हरिदास सम्प्रदाय
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हरिदास सम्प्रदाय ईश्वर भक्ति तथा भक्ति साहित्य से सम्बन्धित एक संप्रदाय है जिसकी उत्पत्ति भारत के कर्नाटक प्रदेश में मध्वाचार्य के पश्चात हुई। यह सम्प्रदाय मध्ययुगीन भारत के बंगाल और असम जैसे पूर्वी राज्यों में भी फैला।[1] लगभग छह शताब्दियों की लम्बी अवधि में इस सम्प्रदाय के कई संतों और रहस्यवादियों ने दक्षिण भारत की संस्कृति, सभ्यता, दर्शन और कला पर गहरा प्रभाव डाला।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Sharma, B. N. Krishnamurti (2000). A History of the Dvaita School of Vedānta and Its Literature, 3rd Edition. Motilal Banarsidass (2008 Reprint). pp. xxxii–xxxiii, 514–516, 539. ISBN 978-8120815759.