हैदराबाद सत्याग्रह
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सन् 1938-39 में जब अंग्रेजों और मुस्लिम शासक निजाम मीर उस्मान अली खान का हिन्दुओ पर अत्याचार चरम पर था तब आर्य समाज ने आंदोलन छेड़ा जिसे हैदराबाद सत्याग्रह कहा जाता है। इस आन्दोलन में हिन्दू महासभा ने आर्य समाज का साथ दिया। आंदोलन सफल हुआ और निजाम मीर उस्मान अली खान हैदराबाद को झुकना पड़ा। इस सत्याग्रह को भारत के स्वतंत्रता संग्राम का सबसे प्रमुख भाग माना जाता है।[1]
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[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "हैदराबाद सत्याग्रह के समय आर्य समाज ने उभारा था एक प्रखर राष्ट्रवादी आंदोलन". मूल से से 1 जून 2023 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 2 अगस्त 2022.