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...त ख्वाबनि जो छा थींदो (अनुवाद: सपनों की बुवाई करते हुये) सिन्धी भाषा के विख्यात साहित्यकार मोहन गेहाणी द्वारा रचित एक नाट्य–संकलन है जिसके लिये उन्हें सन् 2011 में सिन्धी भाषा के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।[1]