हिन्दी के दस सर्वश्रेष्ठ

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हिन्दी के दस सर्वश्रेष्ठ बीसवीं शताब्दी तक के हिन्दी साहित्यकारों एवं हिन्दी साहित्य की विभिन्न विधाओं की रचनाओं के सन्दर्भ में श्रेष्ठ आलोचकों द्वारा किये गये उल्लेखों-विवेचनों पर आधारित मुख्यतः दस-दस उत्कृष्ट साहित्यकारों या फिर साहित्यिक कृतियों का चयन है, जिन्हें सापेक्ष रूप से श्रेष्ठतर माना गया है।

पूर्वकथन[संपादित करें]

हिन्दी के सुदीर्घ कालीन एवं विशाल साहित्यिक क्षेत्र से विभिन्न विधागत सर्वश्रेष्ठ लेखकों एवं लेखन का चयन कठिन एवं विवादास्पद भी हो सकता है; परन्तु यह प्रत्येक पाठक की जिज्ञासा का सहज अंग है। यहाँ चयन में व्यक्तिगत रुचि की अपेक्षा व्यापक आलोचकीय समझ एवं तत्सम्बन्धी मान्य आलोचनात्मक लेखन के आधार को अपनाया गया है। ध्यातव्य है कि इस चयन की उत्तर सीमा बीसवीं सदी तक ही है। समस्त चयन से सम्बद्ध आधार-सामग्री की भी सूचना दे दी गयी है। अनेक अनुभागों में सही अवधारणा के लिए दस सर्वश्रेष्ठ के बाद प्रायः समकक्ष या तुरत बाद स्थान पा सकने योग्य और भी 10 श्रेष्ठतर की सूची दी गयी है।

हिन्दी के दस सर्वश्रेष्ठ आलोचक[संपादित करें]

हिन्दी साहित्य (बीसवीं शताब्दी) के सर्वश्रेष्ठ आलोचकों के चयन की एकाधिक कोशिश पुस्तक-लेखन तथा पत्रिका के विशेषांक रूप में भी आलोचकों द्वारा हो चुकी है। सर्वप्रथम डॉ० रामचंद्र तिवारी ने अपनी पुस्तक 'हिन्दी आलोचना : शिखरों का साक्षात्कार' में सर्वश्रेष्ठ दस आलोचकों का चयन करके[1] उनके आलोचनात्मक योगदान का विवेचन प्रस्तुत किया था। पुनः अरविन्द त्रिपाठी संपादित 'वर्तमान साहित्य' के 'शताब्दी आलोचना पर एकाग्र' विशेषांक (पुस्तक रूप में 'आलोचना के सौ बरस') के प्रथम खंड में 'हिन्दी आलोचना के नवरत्न' की सूची[2] तथा विवेचन प्रस्तुत किये गये थे। इन दोनों अध्ययनों में आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी को भी शामिल किया गया था। आचार्य द्विवेदी का ऐतिहासिक योगदान निस्संदेह अन्य किसी श्रेष्ठ आलोचक से कई मायने में अधिक ही होगा, परंतु तटस्थ दृष्टि से स्वतंत्र आलोचनात्मक लेखन को ध्यान में रखने पर स्पष्ट विदित होता है कि उनके बिल्कुल प्रारम्भिक दौर के आलोचक होने के कारण उनकी कोई पुस्तक सही रूप में आलोचना या साहित्येतिहास की भी श्रेष्ठ पुस्तक के रूप में गिनी तक नहीं जा सकती है। वस्तुतः उन्होंने आलोचना का पथ तैयार किया। डॉ० रामचंद्र तिवारी द्वारा वर्णित अन्य नौ आलोचकों में से डॉ० बच्चन सिंह के बारे में डॉ० तिवारी की स्वयं मान्यता है कि उनके लेखन में नवलता तथा ताजगी का अभाव है एवं प्रायः वे किसी मान्यता के काफी समय बीत जाने पर ही उस पर कलम उठाते हैं। उनकी तुलना में डॉ० तिवारी ने डॉ० नंदकिशोर नवल आदि की विशेषता बतायी है तथा माना है कि बच्चन सिंह जी विद्वान साहित्य-अध्येता की भूमिका ही अपेक्षाकृत निभाते रहे।[3] अतः समग्र लेखकीय महत्त्व के कारण वे श्रेष्ठतर आलोचक के रूप में तो मान्य हैं परंतु सर्वश्रेष्ठ दस में नहीं। 'वर्तमान साहित्य' के शताब्दी आलोचना विशेषांक की समीक्षा करते हुए सुप्रसिद्ध कवि मदन कश्यप ने लिखा था कि इसमें शामिल छह नामों पं० रामचन्द्र शुक्ल, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, मुक्तिबोध, डॉ० रामविलास शर्मा, डॉ० नामवर सिंह और विजयदेव नारायण साही को लेकर शायद ही कोई विवाद हो...। परन्तु आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी हैं तो डॉ० नगेन्द्र क्यों नहीं?[4] इस विशेषांक में 'नवरत्न' में अज्ञेय को भी चुन लिया गया था। इस संदर्भ में मदन कश्यप जी स्पष्ट कहते हैं कि अज्ञेय का सृजनात्मक व्यक्तित्व बेशक बहुत बड़ा और सदी के किसी भी चयन में शामिल होने के काबिल है। लेकिन एक कवि-आलोचक के रूप में उन्हें मुक्तिबोध और साही के साथ नहीं रखा जा सकता। उनका आलोचनात्मक लेखन उतना सुव्यवस्थित नहीं है। उनकी जगह पर नलिन विलोचन शर्मा अथवा बीती सदी के अंतिम तीन दशकों की रचनाशीलता से जुड़े आलोचकों डॉ० परमानन्द श्रीवास्तव, डॉ० मैनेजर पांडेय आदि में से किसी को चुना जाना चाहिए था।[5] इस संदर्भ में ध्यातव्य है कि नलिन जी का लेखन अव्यवस्थित तथा बहुत-कुछ अप्रकाशित है। नवीन एवं सुदृढ़ विचार तथा व्यवस्थित लेखन की दृष्टि से मैनेजर पांडेय सर्वश्रेष्ठ दस में स्थान पाने के लिए अधिक सक्षम व्यक्तित्व सिद्ध होते हैं। समग्रतः पूर्वोक्त चयन के पारस्परिक सन्दर्भन (क्रॉस रेफरेंस) से प्राप्त निष्कर्ष से सर्वश्रेष्ठ दस आलोचकों की सूची (जन्म क्रम से) इस प्रकार है :-

