हरिविनायक पटस्कर

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हरि विनायक पाटस्कर (15 मई 1892 – 21 फ़रवरी 1970) भारतीय राजनीतिज्ञ, प्रसिद्ध वकील और मध्य प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल थे। वो भारत की संविधान सभा के सदस्य भी थे। हरि विनायक पाटस्कर बम्बई उच्च न्यायालय और उसके बाद भारत के सर्वोच्च न्यायालय के एडवोकेट रहे। ये सन 1920 से लगातार अनेक वर्षों तक 'अखिल भारतीय कांग्रेस' के सदस्य रहे। हरि विनायक पाटस्कर 1926 में बम्बई विधान परिषद के सदस्य बने थे। आप अपने जीवन काल में कई आयोगों तथा समितियों के अध्‍यक्ष भी रहे। हरि विनायक पाटस्कर में गंभीरतम विवादों को हल करने की असाधारण क्षमता थी। वे महाराष्‍ट्र-मैसूर सीमा-विवाद संबंधी चार सदस्‍यीय समिति के सदस्‍य थे। उन्होंने आंध्र प्रदेश और मद्रास (वर्तमान चेन्नई) के सीमा-विवाद की भी मध्‍यस्‍थता की थी।

जन्म तथा शिक्षा[संपादित करें]

हरि विनायक पाटस्कर का जन्म 15 मई, 1892 को महाराष्ट्र राज्य के पूना ज़िले में इंदापुर नामक स्थान पर हुआ था। इन्होंने बी.ए., एल.एल.बी. तथा एल.एल.डी. की डिग्रियाँ प्राप्त की थीं। आपने 'न्‍यू इंग्लिश स्‍कूल', पूना; 'फर्ग्‍युसन कॉलेज', पूना तथा 'गवर्नमेन्‍ट लॉ कॉलेज', मुम्बई से शिक्षा ग्रहण की थी।

विवाह[संपादित करें]

हरि विनायक पाटस्कर का विवाह 29 मार्च, 1913 को श्रीमती अन्नपूर्णा बाई के साथ हुआ था। ये एक पुत्री के पिता थे।

सन्दर्भ[संपादित करें]