1990 बंटाला बलात्कार मामला

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1990 Bantala Rape Case
1990 बंटाला बलात्कार मामला
तिथि 30 मई 1990
समय 6:30 बजे शाम भारतीय समय के अनुसार
स्थान बंटाला, दक्षिण 24 परगणा, पश्चिम बंगाल, भारत
मौतें 2 (1 पीड़ित महिला, 1 पीड़ित पुरुष)
चोट लगने की घटनाएं 2 (पीड़ित महिलाएँ)


30 मई 1990 के दिन तीन महिला स्वास्थ्य अधिकारी जिनमें से दो पश्चिम बंगाल सरकार के स्वास्थ्य विभाग की ओर से थीं और एक यूनिसेफ से थीं, को बंटाला रोड पर असामाजिक तत्वों के एक गिरोह ने बलात्कार का शिकार बनाया जब यह महिलाएँ गोसाबा रंगाबेलिया से लौट रहीं थीं। हमलावरों का विरोध करते हुए अधिकारियों में से एक महिला और उनके चालक की मृत्यु हो गई थी।

घटना[संपादित करें]

30 मई 1990 के दिन तीन स्वास्थ्य अधिकारियों की एक टीम गोसाबा में एक टीकाकरण कार्यक्रम का निरीक्षण करने के बाद कोलकाता के लिए लौट रही थी।[1] इस टीम में अनीता दीवान, पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग की उप-जिला एक्सटेंशन मीडिया अधिकारी, उमा घोष, स्वास्थ्य विभाग की एक वरिष्ठ अधिकारी और रेणु घोष, नई दिल्ली-स्थित यूनिसेफ कार्यालय की एक प्रतिनिधि सम्मिलित थी। वे पूर्वी मेट्रोपोलिटन बाईपास बंटाला के पास शाम 6-30 के आसपास पहुंची ही गया थीं कि 4-5 युवकों के एक समूह ने सी पी आई (एम) पार्टी कार्यालय के पास कार को रोका। चालक ने फ़रार होने की कोशिश की, लेकिन वह नियंत्रण खो चुका था और कार पलट गई। इस दौरान 10-12 युवकों का एक और गिरोह मौके पर पहुंचा और कार के बाहर महिलाओं में से एक खींच लिया जबकि अन्य दो महिलाओं को चालक ने बाहर निकाला। चालक ने युवकों को रोकने की कोशिश की लेकिन वह असफल रहा। भीड़ ने चालक को मार डाला और कार को आग लगा दी।[2] इसके बाद अधिकारियों को पास के पास के एक धान के खेत ले जाया गया और उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। एक अधिकारी ने रोकने की कोशिश की जिसे ऐसे प्रयास के कारण मार दिया गया।

पुलिस ने शाम 11-30 के आसपास कलकत्ता के नेशनल मेडिकल कॉलेज के आपातकालीन विभाग के स्थान पर अधिकारियों का नग्न शरीरों को लाया। शुरू में वे सब मृत समझी गई थीं, लेकिन उनमें से बाद में दो जिंदा हो पाई गईं और उन्हें उपचार के लिए भर्ती कराया गया। एक महिला चिकित्सक उस समय बेहोश हो गई जब उसने पाया कि मृत महिला अधिकारी के गुप्तांग में एक धातु का मशाल डाल दिया गया था।

घायल चालक को इलाज के लिए एस एस के एम अस्पताल में स्थानांतरित किया गया था। उसके शरीर में 43 घाव थे जो तेज और भारी हथियारों की वजह से लगे थे।[3] चालक के गुप्तांग को हमलावर लगभग मिटा चुके थे। 4 जून 1990 को सुबह के 5-40 को वह मर गया। उसके शरीर की ऑटोप्सी स्वास्थ्य विभाग के प्रशिक्षण रिजर्व के चिकित्सा अधिकारी डॉ बिश्वनाथ कहाली एक द्वारा किया की गई थी।

जाँच[संपादित करें]

प्रशांत सुर, पश्चिम बंगाल के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने भीड़ का बचाव करते हुए कहा कि पीड़ितों को शायद गलती से बच्चा-चोर समझा गया था। ज्योति बसु, उस समय के पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने सारे मामले को मामूली बताने के प्रयास के तौर पर कहा कि असामाजिक मामले हर जगह पाए जाते हैं।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Woman Official lynched in Calcutta". The Statesman. Kolkata. 1 जून 1990.
  2. Bandyopadhyay, D (9 अक्टूबर 2010). "Musings of a Pensionjivi on Sumanta Banerjee's Letter". Mainstream Weekly. मूल से 25 December 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 7 जुलाई 2013.
  3. Sengupta, Sukhoranjan (22 जून 1990). Anandabazar Patrika (बंगाली में). Kolkata. गायब अथवा खाली |title= (मदद)