  1. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
  2. आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी
  3. आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
  4. डॉ॰ नगेन्द्र
  5. डाॅ॰ रामविलास शर्मा
  6. गजानन माधव मुक्तिबोध
  7. विजयदेव नारायण साही
  8. डॉ॰ नामवर सिंह
  9. डॉ॰ रामस्वरूप चतुर्वेदी
  10. डॉ॰ मैनेजर पाण्डेय
आधार ग्रन्थ-
  • हिन्दी आलोचना : शिखरों का साक्षात्कार - रामचन्द्र तिवारी, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद
  • आलोचना के सौ बरस (तीन खण्डों में), सं० अरविन्द त्रिपाठी, शिल्पायन, शाहदरा, दिल्ली

(तथा इसी के मूल रूप की समीक्षा 'इंडिया टूडे' 11 सितम्बर 2002, समीक्षक-मदन कश्यप)

हिन्दी के दस और श्रेष्ठतर आलोचक[संपादित करें]

(जन्म क्रम :-)

  1. नलिन विलोचन शर्मा
  2. बच्चन सिंह
  3. नेमिचन्द्र जैन
  4. देवीशंकर अवस्थी
  5. सुरेन्द्र चौधरी
  6. रमेशचन्द्र शाह
  7. अशोक वाजपेयी
  8. विश्वनाथ त्रिपाठी
  9. परमानन्द श्रीवास्तव
  10. नन्दकिशोर नवल
आधार ग्रन्थ-
  • हिन्दी आलोचना - विश्वनाथ त्रिपाठी, राजकमल प्रकाशन, नयी दिल्ली
  • हिन्दी आलोचना का दूसरा पाठ - निर्मला जैन,राजकमल प्रकाशन, नयी दिल्ली

हिन्दी के दस सर्वश्रेष्ठ उपन्यास[संपादित करें]

हिन्दी उपन्यास के क्षेत्र में पाँच उपन्यासों को प्रायः निर्विवाद रूप से कालजयी उपन्यास के रूप में स्वीकार किया गया है। डॉ० नामवर सिंह के अनुसार :

