हरनाम सिंह सैनी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search
हरनाम सिंह सैनी
जन्म फतेहगढ़ गाँव, होशियारपुर, पंजाब
मृत्यु 16 मार्च 1917
लाहौर

हरनाम सिंह सैनी (16 मार्च, 1917 को मृत्यु ) एक उल्लेखनीय भारतीय क्रांतिकारी थे जिन्होने ग़दर षड्यंत्र में भाग लिया था।

तीसरे लाहौर षड्यंत्र के तहत उन पर मुकदमा चलाया गया। [1] [2] ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने 16 मार्च 1917 को लाहौर में साम्राज्य के खिलाफ विद्रोह भड़काने के आरोप में उन्हें फांसी दे दी।

हरनाम सिंह सैनी, गोपाल सैनी के पुत्र थे जो होशियारपुर जिले के फतेहगढ़ गाँव के निवासी थे। [3]

ग़दर षड्यंत्र में सहभागिता[संपादित करें]

ग़दर दी गूंज : प्रारम्भिक राष्ट्रवादी-समाजवादी गदरी साहित्य का संग्रह जिसे 1913 में भारत में प्रतिबंधित कर दिया गया था।
ग़दर अख़बार (उर्दू) भाग 1, नंबर 22, 24 मार्च 1914

हरनाम सिंह अत्यन्त प्रभावशाली लेखक थे। हरनाम सिंह ने उद्यम हेतु कनाडा और यूएसए का दौरा किया जो उस समय ग़दर षड्यंत्र के प्रजनन स्थल थे। वे ग़दर पार्टी के सक्रिय सदस्य बन गए और साम्राज्यविरोधी कार्यों में भाग लेने लगे। कैनडा में हरनामसिंह ने ‘दी हिन्दुस्थान’ नामक पत्रिका आरम्भ की। उनकी इस पत्रिका से कैनडा में रहने वाले अनेक भारतीय प्रभावित हुए। कैनडा के प्रशासन ने उन पर बम बनाने, बम निर्माण करना सीखाने और विद्रोही विचारों का प्रचार करने आदि के आरोप लगाकर उन्हें ४८ घंटो में कॅनाडा छोड़ने का आदेश दे दिया।

हरनामसिंह का मित्र रेमिस्बर्ग अपनी बोट से उन्हें अमरिका लाया। अमरिका में ‘गदर’ नामक पत्रिका के प्रकाशन में वे सहायता करने लगे । ‘कोमागाटामारू जहाज के प्रकरण' के उपरान्त हरनामसिंह अमरिका छोड़ चले गए। जापान, चीन और सयाम (थाईलैंड) आदि देशों में 'गदर' का प्रचार करते हुए वे ब्रह्मदेश चले गए।

सन् १९१५ में सिंगापुर का विद्रोह विफल हो जाने पर बडी मात्रा में लोगों को बन्दी बनाया गया। इसलिए अनेक नेता ब्रह्मदेश चले गए। हरनामसिंह को भी बन्दी बनाया गया। उन पर मुकद्दमा चलाया गया और उन्हें मृत्युदंड सुनाया गया। कारागृह से हरनामसिंह भाग निकले किन्तु दुर्भाग्य से उन्हें पुनः बंदी बनाया गया और १९ अक्तूूबर १९१६ को फांसी दी गई !

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "..the second martyr of march 16 was Harnam Singh Saini of Fatehgarh, Hoshiarpur. He was arrested from Battavia by the Dutch." A day to remember Lahore's martyrs, 16 Mar 2002, KS Dhaliwal, Time of India
  2. Punjab Peasant in Freedom Struggle (Volume II), pp 71-72, Master Hari Singh, Published by People's Pub. House, 1984
  3. An account of the Ghadr conspiracy, 1913-1915, pp i, pp 161, F C Isemonger; J Slattery ,Publisher: Meerut : Archana Publ., 1998.