हंतावाइरस
हंतावाइरस (Hantavirus) ऋणात्मक-ध्रुवता वाले आरएनए विषाणुओं का एक समूह है, जो मुख्य रूप से चूहों और गिलहरियों (कृन्तकों) के माध्यम से फैलता है[1]। यह हंताविरिडे परिवार से संबंधित है और अन्य बुन्यावाइरस के विपरीत, मच्छरों या टिक्स के बजाय कृन्तकों के मल-मूत्र या लार से दूषित हवा के माध्यम से मनुष्यों को संक्रमित करता है[2]। मनुष्यों में यह दो घातक बीमारियों का कारण बनता है: फेफड़ों को प्रभावित करने वाला 'हंताविषाणु फुफ्फुसीय सिंड्रोम' (HPS) और गुर्दों को प्रभावित करने वाला 'वृक्क सिंड्रोम सहित रक्तस्रावी ज्वर' (HFRS)।
विषाणु विज्ञान और संरचना
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हंतावाइरस का जीनोम मुख्य रूप से तीन आरएनए खंडों में विभाजित होता है, जिन्हें उनके आकार के आधार पर नामित किया गया है:[1]
- लघु (S): यह खंड न्यूक्लियोकैप्सिड प्रोटीन को कूटबद्ध करता है।
- मध्यम (M): यह वायरल सतह के ग्लाइकोप्रोटीन (Gn और Gc) को कूटबद्ध करता है। ये प्रोटीन वायरस को परपोषी कोशिका को पहचानने और उसके भीतर प्रवेश करने में सहायता करते हैं।[3]
- दीर्घ (L): यह खंड 'आरएनए-निर्भर आरएनए पोलीमरेज़' (RdRp) एन्ज़ाइम को कूटबद्ध करता है, जो वायरस की प्रतिकृति के लिए आवश्यक है।[4]
मनुष्यों में संक्रमण का मुख्य मार्ग संक्रमित कृन्तकों के मल, मूत्र या लार के एरोसोल कणों में सांस लेना है। वायरस शरीर में प्रवेश करने के बाद मुख्य रूप से संवहनी अंतःस्तर कोशिकाओं को लक्षित करता है, जिससे 'साइटोकाइन स्टॉर्म' की स्थिति उत्पन्न होती है और रक्त वाहिकाओं में रिसाव होने लगता है[5]।
प्रमुख बीमारियाँ और लक्षण
[संपादित करें]हंतावाइरस मनुष्यों में मुख्य रूप से दो प्रकार की गंभीर बीमारियाँ पैदा करता है। इनके भौगोलिक फैलाव के आधार पर इन्हें 'न्यू वर्ल्ड' और 'ओल्ड वर्ल्ड' श्रेणियों में बांटा गया है:
1. हंताविषाणु फुफ्फुसीय सिंड्रोम (HPS)
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यह सिंड्रोम मुख्य रूप से 'न्यू वर्ल्ड' हंतावाइरस, जैसे कि 'सिन नोम्ब्रे वायरस' के कारण होता है। यह फेफड़ों को प्रभावित करने वाली एक गंभीर श्वसन बीमारी है।
- लक्षण: इसके शुरुआती लक्षण फ्लू जैसे होते हैं, जिनमें ज्वर, सिरदर्द और पेट दर्द शामिल हैं। संक्रमण के बढ़ने पर फेफड़ों में तरल पदार्थ भर जाता है, जिससे मरीज को सांस लेने में भारी कठिनाई होने लगती है।
- महामारी विज्ञान: 1993 से 2018 के बीच जुटाए गए नैदानिक आंकड़ों के अनुसार, बच्चों में HPS के मामले बहुत कम देखे गए हैं, लेकिन वयस्कों में इसकी मृत्यु दर काफी अधिक (लगभग 35%) पाई गई है।[6]
2. वृक्क सिंड्रोम सहित रक्तस्रावी ज्वर (HFRS)
[संपादित करें]यह बीमारी मुख्य रूप से 'ओल्ड वर्ल्ड' हंतावाइरस (जैसे हंतान और पुउमाला वायरस) के कारण होती है।
- लक्षण: इसके मुख्य लक्षणों में बुखार, निम्न रक्तचाप और तीव्र वृक्क क्षति शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, मूत्र में प्रोटीन का स्राव और मूत्र में रक्त का आना इस बीमारी की प्रमुख पहचान है।[7]
निदान और उपचार
[संपादित करें]वर्तमान में हंतावाइरस संक्रमण के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा स्वीकृत कोई विशिष्ट विषाणुरोधी दवा या टीका उपलब्ध नहीं है। इसका उपचार मुख्य रूप से गहन सहायक देखभाल पर निर्भर करता है, जिसमें ऑक्सीजन थेरेपी, तरल पदार्थ का प्रबंधन और गंभीर मामलों में अपोहन शामिल है। वर्तमान में वैज्ञानिक इसके लिए नए औषधीय लक्ष्यों और लक्षित उपचारों की खोज के लिए निरंतर शोध कर रहे हैं[8]।
हालिया प्रकोप (मई 2026)
[संपादित करें]मई 2026 में, दक्षिण अटलांटिक महासागर में 'एमवी होंडियस' नामक क्रूज़ शिप पर हंतावाइरस के गंभीर प्रकोप की पुष्टि हुई। इस प्रकोप के कारण तीन लोगों की मृत्यु हो गई। प्राप्त सूचना के अनुसार, इस संकटग्रस्त जहाज पर चालक दल के दो भारतीय सदस्य भी फंसे हुए थे।[9] [10]
