होर्नबोस्तेल-साक्स

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होर्नबोस्तेल-साक्स (Hornbostel–Sachs) संगीत वाद्य यंत्रों को वर्गीकृत करने की एक प्रणाली है। इसका संगठन एरिख़ मोरित्ज़ फ़ोन होर्नबोस्तेल और कर्ट साक्स ने किया था और इसका प्रथम प्रकाशन सन् १९१४ में "ज़ाइट्श्रिफ़्ट फ़्युएर एत्नोलोजी" (Zeitschrift für Ethnologie) में हुआ था।[1][2]

वर्गीकरण[संपादित करें]

होर्नबोस्तेल-साक्स व्यवस्था में निम्नलिखित श्रेणियाँ हैं:

  • कम्पनस्वरी (इडियोफ़ोन, Idiophone) - यह वे वाद्य हैं जिनका पूरा शरीर बिना झिल्ली या तंतु (तार) के प्रयोग के कांपता है और उस कम्पन से ध्वनी उत्पन्न करता है। इसका उदाहरण झांझ है।
  • झिल्लीस्वरी (मेम्ब्रेनोफ़ोन, Membranophone) - इन वाद्यों में झिल्लियाँ हैं जिनके कांपने से ध्वनी उत्पन्न होती है। इसका उदाहरण तबला है।
  • तंतुस्वरी (कोर्डोफ़ोन, Chordophone) - इन वाद्यों में एक या अनेक तंतु (तार) होते हैं जिनमें कम्पन से ध्वनी उत्पन्न होती है। इसका उदाहरण सितार है।
  • वायुस्वरी (एरोफ़ोन, Aerophone) - इन वाद्यों में ध्वनी किसी वायु-समूह में कम्पन पैदा करने से होती है। इसका उदाहरण बाँसुरी है।
  • विद्युतस्वरी (इलेक्ट्रोफ़ोन, Electrophone) - इन वाद्यों में ध्वनी विद्युत के प्रयोग से होती है। इसका उदाहरण थेरेमिन है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Volume 46 (1914) of the Zeitschrift is available online in a variety of formats, as part of the digital collection of the University of Toronto. The article by Hornbostel and Sachs is to be found on pages 553–90.
  2. MIMO Project - Musical Instrument Museums Online