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२०२६ नाइजीरिया क्वारा राज्य आक्रमण

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२०२६ नाइजीरिया क्वारा राज्य आक्रमण
अंग्रेज़ी: 2026 Kwara State attacks
सम्बंधित: बोको हराम विद्रोह
स्थान नुक़ू और वोऱो, क्वारा राज्य, नाइजीरिया
निर्देशांक 9°44′20″N 4°10′37″E / 9.739°N 4.177°E / 9.739; 4.177निर्देशांक: 9°44′20″N 4°10′37″E / 9.739°N 4.177°E / 9.739; 4.177
तिथि ३–४ फ़रवरी २०२६
~१७:३० – ०३:०० पश्चिम अफ़्रीका समय
हमले का प्रकार नरसंहार, सामूहिक गोलीबारी, अग्निसंयोग, अपहरण
मृत्यु १६२–२००+
घायल ५०+
पीड़ित ३८ अपहृत
हमलावर बोको हराम (अनुसार हडसन इन्स्टिट्यूट, तिनूबू)
लाकुरावा (अनुसार उमर बायो)
उद्देश्य ग्रामवासियों द्वारा उनकी व्याख्या के अनुसार शरीअत क़ानून को अस्वीकार करना

३ फ़रवरी २०२६ को नाइजीरिया के क्वारा राज्य के वोऱो और नुक़ू ग्रामों पर सैकड़ों उग्र इस्लामवादी उग्रवादियों ने आक्रमण कर कम से कम १६२ ग्रामवासियों की हत्या कर दी। यह आक्रमण तब किया गया जब ग्रामवासियों ने उग्रवादियों की इस माँग को अस्वीकार कर दिया कि वे उनकी व्याख्या के अनुसार शरीअत क़ानून को अपनाएँ। आक्रमण के समय अनेक भवनों को अग्नि संयोग से नष्ट किया गया तथा कई लोगों का अपहरण भी किया गया। हमलावरों की निष्ठा को लेकर भिन्न‑भिन्न दावे किए गए, नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला तिनूबू ने इसके लिए बोको हराम को उत्तरदायी ठहराया, जबकि स्थानीय संसद् सदस्य मोहम्मद उमर बायो ने इस्लामिक स्टेट से सम्बद्ध ‘लाकुरावा’ गुट को दोषी बताया। यह नाइजीरिया में हाल के मासों में घटित सर्वाधिक घातक आक्रमणों में से एक था। नाइजीरियाई स्रोतों ने इस घटना को “क्वारा नरसंहार” कहा।[1][2]

२०२६ नाइजीरिया क्वारा राज्य आक्रमण is located in नाइजीरिया
२०२६ नाइजीरिया क्वारा राज्य आक्रमण
नाइजीरिया के मानचित्र पर आक्रमणस्थल

सूत्रों के अनुसार हमलावर बोर्गू क्षेत्र के वनों में सक्रिय जिहादी थे, जो पूर्व में वोऱो में उपदेश दे चुके थे और ग्रामवासियों को अपनी व्याख्या के अनुसार शरीअत स्वीकार करने का आदेश दे चुके थे। इससे पहले वे नाइजर राज्य की सीमा से लगे ग्रामों में भी उपदेश दे चुके थे, जहाँ उन्होंने लोगों को शरीअत अपनाने और नाइजीरियाई संविधान को अस्वीकार करने के लिए प्रेरित किया था।[3] एमनेस्टी इण्टरनेशनल के अनुसार आक्रमण से लगभग दो सप्ताह पूर्व उन्होंने वोऱो में पत्र और पुस्तिकाएँ भेजी थीं। पाँच मास पूर्व भी उन्होंने ग्राम‑प्रधान को एक पत्र भेजकर सूचित किया था कि वे ग्राम में उपदेश देने का इरादा रखते हैं।[4] इलोरिन परिषद् को इस पत्र की सूचना दी गई थी और उसने वोऱो में सैनिकों की तैनाती का अनुरोध किया था, किन्तु कुछ सप्ताह बाद सैनिक वापस बुला लिए गए।[5] जनवरी में भेजा गया अन्तिम चेतावनी पत्र बोको हराम के औपचारिक नाम और उसके चाड झील क्षेत्र के नेता बकूरा दोरो के नाम से प्रेषित था।[6]

