हेनरी ला फोंटेन
हेनरी ला फॉन्टेन (22 अप्रैल 1854 – 14 मई 1943) बेल्जियम के अंतर्राष्ट्रीय वकील और अंतर्राष्ट्रीय शांति ब्यूरो के अध्यक्ष थे। वे यूरोप में शांति आंदोलन के प्रभावी नेता थे। उनके इस योगदान के लिए 1913 में इन्हें शांति का नोबेल शांति पुरस्कार मिला।[1]
जीवन-परिचय
[संपादित करें]इनका जन्म 22 अप्रैल 1854 को ब्रुसेल्स में हुआ था। उन्होंने फ्री यूनिवर्सिटी ऑफ़ ब्रुसेल्स (जो अब 'यूनिवर्सिटी लिब्रे डी ब्रुसेल्स' और 'व्रिजे यूनिवर्सिटिट ब्रुसेल' में बंट गई है) में कानून की पढ़ाई की। 1877 में उन्हें बार में शामिल किया गया और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून के जानकार के तौर पर अपनी पहचान बनाई।[2] वे और उनकी बहन लियोनी ला फोंटेन महिलाओं के अधिकारों और वोट देने के अधिकार के शुरुआती समर्थक थे।उन्होंने 1890 में 'बेल्जियन लीग फॉर द राइट्स ऑफ़ विमेन' की स्थापना की। 1893 में वे फ्री यूनिवर्सिटी ऑफ़ ब्रुसेल्स में अंतरराष्ट्रीय कानून के प्रोफेसर बने। दो साल बाद सोशलिस्ट पार्टी के सदस्य के तौर पर बेल्जियन सीनेट के लिए चुने गए। उन्होंने 1919 से 1932 तक सीनेट के उपाध्यक्ष के तौर पर काम किया।
ला फोंटेन ने 1882 में स्थापित अंतर्राष्ट्रीय शांति ब्यूरो में प्रारंभिक रुचि ली। 1899 और 1907 के हेग शांति सम्मेलन को आयोजित करने के ब्यूरो के प्रयासों में प्रभावशाली थे। उन्होंने 1907 से 1943 में अपनी मृत्यु तक ब्यूरो के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। प्रथम विश्व युद्ध ने ला फोंटेन को आश्वस्त किया कि शांति लौटने पर दुनिया एक अंतरराष्ट्रीय अदालत स्थापित करेगी। उन्होंने जोसेफ होजेस चोएट, एलिहु रूट, चार्ल्स विलियम एलियट और एंड्रयू डिक्सन व्हाइट सहित कई संभावित सदस्यों का प्रस्ताव रखा। ला फोंटेन ने विश्व के शांतिवादी संगठनों के एकीकरण के विचार को भी बढ़ावा दिया।
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Nobel Peace Prize 1913". NobelPrize.org. अभिगमन तिथि: 5 जून 2026.
- ↑ "Henri La Fontaine | Nobel Prize, Peace Activist, International Law | Britannica". Encyclopedia Britannica (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 5 जून 2026.