हरे कृष्ण (मंत्र)

हरे कृष्ण मंत्र या हरे कृष्ण महामंत्र एक प्रसिद्ध कृष्ण भक्ति मंत्र है[1], जिसे कलिसंतरण उपनिषद से लिया गया। इसके रचयिता रघुनंदन भट्टाचार्य माने जाते हैं। यह ११ वैदिक उपनिषदों में शामिल नहीं है, लेकिन वैष्णव परंपरा में इसे 'महामंत्र' कहा जाता है।
१५वीं शताब्दी में चैतन्य महाप्रभु के भक्ति आंदोलन के समय यह मंत्र विशेष रूप से प्रसिद्ध हुआ। यह मंत्र अति पवित्र माना जाता है क्योंकि इसमें भगवान के अनेक नाम एक साथ आते हैं। भगवान के प्रमुख नाम – राम, कृष्ण, शिव, नारायण और हरी – कलियुग के लिए विशेष सार्थक माने गए हैं।
१५वीं शताब्दी में जब मुगल शासकों द्वारा धर्मांतरण के प्रयास थे, तब इस मंत्र को गोस्वामी तुलसीदास के मार्गदर्शन में प्रोत्साहित किया गया।
मंत्र
[संपादित करें]हरे कृष्ण महामंत्र इस प्रकार है:
हरे कृष्ण हरे कृष्ण
कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे॥
गौड़ीय वैष्णव परंपरा और वैश्विक प्रचार
[संपादित करें]- गौड़ीय वैष्णव परंपरा में इस मंत्र का विशेष महत्व है।
- इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (ISKCON) के संस्थापकाचार्य श्रील प्रभुपाद जी महाराज ने इस 'हरे कृष्ण महामंत्र' को पूरे विश्व में प्रसिद्ध किया।
- आज लाखों अनुयायी इस मंत्र का जाप, संकीर्तन और भजन के रूप में करते हैं।
अर्थ और महत्व
[संपादित करें]- "हरे" – भगवान की ऊर्जा या लीलामयी शक्ति के लिए समर्पण।
- "कृष्ण" – भगवान कृष्ण का नाम।
- "राम" – भगवान राम का नाम।
- इस मंत्र का नियमित जाप मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और भक्ति भाव पैदा करता है।
अभ्यास
[संपादित करें]- मंत्र का उच्चारण माला (जपमाला) के साथ किया जाता है।
- दैनिक साधना, भजन, संकीर्तन और ध्यान के समय इसे जपा जाता है।
- हरे कृष्ण मंत्र का जाप जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है।
इधर भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Hare Krishna Mantra - ISKCON Bangalore" (ब्रिटिश अंग्रेज़ी भाषा में). 2016-01-03. अभिगमन तिथि: 2025-09-29.