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हर हर महादेव

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शिव तथा उनके परिवार की चित्र, सरकारी संग्रहालय एवं कला दीर्घा, चंडीगढ़।

हर हर महादेव (संस्कृत: हर हर महादेव, hara hara mahādēva) एक संस्कृत स्तुति है जो हिन्दू देवता शिव की प्रशंसा में उच्चारित की जाती है।[1][2] यह स्तुति शिव के दो विशेषणों हर और महादेव से मिलकर बनी है। इसे आमतौर पर शुभ अवसरों पर, प्रार्थना के समय या शिव मंदिर में प्रवेश करते समय श्रद्धालुओं द्वारा जप किया जाता है।[3]

ऐतिहासिक रूप से, यह उद्घोषणा रानी पद्मिनी और हजारों महिलाओं द्वारा जौहर करते समय उच्चारित की गई थी, जब उन्होंने अलाउद्दीन खिलजी से अपने सम्मान की रक्षा के लिए आत्मबलिदान किया। यह उद्घोषणा मराठा साम्राज्य के सैनिकों और राजाओं द्वारा युद्ध के मैदान में जयघोष के रूप में भी प्रयोग की जाती थी।

यह भी देखें

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सन्दर्भ

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  1. Madan, T. N. (1988). Way of Life: King, Householder, Renouncer : Essays in Honour of Louis Dumont (अंग्रेज़ी भाषा में). Motilal Banarsidass Publishers. p. 360. ISBN 978-81-208-0527-9.
  2. Chattopadhyaya, Sudhakar (1978). Reflections on the Tantras (अंग्रेज़ी भाषा में). Motilal Banarsidass Publ. p. 75. ISBN 978-81-208-0691-7.
  3. Eck, Diana L. (2013-06-05). Banaras: CITY OF LIGHT (अंग्रेज़ी भाषा में). Knopf Doubleday Publishing Group. p. 188. ISBN 978-0-307-83295-5.