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हफ़्स

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हफ़्स : इस्लामी परंपरा के अनुसार कुरआन पाठ (किरात ) की सात प्रामाणिक विधियों में से एक के प्राथमिक संचारकों में से एक था। उनके शिक्षक आसिम इब्न अबी अल-नजुद के माध्यम से उनकी पद्धति मुस्लिम दुनिया के अधिकांश हिस्सों में सबसे लोकप्रिय पद्धति बन गई है। [1]

आसिम के छात्र होने के अलावा हफ़्स उनके सौतेले बेटे भी थे। बगदाद में जन्मे हफ्स अंततः मक्का चले गए जहाँ उन्होंने अपने ससुर की पाठ पद्धति को लोकप्रिय बनाया।

अंततः आसिम की पद्धति का हफ़्स द्वारा पाठ मिस्र की आधिकारिक पद्धति बन गया, जिसे 1923 में मिस्र के फ़ुआद प्रथम के संरक्षण में कुरआन के मानक मिस्र मुद्रण के रूप में औपचारिक रूप से अपनाया गया था आज कुरआन की अधिकांश प्रतियां हफ्स पाठ पद्धति का अनुसरण करती हैं। उत्तरी और पश्चिमी अफ्रीका में वरश की व्याख्या का अनुसरण करने की अधिक प्रवृत्ति है। [2]

इन्हें भी देखें

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  1. Bewley, Aishah. "The Seven Qira'at of the Qur'an" Archived 2006-05-01 at the वेबैक मशीन, Aisha Bewley's Islamic Home Page
  2. Aisha Geissinger, Gender and Muslim Constructions of Exegetical Authority: A Rereading of the Classical Genre of Qurʾān Commentary, pg. 79. Leiden: Brill Publishers, 2015. ISBN 9789004294448