"हिन्दी के पाँच कालजयी उपन्यास 'गोदान', 'त्यागपत्र', 'शेखर : एक जीवनी', 'बाणभट्ट की आत्मकथा' और 'मैला आँचल' हैं निर्विवाद रूप से।"[6]

छठवाँ नाम उन्होंने जोर देकर 'नौकर की कमीज' (-विनोद कुमार शुक्ल) का लिया है।

डॉ० परमानन्द श्रीवास्तव ने भी लिखा है कि :
" 'गोदान', 'त्यागपत्र', 'मैला आँचल', 'शेखर : एक जीवनी' और 'बाणभट्ट की आत्मकथा' -- ये पाँच हिन्दी में कालजयी कृतियों की तरह मान्य हैं।"[7]

'कथा साहित्य के सौ बरस' ('वर्तमान साहित्य' के 'शताब्दी कथा विशेषांक') में सदी के चुने हुए दस उपन्यासों की सूची[8] में 'मित्रो मरजानी' का नाम दे दिये जाने से 'बाणभट्ट की आत्मकथा' का नाम छोड़ दिया गया है, जबकि उसी में विवेचन क्रम में 'बाणभट्ट की आत्मकथा' का भी विवेचन सम्मिलित है।[9] 'मित्रो मरजानी' का प्रकाशन[10] और विवेचन[11][12] भी कहानी के रूप में ही होते रहा है तथा स्वयं इसकी लेखिका (कृष्णा सोबती) ने इसके उपन्यास रूप में सम्मिलित किये जाने पर आपत्ति प्रकट की थी।[13] अतः यहाँ इसे उपन्यासों में सम्मिलित न कर कहानियों में ही सम्मिलित किया गया है।

  1. गोदान (१९३६) -- प्रेमचन्द
  2. त्यागपत्र (१९३७) -- जैनेन्द्र कुमार
  3. शेखर : एक जीवनी (१९४०-४४) -- अज्ञेय
  4. बाणभट्ट की आत्मकथा (१९४६) -- हजारीप्रसाद द्विवेदी
  5. मैला आँचल (१९५४) -- फणीश्वरनाथ रेणु
  6. बूँद और समुद्र (१९५६) -- अमृतलाल नागर
  7. झूठा सच (१९५८-६०) -- यशपाल
  8. आधा गाँव (१९६६) -- राही मासूम रजा
  9. राग दरबारी (१९६८) -- श्रीलाल शुक्ल
  10. नौकर की कमीज (१९७९) -- विनोद कुमार शुक्ल
आधार ग्रन्थ-

कथा-साहित्य के सौ बरस - सं० विभूति नारायण राय, शिल्पायन,शाहदरा,दिल्ली

हिन्दी के दस सर्वश्रेष्ठ नाटककार[संपादित करें]

दस श्रेष्ठ नाटकों की बजाय यहाँ नाटककारों को चुना गया है; क्योंकि अनेक निर्विवादित श्रेष्ठ नाटककारों का भी सर्वश्रेष्ठ नाटक कौन सा है यह बता पाना किसी समीक्षक के लिए कठिन रहा है। उदाहरण के लिए प्रसाद जी का नाटक स्कन्दगुप्त समग्र दृष्टि से श्रेष्ठ है या चन्द्रगुप्त ? यही बात मोहन राकेश, सुरेन्द्र वर्मा आदि के साथ भी लागू है। हाँ नाटककारों के नाम के आगे दी गयी शीर्ष कृतियों की सूची आनुमानिक नहीं तत्सम्बन्धी श्रेष्ठ आलोचनात्मक लेखन पर आधारित है। यहाँ प्रथम,तृतीय तथा चतुर्थ नाम ऐतिहासिक महत्त्व की दृष्टि से है। शेष नाम समग्र महत्त्व की दृष्टि से श्रेष्ठता-क्रम में हैं। लेखक के नाम के आगे उनकी शीर्ष कृतियों के नाम हैं। फिर विशेष अध्ययन हेतु उल्लेखनीय कृतियों के नाम भी दे दिये गये हैं।