इस प्रकोप के बाद, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वैश्विक स्तर पर यात्रा और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए एक आधिकारिक अलर्ट (DON599) जारी किया और 12 देशों को सतर्क रहने की चेतावनी दी।[11][12]
कोविड-19 से तुलना
[संपादित करें]इस प्रकोप के कारण मीडिया में इसे "कोविड 2.0" बताए जाने जैसी आशंकाएं व्यक्त की गईं। हालाँकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि हंतावाइरस अगला कोविड-19 नहीं बन सकता। कोविड-19 के विपरीत, हंतावाइरस का मानव-से-मानव संचरण अत्यंत दुर्लभ है[13]। चूंकि यह मुख्य रूप से कृन्तकों के मल-मूत्र से दूषित हवा में सांस लेने से फैलता है, इसलिए इसके किसी वैश्विक महामारी का रूप लेने की आशंका बेहद कम है।[14][15]
भारत में स्थिति और जोखिम
[संपादित करें]भारतीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारत में हंतावाइरस संक्रमण के मामले अत्यंत दुर्लभ हैं। अब तक देश में इस वायरस के मानव-से-मानव संचरण का कोई भी मामला सामने नहीं आया है। अतः भारत के लिए इसका तात्कालिक जोखिम काफी कम माना जा रहा है।[16][17]
सन्दर्भ
[संपादित करें]- 1 2 Jonsson, Colleen B.; Figueiredo, Luiz Tadeu Moraes; Vapalahti, Olli (2010-04-01). "A Global Perspective on Hantavirus Ecology, Epidemiology, and Disease". Clinical Microbiology Reviews (अंग्रेज़ी भाषा में). 23 (2): 412–441. डीओआई:10.1128/CMR.00062-09. आईएसएसएन 0893-8512.
- ↑ Vial, Pablo A; Ferrés, Marcela; Vial, Cecilia; Klingström, Jonas; Ahlm, Clas; López, René; Le Corre, Nicole; Mertz, Gregory J (2023-09-01). "Hantavirus in humans: a review of clinical aspects and management". The Lancet Infectious Diseases (अंग्रेज़ी भाषा में). 23 (9): e371 – e382. डीओआई:10.1016/S1473-3099(23)00128-7.
- ↑ Vial, Pablo A.; Ferrés, Marcela; Vial, Cecilia; Klingström, Jonas; Ahlm, Clas; López, René; Corre, Nicole Le; Mertz, Gregory J. (2023-09-01). "Hantavirus in humans: a review of clinical aspects and management". The Lancet Infectious Diseases (English भाषा में). 23 (9): e371 – e382. डीओआई:10.1016/S1473-3099(23)00128-7. आईएसएसएन 1473-3099. पीएमआईडी 37105214.
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- ↑ Muranyi, Walter; Bahr, Udo; Zeier, Martin; van der Woude, Fokko J. (2005-12-01). "Hantavirus Infection". Journal of the American Society of Nephrology (अमेरिकी अंग्रेज़ी भाषा में). 16 (12): 3669–3679. डीओआई:10.1681/ASN.2005050561. आईएसएसएन 1046-6673.
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- ↑ "Hantavirus outbreak on cruise ship not start of pandemic, UN health agency says". www.bbc.com (ब्रिटिश अंग्रेज़ी भाषा में). 2026-05-07. अभिगमन तिथि: 2026-05-08.
- ↑ "Hantavirus cluster linked to cruise ship travel, Multi-country". www.who.int (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-05-08.
- ↑ "Hantavirus outbreak: WHO warns 12 countries after South Atlantic cruise ship confirmed cases; raising global travel health concerns". The Times of India. 2026-05-08. आईएसएसएन 0971-8257. अभिगमन तिथि: 2026-05-08.
- ↑ एंडीज़ वायरस के कुछ मामलों को छोड़कर
- ↑ Emanuel, Gabrielle (2026-05-07). "Is hantavirus the next COVID? Is the U.S. response on point? An outbreak update". NPR (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-05-08.
- ↑ "Explainer: Can hantavirus outbreak become Covid 2.0?". The Times of India. 2026-05-08. आईएसएसएन 0971-8257. अभिगमन तिथि: 2026-05-08.
- ↑ Kaul, Rhythma (2026-05-08). "Hantavirus infection rare, India has nothing to worry: Govt official". Hindustan Times (अंग्रेज़ी भाषा में). अभिगमन तिथि: 2026-05-08.
- ↑ Bharatvarsh (2026-05-08). "हंता वायरस को लेकर WHO का अलर्ट जारी, जानें भारत में कितना रिस्क?". TV9 Bharatvarsh. अभिगमन तिथि: 2026-05-08.
