हरिवर्मन्
हरिवर्मन प्रथम सन् 802 से 817 तक चम्पा के राजा थे।[1] सन् 758 से 859 ई॰ की अवधि के दौरान, मंडल चम्पा को चीनियों द्वारा सामूहिक रूप से हुआनवांग कहा जाता था, जो स्पष्ट रूप से चम्पा का उचित नाम नहीं था।
हरिवर्मन के तात्कालिक राजा इन्द्रवर्मन प्रथम (शासनकाल 787–801) के बहनोई थे। उनका शासन सन् 802 से आरम्भ हुआ। सन् 813 से 817 तक वो और उनके सैन्य कमाण्डर सेनापति पनरो और सेनापति पामर ने न्हा ट्रांग में पो नागार का मंदिर, होवा लाई (थुवान बाक, नन्ह थुवान) में तीन कलान, फ़न रंग (पनरंग) के पास, पूर्व पांडुरंग आदि का निर्माण करवाया। ये तीनों मिनारें पूर्वी तरह लाल ईंटों से बनी थीं जिन्हें लम्बे समय तक छोड़ दिया और वो अभी भी अच्छी स्थिति में हैं। इस चाम यथार्थवादी वास्तुकला को "होवा लाई शैली" कहा जाता है। हरिवरमन के शासनकाल में पहले चाम लिपि के शिलालेख उत्कीर्ण किये गये जो धीरे-धीरे संस्कृत की जगह ले रहे थे।
सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Coedès 1975, p. 103.
स्रोत
[संपादित करें]- Coedès, George (1975), Vella, Walter F. (ed.), The Indianized States of Southeast Asia, University of Hawaii Press, ISBN 978-0-824-80368-1
- Lafont, Pierre-Bernard (2007), Le Campā: Géographie, population, histoire, Indes savantes, ISBN 978-2-84654-162-6
- Taylor, Keith Weller (1983), The Birth of the Vietnam, University of California Press, ISBN 978-0-52007-417-0
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