यावहारिक लक्षणों पर भी असर पड़ता है।
हम जैसे-जैसे बूढ़े होते हैं, हमारी सोचने और याद करने की क्षमता भी कमजोर होती है। लेकिन इसका गंभीर होना और हमारे दिमाग के काम करने की क्षमता में गंभीर बदलाव उम्र बढ़ने का सामान्य लक्षण नहीं है। यह इस बात का संकेत है कि हमारे दिमाग की कोशिकाएं मर रही हैं। दिमाग में एक सौ अरब कोशिकाएं (न्यूरान) होती हैं। हरेक कोशिका बहुत सारी अन्य कोशिकाओं से संवाद कर एक नेटवर्क बनाती हैं। इस नेटवर्क का काम विशेष होता है। कुछ सोचती हैं, सीखती हैं और याद रखती हैं। अन्य कोशिकाएं हमें देखने, सुनने, सूंघने आदि में मदद करती हैं। इसके अलावा अन्य कोशिकाएं हमारी मांसपेशियों को चलने का निर्देश देती हैं।
अपना काम करने के लिए दिमाग की कोशिकाएं लघु उद्योग की तरह काम करती हैं। वे सप्लाई लेती हैं, ऊर्जा पैदा करती हैं, अंगों का निर्माण करती हैं और बेकार चीजों को बाहर निकालती हैं। कोशिकाएं सूचनाओं को जमा करती हैं और फिर उनका प्रसंस्करण भी करती हैं। शरीर को चलते रहने के लिए समन्वय के साथ बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन और ईंधन की जरूरत होती है।
अल्जाइमर रोग में कोशिकाओं की उद्योग का हिस्सा काम करना बंद कर देता है, जिससे दूसरे कामों पर भी असर पड़ता है। जैसे-जैसे नुकसान बढ़ता है, कोशिकाओं में काम करने की ताकत कम होती जाती है और अंततः वे मर जाती हैं।

लक्षण[संपादित करें]

  • यह बढ़नेवाला और खतरनाक दिमागी रोग है।
  • अल्जाइमर से दिमाग की कोशिकाएँ नष्ट हो जाती हैं, जिसके कारण याददाश्त, सोचने की शक्ति और अन्य व्यवहार बदलने लगते हैं। इसका असर सामाजिक जीवन पर पड़ता है।
  • समय बीतने के साथ यह बीमारी बढ़ती है और खतरनाक हो जाती है।
  • यह याददाश्त खोने (डीमेंसिया) का सबसे सामान्य रूप है। अन्य बौद्धिक गतिविधियां भी कम होने लगती हैं, जिससे प्रतिदिन के जीवन पर असर पड़ता है।

10 चेतावनी संकेत[संपादित करें]

  • याददाश्त खोना – हाल ही में सीखी गयी सूचना को भूलना डीमेंसिया का सबसे सामान्य आरंभिक लक्षण है। व्यक्ति अक्सर भूलने लगता है और बाद में उसे याद नहीं कर पाता।
  • सामान्य कामकाज करने में कठिनाई- डीमेंसिया से पीड़ित व्यक्ति दैनिक कामकाज की योजना बनाने और उन्हें कार्यान्वित करने में अक्सर कठिनाई महसूस करता है। कई व्यक्ति तो खाना बनाने में अपनाये जानेवाले कदम या टेलीफोन करने या कोई खेल खेलने में भी कठिनाई महसूस करता है।
  • भाषा के साथ समस्या- अल्जाइमर बीमारी का मरीज साधारण शब्द या असामान्य समानार्थक शब्द भूलने लगता है और उसकी बोली या लिखावट अस्पष्ट होती जाती है। उदाहरण के लिए वह टूथब्रश भूल जाता है और अपने मुंह के लिए वह चीज मांगता है।
  • समय और स्थान में असमन्वय- अल्जाइमर का मरीज अपने पड़ोस में भी खो जाता है। वह यह भूल जाता है कि वह कहां है, वहां वह कैसे आया और घर वापस कैसे जाना है।
  • निर्णय लेने में कठिनाई या गलत निर्णय- अल्झीमर्स का मरीज अनाप-शनाप कपड़े पहन सकता है, गरमी में बहुत से कपड़े या ठंड में काफी कम कपड़े। उसके निर्णय लेने की क्षमता कम होती है। वह अंजान लोगों को बहुत सारे पैसे दे सकता है।
  • संक्षिप्त सोच में समस्या- अल्जाइमर का मरीज कठिन मानसिक कार्यों में असामान्य कठिनाई महसूस करने लगता है, जैसे वह यह नहीं समझ पाता कि कोई संख्या क्यों है और उनका उपयोग कैसे किया जाता है।
  • चीजों को यत्र-तत्र रखना- अल्जाइमर का मरीज चीजों को यत्र-तत्र रख देता है। उदाहरण के लिए वह आयरन (इस्तरी) को फ्रिज में रख सकता है।
  • मूड या स्वभाव में बदलाव- अल्जाइमर का मरीज अपने स्वभाव में तेजी से बदलाव प्रदर्शित करता है। जैसे वह अकारण ही रोने या गुस्सा करने या हंसने लग जाता है।
  • व्यक्तित्व में बदलाव- डीमेंसिया से पीड़ित व्यक्ति नाटकीय ढंग से बदल सकता है। वह बेहद उलझनपूर्ण, संदेह करनेवाला, भयभीत या किसी परिजन पर अत्यधिक निर्भर बन जाता है।
  • प्रयास करने में अक्षमता- अल्जाइमर का मरीज बेहद निष्क्रिय, टीवी के सामने घंटों बैठनेवाला, बहुत अधिक सोनेवाला या सामान्य गतिविधियों को पूरा करने में अनिच्छुक हो सकता है।

यदि आप खुद में या अपने किसी परिजन में इनमें से कोई चेतावनी संकेत देखें, तत्काल किसी चिकित्सक से संपर्क करें। अल्झीमर्स या डीमेंसिया पैदा करनेवाली अन्य गड़बड़ियों की समय रहते पहचान और उनका इलाज, सहयोग तथा समर्थन बेहत महत्वपूर्ण है।

पटिया/फलक (प्लेक) और लट (टैंगल) की भूमिका[संपादित करें]

स्नायु कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने और मारने के लिए दो संदिग्ध तत्वों पटिया/ फलक (प्लेक) और लट (टैंगल) की पहचान हुई है। प्लेक स्नायु तंत्र के बीच में बनते हैं और टैंगल मरती हुई कोशिकाओं में रेशे के रूप में पाये जाते हैं। हालांकि अधिकांश लोगों में उम्र बढ़ने के साथ प्लेक और टैंगल पैदा होने लगते हैं, अल्झाइमर्स के रोगी में इनकी संख्या बहुत अधिक होती है। प्लेक और टैंगल उन क्षेत्रों में अधिक बनते हैं, जहां से सीखने या याद रखने की क्षमता पैदा होती है और बाद में यह दूसरे क्षेत्रों में फैलता है।

इलाज[संपादित करें]

इसका अभी कोई इलाज नहीं है। लेकिन लक्षणों का इलाज और उचित देखभाल, मदद आदि से अल्जाइमर के रोगियों का जीवन बेहतर बनाया जा सकता है।

संदर्भ[संपादित करें]

  1. अलजाइमर में खतरनाक ढंग से इजाफा। घमासान.कॉम।(हिन्दी)१० अक्टूबर, २००९

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]