आक्रमण का क्रम

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नुक़ू और वोऱो, जो कि क्वारा के कायामा क्षेत्र में बेनिन की सीमा के समीप स्थित, मुख्यतः मुस्लिम ग्राम हैं, पर आक्रमण १७:३० पश्चिम अफ़्रीकी समय पर आरम्भ हुआ।[7][8][9] यह कई घण्टों तक चला और अगले दिन प्रातः ०३:०० बजे तक विस्तृत रहा।[10][11] स्थानीय रेड क्रॉस अधिकारी के अनुसार सैकड़ों सशस्त्र हमलावर उपस्थित थे।[12] वे विस्फोटकों, ए.के‑४७ राइफ़लों और पम्प‑एक्शन हथियारों से लैस थे तथा उन्होंने ग्राम को चारों ओर से घेरकर उसके सभी मार्ग अवरुद्ध कर दिए थे।[13] ग्रामवासियों द्वारा उनकी माँगें अस्वीकार किए जाने के बाद उन्होंने गोलीबारी आरम्भ कर दी।[14]

मोटरसाइकिलों पर सवार हमलावर घर‑घर जाकर लोगों की हत्या करते और भवनों में आग लगाते चले गए।[15] उन्होंने उस संघीय राजमार्ग पर भी गोलीबारी की जो इस क्षेत्र से होकर गुज़रता है। १८:३० से २०:०० के मध्य आक्रमण तथाकथित “दण्ड‑चरण” में प्रवेश कर गया, जिसमें हत्याएँ तीव्र हो गईं।[16] एक स्थानीय जनप्रतिनिधि के अनुसार हमलावरों ने लोगों को एकत्र कर उनके हाथ बाँध दिए और फिर उनकी हत्या कर दी। एमनेस्टी के अनुसार हमलावरों को आक्रमण के दौरान “पूर्ण स्वतन्त्रता” प्राप्त थी, वे युवकों और सम्पूर्ण परिवारों को पकड़कर मारते गए और दुकानों को लूटते रहे। लगभग २०:०० बजे एक सैन्य विमान के मँडराने पर हमलावर कुछ समय के लिए पीछे हटे।[17] एक घण्टे बाद ग्रामवासी बाहर निकलने लगे, किन्तु हमलावर पुनः संगठित होकर मस्जिद में नमाज़ के लिए बुलाने का छल‑प्रयास करने लगे और वहाँ पहुँचने वालों की हत्या कर दी।[18] नरसंहार अगले दिन प्रातः ०२:०० बजे तक चलता रहा। सैनिक लगभग एक घण्टे बाद पहुँचे, परन्तु तब तक हमलावर भाग चुके थे। [19]

हमलावरों ने वोऱो के पारम्परिक राजा अल्हाजि सलीहू उमर के महल सहित अनेक घरों और दुकानों को भी जला दिया। उमर का घर विशेष रूप से निशाना बनाया गया, क्योंकि पूर्व में भेजे गए पत्र उन्हीं को सम्बोधित थे। वे उस समय उपस्थित न होने के कारण बच गए, किन्तु उनके परिवार के अनेक सदस्य मारे गए या अपहृत कर लिए गए।[20] लगभग ३८ घर नष्ट हो गए। अनेक लोगों का पता नहीं चल सका।[21] बड़ी संख्या में ग्रामवासी आसपास के वन‑क्षेत्र में भाग गए।[22][23] एक जीवित बचे व्यक्ति ने बताया कि जो लोग भाग नहीं सके, वे प्राण‑रक्षा हेतु वृक्षों पर चढ़ गए। [24]

