हिन्दी प्रचारक संस्थान

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हिन्दी प्रचारक संस्थान भारत की एक प्रमुख प्रकाशन संस्था है। इसकी स्थापना कोलकाता में निहालचंद एंड संस नाम से हुई थी। 1934 के भूकंप के बाद प्रकाशन वाराणसी आ गया। जहां इसका नाम हिंदी प्रचारक संस्थान रखा गया। प्रकाशन की स्थापना निहाल चंद बेरी ने की थी। बाद में उनके पुत्र कृष्णचन्द्र बेरी ने प्रकाशन को आगे बढ़ाया। प्रचारक ग्रन्थावली परियोजना के अन्तर्गत इस संस्था ने लागत से भी कम मूल्य पर हिन्दी में कई मूल्यवान साहित्यिक पुस्तकें प्रकाशित कीं। इसमें शरत समग्र, भारतेंदु समग्र, वृंदावनलाल वर्मा समग्र, कबीर समग्र, प्रताप चंद्र समग्र जैसी पुस्तकें शामिल है। कृष्णचन्द्र बेरी का निधन 2002 में हुआ। अब उनके पुत्र विजय प्रकाश बेरी अब इसका कामकाज देखते हैं। हिंदी प्रचारक संस्थान का कार्यालय वाराणसी के पिशाचमोचन में है। इसकी सहयोगी प्रकाशन संस्था साहित्य भारती पब्लिकेशंस कोलकाता है जिसका कामकाज बेरी जी के छोटे बेटे अनिल बेरी देखते हैं।