हेमचन्द जोशी

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हेमचंद जोशी (२१ जून सन् १८९४ ई. -) हिंदी के प्रमुख भाषाशास्त्री तथा इतिहासज्ञ थे।

इनका जन्म नैनीताल में २१ जून सन् १८९४ ई. को हुआ। शिक्षा दीक्षा अल्मोड़ा, प्रयाग तथा वाराणसी में हुई। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से इतिहास में एम. ए. किया। बर्लिन विश्वविद्यालय में भी आपने उच्च अध्ययन किया और पैरिस विश्वविद्यालय से ऋग्वेदकाल में आर्थिक राजनीतिक स्थिति पर शोधप्रबंध प्रस्तुत कर डी. लिट्. की उपाधि ली। फ्रांस तथा जर्मनी में आप अनेक वर्ष रहे तथा वहाँ भाषा एवं साहित्य का गहन अध्ययन किया।

भारत के स्वाधीनता आंदोलन में भी आपने प्रारंभ में भाग लिया था। गांधीजी की अपेक्षा तिलक का आपपर अधिक प्रभाव था। आप प्राय: सभी प्रमुख भारतीय भाषाएँ जानते थे। ग्रीक, लैटिन, इतालवी आदि भाषाओं के भी आप अच्छे ज्ञाता थे। सन् १९२२ में आपकी 'स्वाधीनता के सिद्धांत' नामक पुस्तक प्रकाशित हुई। सन् ४० में 'भारत का इतिहास' और ४४ में 'विक्रमादित्य' नामक पुस्तकें प्रकाशित हुईं। रिचर्ड पिशेल के 'प्राकृत भाषा के व्याकरण' का अनुवाद आपकी उल्लेख्य कृति है। आपने संस्मरण, यात्रा विवरण तथा प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में सैकड़ों महत्वपूर्ण निबंध लिखे हैं। मासिक विश्वमित्र, विश्ववाणी तथा धर्मयुग का संपादन कर आपने हिंदी पत्रकारिता को नवीन दिशा प्रदान की। हिंदी भाषा तथा साहित्य के क्षेत्र में आपकी सेवाएँ चिरस्मरणीय रहेंगी।