प्रारम्भिक प्रतिवेदनों में कहा गया कि आक्रमण में लगभग ३५ से ४० लोग मारे गए।[25] बाद में यह संख्या बढ़कर १६२ हो गई, जैसा कि सांसद मोहम्मद उमर बायो तथा रेड क्रॉस ने बताया; रेड क्रॉस ने यह भी कहा कि अतिरिक्त शवों की खोज जारी है।[26][27] आक्रमण पूर्णतः अन्धाधुन्ध था, जिसमें महिलाओं और बच्चों सहित अनेक लोग मारे गए। वोऱो के मुख्य इमाम, एक विद्यालय‑प्रधानाचार्य, एक प्रधानाध्यापिका तथा कई छात्र भी मृतकों में सम्मिलित थे।[28] बाद में यह संख्या बढ़कर २०० से अधिक बताई गई, क्योंकि आसपास के वन‑क्षेत्र से और शव प्राप्त हुए।[29] एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि मृतकों में लगभग ९५% मुस्लिम थे और शेष ईसाई।[30]

एमनेस्टी के अनुसार अनेक लोगों को निकट दूरी से गोली मारी गई, कुछ को जीवित ही जला दिया गया या उनका गला रेत दिया गया।[31] कुछ पीड़ितों के अंग‑भंग भी किए गए।[32] यह २०२६ में नाइजीरिया का सर्वाधिक घातक आक्रमण था, और ‘क्रिटिकल थ्रेट्स प्रोजेक्ट’ के अनुसार उत्तर‑पूर्व नाइजीरिया के बाहर अब तक का सर्वाधिक घातक तथा दशक का सबसे भीषण जिहादी आक्रमण था।[33][34]

३८ लोगों का अपहरण किया गया, जिनमें अधिकांश महिलाएँ और बच्चे थे। वोऱो के ग्राम प्रधान अल्हाजि उमर सलीहू तन्क़ो ने कहा कि उनके तीन बच्चों की हत्या कर दी गई और उनकी पत्नी तथा दो अन्य परिजनों का अपहरण कर लिया गया; कुछ अपहृतों को एक चोरी किए गए जीप वाहन में ले जाया गया।[35] ५० से अधिक लोग चिकित्सालय में भर्ती कराए गए।[36][37]

उमर बायो ने कहा कि आक्रमण इस्लामिक स्टेट से सम्बद्ध ‘लाकुरावा’ गुट ने किया, यद्यपि किसी भी संगठन ने इसकी औपचारिक ज़िम्मेदारी नहीं ली।[38] ‘क्रिटिकल थ्रेट्स प्रोजेक्ट’ के अनुसार लाकुरावा द्वारा यह आक्रमण किया जाना संदिग्ध था, क्योंकि यह गुट सामान्यतः नाइजर सीमा के निकट उत्तर में सक्रिय रहता है।[39] हडसन इन्स्टिट्यूट के जेम्स बार्नेट ने कहा कि इस क्षेत्र में अन्य नरसंहारों के लिए बोको हराम उत्तरदायी रहा है और वही सबसे सम्भावित कर्ता है। राष्ट्रपति बोला तिनूबू ने भी बोको हराम को दोषी ठहराया।[40] यह भी प्रतिवेदित हुआ कि सादिक़ू के नेतृत्व वाली बोको हराम की एक इकाई इस आक्रमण के पीछे थी।[41][42]

आक्रमणों के बाद पुलिसकर्मियों और सैनिकों को खोज‑और‑बचाव अभियानों के लिए तैनात किया गया।[43] रेड क्रॉस इन ग्रामों तक नहीं पहुँच सका, क्योंकि वे क्वारा राज्य की राजधानी से लगभग आठ घण्टे दूर एक दुर्गम क्षेत्र में स्थित हैं।[44]

नाइजीरियाई राष्ट्रपति बोला तिनूबू ने ‘ऑपरेशन सवाना शील्ड’ आरम्भ करने की घोषणा की, जिसके अन्तर्गत क्वारा राज्य में एक बटालियन की तैनाती तथा अभियान की देखरेख हेतु एक क्षेत्रीय कमाण्डर की नियुक्ति की गई।[45][46] तिनूबू ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य स्थानीय ग्रामों की रक्षा करना और “इन बर्बर आतंकवादियों को रोकना” है।[47]