  1. भारतेन्दु हरिश्चन्द्र -- सत्य हरिश्चन्द्र, अंधेर नगरी (विशेष अध्ययन हेतु उल्लेखनीय कृति -- नाटककार भारतेन्दु की रंग-परिकल्पना, लेखक- सत्येन्द्र कुमार तनेजा)
  2. जयशंकर प्रसाद -- स्कन्दगुप्त विक्रमादित्य, चन्द्रगुप्त मौर्य (विशेष अध्ययन हेतु उल्लेखनीय कृतियाँ -- 1.जयशंकर प्रसाद : रंगदृष्टि एवं रंगसृष्टि {दो भागों में}, लेखक- महेश आनन्द; 2.नाटककार जयशंकर प्रसाद - सं० सत्येन्द्र कुमार तनेजा)
  3. भुवनेश्वर -- ताँबे के कीड़े, ऊसर, स्ट्राइक (विशेष अध्ययन हेतु कृतियाँ - भुवनेश्वर : व्यक्तित्व एवं कृतित्व, सं० राजकुमार शर्मा; भुवनेश्वर {मोनोग्राफ}, लेखिका- गिरीश रस्तोगी)
  4. धर्मवीर भारती -- अन्धा युग (विशेष अध्ययन हेतु - हिन्दी नाटक का आत्मसंघर्ष, ले० गिरीश रस्तोगी)
  5. मोहन राकेश -- आषाढ़ का एक दिन, लहरों के राजहंस, आधे-अधूरे (विशेष अध्ययन हेतु उल्लेखनीय कृतियाँ - मोहन राकेश : रंग-शिल्प और प्रदर्शन, ले० जयदेव तनेजा; मोहन राकेश और उनके नाटक, ले० गिरीश रस्तोगी)
  6. सुरेन्द्र वर्मा -- द्रौपदी, सूर्य की अन्तिम किरण से सूर्य की पहली किरण तक, आठवाँ सर्ग (विशेष अध्ययन हेतु -- आधुनिक हिन्दी नाटक और रंगमंच, सं० नेमिचन्द्र जैन; हिन्दी नाटक का आत्मसंघर्ष, ले० गिरीश रस्तोगी)
  7. भीष्म साहनी -- हानूश, कबिरा खड़ा बजार में, माधवी (विशेष अध्ययन हेतु -- आलोचना, सहस्राब्दी अंक-17-18; हिन्दी नाटक का आत्मसंघर्ष, ले० गिरीश रस्तोगी)
  8. जगदीशचन्द्र माथुर -- कोणार्क, शारदीया, पहला राजा (विशेष अध्ययन हेतु -- नाटककार जगदीशचन्द्र माथुर, ले० गोविन्द चातक; हिन्दी नाटक का आत्मसंघर्ष, ले० गिरीश रस्तोगी)
  9. लक्ष्मीनारायण लाल -- मादा कैक्टस, दर्पण, करफ्यू (विशेष अध्ययन हेतु -- आधुनिक हिन्दी नाटक और रंगमंच, सं० नेमिचन्द्र जैन; हिन्दी नाटक का आत्मसंघर्ष, ले० गिरीश रस्तोगी)
  10. शंकर शेष -- एक और द्रोणाचार्य, कोमल गांधार, रक्तबीज (सहायक अध्ययन हेतु- हिन्दी नाटक का आत्मसंघर्ष, ले० गिरीश रस्तोगी)

हिन्दी के दस सर्वश्रेष्ठ महाकाव्य[संपादित करें]

महाकाव्यों के चयन में प्रायः विवाद की गुंजाइश नहीं है, क्योंकि हिन्दी की समृद्ध आलोचना-परम्परा महाकाव्यों को इतनी कड़ी कसौटियों पर कसती रही है कि आधुनिक काल में, खासकर स्वातन्त्रयोत्तर काल में, हिन्दी में काफी अच्छे कवि भी प्रायः महाकाव्य लिखने का साहस तक नहीं कर पाते। हिन्दी आलोचना का यह आतंक ही है जिससे दिनकर जी जैसे कवि ने जब पूरी तरह तत्पर होकर महाकाव्य लिखने का मन बनाया तो रूप की दृष्टि से 'महाकाव्य' न लिखकर 'काव्य नाटक' (उर्वशी) लिखा; ताकि अनावश्यक विस्तार से भी बच सकें और बहुत से रूपाधारित आक्षेपों से भी अग्रिम छुटकारा मिल जाये। पहले भी कई कवियों ने जो महाकाव्य लिखे उन्हें उत्तम काव्य में कभी नहीं गिना गया। [इसकी अपेक्षा संस्कृत तथा मैथिली में भी आधुनिक समय में भी अनेक महाकाव्य लिखे गये हैं। इसके कुछ अन्य कारण भी होंगे, परन्तु सर्वाधिक प्रमुख कारण इन भाषाओं में समृद्ध तथा प्रभावी आलोचना का अभाव ही है।] अतः हिन्दी में उत्कृष्ट महाकाव्यों की संख्या दस के भीतर ही रही है। हाँ यह अवश्य है कि ये महाकाव्य विश्व-वाङ्मय की अमूल्य निधि हैं। यहाँ आचार्य शुक्ल तथा हिन्दी साहित्यकोश, भाग-2 की मान्यतानुसार 'नूरजहाँ' को जोड़कर दस की संख्या पूरी की जा रही है। (कालक्रम से :-)

