हिन्दू राष्ट्रवाद

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हिन्दू राष्ट्रवाद सामूहिक तौर पर सामाजिक और राजनीतिक विचार की अभिव्यक्ति को संदर्भित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है जो ऐतिहासिक भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित है।[1] भारतीय मूल संस्कृति के प्रति जागरूकता और उसका विचार भारतीय इतिहास में अत्यधिक प्रासंगिक बन गया जब उसकी वजह से भारतीय राजनीति को एक विशिष्ट पहचान मिली तथा उपनिवेशवाद के विरुद्ध प्रश्न उठाने में आधार प्रदान किया। मूल संस्कृति की भावना ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध स्वतंत्रता आंदोलनों को प्रेरित किया जिस में सशस्त्र संघर्ष, प्रतिरोधी राजनीति और गैर-हिंसक विरोध प्रदर्शन शामिल थे। इसने भारत में सामाजिक सुधार आंदोलनों और आर्थिक सोच को प्रभावित किया।[2][3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. जैन, गिरिलाल (1994). The Hindu Phenomenon. नई दिल्ली: UBS Publishers' Distributors. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 81-86112-32-4. 
  2. Peter van der Veer, Hartmut Lehmann, Nation and religion: perspectives on Europe and Asia, प्रिंसटन युनिवर्सिटी प्रेस, 1999
  3. विद्या धर महाजन और सावित्री महाजन (1971). Constitutional history of India, including the nationalist movement (6th edition). दिल्ली: एस. चंद.