कम से कम ७८ शव ग्रामवासियों द्वारा ४ फ़रवरी को एकत्र कर दफ़नाए गए।[48] मृतकों का अन्तिम संस्कार सामूहिक क़ब्रों में किया गया।[49] ५ फ़रवरी तक ग्रामों में केवल लगभग २० पुरुष ही शेष थे, जो मृतकों को दफ़नाने का कार्य कर रहे थे।[50]

प्रतिक्रियाएँ

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राष्ट्रपति तिनूबू ने इस आक्रमण को “विशेष रूप से विचलित करने वाला” बताया, क्योंकि पीड़ितों की हत्या इसलिए की गई कि उन्होंने “बलपूर्वक मतप्रचार के प्रयास” का विरोध किया था। उन्होंने हमलावरों को “निर्दयी” कहा और आश्वासन दिया कि उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।[51]

क्वारा राज्य के राज्यपाल अब्दुलरहमान अब्दुलरज़ाक़ ने इसे “उग्रवाद से प्रेरित एक क्रूर और सुनियोजित नरसंहार” बताया, न कि डकैती‑आधारित हिंसा।[52] उन्होंने ४ फ़रवरी को वोऱो और नुक़ू का दौरा किया और इस नरसंहार को जनसंहार की संज्ञा दी। पड़ोसी ओसुन राज्य के राज्यपाल अदेयोला अदेलेके ने पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की और अपने राज्य की सीमा‑समुदायों के लिए सुरक्षा कड़ी कर दी।[53]

संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश विभाग ने इस “भीषण” आक्रमण की निन्दा की और संवेदना व्यक्त की।[54] तुर्की ने भी आक्रमण की निन्दा की और नाइजीरिया को आतंकवाद‑विरोधी अभियानों में निरन्तर सहयोग देने का आश्वासन दिया।[55] संयुक्त राष्ट्र महासचिव अन्तोनियो गुतरेस ने “हार्दिक संवेदना” व्यक्त की और कर्ताओं को न्याय के समक्ष लाने की माँग की।[56] अफ़्रीकी संघ तथा जर्मनी और बेनिन सहित कई देशों ने भी एकजुटता के वक्तव्य जारी किए।[57]

सन्दर्भ

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  2. Nda-Isaiah, Jonathan (4 February 2026). "Kwara Massacre: Tinubu Orders Army Battalion To Move Into Kaiama". Leadership Nigeria. अभिगमन तिथि: 5 February 2026.
  3. "Kwara massacre: FG faces heat as 100 feared dead". Punch Newspapers (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). 2026-02-04. 2026-02-05 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2026-02-04.
  4. Ayodele, Aduwo (2026-02-04). "Bandits killing 200 Nigerians is of low priority to Tinubu: Amnesty International". Peoples Gazette Nigeria (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-02-05.
  5. Mohammed, Yakubu (2026-02-04). "Five months after warning letter, Boko Haram attacks Kwara community, kills 170, abducts women and children". Premium Times (ब्रिटिश अंग्रेज़ी भाषा में). आईएसएसएन 2360-7688. 2026-02-04 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2026-02-05.
  6. "Boko Massacre in Nigeria; Ethiopia on the Brink; M23 Drone Attack; IS Attacks Niamey: Africa File, February 5, 2026". Critical Threats. अभिगमन तिथि: 2026-02-07.
  7. Nda-Isaiah, Jonathan (4 February 2026). "Kwara Massacre: Tinubu Orders Army Battalion To Move Into Kaiama". Leadership Nigeria. अभिगमन तिथि: 5 February 2026.
  8. "Nigeria gunmen in deadly attack on Kwara villages as US military team's deployment confirmed". www.bbc.com (ब्रिटिश अंग्रेज़ी भाषा में). 2026-02-04. अभिगमन तिथि: 2026-02-04.
  9. "Nigeria: Extremists kill over 100 in western villages". dw.com (अंग्रेज़ी भाषा में). 2026-02-04 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2026-02-04.
  10. Mohammed, Yakubu (2026-02-04). "Five months after warning letter, Boko Haram attacks Kwara community, kills 170, abducts women and children". Premium Times (ब्रिटिश अंग्रेज़ी भाषा में). आईएसएसएन 2360-7688. 2026-02-04 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 2026-02-05.
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