  1. पृथ्वीराज रासो -- चंदबरदाई
  2. पद्मावत -- मलिक मुहम्मद जायसी
  3. रामचरितमानस - तुलसीदास
  4. रामचन्द्रिका -- केशवदास
  5. प्रियप्रवास -- अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
  6. साकेत -- मैथिलीशरण गुप्त
  7. नूरजहाँ -- गुरुभक्त सिंह 'भक्त'
  8. कामायनी -- जयशंकर प्रसाद
  9. उर्वशी -- रामधारी सिंह 'दिनकर'
  10. राधा -- जानकीवल्लभ शास्त्री

आधुनिक हिन्दी के दस श्रेष्ठतर कवि[संपादित करें]

  1. सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
  2. जयशंकर प्रसाद
  3. अज्ञेय
  4. नागार्जुन
  5. मुक्तिबोध
  6. शमशेर
  7. धूमिल
  8. कुँवर नारायण
  9. रघुवीर सहाय
  10. केदारनाथ सिंह

(--डॉ॰ मैनेजर पाण्डेय, अभिधा,जनवरी 1999, पृ॰9)

हिन्दी की दस सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ[संपादित करें]

(कोष्ठक में उसी लेखक की दूसरी सर्वप्रमुख कहानी का नाम दिया गया है।)

  1. उसने कहा था -- चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी'
  2. कफ़न - प्रेमचन्द (दूसरी सर्वप्रमुख-- पूस की रात)
  3. आकाशदीप - जयशंकर प्रसाद (गुंडा)
  4. गैंग्रीन - अज्ञेय (शरणदाता)
  5. चीफ की दावत - भीष्म साहनी (अमृतसर आ गया है)
  6. तीसरी कसम - फणीश्वर नाथ रेणु (रसप्रिया)
  7. मित्रो मरजानी - कृष्णा सोबती
  8. डिप्टी कलक्टरी - अमरकान्त (हत्यारे)
  9. घण्टा - ज्ञानरंजन (बहिर्गमन)

[इन कहानियों के उत्तम विवेचन के लिए पठनीय-- हिन्दी कहानी : प्रक्रिया और पाठ - सुरेन्द्र चौधरी; कुछ कहानियाँ : कुछ विचार - विश्वनाथ त्रिपाठी; कफ़न : एक पुनर्पाठ - सं० पल्लव; प्रसाद जी की कहानियों की अत्युत्तम विवेचना के लिए द्रष्टव्य - 'जयशंकर प्रसाद की श्रेष्ठ कहानियाँ' की भूमिका, सं० विजयमोहन सिंह; अथवा, समय और साहित्य, ले० विजयमोहन सिंह]

हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ कहानीकार[संपादित करें]

(प्रायः जन्म-क्रम)

हिन्दी के काफी श्रेष्ठ कहानीकारों की एक समृद्ध शृंखला मौजूद है। कहानीकारों के मामले में केवल दस का चयन चयनित के साथ न्याय से अधिक अन्य के साथ अन्याय हो जाता है। साथ ही उसमें पूर्वाग्रह प्रबल हो जाता है, क्योंकि हिन्दी में कहानी-समीक्षा पूर्वापर व्याप्ति की दृष्टि से अब तक पर्याप्त समृद्ध नहीं है। इसलिए यहाँ कहानी के इतिहास को तीन काल-खण्डों में बाँटकर सर्वश्रेष्ठ का चयन किया गया है।

नयी कहानी-पूर्व[संपादित करें]

  1. प्रेमचन्द
  2. जयशंकर प्रसाद
  3. जैनेन्द्र कुमार
  4. यशपाल
  5. अज्ञेय

नयी कहानी युग[संपादित करें]

