हैंस श्पेमान

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हैंस श्पेमान (१९३५ में)

हैंस श्पेमान (Hans Spemann ; सन् १८६९ - १९४१), जर्मनी के भ्रूणविज्ञानी थे जिन्हें १९३५ में चिकित्साविज्ञान का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।[1] उन्होने जिस प्रभाव का अध्ययन किया था उसे आजकल 'भ्रूण प्रेरण' (embryonic induction) कहा जाता है।

परिचय[संपादित करें]

हैंस श्पेमान का जन्म स्टटगार्ट (Stuttgort) में हुआ था और इन्होंने हाइडेलबर्ग, म्यूनिख तथा वर्टस् बुर्ख (Würzburg) में शिक्षा पाई थी।

सन् १९०८ में रॉस्टॉक में, सन् १९१४ में कैसर विल्हेल्म इंस्टिट्यूट में तथा सन् १९१९ से फ्राइबुर्ख इम ब्राइसगॉउ (Freiburg im Brisgou) में ये प्रोफेसर नियुक्त हुए।

श्पेमान विलक्षण प्रयोगकर्ता थे। इन्होंने भ्रूण के ऊतकों के रोपण की एक रीति का विकास किया। उभयचरों के भ्रूणविकास निर्धारण के कालिक तथा स्थैतिक संबंधों की खोज के लिए अपने अनेक प्रयोग किए। ये भ्रूणों में संगठनकेंद्रों के आविष्कर्ता थे। इन्होंने कोरकरंध्र (blastopore) के ओष्ठ के संगठन कर्म का सप्रयोग निदर्शन किया। इस उपलब्धि ने अन्य जीवों में इसी प्रकार के संगठनकेंद्रों का पता लगाने तथा पहचानने की रीतियों से संबंधित रासायनिक अध्ययनों को जन्म दिया। सन् १९३५ में आपकी खोजों के उपलक्ष्य में आपको नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. The Nobel Prize in Physiology or Medicine 1935 [archive] , Nobel Fondation , 2010.