हिन्दी ललित निबन्धकार

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ललितनिबंध निबंध का एक प्रकार है। ललित निबन्ध विधा की उपस्थिति का अभास आधुनिक काल और गद्य विधा के आरम्भ के साथ ही मिलने लगता है। भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, प्रतापनारायण मिश्र, सरदार पूर्ण सिंह, चन्द्रधर्शर्मा गुलेरी, बालमुकुन्द गुप्त, पुन्न्नलाल पदुमलाल बक्शी आदि के निबन्धों में इस विधा के पूर्वाभास दिखाई पडने लगते हैं, लेकिन एक व्यवस्थित और महत्वपूर्ण विधा के रूप में इसकी पहचान पहले-पहल आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी के निबन्धों में दिखाई पडती है। ‘अशोक के फूल’, ‘कुटज ’और ‘कल्पलता’ संकलनों के निबंध पहले-पहल इस विधा के प्रतिदर्श बने। अतः उनके ये निबन्ध ही इस विधा के वास्तविक प्रस्थान विन्दु हैं। आगे चलकर कुबेरनाथ राय , विद्या निवास मिश्र, विवेकी राय , कृष्णबिहारी मिश्र, श्रीराम परिहार, दरवेश सिंह आदि निबन्धकारों ने इसे और समृद्ध किया। ललित निबंध की एक संज्ञा व्यक्तिव्यंजक निबंध भी है। इसलिए इसके दायरे में शिवप्रसाद सिंह, नामवर सिंह, अज्ञेय, अष्टभुजा शुक्ल को भी शामिल कर सकते हैं। किंतु, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, विद्यानिवास मिश्र और कुबेरनाथ राय इस विधा की एक त्रयी रचते हैं। इस विधा को वास्तविक पहचान इन्ही रचनाकारों ने दी।

* कुबेरनाथ राय[संपादित करें]

(२६ मार्च, १९३३ - ५ जून, १९९६) हिन्दी ललित निबन्ध परम्परा के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर, सांस्कृतिक निबन्धकार और भारतीय आर्ष-चिन्तन के गन्धमादन थे। उनकी गिनती आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी और विद्यानिवास मिश्र जैसे ख्यातिलब्ध निबन्धकारों के साथ की जाती है। उनका समूचा लेखन भारतीयता की पहचान और उसकी व्याख्याको समर्पित रहा है।

* विद्या निवास मिश्र[संपादित करें]

(२८ जनवरी, १९२६ - १४ फरवरी, २००५) संस्कृत के प्रकांड विद्वान, जाने-माने भाषाविद्, हिन्दी साहित्यकार और सफल सम्पादक (नवभारत टाइम्स) थे। उन्हें सन १९९९ में भारत सरकार ने साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। ललित निबंध परम्परा में ये आचार्य हज़ारीप्रसाद द्विवेदी और कुबेरनाथ राय के साथ मिलकर एक त्रयी रचते है। पं. हजारीप्रसाद द्विवेदी के बाद अगर कोई हिन्दी साहित्यकार ललित निबंधों को वांछित ऊँचाइयों पर ले गया तो हिन्दी जगत में डॉ॰ विद्यानिवास मिश्र का ही जिक्र होता है।

* हजारीप्रसाद द्विवेदी[संपादित करें]