  1. फणीश्वरनाथ रेणु
  2. मार्कण्डेय
  3. भीष्म साहनी
  4. कृष्णा सोबती
  5. अमरकान्त
  6. निर्मल वर्मा
  7. मन्नू भण्डारी
  8. शेखर जोशी
  9. शैलेश मटियानी
  10. kashinath singh

साठोत्तरी से समकालीन[संपादित करें]

  1. ज्ञानरंजन
  2. काशीनाथ सिंह
  3. दूधनाथ सिंह
  4. मिथिलेश्वर
  5. असग़र वजाहत
  6. स्वयं प्रकाश
  7. संजीव
  8. अरुण प्रकाश
  9. उदय प्रकाश
  10. अखिलेश
आधार ग्रन्थ-
  • हिन्दी कहानी : प्रक्रिया और पाठ - सुरेन्द्र चौधरी
  • हिन्दी कहानी : रचना और परिस्थिति - सुरेन्द्र चौधरी
  • कुछ कहानियाँ : कुछ विचार - विश्वनाथ त्रिपाठी
  • कहानी के साथ-साथ - विश्वनाथ त्रिपाठी
  • आज की कहानी - विजयमोहन सिंह
  • हिन्दी कहानी : अस्मिता की तलाश - मधुरेश
  • नयी कहानी : पुनर्विचार - मधुरेश
  • हिन्दी कहानी का विकास - मधुरेश

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. हिन्दी आलोचना : शिखरों का साक्षात्कार, रामचन्द्र तिवारी, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद, संस्करण-2002, पृ०-5.
  2. आलोचना के सौ बरस, प्रथम खण्ड, सं०- अरविन्द त्रिपाठी, शिल्पायन, शाहदरा, दिल्ली, संस्करण-2012, पृ०-5 (पुरोवाक्) तथा पृ०-7.
  3. हिन्दी आलोचना : शिखरों का साक्षात्कार, रामचन्द्र तिवारी, लोकभारती प्रकाशन, इलाहाबाद, संस्करण-2002, पृ०-149.
  4. मदन कश्यप, 'इंडिया टूडे' 11 सितम्बर 2002, पृ०-74.
  5. मदन कश्यप, 'इंडिया टूडे' 11 सितम्बर 2002, पृ०-74-75.
  6. मूलतः 'हिंदी कथा साहित्य की कालजयी परम्परा' शीर्षक वक्तव्य में, प्रगतिशील वसुधा-63, जनवरी 2005, संपादक- कमला प्रसाद एवं अन्य, पृष्ठ-77. साहित्य की पहचान में संकलित; द्रष्टव्य- साहित्य की पहचान, नामवर सिंह, राजकमल प्रकाशन, नयी दिल्ली, संस्करण-2015, पृष्ठ-167.
  7. आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी : व्यक्तित्व और कृतित्व, संपादक- डॉ० व्यास मणि त्रिपाठी, हिन्दी साहित्य कला परिषद्, हिन्दी भवन, पोर्ट ब्लेयर-1, अण्डमान, प्रथम संस्करण-2008, पृष्ठ-102.
  8. कथा-साहित्य के सौ बरस, सं० विभूति नारायण राय, शिल्पायन, शाहदरा,दिल्ली, तृतीय संस्करण-2012, पृष्ठ-575.
  9. कथा-साहित्य के सौ बरस, सं० विभूति नारायण राय, शिल्पायन, शाहदरा,दिल्ली, तृतीय संस्करण-2012, पृष्ठ-352.
  10. गंगा स्नान करने चलोगे, विश्वनाथ त्रिपाठी, भारतीय ज्ञानपीठ, नयी दिल्ली, दूसरा संस्करण-2014, पृष्ठ-117-118.
  11. कुछ कहानियाँ : कुछ विचार, विश्वनाथ त्रिपाठी, राजकमल प्रकाशन, नई दिल्ली, प्रथम संस्करण-1998, पृष्ठ-74.
  12. नयी कहानी : पुनर्विचार, मधुरेश, नेशनल पब्लिशिंग हाउस, नयी दिल्ली, संस्करण-1999, पृष्ठ-228, 234 एवं 237से 240.
  13. हंस, मार्च 2000, पृष्ठ-14; आलोचना और संस्कृति, अजय तिवारी, वाणी प्रकाशन, नयी दिल्ली, प्रथम संस्करण-2007, पृष्ठ-114 पर उद्धृत।