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हर्बिग-हारो वस्तु

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हर्बिग-हारो वस्तुएं (अंग्रेज़ी: Herbig–Haro object, संक्षेप में HH वस्तुएं) नवजात तारों से जुड़ी नेबुलोसिटी (चमकती हुई गैस) के छोटे धब्बे हैं। इनका निर्माण तब होता है जब युवा तारों से निकलने वाले आंशिक रूप से आयनित गैस के संकीर्ण जेट आसपास के गैस और धूल के बादलों (अंतरतारकीय माध्यम) से सैकड़ों किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से टकराते हैं। यह टकराव अत्यधिक शक्तिशाली शॉक वेव पैदा करता है, जिससे गैस गर्म होकर चमकने लगती है।[1][2]

खोज और नामकरण

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इन वस्तुओं को सबसे पहले 19वीं सदी के अंत में देखा गया था, लेकिन उनकी वास्तविक प्रकृति 1940 के दशक तक एक रहस्य बनी रही। 1946-1947 के आसपास, अमेरिकी खगोलशास्त्री जॉर्ज हर्बिग और मैक्सिकन खगोलशास्त्री गुइलेर्मो हारो ने स्वतंत्र रूप से इन वस्तुओं का विस्तार से अध्ययन किया। उन्होंने यह पहचाना कि ये चमकते हुए धब्बे वास्तव में नवजात तारों के निर्माण की प्रक्रिया का एक उपोत्पाद हैं। उन्हीं के सम्मान में इन्हें 'हर्बिग-हारो वस्तुएं' कहा जाता है।[3]

निर्माण की भौतिकी

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HH वस्तुओं का निर्माण 'तारा निर्माण' की प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसे निम्नलिखित चरणों में समझा जा सकता है:

  1. अभिवृद्धि चक्रिका: जब एक नया तारा गैस के बादल से बनता है, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण आसपास की गैस और धूल तारे में गिरने लगती है, जिससे तारे के चारों ओर एक घूमती हुई 'अभिवृद्धि चक्रिका' बन जाती है।
  2. चुंबकीय क्षेत्र और जेट: जैसे-जैसे सामग्री तारे पर गिरती है, अत्यधिक कोणीय संवेग उत्पन्न होता है। तारे का शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र इस गिरती हुई सामग्री के एक हिस्से को ध्रुवों की ओर निर्देशित कर देता है।
  3. द्विध्रुवीय जेट का निष्कासन: यह सामग्री ध्रुवों से अत्यधिक संकीर्ण बीम या जेट के रूप में अंतरिक्ष में 100 से 1,000 किमी/सेकंड की गति से बाहर फेंकी जाती है।
  4. शॉक वेव: जब ये सुपरसोनिक जेट आसपास के ठंडे 'अंतरतारकीय माध्यम' से टकराते हैं, तो वे तीव्र शॉक वेव उत्पन्न करते हैं। इस गतिज ऊर्जा के कारण गैस आयनित हो जाती है और प्रकाश (मुख्य रूप से दृश्यमान और अवरक्त) उत्सर्जित करती है। इसी चमकते हुए शॉक वेव क्षेत्र को HH वस्तु कहा जाता है।[4]

जीवन चक्र और गतिशीलता

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खगोलीय दृष्टिकोण से, हर्बिग-हारो वस्तुओं का जीवन बहुत ही छोटा होता है—आमतौर पर केवल कुछ हज़ार से लेकर 100,000 वर्ष तक।[5][6]

ये ब्रह्मांड की सबसे गतिशील संरचनाओं में से एक हैं। हबल स्पेस टेलीस्कोप द्वारा कुछ वर्षों के अंतराल पर ली गई छवियों ने स्पष्ट रूप से इन वस्तुओं को अंतरिक्ष में आगे बढ़ते और अपना आकार बदलते हुए दिखाया है। जैसे-जैसे नवजात तारा बड़ा होता है और मुख्य अनुक्रम में प्रवेश करता है, उसकी अभिवृद्धि चक्रिका समाप्त हो जाती है, जेट बंद हो जाते हैं, और HH वस्तुएं अंतरिक्ष के निर्वात में फीकी पड़कर गायब हो जाती हैं।[7]

वैज्ञानिक महत्व

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खगोलविदों के लिए HH वस्तुएं बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे हमें यह समझने में मदद करती हैं कि कैसे एक नवजात तारा अपने अतिरिक्त कोणीय संवेग को बाहर निकालता है। यदि ये जेट न हों, तो एक आद्य तारा इतना तेज़ी से घूमेगा कि वह गुरुत्वाकर्षण के बावजूद खुद को ही फाड़ डालेगा। ये जेट नवजात तारे को धीमा करने और स्थिर होने में मदद करते हैं।

सन्दर्भ

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  1. Reipurth, Bo; Bally, John (2001). "Herbig-Haro Flows: Probes of Early Stellar Evolution". Annual Review of Astronomy and Astrophysics. 39: 403–455. डीओआई:10.1146/annurev.astro.39.1.403.
  2. "Note on Hind's Variable Nebula in Taurus"
  3. Bode, M. F.; Evans, A. (2008). Classical Novae. Cambridge University Press. pp. 120-135. ISBN 978-0521843300.
  4. Stahler, Steven W.; Palla, Francesco (2004). The Formation of Stars. Wiley-VCH. pp. 315–325. ISBN 978-3527405596.
  5. "Herbig–Haro Objects 46 and 47 – Evidence for bipolar ejection from a young star"
  6. "Protostellar Outflows"[मृत कड़ियाँ]
  7. Hartigan, Patrick; et al. (2001). "Proper Motions of the HH 1-2, HH 34, and HH 47 Jets". The Astrophysical Journal. 559 (2): 157–172. डीओआई:10.1086/322384.

बाहरी कड़ियाँ

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