आधुनिक युग के मौलिक निबंधकार, उत्कृष्ट समालोचक एवं सांस्कृतिक विचारधारा के प्रमुख उपन्यासकार आचार्य हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का जन्म १९ अगस्त १९०७ में बलिया जिले के दुबे-का-छपरा नामक ग्राम में हुआ था। उनका परिवार ज्योतिष विद्या के लिए प्रसिद्ध था। उनके पिता पं. अनमोल द्विवेदी संस्कृत के प्रकांड पंडित थे। द्विवेदी जी की प्रारंभिक शिक्षा गांव के स्कूल में ही हुई और वहीं से उन्होंने मिडिल की परीक्षा पास की। इसके पश्चात् उन्होंने इंटर की परीक्षा और ज्योतिष विषय लेकर आचार्य की परीक्षा उत्तीर्ण की। शिक्षा प्राप्ति के पश्चात द्विवेदी जी शांति निकेतन चले गए और कई वर्षों तक वहां हिंदी विभाग में कार्य करते रहे। शांति-निकेतन में रवींद्रनाथ ठाकुर तथा आचार्य क्षितिमोहन सेन के प्रभाव से साहित्य का गहन अध्ययन और उसकी रचना प्रारंभ की। द्विवेदी जी का व्यक्तित्व बड़ा प्रभावशाली और उनका स्वभाव बड़ा सरल और उदार था। वे हिंदी, अंग्रेज़ी, संस्कृत और बांग्‍ला भाषाओं के विद्वान थे। भक्तिकालीन साहित्य का उन्हें अच्छा ज्ञान था। लखनऊ विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट. की उपाधि देकर उनका विशेष सम्मान किया था।

*विवेकी राय[संपादित करें]

हिन्दी के एक महत्वपूर्ण ललित निबन्धकार, जो अपनी ललित भंगिमा और गंवई जीवन के प्रति अनन्य राग क कारण विशेष रूप से जाने जाते हैं। विवेकी राय हिन्दी ललित निबन्ध परम्परा के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। इस विधा में उनकी गिनती आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदि, विद्यानिवास मिश्र और कुबेरनाथ राय जैसे शीर्षस्थानीय निबन्धकार के साथ की जाती है। उनके निबन्ध सग्रह ‘मनबोध मास्टर की डायरी’ और ‘फ़िर बैतलवा डाल पर’ उनकी पहचान के शुरुआती आधार बनते हैं तो ‘वन तुलसी की गन्ध’ और ‘जगत तपोवन सो कियो’ निबन्ध के क्षेत्र में नए क्षितिज के विस्तर के प्रमाण हैं। इस विधा में उनके अब तक ग्यारह संग्रह प्रकशित हो चुके हैं। ‘उठ जाग मुसफ़िर’ उनका बारहवां निबन्ध संग्रह है।

* परिचय दास [संपादित करें]

ललित निबंध , सांस्कृतिक कविता , भारतीय आलोचना में नए विन्यास का प्रयत्न . भोजपुरी , हिन्दी में लेखन . जन्म: ग्राम - रामपुर कांधी [ देवलास ] , जिला- मऊ नाथ भंजन [ उत्तर प्रदेश ] . गोरखपुर विश्व विद्यालय से साहित्य के समाजशास्त्र में डॉक्टरेट . सार्क साहित्य सम्मलेन , नई दिल्ली में कविता-पाठ के अतिरिक्त भारत की ओर से नेपाल सरकार के नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान , काठमांडू में भोजपुरी पर व्याख्यान. रचनाएं कई विश्वविद्यालयों के एम. ए. के पाठ्यक्रम में सम्मिलित. भोजपुरी-मैथिली पत्रिका - ';परिछन'; के संस्थापक-संपादक एवं हिन्दी पत्रिका - ';इंद्रप्रस्थ भारती'; के संपादक रहे। हिन्दी अकादमी, दिल्ली एवं मैथिली-भोजपुरी अकादमी , दिल्ली के सचिव रहे। प्रमुख प्रकाशित पुस्तकें - ';संसद भवन की छत पर खड़ा हो के ';, ';एक नया विन्यास';, ';युगपत समीकरण में';, ';पृथ्वी से रस ले के ';, ';चारुता';, ';आकांक्षा से अधिक सत्वर';, ';धूसर कविता';;, ';कविता चतुर्थी';, ';अनुपस्थित दिनांक';, ';मद्धिम आंच में';, ';मनुष्यता की भाषा का मर्म '; [सीताकांत महापात्र की रचनात्मकता पर संपादित पुस्तक ] , ';स्वप्न, संपर्क, स्मृति'; [ सीताकांत महापात्र पर संपादित दूसरी पुस्तक ], ';भिखारी ठाकुर '; [ भोजपुरी में संपादित पुस्तक ] ,भारत की पारम्परिक नाट्य शैलियाँ [ दो खण्डों में ] , ';भारत के पर्व [ दो खण्डों में ].