स्वैरकल्पना

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स्वैरकल्पना (जिसे विलक्षण या फ़न्तासी भी कहते हैं) कपोलकल्पित ब्रम्हांड में आधारित कपोलकल्पना की एक विधा है, जिसमें अक्सर कोई भी स्थान, घटनाएँ, या लोग वास्तविक दुनिया से सन्दर्भ नहीं रखते हैं। इसकी जड़ें मौखिक परंपराओं में हैं, जो बाद में साहित्य और नाटक बन गईं। बीसवीं शताब्दी से यह फ़िल्म, टेलीविजन, ग्राफिक उपन्यास और वीडियो गेम सहित विभिन्न मीडिया में विस्तारित हुई है। यह एक फ़िल्मी विधा है जिसमें सामान्यतः जादू और पराप्राकृतिक परिघटनाओं को कथानक के प्राथमिक अवयव के रूप में दिखाया जाता है।

स्वैरकल्पना अटकल कपोलकल्पना की एक उपविधा है। इसमें वैज्ञानिक और भयंकर थीमों के अभाव से, यह क्रमतः विज्ञान कपोलकल्पना और वीभत्स से अलग है, भले ही ये विधाएँ एक दूसरे का अतिच्छादन करती हैं। लोकप्रिय संस्कृति में, स्वैरकल्पना मुख्यतः मध्ययुगीन रूप की होती है। इसके व्यापक अर्थों में, हालांकि, स्वैरकल्पना में प्राचीन मिथकों और किंवदंतियों से कई लेखकों, कलाकारों, फिल्म निर्माताओं, और संगीतकारों द्वारा कार्यों से लेकर कई हालिया और लोकप्रिय कार्य शामिल हैं।

एक स्वैरकल्पना चित्र

इतिहास[संपादित करें]

मीडिया[संपादित करें]

वर्गीकरण[संपादित करें]

उपसंस्कृति[संपादित करें]

सम्बन्धित विधाएँ[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]

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